मदरसा यौन शोषण मामला :  ‘हाफिज जी हमसे पैर दबवाते थे, पेट पर लात मारते थे’

मदरसा  यौन शोषण मामला :  ‘हाफिज जी हमसे पैर दबवाते थे, पेट पर लात मारते थे’नारी निकेतन गेट के अन्दर छात्राओं के परिजन 

लखनऊ। “हमसे छोटी सी गलती हो जाती तो वो बहुत मारते। घर पर कभी इसलिए नहीं बताया, अगर उन्हें पता चल जाता तो वो और मारते।” मदरसे की एक छात्रा बताती हैं। एक और छात्रा ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वो पेट पर गंदी तरीके से लात मारते थे। महिला कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कई लड़कियों ने वहां मारपीट, गंदी तरीके से रखने और यौन शोषण की शिकायतें की है।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक मदरसे में लड़कियों को बंधक बनाकर यौन शोषण किया जा रहा था। पुलिस ने मदरसा संचालक को गिरफ्तार कर 51 लड़कियों को मुक्त कराया है। इन लड़कियों को धार्मिक गुरु और संस्थापक ने पुलिस की मदद से छुड़वाया है। अभी इन लड़कियों को नारी निकेतन में रखकर काउंसलिंग की जा रही है। जिनके माता-पिता आ गये हैं उन छात्राओं की काउंसलिंग करके उन्हें घर भेजा जा रहा है।

मदरसे की एक लड़की ने रोते हुए बताया, “पूरे हास्टल की छोटी या बड़ी किसी भी लड़की को हमसे ही कहा जाता था उसे हमारे पास बुलाकर लाओ। जैसे ही लड़की हम बुलाकर लाते, हमे दूसरे काम करने के लिए भेज दिया जाता। इस मामले की पूरी जांच होनी चाहिए, जो लड़कियां यहां से पढ़कर गयी हैं उनके साथ भी ऐसे हुआ होगा।”

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महिला कल्याण के नारी निकेतन गेट के बहार खड़े छात्राओं के परिजन

नारी निकेतन के गेट पर इनके माता-पिता और रिश्तेदारों की भीड़ सुबह से लगी हुई है, अभी इन्हें लड़कियों से मिलने नहीं दिया जा रहा है। गेट के बाहर खड़ी एक महिला ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हमारी भतीजी यहां पढ़ती हैं, उसने हमें कई बार बताया कि हाफिज़ जी बहुत गंदे तरीके से मारते हैं। वो हमारे पेट पर लात रख देते हैं, उन्हें मारने का बस एक बहाना चाहिए।”

जब भतीजी ने आपको कई बार बताया तो आपने शिकायत क्यों नहीं की, इस सवाल के जबाब में उन्होंने कहा, “मेरी अकेली भतीजी है, अगर अपने भाई को बता देती तो वो उसकी पढ़ाई बंद करा देते। लड़की जात है इसमें उसकी बदनामी होती, इसलिए कभी किसी से जिक्र नहीं किया। हाफिज़ जी ने कभी गंदे तरीके से छुआ ऐसा उसने कभी नहीं बताया।” वो आगे बताती हैं, “सुपाड़ी और मसाला खाने वाली लड़कियों को बहुत मारते थे। मुझे लगा गंदी आदतें हैं इसलिए हाफिज़ जी मारते हैं तो कोई बुरा नहीं करते हैं।”

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सीतापुर से आये छात्राओं के भाई

नारी निकेतन में मदरसे की लड़कियों की काउंसलिंग कर रही आशा ज्योति केंद्र की सामाजिक कार्यकर्ता अर्चना सिंह ने गांव कनेक्शन को बताया, “लड़कियों की काउंसलिंग चल रही हैं, ये बहुत घबरायी हुई हैं, कुछ तो रो भी रही हैं। 15 काउंसलर सुबह से लगातार इनकी काउंसलिंग कर रही हैं, कई तरह की बातें निकल कर आयी हैं, वो मारते बहुत थे ये सभी ने बताया।” वो आगे बताती हैं, “लड़कियों ने कहा उन पर बहुत निगरानी रखी जाती थी, फोन पर जब घरवालों से बात करते तो रिकॉर्डिंग ऑन रहती थी जिससे हम शिकायत न कर सकें। कुछ ने बताया कि अकेले कमरे में बुलाते थे, दो-तीन के साथ रेप हुआ, कुछ के साथ छेड़खानी हुई। वहां की एक महिला शिक्षक ने बताया कि हमें भी लड़कियों से नहीं मिलने देते थे।”

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सीतापुर जिले से आये मोहम्मद इसराइल रजा (20 वर्ष) की छोटी बहन नर्सरी कक्षा में यहां पढ़ती है। उनका कहना है, “एक महीने पहले घर गयी थी उसने कुछ नहीं बताया। हर हफ्ते रविवार को हम मिलने आते थे कल फिर आना था तब तक पेपर में सुबह खबर पढ़ ली। यहां आकर पता चला महिलाएं ही अंदर जा सकती हैं अभी माँ को बुलाया।” मोहम्मद नारी निकेतन गेट के बाहर परेशान खड़े थे और कह रहे थे, “हमारी बहन को ये लोग छोड़ दें, हम उसे घर ले जाना चाहते हैं। चिंता हो रही है पता नहीं अंदर वो किस हालत में होगी। जब भी यहां बहन से मिलने आया, आसपास के माहौल से भी कोई अंदाजा नहीं लगा कि यहां ऐसा कुछ होता होगा। बहन से मिलने के बाद ही पता चलेगा सच्चाई क्या है।”

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नारी निकेतन गेट के बहार हर कोई परेशान

अर्चना सिंह का कहना है, “काउंसलिंग के दौरान लड़कियां ये भी बता रही हैं, जब भी हमारे घर वाले मिलने आते थे, दो तीन लड़कियों को आस पास खड़ा कर देते थे जिससे हम शिकायत न कर सकें, हर किसी की रिकॉर्डिंग काल सुनते थे कि किसने घर में क्या बात की है।” छुट्टियों में घर पर जाने पर क्यों नहीं बताया इस सवाल पर अर्चना को लड़कियों ने बताया, “हमें डर लगता था कि हमारी पढ़ाई बंद हो जाएगी, हाफिज़ जी को अगर पता चल गया तो वो और ज्यादा मारेंगे इसलिए कभी बताया नहीं।”

नारी निकेतन के बहार पुलिस फ़ोर्स लगा हुआ है। गेट के अंदर छात्रा की माँ या बहन जा सकती है। आधार कार्ड की फोटो कॉपी, पासपोर्ट साइड की फोटो, दो गवाहों के बाद ही गेट के अंदर जा सकते हैं। बाहर खड़े इन छात्राओं के माता-पिता अपनी बेटियों के लिए परेशान हैं, सब फ़ोन से एक दूसरे को दिलासा दे रहे हैं। जिनके माता-पिता आ गये हैं काउंसलिंग के बाद उन्हें घर भेजा जा रहा है।

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वीडियो काल पर बात करती एक छात्रा की दादी

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