इंजीनियर के क्षेत्र में बनाएं भविष्य की बुनियाद

इंजीनियर के क्षेत्र में बनाएं भविष्य की बुनियाद

देश के विकास की बुनियाद इंजीनियरिंग से ही होती है। सड़क, इमारतें, पुल आदि ये सब इंजीनियरिंग की ही देन हैं। अब क्योंकि मेक इन इंडिया जैसी अनेक योजनाएं चल रही हैं और इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ोतरी हो रही है, ऐसे में इंजीनियर की मांग भी बढ़ रही है।

छात्र-छात्राओं के लिए इंजीनियर के क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं और इस क्षेत्र में कॅरियर को लेकर हमें बता रहे हैं लखनऊ में कॅरियर ग्रूमस के कॅरियर काउंसलर प्रो. सत्येन्द्र कुमार सिंह।

लखनऊ में कॅरियर ग्रूमर्स के कॅरियर काउंसलर प्रो. सत्येन्द्र कुमार सिंह

अगर आप में इंजीनियरिंग क्षेत्र में जाने की इच्छा है तो बी.टेक. या बी.ई कर सकते हैं। मान्यता प्राप्त संस्थान से ये डिग्री लेने के बाद आप सरकारी नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए इंजीनियरिंग सर्विस एग्जामिनेशन का प्रावधान है। आपको ये ध्यान देना होगा कि आपकी रुचि इंजीनियरिंग के किस ब्रांच में है। सामान्यत: सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्यूनिकेशन में मांग बनी रहती है।

इंजीनियरिंग सर्विस एग्जामिनेशन में बैठने के लिए आयु 21 से 30 वर्ष के बीच में होनी चाहिए। आरक्षण की छूट नियमानुसार होती है। इस परीक्षा के लिए अपने विषय का गहन ज्ञान होना चाहिए। एग्जाम के सिलेबस का ज्ञान होना ज़रूरी है। साथ ही सामान्य ज्ञान, इतिहास, भूगोल, पॉलिटिक्स, जनरल इंग्लिश से भी प्रश्न पूछे जाते हैं। लिखित परीक्षा में ऑब्जेक्टिव एवं सब्जेक्टिव प्रश्न पूछे जाते हैं। लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद पर्सनालिटी टेस्ट के लिए बुलाया जाता है।

पिछले वर्षों के प्रश्न पत्र सॉल्व करना चाहिए| इससे अपनी कमजोरी का ज्ञान होता है जिसके सुधार के लिए प्रयास कर सकते हैं। इसके अलावा अपने विषय के बारे में अपडेट रहने की विशेष आवश्यकता है। जनरल एबिलिटी में उत्तीर्ण होना ज़रूरी है। वहीं जनरल इंग्लिश के लिए लगातार प्रैक्टिस बनाये रखिये। जनरल स्टडीज में भारतीय संविधान, इतिहास और भूगोल के प्रश्न को सॉल्व करना होता है, ऐसे में इसका अभ्यास ज़रूरी है। आप इसके लिए एनसीआरटी की किताब से पढ़ सकते हैं।

इंजीनियरिंग में विकल्प

इंजीनियरिंग में प्रवेश के लिए विद्यार्थियों में बहुत लालसा रहती है। इसमें प्रवेश के लिए इंटर में साइंस और मैथ्स होना अनिवार्य है। इसके लिए IIT JEE

और AIEEE मुख्य परीक्षाएं हैं| इसकी तयारी पूरे मनोयोग से करनी चाहिए, किन्तु उससे पहले ये जानना बहुत ज़रूरी है कि आपका रुझान इंजीनियरिंग के किस ब्रांच में है और कौन कौन से ब्रांच उपलब्ध है। चलिए, कुछ प्रमुख ब्रांचों के बारे में जानने का प्रयास करते हैं।

ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग

इस सेक्टर में विकास बहुत तेजी से हो रहा है। नित नए रूप-स्वरूप में वाहन पेश हो रहे हैं। उनके फीचर आदि के बारे में लगातार अनुसन्धान हो रहे हैं। नए डिजाइन बनाने और उसे मूर्तरूप देने में ऑटोमोबाइल इंजीनियर की मांग रहती है। अगर आपका मन इस सेक्टर में है तो आप इसके लिए 4 वर्षीय बी.टेक. (डिजाइनिंग) पढ़ाई IIT गुवाहाटी, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ डिजाइन अहमदाबाद आदि से कर सकते हैं। IIT से इंडस्ट्रियल डिजाइनिंग में 2 वर्षीय परास्नातक डिग्री ले सकते हैं। कई प्राइवेट संस्थाओं में भी ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग का कोर्स होता है।

