आलू और प्याज के किसानों का दूर होगा संकट 58 नए कोल्ड स्टोरेज बनेंगे

Rishi MishraRishi Mishra   10 Aug 2017 5:41 PM GMT

आलू और प्याज के किसानों का दूर होगा संकट 58 नए कोल्ड स्टोरेज बनेंगेनए कोल्ड स्टोरेज बनने की योजना।

लखनऊ। एक रुपये किलो बिकता आलू और सड़क पर सड़ते सब्जियों के राजा की गरीबी को दूर करने का इंतजाम पूरा हो गया है। अब प्रदेश में कोल्ड स्टोरेज का बड़ा जाल फैलाया जाएगा। आलू भंडारण के लिए अब किसान नहीं परेशान होंगे।

प्रदेश में जहां जहां भी आलूकी पैदावार ज्यादा है मगर भंडारण की व्यवस्था नहीं है, ऐसे 27 जिलों के 58 विकासखंडों में नये कोल्ड स्टोरेज का निर्माण किया जाएगा।ताकि भविष्य में आलू को सुरक्षित रखने मेंकिसानों को परेशानियों का सामना न करना पड़े। अभी किसानों को रात रात भर इंतजारकरने के बावजूद अपना आलू कोल्ड स्टोर के बाहर छोड़ कर आना पड़ता है।

प्रदेश सरकार ने शीतगृह रहित 27 जनपदों के 58 विकास खण्डों में एक-एक शीत गृह स्थापित किये जाने का निर्णय लिया है। प्रमुख सचिव उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण सुधीर गर्ग ने दी है। उन्होंने बताया कि शीतगृह रहित यह वे जनपद हैं जहां पर आलू का उत्पादन होता है परन्तु वहां आलू भण्डारण की कोई व्यवस्था नहीं थी।

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गर्ग ने बताया कि जनपद गाजियाबाद के विकास खण्ड, भोजपुर, हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर,सिम्भावली, गौतमबुद्धनगर के जेवर, फिरोजाबाद के एका, बदायूं के कादरचैक, शाहजहांपुर के बण्डा, खुटार, मिर्जापुर, मुरादाबाद के बिलारी, अमरोहा के गंगेश्वरी, फर्रूखाबाद के नवाबंगज,औरैया के ऐरवाकटरा, अहल्दा, कानपुर नगर के ककवन, विधून, कानपुर देहात के ढेरापुर,झींझक, अमरौधा, मैंथा मलाशा, सन्दलपुर, कौशाम्बी के चायल, नेवादा, कौशाम्बी, सरसवां,प्रतापगढ़ के विहार पट्टी, जालौन के माधैेगढ़ तथा गाजीपुर के करण्डा सैदपुर, सादात,कासमाबाद, भदौरा-मिर्जापुर के छान्चे, कोन, बलिया के सियर,देवरिया के बरहज,संतकबीरनगर, नाथ नगर, सोमरियावां, सिद्धार्थनगर के डुमरियांगज, बांसी, नौगढ़, लखनऊ के गोसाईगंज, रायबरेली के संताव, खीरों, छतोह, दीनशाहगौरा, सीतापुर के महोली, मिश्रिख, हरदोई के भरखनी, बिलग्राम, हरपालपुर, बावन, अम्बेडकरनगर के जहांगीराबाद तथा बारांबकी के निदूरा, बनीकोडर, सिद्धौर, सूरतगंज विकास खण्डों में शीतगृहों की स्थाना की जायेगी।

155 लाख टन आलू को संभालने की है युक्ति

उत्तर प्रदेश में एक तरफ जहां 155 लाख टन आलू पैदा हुआ है। भंडारण और निर्यात की सुविधा न होने से किसानों को माटी मोल बेचना पड़ रहा है। लक्ष्य का एक प्रतिशत भी सरकार आलू खरीद नहीं सकी। इसी तरह टमाटर उत्पादन 413.83 हजार मीट्रिक होता है, लेकिन भंडारण की सही व्यवस्था न होने से किसानों को लाभ नहीं मिल पाता। यूपी में प्याज भी 418.1 हजार मीट्रिक टन पैदा होता है, लेकिन हर साल हजारों टन सड़ जाता है।

देश में पैदा होने वाले फल, सब्जियों और दूसरे कृषि उत्पादों का विदेश में निर्यात करने के लिए बनाए गए संगठन ‘कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा), नई दिल्ली के सलाहकार विनोद कुमार इस बारे में कहते हैं, ‘’ उत्तर प्रदेश में पैदा होने वाले फल और सब्जियों का निर्यात में जो हिस्सा होना चाहिए, वह बहुत कम है। यहां की सरकार को इस पर ध्यान देना होगा।’’ उन्होंने बताया कि भारत दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा प्याज उत्पादक देश है। पिछले साल देश ने करीब 12 लाख मीट्रिक टन प्याज का निर्यात विश्वभर में किया, जिससे 2,747.41 करोड़ रुपये मिले, लेकिन इसमें यूपी की हिस्सेदारी नगण्य रही।

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