गाय - गाय के शोर बीच ये पढ़िए- बेजुबानों को नहीं मिल रहा समय पर इलाज 

गाय - गाय के शोर बीच ये पढ़िए- बेजुबानों को नहीं मिल रहा समय पर  इलाज खेतों में लगे कटीलें तारों से जख्मी गाय।

अतरौली( हरदोई)। प्रदेश में कई इलाकों के किसानों ने अपने खेतों को छुट्टा जानवरों से बचाने के लिए चारों ओर कंटीले तार लगवाने शुरू कर दिए हैं। इन तारों में फंसकर सैंकड़ों पशु रोज घायल हो रहे हैं और इन्हें समय पर इलाज भी नहीं मिल पाता। ऐसे में कीड़े पड़ने से ज्यादातर घायल पशुओं की मौत हो रही है। इनमें सबसे ज्यादा संख्या गायों की है।

ब्लाक भरावन की न्याय पंचायत गोंडवा में आए दिन कटीले तारों से पशु घायल होते हैं, लेकिन पशु चिकित्सालय की हालत जर्जर होने के कारण उनका इलाज नहीं हो पाता। ग्रामीणों के कई बार प्रयास करने पर विभाग की तरफ से जिला योजना में प्रस्ताव तो रखा जाता है पर बजट न होने का हवाला देकर इस मामले पर चुप्पी साध ली जाती है। क्षेत्र में पशुओं के इलाज की उचित व्यवस्था न होने के कारण ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जर्जर अस्पताल के पुनर्निर्माण की मांग की है।

ये भी पढ़ें- सुर्खियां नहीं बनती कंटीले तारों वाली गोहत्या

अलीगढ़ के खेतों में लगे कटीलें तारों से जख्मी गाय।

उत्तर प्रदेश में कुल 2,200 पशुचिकित्सा केंद्र हैं। राष्ट्रीय कृषि आयोग के अनुसार देश में 5000 पशुओं पर एक पशुचिकित्सालय स्थापित होना चाहिए, लेकिन उत्तर प्रदेश में 21 हज़ार पशुओं पर एक पशु चिकित्सालय उपलब्ध हैं।

ये भी पढ़ें : डॉक्टरों की कमी और अस्पताल दूर होने की वजह से पशुपालक खुद कर रहे अपने पशुओं का इलाज

पशुचिकित्यालयों की स्थिति तो खराब है ही साथ ही पशु सेवा केंद्र की हालत भी खराब है। ग्राम गोंडवा स्थित (द श्रेणी पशु सेवा केंद्र) करीब 40 वर्षों से ग्राम सभा के भवन में किराए से चल रहा है। गाँव के शनि सिंह ने बताया," इस पशु चिकित्सालय में दर्जनों गाँवों के किसान पशुओं को इलाज के लिए लाते हैं। भवन की जर्जर हालत के कारण यहां रखी जाने वाली दवाइयां, चिकित्सालय से संबंधित अभिलेख और अन्य उपकरणों को चिकित्सक पास के घरों में रखने को मजबूर हैं।"

संबंधित खबर : सुर्खियां नहीं बनती कंटीले तारों वाली गोहत्या

नेवादा गढ़ी निवासी नीशू द्विवेदी ने बताया, "काफी कोशिशों के बाद भवन निर्माण के लिए पिछले चार वर्षों से जिला योजना के माध्यम से प्रस्ताव पास हो रहा है, लेकिन बजट निर्गत न होने के कारण हालत जस की तस बनी हुई है।" प्रदेश में बढ़ते चारे की कमी और पशुओं का दुधारू न होने से पशुपालक ऐसे लाखों पशुओं को छुट्टा छोड़ देते हैं, और इन्हीं पशुओं से फसल को बचाने के लिए खेत के चारों ओर कंटीले तार लगा देते हैं।

पशु चिकित्सालय के नाम की जा चुकी है भूमि

ग्राम प्रधान आशा सिंह ने बताया, करीब छह साल पहले प्रस्ताव पास कर नए भवन के निर्माण के लिए भूमि भी पशु सेवा केंद्र के नाम की जा चुकी है। विभाग की तरफ से बजट मिले तो नए भवन का निर्माण हो और किसानों की समस्या का समाधान हो सके।"

देखें वीडियो

ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top