आज के समय में बहुत कम ही लोग हैं जो दुनिया को कुछ देने की चाह रखते हैं : वरुण ग्रोवर

आज के समय में बहुत कम ही लोग हैं जो दुनिया को कुछ देने की चाह रखते हैं : वरुण ग्रोवरवरुण ग्रोवर ने गाँव कनेक्शन के पांच साल पूूरे होने पर दी बधाई।

''आज के समय में बहुत कम ही लोग हैं जो दुनिया को कुछ देने की चाह रखते हैं। बहुत कम हैं उनमें से वो जो इस चाह को व्यक्त कर पाते हैं और उनमें से वो बहुत ही कम हैं जो ये सच में कर पाते हैं। ऐसे ही नीलेश मिसरा और उनके साथियों ने मिलकर आज से पांच साल पहले गाँव कनेक्शन शुरू किया था,'' गाँव कनेक्शन के पांच वर्ष पूरे होने पर बधाई देते हुए लेखक और कॉमेडियन वरुण ग्रोवर ने कहा।

वरुण ग्रोवर एक भारतीय हास्य अभिनेता, पटकथा लेखक और गीतकार हैं। 2015 में फिल्म ‘दम लगा के हईशा’ के गाने ‘मोह मोह के धागे’ के लिए उन्हें बेस्ट लिरिक्स के नेशनल अवार्ड से नवाज़ा गया।

जब लोग वरुण ग्रोवर को नेशनल अवॉर्ड के लिए शुभकामनाए दे रहे थे, तब उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा था कि शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद। मैने और @ghaywan (नीरज घयवान) ने राष्ट्रीय पुरस्कार में मिली राशि को महाराष्ट्र के किसानों की राहत के लिए दान करने का निर्णय लिया है।

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उस समय महाराष्ट्र भीषण सूखे की चपेट में था। सूखे और कर्ज के बोझ से परेशान किसान आत्महत्या कर रहे थे, जिसको देखते हुए वरुग ग्रोवर ने पुरस्कार में प्राप्त राशि किसानों को दान करने का फैसला लिया था।

उन्होंने अपने अगले ट्वीट में लिखा, ‘‘मैं जानता हूं ये समंदर में एख बूंद के समान है, हालात के अनुसार अधिक भागीदारी की अवश्यकता है (और सिर्फ नकदी नहीं)। पर इस समय ये करना ही होगा।’’

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वरुण ग्रोवर ने कहा, ''गाँव कनेक्शन को पांच साल हो रहे हैं। इतनी बढ़िया पहल, एक नया पर्सपेक्टिव दुनिया को दिखने का समझने का और मैं इसको नया कह रहा हूं जबकि ये बहुत जरूरी पर्सपेक्टिव है और ये हमेशा से रहा था, लेकिन बीच में खो गया। उसको वापस लाए हैं नीलेश मिसरा और उनके साथी।''

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वरुण लेखक के तौर पर पहले ही बहुत काम कर चुके थे, लेकिन 'तार बिजली से पतले हमारे पिया...', 'जिया तू बिहार के लाला', 'ओह वुमनिया' जैसे गाने लिख वे लाइमलाइट में आये।

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ये मोह-मोह के धागे

तार बिजली से पतले हमारे पिया...

उन्होंने कहा, ''गाँव कनेक्शन मेरी बहुत ही पसंदीदा वेबसाइट है, बहुत ही पसंदीदा ट्वीटर हैंडल है। हमेशा कुछ नया पढ़ने को मिलता है, नया समझने को मिलता है। इन सबके बीच में ये उम्मीद है कि ये चलता रहे और बड़ा हो, हिंदुस्तान की सब भाषाओं में आए और जगह-जगह के लोग इसमें जुड़ें। बहुत सारी शुभकामनाएं।''

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वरुण ग्रोवर, सुंदरनगर, हिमाचल प्रदेश में पैदा हुए थे। उनकी माँ एक स्कूल टीचर थी और पिता आर्मी इंजिनियर। उन्होंने अपना शुरुआती जीवन सुंदरनगर और देहरादून, उत्तराखंड में बिताया, जिसके बाद वे लखनऊ, उत्तर प्रदेश आ गए। उन्होंने 2003 में IIT, BHU से सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक स्तर की पढ़ाई पूरी की। पुणे में सॉफ्टवेर सलाहकार के तौर पर कुछ समय काम करने के बाद वे 2004 में मुंबई चले गए। 2005 में वे टीवी श्रंखला द ग्रेट इंडियन कॉमेडी शो के छे स्टाफ लेखक में से एक थे। बाद में वे स्टैंड-अप कॉमेडी और हिंदी फिल्म उद्योग में संगीत लेखक का काम करने लगे।

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