गेहूं खरीद में पंजाब, हरियाणा और मध्यप्रदेश से भी पीछे है उत्तर प्रदेश

Ashwani NigamAshwani Nigam   16 May 2017 12:43 PM GMT

गेहूं खरीद में पंजाब, हरियाणा और मध्यप्रदेश से भी पीछे है उत्तर प्रदेशउत्तर प्रदेश में गेहूं की खरीद की रफ्तार सुस्त।

लखनऊ। यूपी सरकार ने जब इस साल घोषणा की थी कि वह किसानों से 80 मीट्रिक टन गेहूं खरीदेगी तो किसानों के चेहरे खिल गए थे लेकिन इस काम की धीमी रफ्तार से उनमें मायूसी भी है।

उत्तर प्रदेश सरकार अभी तक मात्र 15.9 लाख टन ही गेहूं खरीद पाई है जबकि इसी सीजन में पंजाब ने 115 लाख टन, हरियाणा ने 73.4 लाख टन, मध्यप्रदेश ने 59.2 लाख टन गेहूं की खरीद किसानों से कर लिया है। उत्तर प्रदेश में गेहूं खरीद की धीमी रफ्तार बढ़ने की बजाय स्थिर है। यह हाल तब है कि जब सरकार की एजेंसियों की तरफ से गेहूं खरीदने के लिए जो समय निर्धारित किया गया था उसका 45 दिन बीत गया है। अब मात्र 30 दिन बचा है जिसमें गेहूं खरीदने वाली एजेंसियों का लक्ष्य पूरा करना है।

पुखरायां में गेहूं क्रय विक्रय केंद्र में रात के 12 बजे से लाइन में लगना पड़ता तब जाकर अगले दिन शाम पांच बजे तक नंबर आता है। ऐसे में किसान सरकारी क्रय केन्द्र की बजाय आढ़तियों के यहां बेचना पसंद करते हैं।
सुदीप कुमार, किसान

उत्तर प्रदेश खाद्य व रसद विभाग के अपर आयुक्त विपणन अशोक कुमार ने बताया, ‘गेहूं क्रय केन्द्रों पर शुरुआत में किसान कम आ रहे थे लेकिन अब क्रय केंद्रों पर तेजी आई है, हालांकि लक्ष्य को पूरा करने के लिए एजेंसियों को और अधिक सक्रिय होना होगा।’ खाद्य आपूर्ति के अधिकारी चाहे जितना भी दावा करें लेकिन स्थिति यह है एजेंसियों की तरफ से गेहूं खरीद की जो रफ्तार है उससे गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा होता नहीं दिख रहा है।

गेहूं क्रय केन्द्रों पर शुरुआत में किसान कम आ रहे थे लेकिन अब क्रय केंद्रों पर तेजी आई है, हालांकि लक्ष्य को पूरा करने के लिए एजेंसियों को और अधिक सक्रिय होना होगा।
अशोक कुमार, अपर विपणन आयुक्त, खाद्य व रसद विभाग, यूपी

गेहूं खरीद

रबी विपणन वर्ष 2017-18 में केन्द्रीकृत प्रणाली के अंतर्गत न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के तहत उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों से इस साल 80 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा है। सरकार की 9 गेहूं खरीद एजेंसियों के जरिए प्रदेश के 5 हजार गेहूं क्रय केन्द्रों पर 1 अप्रैल से गेहूं खरीदने काम शुरू हुआ था। 15 जून तक एजेंसियों की तरफ से गेहूं खरीदने का अंतिम दिन है।

कानपुर देहात जिले के अमरौधा ब्लॉक के ग्राम जरईलापुर के किसान सुदीप कुमार ने बताया, ‘पुखरायां में गेहूं क्रय विक्रय केंद्र में रात के 12 बजे से लाइन में लगना पड़ता तब जाकर अगले दिन शाम पांच बजे तक नंबर आता है। ऐसे में किसान सरकारी क्रय केन्द्र की बजाय आढ़तियों के यहां बेचना पसंद करते हैं।’

इसी जिले के संदलपुर ब्लॉक के किसान राम जीवन बताते हैं, ‘गेहूं क्रय केन्द्र गांव से बहुत ज्यादा दूर बनाए गए हैं जिससे गेहूं बेचने के लिए बहुत अधिक भाड़ा ही लग जा रहा है। ऐसे में हम लोग गांव में ही अपना गेहूं बेच रहे हैं।’

उत्तर प्रदेश में क्रय केंद्रों पर जिन एजेंसियों को गेहूं खरीदने का जिम्मा दिया गया है उसमें खाद्य विभाग की विपणन शाख मल्टी स्टेट कोआपरेटिव सोसाइटी को 20 लाख मीट्रिक टन, उत्तर प्रदेश कर्मचारी कल्याण निगम को पांच लाख मीट्रिक , उत्तर प्रदेश राज्य खाद्य व आवश्यक वस्तु निगम यानी एसएफसी को तीन लाख मीट्रिक, उत्तर प्रदेश सहकारी संघ को 24 लाख मीट्रिक टन, उत्तर प्रदेश काआपरेटिव यूनियन यानि पीसीएफ को आठ लाख मीट्रिक टन, यूपी एग्रो को चार लाख मीट्रिक टन, एनसीसीएफ को 4 लाख मीट्रिक टन, नैफेड को दो लाख मीट्रिक टन और भारतीय खाद्य निगम को 10 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य दिया गया है।

इसके अलावा उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश उपभोक्ता सहकारी संघ लिमिटेड को भी गेहूं क्रय के लिए नामित किया है। इसका न्यूनतम खरीद लक्ष्य 3.00 लाख मीट्रिक टन और कार्यकारी लक्ष्य पांच लाख मीट्रिक टन तय किया गया है। सहकारी संघ के क्रय एजेंसी नामित हो जाने के बाद अब खाद्य विभाग का न्यूनतम गेहूं खरीद लक्ष्य 10 लाख मीट्रिक टन से घटकर सात लाख मीट्रिक टन हो गया है, वहीं कार्यकारी लक्ष्य 20 लाख मीट्रिक टन के स्थान पर 15 लाख मीट्रिक टन हो गया है लेकिन सभी एजेंसियों में गेहूं खरीद की दर बहुत धीमी है। अगर गेहूं खरीद ऐसी ही सुस्त रफ्तार से चलती रही तो काई भी एजेंसी अपना लक्ष्य पूरा नहीं कर पाएगी।

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