#WorldHeartDay : बेटे के दिल के इलाज के लिए दर-दर भटक रहा कन्नौज का एक परिवार  

#WorldHeartDay : बेटे के दिल के इलाज के लिए दर-दर भटक रहा कन्नौज का एक परिवार  डॉक्टर के साथ खड़ा परिवार। 

गाँव कनेक्शन, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

कन्नौज। भले ही लोग आज विश्व हृदय दिवस मना रहे हैं, मगर कन्नौज से एक माता-पिता अपने जिगर के टुकड़े को बचाने के लिए ज़मीन तक गिरवी रखने के बावजूद बेटे का इलाज कराने के लिए कानपुर, लखनऊ और दिल्ली के चक्कर लगा रहे हैं।

यह हाल तब है कि कन्नौज के तिर्वा इलाके में करोड़ों रुपए के बजट खर्च कर न सिर्फ राजकीय मेडिकल कॉलेज बना है, बल्कि कैंसर अस्पताल और हृदय रोग संस्थान भी बनकर खड़े हो चुके हैं। मगर अब तक यहां इलाज शुरू नहीं हो सका है। जिले से करीब 10 किमी दूर बरौली गाँव निवासी धर्मेन्द्र सिंह (38 वर्ष) बताते हैं, “मेरा 16 महीने का बेटा है ज्ञान, उसका दिल बढ़ रहा है, हम एक साल से इलाज करा रहे हैं। करीब दो लाख रुपए भी खर्च कर दिए हैं।”

उन्होंने आगे कहा, ”आठ बीघा खेती है, जिसमें बेटे के इलाज के लिए सात बीघा गिरवीं रख दी। मगर अब तक सही इलाज नहीं मिल सका है।“

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धर्मेंद्र बताते हैं, “डॉ. वरुण सिंह कटियार ने हमको लखनऊ तक पहुंचाया है। पीजीआई लखनऊ गए, वहां से हमें पांच अप्रैल 2018 की तारीख दे दी गई है। अब हमें इतने समय तक इंतजार करना होगा। अधिकारियों से भी मिले, लेकिन मदद किसी प्रकार की नहीं हो पा रही है।“ आगे कहते हैं, “अगर इलाज के लिए इतनी लंबी तारीख दी जाएगी तो बच्चा कमजोर हो जाएगा। पांच बेटियां हैं, मेरा यह बच्चा सबसे छोटा है।“

कन्नौज के राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के डॉ. वरुण सिंह कटियार बताते हैं, “हृदय रोग और कैंसर से पीड़ित बच्चों के इलाज में यदि इतना विलंब होगा तो कैसे हम कह सकते हैं कि एक स्वस्थ और प्रगतिशील भारत का निर्माण कर रहे हैं। मेरी टीम ने ही इन बच्चों को आरबीएसके के तहत खोजा था। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि इलाज के लिए इंतजार कर रहे मरीजों को इलाज मिलने तक सकुशल रखे।“

वहीं, कन्नौज से सात किमी दूर वैसापुर पट्टी के रहने वाले बृजेश कुमार (30 वर्ष) कहते हैं, ‘‘मैं मजदूरी करता हूं। मेरी चार साल की बेटी प्रियंका के दिल में छेद है। डॉक्टरों ने ऑपरेशन बताया है। इससे पहले हम इलाज के लिए कानपुर और दिल्ली भी गए। लखनऊ में अभी हम 19 सितम्बर को लखनऊ पीजीआई गए थे, डॉक्टर ने दवा लिखी है, वही खिला रहे हैं। मगर अब अगले साल की 12 अप्रैल की तारीख की दी गई है।”

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