देश

बड़ा सवाल : आरुषि हेमराज को फिर मारा किसने ?

लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बहुचर्चित आरुषि और हेमराज मर्डर केस में सीबीआई अदालत के उम्रकैद के फैसले के खिलाफ राजेश तलवार और नुपुर तलवार की अपील पर गुरुवार को अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने तलवार दंपति को निर्दोष माना है और उनको रिहा करने का तत्काल आदेश दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस तरह की सजा तो सुप्रीम को भी अपने आदेश में नहीं देता, जबकि सीबीआई के वकील की हाईकोर्ट में तर्कों के आगे तलवार दंपत्ति के तर्कों की जीत हुई। वहीं कोर्ट के इस फैसले के बाद डासना में बंद तलवार दंपत्ति ने भावुकता से एक दूसरे को गले लगाकर कहा कि आखिर सत्य की जीत हुई।

इस मामले में न्यायमूर्ति बीके नारायण और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार मिश्र की पीठ ने सीबीआई की जांच में कई खामियों का हवाला देते हुए दोनों को बरी कर दिया। आरोपी दंपति डॉ राजेश तलवार और नुपुर तलवार ने सीबीआई अदालत की ओर से आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डॉ. राजेश तलवार और नुपुर तलवार को जेल से तुरंत छोड़ने का आदेश जारी किया है। गाजियाबाद के डासना जेल में तलवार दंपति बंद हैं।

ये भी पढ़ें- आरुषि-हेमराज हत्याकांड में हाईकोर्ट ने राजेश और नूपुर तलवार को बरी किया

यह फैसला तलवार दंपति के लिए नौ वर्ष बाद राहत लेकर आया है। सीबीआई की अदालत ने उन्हें 14 वर्षीय आरुषि को अचानक गुस्से में आकर हत्या करने का दोषी ठहराया था। इसके पीछे वजह मानी गई थी कि दंपति को आरुषि और हेमराज के बीच संबंध होने का शक था।

ज्ञात हो कि गाजियाबाद की स्पेशल कोर्ट ने तलवार दंपति को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ इस दंपति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील की थी। 16 मई 2008 को दिल्ली से सटे नोएडा के जवलायु विहार स्थित घर में 14 साल की आरुषि का शव मिला, जबकि 17 मई को नौकर हेमराज (45) की डेड बॉडी छत पर मिली थी।

आरुषि का गला रेता गया था। 2008 के आरुषि-हेमराज हत्याकांड में अदालत आरुषि के माता-पिता, नूपुर और राजेश तलवार को दोषी मान करार दिया। उस वक्त की उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी। आरुषि की हत्या वाली रात अपने बेडरूम में सोते समय डॉ.राजेश तलवार को बाहर से कुछ आवाज आई। बेडरूम से बाहर निकल कर वह हेमराज के कमरे में गए लेकिन वह वहां नहीं मिला। उसके कमरे में गोल्फ स्टिक रखी हुई थी जो उन्होंने उठा ली। इसी दौरान उन्होंने आरुषि के कमरे से आवाज आती सुनी और वह उधर बढ़ गए। आरुषि के बेडरूम के दरवाजे पर कुंडी नहीं लगी थी।

ये भी पढ़ें- आरुषि मर्डर केस पर आ गया हाईकोर्ट का फैसला, जानिए क्या हुआ हत्या की उस रात

डॉ.राजेश दरवाजा खोलकर अंदर घुसे तो उन्हें आरुषि और हेमराज आपत्तिजनक स्थिति में मिले। इतना देखते ही डॉ.तलवार ने गोल्फ स्टिक से हेमराज पर हमला किया लेकिन स्टिक हेमराज को न लग कर आरुषि के सिर पर लगी। इसके बाद तलवार ने हेमराज पर गोल्फ स्टिक पर हमला कर दिया। तब तक आरुषि की मौत हो चुकी थी। आवाजें सुनकर डॉ. नूपुर तलवार भी वहां पहुंच चुकी थीं। बाद में उन्होंने दोनों के गले रेत दिए। राजेश ने हेमराज के शव को घर की छत पर पहुंचाया और कूलर के पैनल से ढंक दिया। फिर वापस आरुषि के बेडरूम में पहुंच कर खून को साफ कर दिया। वारदात में इस्तेमाल गोल्फ स्टिक को भी साफ करके छिपा दिया गया।

