सफाई की स्पेशल क्लास ने सुधारी बच्चों की सेहत

सफाई की स्पेशल क्लास ने सुधारी बच्चों की सेहत

लखनऊ। " ठंड के बावजूद मेरी बेटी कभी बिना नहाए स्कूल नहीं जाती। कंपकंपाती ठंड में मैंने नहाने से मना किया तो कहती है पापा रोज नहाने से बीमार नहीं पड़ते। अब तो बिना हाथ धोए वह खाने को छूती भी नहीं है। " यह कहना है माल ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय रामपुर में कक्षा चार में पढ़ने वाली छात्रा कल्पना के पिता राम सिंह का।

प्राथमिक विद्यालय रामपुर में पढ़ाई के साथ-साथ साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक विनय कुमार ने बताया, " जब मेरी इस स्कूल में नियुक्ति हुई , तब बच्चों की उपस्थिति बहुत कम रहती थी। मैंने कारण पता किया तो पता चला कि ग्रामीण साफ-सफाई पर ज्यादा ध्यान नहीं देते थे। बच्चे बिना हाथ धोए खाना खाते थे, जिससे आए दिन बीमारी उन्हें घेर लेती थी। तभी से मैंने ठान लिया की बच्चों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करूंगा।"

ये भी पढ़ें:अध्यापक-अभिभावकों की कोशिशें रंग लाईं, सकरौली बन गया सबसे खास स्कूल


साबुन और हैंडवॉश की व्यवस्था

विद्यालय में प्रार्थना के दौरान बच्चों को जनरल नॉलेज के साथ-साथ साफ-सफाई के बारे में भी जागरूक किया जाता है। हर बच्चे का नाखुन चेक किया जाता है। गंदगी से होने वाली बीमारियों के बारे में उन्हें सचेत किया जाता है। अब इन बातों का असर बच्चों पर दिखने लगा है। स्कूल का हर बच्चा मिड डे मील खाने से पहले साबुन से हाथ जरूर धोता है। बच्चों के हाथ धोने के लिए विद्यालय में करीब आधा दर्जन टोटियां लगवाई गईं हैं। साबुन और हैंडवॉश की व्यवस्था भी रहती है।

ये भी पढ़ें:औषधीय पौधों से महकती है स्कूल की बगिया

विद्यालय में 110 बच्चे पंजीकृत हैं, जिसमें 49 छात्र और 61 छात्राएं हैं। अब विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति 90 प्रतिशत रहती है। जो बच्चा स्कूल नहीं आता है उसके अभिभावक बच्चे के न आने की वजह जरूर बताते हैं।


गाँव में काम करने वाली गैर सरकारी संस्था वात्सल्य भी बच्चों के साथ-साथ ग्रामीणों को सफाई के प्रति जागरूक कर रही है। वात्सल्य की प्रतिनिधि वैशाली ने बताया, " मैं बच्चों को स्वस्थ रहने के लिए स्वच्छता का पाठ पढ़ाती हूं। स्वच्छता अपनाने से व्यक्ति रोग मुक्त रहता है और एक स्वस्थ राष्ट्र निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान देता है। ग्रामीणों को खुले में शौच नहीं जाने के बारे में जागरूक करती हूं। ग्रामीण हमारी बातों से काफी प्रभावित हैं। वे अब सफाई पर जोर देने लगे हैं। "

कक्षा चार में पढ़ने वाली आसमा ने बताया, " पहले मैं खाने से पहले हाथ नहीं धोती थी। लेकिन मेरे मास्टर साहब ने जब यह समझाया कि हाथ न धोने से हैजा, पेंचिश, पोलियो, टाईफाइड जैसी घातक बीमारियां फैलती हैं तब से मैं हाथ जरूर धोती हूं। मैं अपने घर वालों को भी बताती हूं कि बिना हाथ धोए खाना खाने से आप बीमार पड़ जाएंगे।"

ये भी पढ़ें:इस स्कूल में प्रधानाध्यापक अभिभावकों से भरवाते हैं शपथ पत्र


सहायक अध्यापक ओपी यादव ने बताया, "हाथ धोने के बारे में जागरूक करना भले ही छोटी बात लगे लेकिन इस छोटी सी पहल से बच्चों की सेहत सुधरती देखी है। स्वच्छता का संदेश घर-घर तक पहुंचाना बेहद जरूरी है। जब बच्चे जागरूक होंगे तो वे अभिभावकों को भी समझाएंगे। "

हर बच्चे ने घर में बना रखा है डस्टबिन

बच्चे स्कूल के साथ-साथ अपने घर पर भी सफाई का विशेष ध्यान रखते हैं। हर बच्चे ने अपने घर पर गत्ते का डस्टबिन बना रखा है। घर की बेकार चीजों को वे अब इधर-उधर फेंकने की जगह डस्टबिन में ही डालते हैं। बच्चों के इस प्रसास का असर अभिभावकों पर भी पड़ रहा है। वे भी अब सफाई पर जोर देने लगे हैं।

ये भी पढ़ें:बच्चों को जिम्मेदार बना रही बाल संसद


Share it
Top