सिविल इंजीनियरिंग

इंफ्रास्ट्रक्चर आदि में निर्माण कार्य के लिए तकनीक को समझने के लिए सिविल इंजीनियरिंग का कोर्स किया जाता है। इसमें ईमारत आदि की प्लानिंग और डिजाइनिंग की जाती है। निर्माण के मानकों का ध्यान रखा जाता है। निर्माण के जगह का अवलोकन, उसमे निर्माण की सम्भावना, निर्माण का प्रबंधन, विभिन्न एजेंसीज से समन्वय आदि में अपना सहयोग देना पड़ता है। ये कोर्स प्राइवेट तथा सरकारी संस्थाओं में उपलब्ध है।

एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग

इस क्षेत्र में जाने के लिए फिजिक्स और कैमिस्ट्री के साथ या तो मैथ्स होनी चाहिए या फिर बायोलॉजी। खेती में नए तकनीक का उपयोग हो रहा है। इस भौतिक ज़रूरत को पूरा करने के लिए एग्रीकल्चर इंजीनियर की आवश्यकता होती है। इस ब्रांच के लिए एग्रीकल्चरल इंस्टीट्यूट और यूनिवर्सिटी में 4 वर्षीया बी.टेक. या बी.ई. कोर्स उपलब्ध हैं। इस डिग्री के बाद परास्नातक कोर्स भी किया जा सकता है। ट्रेक्टर उत्पादन, सिंचाई के उपकरण, वर्टीकल खेती आदि में कुशल योजना एवं तकनीकी प्रबंधन की ज़रूरत होती है। प्राइवेट कम्पनीज जो कि खेती के क्षेत्र में अपना कार्य करती है उन में ऐसे इंजीनियर की मांग होती है।

एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग

टूरिज्म, व्यापार और रक्षा में एरोनॉटिक्स का अहम रोल होता है। इस ब्रांच में एरोनॉटिक्स के साथ स्पेस टेक्नोलॉजी के बारे में भी बताया जाता है। स्ट्रक्चरल डिजाइन, गाइडेंस एवं कण्ट्रोल सिस्टम, नेविगेशनल साइंस और विभिन्न प्रकार के विमान आदि के बारे में सिखाया जाता है। इसके लिए डिग्री एवं डिप्लोमा कोर्सेज उपलब्ध हैं। डिग्री कोर्स के लिए आई.आई.टी. एक प्रमुख संस्था है। डिप्लोमा के लिए बहुत से पॉलिटेक्निक उपलब्ध हैं। ये ज़रूर ध्यान दें कि संस्था में आवश्यक संसाधन हो एवं प्रैक्टिकल कराने की सुविधा हो। डिफेन्स, इसरो, एयरलाइन्स आदि में एयरोनॉटिकल इंजीनियर की मांग सदा रहती है।

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जेनेटिक इंजीनियरिंग

आज हम बीजरहित तरबूज खाते हैं तो अधिक दुग्ध उत्पादन वाली जर्सी गाय देखते हैं। ये सब जेनेटिक इंजीनियरिंग का कमाल है। बहुत सी बीमारियों के इलाज़ में भी इसका अहम योगदान है। अगर इस क्षेत्र में आगे जाने की रुचि हो तो स्नातक और परास्नातक कोर्स उपलब्ध हैं। इसके लिए इंटर में फिजिक्स, कैमिस्ट्री और बायोलॉजी का होना ज़रूरी है। सामान्यतः ये कोर्स बायोटेक्नोलॉजी के नाम से उपलब्ध हैं, जिसमे जेनेटिक इंजीनियरिंग में स्पेशलाइजेशन किया जा सकता है।

J.N.U. में M.Sc. (जेनेटिक इंजीनियरिंग) का कोर्स उपलब्ध है। जेनेटिक इंजीनियरिंग करने के बाद देश विदेश की दवा कंपनियों, एनिमल हसबेंडरी, पर्यावरण आदि में रोज़गार प्राप्त कर सकते हैं। इसमें अनुसन्धान की भी अपार संभावनाएं हैं।