पहले फैसला सुरक्षित रखा था हाईकोर्ट ने

सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने 6 नवम्बर 2013 को नूपुर और राजेश तलवार को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। दंपति ने इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। जस्टिस बीके नारायण और जस्टिस एके मिश्रा ने इस साल 7 सितंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

कौन हैं तलवार दंपति

तलवार दंपति दिल्ली-एनसीआर के जाने माने डेंटिस्ट रहे। डॉ. राजेश पंजाबी परिवार से हैं और नुपुर महाराष्ट्रीयन फैमिली से हैं। नुपुर एयरफोर्स के अफसर की बेटी हैं और डॉ. राजेश हार्ट स्पेशिलिस्ट के बेटे हैं। आरुषि का जन्म 1994 में हुआ था।

यह भी पढ़ें : आरुषि हत्याकांड से आगे : ऐसे मामलों की जांच को कोर्ट तक पहुंचने में इतना समय क्यों लगता है ?

एक ने क्लीन चिट दी, दूसरी ने तलवार दंपति को सस्पेक्ट माना

इस मामले की जांच सबसे पहले यूपी पुलिस ने शुरू की थी। शुरुआती जांच में पुलिस ने तलवार दंपति को शक के घेरे में लिया था। बाद में यह जांच सीबीआई को सौंपी गई। उस वक्त प्रदेश में मायावती की सरकार थी और उन्होंने पूरे केस की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। इस केस की जांच 31 मई 2008 को उस वक्त के सीबीआई ज्वाइंट डायरेक्टर के हाथ में आई। उन्होंने तलवार दंपति को क्लीन चिट दी और तीन नौकरों को सस्पेक्ट माना। इसके बाद सितंबर 2009 में फिर से सीबीआई की दूसरी टीम ने जांच शुरू की। इस बार सीबीआई के अफसर एजीएल कौर ने जांच शुरू की। उन्होंने तलवार दंपति को प्राइम सस्पेक्ट माना।

आरुषि-हेमराज कांड: कब क्या हुआ ?

  • 16 मई, 2008 : आरुषि तलवार की बॉडी उनके घर में मिली।
  • 17 मई 2008 : नेपाल के रहने वाले नौकर हेमराज की लाश छत पर मिली, उसी पर आरुषि की हत्या का आरोप राजेश तलवार ने लगाया था।
  • 18 मई 2008: जांच में यूपी एसटीएफ को भी लगाया गया। पुलिस ने कहा कि दोनों मर्डर बेहद सफाई से किए गए। साथ ही पुलिस ने माना की मर्डर में परिवार से जुड़े लोग है।
  • 19 मई, 2008: तलवार परिवार के पूर्व घरेलू नौकर विष्णु शर्मा पर भी पुलिस ने शक जाहिर किया।
  • 21 मई, 2008: यूपी पुलिस के साथ ही दिल्ली पुलिस भी मर्डर की जांच में शामिल हुई।
  • 22 मई, 2008: आरुषि की हत्या ऑनर किलिंग होने का शक पुलिस ने जाहिर किया। इस पहलू से भी जांच शुरू की गई। पुलिस ने आरुषि के लगातार संपर्क में रहे एक नजदीकी दोस्त से भी पूछताछ की। इस दोस्त से आरुषि ने 45 दिनों में 688 बार फोन पर बात की थी।
  • 23 मई, 2008 : पुलिस ने डॉ.राजेश तलवार को मर्डर के आरोप में अरेस्ट किया।
  • 29 मई, 2008: जांच सीबीआई के हवाले।
  • 01 जून, 2008 : सीबीआई ने जांच शुरू की।
  • 03 जून, 2008 : कम्पाउंडर कृष्णा को पूछताछ के लिए सीबीआई ने हिरासत में लिया।
  • 27 जून, 2008 : नौकर राजकुमार को अरेस्ट किया गया।
  • 12 जुलाई, 2008 : नौकर विजय मंडल अरेस्ट डॉ.तलवार को जमानत मिली।
  • 29 दिसंबर 2010: सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट लगाई। गाजियाबाद कोर्ट ने नौकरों को क्लीन चिट दी लेकिन पेरेंट्स के रोल पर सवाल उठाए।
  • 09 फरवरी 2011: मामले में तलवार दंपति बने आरोपी।
  • 21 फरवरी 2011: दंपति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से अपील की। हाईकोर्ट ने अपील खारिज कर दी और ट्रायल कोर्ट इनके खिलाफ सुनवाई शुरू करने के आदेश दिए।
  • 19 मार्च 2011: सुप्रीम कोर्ट गए। यहां भी राहत नहीं मिली।
  • 11 जून, 2012: सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। इस मामले की सुनवाई जस्टिस एस लाल ने की।
  • 26 नवम्बर 2013 : नूपुर और राजेश तलवार को उम्रकैद की सजा। जस्टिस एस लाल ने 208 पेज का जजमेंट सुनाया था।

यह भी पढ़ें : ऐसे मामलों की जांच को कोर्ट तक पहुंचने में इतना समय क्यों लगता है ?

