लोक गायिका मालिनी अवस्थी के मन की बात.. जोर-शोर से हो गांव की बातें...

लोक गायिका मालिनी अवस्थी के मन की बात.. जोर-शोर से हो गांव की बातें...लोकगायिका मालिनी अवस्थी ने गाँव कनेक्शन के पांच साल पूरे होने पर दी बधाई

लोकगायिका मालिनी अवस्थी ने लोक गीतों को देश-विदेशों तक पहुंचाया है। उनका भी गाँव से खास रिश्ता है गाँव कनेक्शन की पांचवीं सालगिरह पर उन्होंने गाँव कनेक्शन को बधाई दी।

“देश की तरक्की की बातें करना, देश की तरक्की के सपने देखना सबकुछ बेईमानी होगी अगर हम गाँव पहुंच पाए। यदि गाँव की तरक्की नहीं हुई तो फिर कैसी तरक्की और आज के युग में दिल्ली, मुम्बई, चेन्नई जैसे बड़े शहरों में होने वाली घटनाएं ब्रेकिंग न्यूज बन जाती हैं वहां कौन बात करेगा गाँव में रहने वाले बुर्जुगों की, किसानों की। कौन चर्चा करेगा बेरोजगारी के सपनों की कौन बात करेगा उन बहनों की जिनके सपने इसलिए दम तोड़ देते हैं गाँव में शिक्षा का प्रबंध नहीं है, लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने गाँव कनेक्शन के पांच साल पूरे होने पर बधाई देते हुए कहा।’’

मैं बहुत बहुत बधाई देती हूं नीलेश मिसरा ने शिक्षा का सही उपयोग किया है, शिक्षा का यही उद्देश्य है समाज से जो जोड़ सके वही शिक्षा है और ऐसे में वो गाँव कनेक्शन अखबार लेकर आए ,उनका जो पूरा प्रयास है गाँव मुख्यधारा में लाने और संवाद कायम करने की कोशिश कितनी खूबसूरत सोच है। पांच बरस का ये सफर बड़ा कामयाब रहा है दिली मुबारकबाद देती हूं नीलेश मिसरा आपको और आपकी पूरी टीम को। मैं साथ ही ये दुआ करती हूं और कामना करती हूं देश में रहने वाले करोड़ों युवा लड़के लड़कियों को भी इस तरह की सोच रखनी चाहिए, इस तरह का प्रयास करना चाहिए।

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लोकगायिका गिरिजादेवी से ली थी शिक्षा।

भारतीय युवाओं को गाँव से जुड़ना चाहिए

बात करिए अपने गाँव की दिल्ली तो छोड़िए अपने प्रदेश की राजधानी से ही उन्हें जोड़ दीजिए। उनकी बात करिए जिनकी कोई नहीं करता। बात करिए सरकारी योजना के तहत जो वैक्सीन आई थी वो एक्सपायरी तो नहीं है बात कीजिए जो किसान को सस्ते दाम पर बीज उपलब्ध कराने के लिए कॉपरेटिव खुले हैं वहां बिना बिचौलिए के काम होता है। बात करिए उन सड़क व खड़ंज्जों की जिनके वायदे बरसों से ऐसे ही हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मालिनी अवस्थी

बात करिए अपने गाँव की दिल्ली तो छोड़िए अपने प्रदेश की राजधानी से ही उन्हें जोड़ दीजिए। उनकी बात करिए जिनकी कोई नहीं करता। बात करिए सरकारी योजना के तहत जो वैक्सीन आई थी वो एक्सपायरी तो नहीं है बात कीजिए जो किसान को सस्ते दाम पर बीज उपलब्ध कराने के लिए कॉपरेटिव खुले हैं वहां बिना बिचौलिए के काम होता है। बात करिए उन सड़क व खड़ंज्जों की जिनके वायदे बरसों से ऐसे ही हैं।

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जो जड़ से नहीं जुड़ता, जड़ भी उसे छोड़ देती है

यकीन कीजिए जो अपने जड़ से नहीं जुड़ा जड़ भी उसे छोड़ देती है। बहुत बहुत आर्शीवाद और मंगलकामना करती हूं इस पूरी मुहिम को। साथ ही साथ नीलेश मिसरा जी से कहना डिजिटली व ऑर्गेनिक जिस तरह से वो प्रमोट कर रहे हैं इस मुहिम को । कई सारे लोगों की जुबान पर चढ़ गया है। लोगों को कहीं से जोड़ते हैं, मैंने कई सारे लोगों से बात है जो ये कहते हैं कि ये बहुत ब्रिलियंट आईडिया है बहुत अच्छा स्टार्टअप है। मैं ये सोचती हूं 2017 में इसे ब्रियलिंट आईडिया कहने वाले ये सोच पाते कि ये और कुछ नहीं अपने पुरखों की थापी से जुड़ने का आत्मसुख है। तो आइए हम लोग भी सामने आएं और जोड़ें व खुद भी जुड़ें गाँव से गाँव कनेक्शन से।

अवध की लोकगीतों को दिया नया मुकाम

मालिनी अवस्थी का गाँव कनेक्शन

मालिनी अवस्थी मशहूर लोकगायिका हैं जिन्हें पहचान की जरूरत नहीं है। मालिनी अवस्थी हिन्दी भाषा की बोलियों जैसे अवधी, बुंदेली भाषा और भोजपुरी में गाती है। भारत सरकार ने उन्हें नागरिक सम्मान पद्म श्री से 2016 में सम्मानित भी किया था।

पद्मश्री सम्मान से भी नवाजा जा चुका है।

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इनका जुड़ाव भी गाँव से है इसलिए वो गाँव के परंपराओं व रीतियों को जानती हैं। इनका जन्म उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में हुआ था। इन्होंने संगीत की शिक्षा भातखंडे संगीत संस्थान लखनऊ से ली। वह बनारस की पौराणिक शास्त्रीय गायिका, गिरिजा देवी जी की शिष्या थीं। इसके अलावा इन्हें सहारा अवध सम्मान, यश भारती सम्मान, नारी गौरव व कालिदास सम्मान से नवाजा जा चुका है।

अपने ससुराल में मालिनी अवस्थी

लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने दिया स्वच्छ भारत का संदेश

लोकगायिका होने के साथ-साथ मालिनी अवस्थी एक जागरूक नागरिक हैं जो स्वच्छ भारत के सपने को साकार करने में सरकार की मदद भी करना चाहती हैं। हाल ही में मालिनी अवस्थी ने लखनऊ में सड़कों पर झाडू लगाकर लोगों को स्वच्छता बनाए रखने का संदेश दिया।

उन्होनें कहा था कि लोक कलाकारों द्वारा स्वच्छता कार्य में भागीदारी की वजह आम जनता में स्वच्छता कार्य के महत्वपूर्ण संदेश को लोगों के दिलों में उतारना है। आम लोग लोक कलाकारों की बातों को बड़े सम्मान से दिली तौर पर अपनाते हैं। इस मौके पर उन्होंने साफ सफाई से जुड़े लोकगीत ‘छेड़ो छेड़ो रे तराना सफाई का रे भैया, अपना देश के निखारो रे संवारो से भैया’ और ‘गलिन गलिन में मैं बुहार आई रे, मैं तो अवध नगरिया संवार आई रे’ भी सुनाए।

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