मैकेनिकल इंजीनियरिंग

इस ब्रांच का विभिन्न सेक्टर में बहुत योगदान है चाहे वह थर्मल सेक्टर हो या एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग हो या ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग हो या कोई अन्य। अत: रोज़गार की अपार सम्भावना वाली इस ब्रांच की मांग सदा रहती है।

कैमिकल इंजीनियरिंग

इस विधा का प्रयोग तमाम रसायनों के उत्पादन और उनके कॉम्बिनेशन से बनने वाले प्रोडक्ट्स में होता है। मेडिसिन, कीटनाशक, पेंट्स, फ़र्टिलाइज़र, पेट्रोलियम आदि अनेक सेक्टर हैं जहाँ इस इंजीनियरिंग का प्रयोग होता है। इसमें भी जॉब्स की प्रबल संभावाएं हैं। आई.आई.टी., बी.एच.यू. और अन्य संस्थानों में इस ब्रांच के लिए कोर्स उपलब्ध हैं। अखिल भारतीय प्रवेश परीक्षा, GATE, UGC-NET के द्वारा स्नातक अथवा परास्नातक कोर्स में एडमिशन लिया जा सकता है।

माइनिंग इंजीनियरिंग

इसमें माइनिंग क्षेत्र में होने वाले कार्य के बारे में सिखाया जाता है जैसे कि ड्रिलिंग, ब्लास्टिंग, माइन सेफ्टी, रॉक मैकेनिक्स आदि के बारे में अध्ययन होता है। खनिज पदार्थों को साफ़ करना, उनका रख-रखाव, खदानों का प्रबंधन भी इसमें शामिल होता है। स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया, कोल इंडिया लिमिटेड जैसी अनेक संस्थाएं हैं, जहां इस क्षेत्र में रोज़गार उपलब्ध होते हैं।

पेट्रोलियम इंजीनियरिंग

देश में पेट्रोलियम उत्पाद की मांग लगातार बढ़ रही है। नए गैस भंडारों के बारे में अनुसन्धान हो रहा है। इंटर में पी.सी.एम. से पढ़ने वाले छात्र इस ब्रांच में प्रवेश के लिए आवेदन कर सकते हैं। ए.आई.ई.ई.ई., जे.ई.ई. जैसे प्रवेश परीक्षा से इस कोर्स में एडमिशन लिया जा सकता है। देहरादून स्थित पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी से भी कोर्स किया जा सकता है। इंडियन आयल, भारत पेट्रोलियम, एच.पी.सी.एल., ओ.एन.जी.सी. आदि में ऐसे इंजिनियर की मांग बनी रहती है।

इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग

टी.वी., एयर-कंडीशनर, रेफ्रीजिरेटर आदि प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ रही है। अत: इस क्षेत्र में कुशल इंजीनियर की आवश्यकता होती है। ए.आई.ई.ई.ई., जे.ई.ई. जैसे प्रवेश परीक्षा से इस कोर्स में एडमिशन लिया जा सकता है। रेलवे, टेलीकम्यूनिकेशन जैसे क्षेत्र में भी इलेक्ट्रिकल इंजीनियर की मांग रहती है।

कंप्यूटर इंजीनियरिंग

कंप्यूटर तो आजकल हर घर में उपलब्ध है। इसकी स्पीड और फीचर को बढ़ने का निरंतर प्रयास होता रहता है। हमारे जीवन के इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में रिसर्च, डिजाइनिंग, टेस्टिंग आदि के लिए एक्सपर्ट्स की डिमांड बनी रहती है। इसमें दो प्रकार के आप्शन होते हैं- हार्डवेयर इंजीनियर और सॉफ्टवेर इंजीनियर। देश विदेश के सरकारी और प्राइवेट संस्थानों में कंप्यूटर इंजीनियर की मांग सदैव रहती है। आप अपनी कंपनी भी बना सकते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग

टेलिकॉम सेक्टर में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का प्रयोग बहुत होता है। इसके अलावा एविएशन और अन्य उद्योगों में भी इनका यूज़ होता है। इसके लिए 4 वर्षीय बी.टेक./बी.ई. कोर्स होता है। ए.आई.ई.ई.ई., जे.ई.ई. जैसे प्रवेश परीक्षा से इस कोर्स में एडमिशन लिया जा सकता है।

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