आखिर आरुषि-हेमराज को फिर मारा किसने

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलवार दंपत्ति को आरुषि और हेमराज के मर्डर के आरोपों से बरी कर दिया है। कोर्ट ने अपना यह आदश सबूतों के अभाव में दिया है। इसके बाद हर तरफ एक ही सवाल उठा रहा है कि, फिर आरुषि-हेमराज की हत्या किसने की है। उस वक्त के नोएडा के एसएसपी सतीश गणेश ने कहा कि, इस पूरे केस में पहला सस्पेक्ट परिवार ही दिख रहा था, लेकिन उनके खिलाफ सीधे तौर पर कोई सबूत नहीं थे, जबकि कुछ दिनों बाद इस केस को सीबीआई के हवाले कर दिया। हालांकि इस दौरान आरुषि और हेमराज केस से जुड़े सारे जांच के साक्ष्यों को सीबीआई टीम को सौंप दिया गया था।

इस पूरे आदेश के बाद उस वक्त के पुलिस अधिकारी से लेकर हर कोई सीबीआई की भी जांच पर सवाल उठा रहा है कि,अगर तलवार दंपत्ति निर्दोष था तो उन्हें क्यों अपनी ही बेटी के कत्ल में फंसाया गया। जबकि घटना के वक्त मिले साक्ष्यों के आधार पर हत्या की शक की सुई तलवार दंपत्ति पर ही उठी थी, जिस वजह से नीचली अदालत से उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई गई थी।

वैज्ञानिक साक्ष्य न होने से हुए रिहा

सीबीआई जांच टीम के पास तलवार दंपत्ति को सलाखों के पीछे भेजने के कई सबूत थे, लेकिन यह सारे सबूत केवल वैज्ञानिक आधार पर पुष्ट नहीं हो पा रहे थे, जिसके चलते उन्हें कोर्ट ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। सीबीआई ने कड़ी से कड़ी जोड़ कर तलवार दंपत्ति को सलाखों के पीछे भेजा था, लेकिन वह सबूत फोरेंसिक लैब में एक मिनट भी नहीं ठहर पाये और इसका ही फायदा तलवार दंपत्ति को मिला, जिसने उन्हें निर्दोष साबित कर दिया।

सीबीआई और तलवार दंपत्ति के बीच कोर्ट में हुई बहस के अंश

1. सीबीआई ने पहली दलील दी कि- वारदात की रात घर में सिर्फ चार लोग थे। आरुषि-हेमराज-राजेश और नूपुर तलवार। इन चार में से दो की हत्या हो गई और दो बच गए। सीबीआई ने कहा कि घर में कोई बाहरी शख्स नहीं आया और ना ही उसके सबूत मिले हैं। इस आधार पर सीबीआई ने तलवार दंपति पर आरोप लगाया कि उन्होंने ही आरुषि-हेमराज की हत्या की और फिर घर से सबूत मिटाए।

यह भी पढ़ें- रेप मामला : पत्रकार तरुण तेजपाल के खिलाफ आरोप तय

सीबीआई की इस दलील के खिलाफ तलवार दंपति ने कहा कि कत्ल की रात हेमराज कमरे में था ही नहीं, क्योंकि आरुषि के बिस्तर और तकिए से हेमराज के खून का निशान नहीं मिला। तलवार दंपति के तर्क दिया कि मौके से कुल 24 फिंगर प्रिंट उठाए गए थे। लेकिन उसमें से कोई भी फिंगर प्रिंट हेमराज का नहीं था।

2.सीबीआई ने दूसरा अहम दावा किया कि आरुषि के कमरे से आवाज आने पर राजेश तलवार उठे और हेमराज के कमरे में गए। वहां हेमराज के नहीं होने पर वो आरुषि के कमरे में गए और दोनों को आपत्तिजनक हालत में देख कर गॉल्फ स्टिक से उस पर वार किया। पहला वार हेमराज के सिर के पिछले हिस्से पर लगा, दूसरे हमले के दौरान हेमराज का सिर दूर हो गया और गॉल्फ स्टिक आरुषि के सिर पर लगी।

