फेसबुक की मदद से पिता को आठ साल बाद मिला खोया बेटा 

फेसबुक की मदद से पिता को आठ साल बाद मिला खोया बेटा खाेए बच्चे के साथ पिता

दीपिका रस्तोगी , स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

लखनऊ। आज के समय मे सोशल मिडिया एक बहुत बड़ा प्लेटफार्म बनकर उभरा है, फेसबुक की मदद से आठ साल बाद एक पिता को उसका बेटा मिल गया।

आठ वर्ष पहले लखनऊ जनपद के माल ब्लॉक के आट गढी सरौरा गाँव में ग्रामीणों को एक मानसिक रूप से विक्षिप्त किशोर मिला जिसे ग्रामीणों ने आट गढ़ी के प्रधान रामदुलारी के घर पहुंचा दिया।

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पूर्व प्रधान रामदुलारी के पति कल्लु रावत ने बताया, "जब ये किशोर मिला तो इसकी दिमागी हालत सही नहीं थी और काफी बीमार भी था, काफी समय बाद दवा इलाज के बाद जब किशोर की हालत सही हुई तो उसने अपना नाम अमित बताया और खुद को संभल जिले का निवासी बताया सही पता न मालूम होने के वजह से मैं अमित को उसके घर नहीं भेज पाया और अमित भी धीरे धीरे परिवार में घुल मिल गया व पारिवारिक सदस्य की तरह पिछले आठ वर्षों से हमारे साथ रह रहा है।

संभल जिले के पवांसा क्षेत्र में अतरासी गाँव निवासी अमित के पिता पप्पू प्रजापति ने बताया कि मैं और मेरा परिवार तो ये आस छोड़ चुका था कि अब लड़का मिलेगा सीने पर पत्थर रखकर मन को समझा लिया था आज से आठ बरस पहले अमित गायब हो गया था। वह सीतापुर जिले के महोली क्षेत्र में ईंट भट्ठे पर काम करने जा रहे अपने गाँव के लोगो के साथ चला आया था, उसके बाद उसका कुछ पता नहीं चला, काफी खोजबीन की लेकिन अमित नही मिला।

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बीते सोमवार अमित पूर्व प्रधान पति कल्लु के साथ माल क्षेत्र के ही जलौली गाँव निवासी सपा नेता पंकज सिंह के घर आया था, पंकज ने उसके गाँव और जिले का नाम पूछा तो उसने संभल जिले का पता बताया। पंकज ने उसका फोटो और बताया गया पता फेसबुक पर शेयर किया, तो किसी ने कमेंट में पते की पुष्टि कर दी। बस पंकज ने पुलिस अधीक्षक संभल से संपर्क किया।

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वहां से पता चला की यह लड़का बहजोई थानाक्षेत्र में आने वाले बहजोई गॉव के पप्पू प्रजापति का है जिस पर पंकज सिंह ने बहजोई थानाध्यक्ष से मदद मांगी, बहजोई पुलिस की मदद से पंकज ने अमित के पिता पप्पू प्रजापति को संपर्क किया और उनका फोटो वाट्सएप पर मंगाया फोटो देखते ही अमित अपने पिता को पहचान गया।पंकज द्वारा दी गयी जानकारी पर अमित के पिता पप्पू व चाचा लाखन जलौली गांव पहुंचे।

अपने बच्चे को सही सलामत देखकर उनकी आँखों से आंसू निकल आये। अमित को कलेजे से लगाये पिता ने गाँववालों के हाथ जोड़कर धन्यवाद दिया। अमित अब इतना घुलमिल गया था की गाँववाले भी कभी अमित को देखते तो कभी उसके पिता को। अमित भी अब यहां के मोह को छोड़ने के दर्द से आहत दिखा।

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