जब जब अयोध्या की बात चलेगी शरीफ चचा की चर्चा होगी

जब जब अयोध्या की बात चलेगी शरीफ चचा की चर्चा होगीशरीफ चचा, जिन्हें लाशों का मसीहा भी कहा जाता है।

लखनऊ। गांव कनेक्शन टीवी में आज आप को उस शख्स की कहानी दिखाते है, जो दुनिया के आगे एक मिशाल है। वे इंसानियत का जीता जागता उदाहरण हैं, वे गंगा-जमुना तहजीब हैं।

लोग मौत से दूर भागते हैं, डरते हैं। लेकिन एक इंसान ऐसा भी है जो हर रोज मौत से रूबरू होता है मौत का सामना करता है। वे लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करते हैं। लोग उन्हें लाशों का मसीहा करते हैं, कहां से आती है फैजाबाद के शरीफ चचा में इतनी हिम्मत, खुद शरीफ चचा की जुबानी सुनिए उन्हीं की दर्दनाक कहानी

शऱीफ चचा पेशे से साइकिल मिस्त्री हैं, जिससे उनके परिवार की रोजी-रोटी चलती है, लेकिन पिछले कई वर्षों से वे दुकान पर कम, अस्पताल और श्मशान घाटों, सड़क और रेलवे ट्रैक के किनारे ज्यादा नजर आते हैं, उनकी भी जिंदगी ट्रैक पर थी लेकिन एक हादसे ने सब कुछ बदल दिया।

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शरीफ चचा अपने बेटे के जनाजे को कांधा भले न दे पाएं हो लेकिन उस दिन के बाद से उन्होंने हर लावारिस लाश से अपना रिश्ता जोड़ लिया। 20 साल से शरीफ चाचा इन लाशों को श्मशान घाट और कब्रिस्तान पहुंचा रहे हैं।

पेशे से साइकिल मिस्त्री हैं शरीफ चचा।

सिर्फ अयोध्या और फैजाबाद नहीं पूरे जिले में लोग उनके काम की सरहना करते हैं और अब तो तमाम लोग उनके साथ कदम भी मिला रहे हैं। जिस फैजाबाद में धर्म के नाम पर न जाने कितना खून बहा है, उसी जमीन पर शरीफ चचा अपने निस्वार्थ काम से मानवता की नई परिभाषा गढ़ रहे हैं। गांव कनेक्शन शरीफ चचा को सलाम करता है।

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