गौ माता को राम मंदिर की तरह राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा: मायावती 

गौ माता को राम मंदिर की तरह राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा: मायावती बहुजन समाजवादी पार्टी की प्रमुख मायावती।

लखनऊ। बहुजन समाजवादी पार्टी की प्रमुख मायावती ने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि गौ माता को राम मंदिर की तरह राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है और जो गौशालाएं बूचड़खाना बन चुकी है उन पर कोई रोक नहीं है। बीजेपी शासित राज्यों में भ्रष्टाचार से गायें तड़प-तड़प कर मर रही है लेकिन आरएसएस और बीजेपी के नेता जवाब देने के लिए तैयार नहीं है।

योगी सरकार के आते ही अवैध बूचड़खाने बंद हो गए हैं, लेकिन प्रदेश की सबसे बड़ी समस्या छुट्टा जानवर इस पर अभी तक सरकार का ध्यान ही नहीं गया। उत्तर प्रदेश का कोई शहर, गांव कस्बा हो या देश का कोई दूसरा शहर सड़क पर गायों के झुंड के झुंड नजर आएँगे। जबकि ऐसी गायों को पालने ने बनाई गई गोशालाओं में अवस्थाओं के बीच मायूसी पनप रही है।

वहीं राजधानी लखनऊ से 15 किमी. दूर सरोजनी नगर ब्लॅाक के नादरगंज क्षेत्र में स्थित कांहा उपवन में पांच महीनों से अनुदान न मिलने से चारे का संकट है। गोशाला में अतिरिक्त पशु भेज दिए जाते है, जिससे चारे और दूसरी जरुरतों का प्रभाव बढ़ जाता है। गोशाला में भूसा और चोकर उपलब्ध करवाने वाले व्यापारियों ने भी अब उधार में चारा देने से इनकार कर दिया है।

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कान्हा उपवन का संचालन करने वाली संस्था जीवाश्रय के सचिव यतीन्द्र त्रिवेदी बताते हैं, "सरकार की तरफ फाइलें घूम रही है। हमारे पास 31 मार्च तक का अनुदान था एक अप्रैल से जो अनुदान मिलना चाहिए था वो अभी तक नहीं मिला। 15 अप्रैल को ही सरकार को दे दी गई थी। अब अगस्त खत्म होने वाला है पर कोई अनुदान नहीं मिला है। गोशाला में एक दिन में चारे की खपत करीब ढ़ेड लाख रुपए है।" जीवाश्रय को पशुओं के चारे और चोकर सहित अन्य काम के लिए हर महीने गौसेवा आयोग ने 19 लाख रुपये अनुदान मिलता है।

यतीन्द्र त्रिवेदी आगे बताते हैं, "अभी सरकार ने अवैध भूमि पर जो कब्जा से उस को खाली कराया था, मंत्री स्वाती सिंह के द्वारा सरोजनी नगर की 17 बीघा जमीन चारे के लिए दिलवाई है। जिस पर चरी बोई गई है पर अभी चारा उपलब्ध नहीं हुआ है।" उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मार्च में इसी गोशाला का निरीक्षण भी किया था।

" गोशाला की क्षमता 1600 पशुओं की है। इसके अलावा नगर निगम के छुट्टा जानवरों को शहर से हटाने के लिए अभियान के तहत पकड़े गए 650 गौवंश भी यहां लाए गए हैं। इन सभी के लिए चारे का इंतजाम करने का दबाव भी जीवाश्रय पर बढ़ा है।" यतिंद्र ने बताया।

मायावती ने बयान में यह भी कि गौ माता से जुड़ी योजनाओं में हो रही भ्रष्टाचार पर रोक लगाए। सरकार के गुड गवर्नेंस में इंसानी जानमाल की कीमत नहीं है। अब तो गौमाताओं पर भी जबरदस्त आफत है।

राजधानी की सड़कों पर आवारा जानवरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। मुश्किल यह भी है कि जिन गौशालाओं में आवारा पशुओं को रखा जाता है, वहां पशुओं की इतनी संख्या हो गई है कि अब और जगह ही नहीं बची है। छुट्टा जानवर यानी वो पशु जिनके मालिक दूध निकालने के बाद चरने के लिए खुला छोड़ देते हैं, लेकिन बाहर चारे का इंतजाम न होने पर वो किसानों के खेतों को नुकसान पहुंचाते हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्या गायों की है, उसके बाद सांड और बछड़े हैं।

यह स्थिति उत्तर प्रदेश की गोशालाओं की ही नहीं है बल्कि कई राज्यों की दर्जनों गोशालाओं की है। कभी अनुदान तो कभी गोशालाओं में काम करने के लिए कर्मचारियों की कमी से गोशालाओं को जूझना पड़ता है।

पिछले महीने राजस्थान में जालौर की पचमेढ़ा गौशाला में सैकड़ों गायों की मौत हो गई। गायों की मौत बाढ़ के पानी से हुई, सबसे ज्यादा मौते उन गायों की हुई जो चलने फिरने में असमर्थ थीं और उन्हें उठाने के लिए कर्मचारियों की संख्या काफी कम थी। पिछले साल राजस्थान की हिंगोनिया गोशाला में भी कई गायों की मौत हो गई थी। इसकी वजह पर गौर करना इसलिए जरुरी है क्योंकि लचर प्रबंधन और मूलभूत सुविधाओं के अभाव के चलते कर्मचारी हड़ताल पर चले गए थे और नतीजन ये हादसा हुआ।

हर छह साल में देश में होने वाली पशुगणना 2012 के मुताबिक देश के 51 करोड़ मवेशियों में से गोवंश (गाय-सांड, बैंड बछिया, बछड़ा) की संख्या 19 करोड़ है। उत्तर प्रदेश में दो करोड़ 95 लाख गोवंश हैं।

मध्यप्रदेश के भोपाल जिले के आनंद नगर में स्थित 'श्री महामृत्युंजय गौ सेवा सदन' में करीब 2000 गोवंश है, जिनकी सेवा के लिए केवल 9 कर्मचारी है। पिछले 33 वर्षों से गोशाला के सचिव गोविंद व्यास बताते हैं, "किसी को बोलो गोशाला में काम करना है तो कोई तैयार नहीं होता है। अभी बरसात चल रही इसमें और ज्यादा सफाई की जरुरत हो जाती है।”

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