सीबीआई के इस दावे पर तलवार दंपति ने कहा कि अगर आरुषि के कमरे से आवाज आती तो वो सबसे पहले आरुषि के कमरे में जाते ना कि हेमराज के कमरे में जो कि 40 से 50 फीट की दूरी पर था। सीबीआई के गॉल्फ स्टिक के दावे को खारिज करते हुए राजेश और नूपुर ने दावा किया कि आरुषि-हेमराज के सिर पर लगी चोट गॉल्फ स्टिक से नहीं बल्कि गिरने की वजह से लगी है। इसके लिए बचाव पक्ष ने कोर्ट में बाकायदा गॉल्फ स्टिक को कोर्ट में मंगवाकर हेलमेट से उस पर वार करके ये दिखाने की भी कोशिश की कि इस तरीके का घाव स्टिक के आगे के हिस्से से नहीं लग सकता है।

3. सीबीआई की तीसरी दलील थी कि गॉल्फ स्टिक के हमले से हेमराज की मौत होने के बाद राजेश और नूपुर तलवार उसकी लाश को चादर में लपेटकर घसीटते हुए छत पर ले गए। सीबीआई की इस दलील की काट के लिए तलवार दंपति ने कोर्ट में एक चादर मंगवाई और उसमें एक शख्स को लपेटकर घसीटा गया। इस कार्रवाई के बाद बचाव पक्ष ने कहा कि अगर हेमराज की लाश को चादर में रखकर घसीटा जाता तो उसके शरीर पर छिलने का निशान लगता, लेकिन हेमराज के शरीर पर ऐसा कोई जख्म नहीं था।

जितनी मजबूत सीबीआई की दलीलें हैं उतने ही मजबूत तलवार दंपति के तर्क। कोर्ट में कई बार पूरे क्राइम सीन को ही रीक्रिएट कर राजेश और नूपुर तलवार ने बड़े ही वैज्ञानिक तरीके से अपना पक्ष रखा है। वहीं सीबीआई की दलीलें फोरेंसिक टेस्ट और हालात के मुताबिक बने सबूतों पर थी।

4. सीबीआई की चौथी दलील थी कि आरुषि और हेमराज पर पहले गॉल्फ स्टिक से हमला किया गया और उसके बाद सर्जिकल ब्लेड से दोनों का गला रेत दिया गया। तलवार दंपति ने सीबीआई के इस दावों को भी खारिज किया और कहा कि जिस डॉक्टर के बयान पर सीबीआई सर्जिकल ब्लेड की बात कर रही है उस डॉक्टर ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट या एम्स की कमेटी के सामने ऐसी बात नहीं कही थी। तलवार दंपति ने ये भी कहा कि इस तरह का सर्जिकल ब्लेड किसी डेंटिस्ट के पास नहीं होता।

5. सीबीआई की पांचवी दलील थी कि हेमराज की लाश को छत पर रखने के बाद राजेश तलवार वापस फ्लैट में आए और सबूत मिटाने के दौरान उन्होंने लगातार शराब पी। सीबीआई ने ये भी दावा किया कि शराब की बोतल पर आरुषि और हेमराज का खून भी मिला था। सीबीआई की इस दलील पर तलवार दंपति ने कहा कि अगर राजेश तलवार ने शराब पी होती तो बोतल से राजेश तलवार के फिंगरप्रिंट मिलते। बचाव पक्ष ने कहा कि शराब की बोतल से 5 लोगों के फिंगर प्रिंट मिले, लेकिन कोई फिंगरप्रिंट राजेश तलवार का नहीं था।

यह भी पढ़ें- डिजिटल इंडिया के तहत यूपी पुलिस एफआईआर कॉपी अपलोड करने में पीछे

सत्यमेव जयते

आरुषि-हेमराज और तलवार दंपत्ति के सपोर्ट में दो वर्षोँ से सोशल मीडिया पर जस्टिस फॉर आरुषि के नाम से अभियान चला रही महिला स्वति वाजपेयी ने होईकोर्ट का फैसला सुनने के बाद बोला कि, देर से ही सही लेकिन सत्यमेव जयते। उन्होंने कहा कि, इससे पहले कभी तलवार दंपत्ति से मैं नहीं मिली हूं, लेकिन अब उनके रिहा होने के बाद गाजियाबाद के डासना जेल जरुर जाऊंगी और तलवार दंपत्ति के साथ मिलकर आरुषि के सही हत्यारों के जेल भेजने के लिए काम करुंगी।