कृषि बिलों के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले होगा दिल्ली कूच, पंजाब के किसान ट्रैक्टर ट्राली से पहुंचेंगे दिल्ली

कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठन जहां आरपार की लड़ाई का ऐलान कर 26 नवंबर को दिल्ली पहुंच रहे हैं, दिल्ली पुलिस से अभी तक प्रदर्शन की इजाजत नहीं मिली है, लेकिन किसान दिल्ली कूच को तैयार हैं..

कृषि बिलों के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले होगा दिल्ली कूच, पंजाब के किसान ट्रैक्टर ट्राली से पहुंचेंगे दिल्ली19 नवंबर को चंडीगढ़ में संयुक्त किसान मोर्चा के कोर संगठन की बैठक में चलो दिल्ली की रुपरेखा तय करते किसान प्रतिनिधि।

तीनों नए कृषि कानूनों के विरोध में देश के कई राज्यों के किसान संगठनों ने मिलकर संयुक्त किसान मोर्चे का गठन किया है। इस मोर्चे की अगुवाई में ही किसान 26 नवंबर को दिल्ली कूच करेंगे। संविधान दिवस के मौके पर किसान संगठनों ने शांतिपूर्ण मार्च का ऐलान किया है।

चंढ़ीगढ़ में बृहस्पतिवार को तीन कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ाई के लिए बनाए गए संयुक्त किसान मोर्चा की कोर कमेटी की दूसरी बैठक हुई। जिसमें कई राज्यों के किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस बैठक में तय किया गया है केंद्र सरकार द्वारा कृषि सुधार के नाम पर लादे गए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है ऐसे में सबको मिलकर लड़ना होगा और आरपार के लिए चलो दिल्ली के आह्वान पर राष्ट्रीय राजधानी में अनिश्चितकालीन संघर्ष शुरू होगा।

संयुक्त किसान मोर्चा की पहली बैठक 7 नवंबर को दिल्ली के गुरुद्वारा रकाबगंज में हुई थी। मोर्चा के संचालन और देशभर के किसान संगठनों से तालमेल के लिए सात सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति में सरदार बलबीर सिंह राजेवाल, शिवकुमार कक्काजी, सरदार जगजीत सिंह दल्लेवाल, सरदार गुरनाम सिंह चढूनी, सरदार वीएम सिंह, योगेंद्र यादव और राजू शेट्टी (उनकी अनुपस्थिति में हन्नान मौल्ला) शामिल हैं।

संयुक्त किसान मोर्चा की कोर कमेटी की बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया है कि 26 नवंबर को दिल्ली के पड़ोसी राज्यों के किसान पांच मार्गों से राजधानी पहुंचेंगे। अमृतसर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग (कुंडली बॉर्डर), हिसार-दिल्ली राजमार्ग (बहादुरगढ़), जयपुर-दिल्ली राजमार्ग (धारूहेड़ा), बरेली-दिल्ली राजमार्ग (हापुड़), आगरा-दिल्ली राजमार्ग (बल्लभगढ़) पर एकत्रित होकर किसान दिल्ली के लिए मार्च करेंगे।

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राष्ट्रीय किसान महासंघ के प्रवक्ता अभिमन्यु कोहाड़ ने गांव कनेक्शन को फोन पर बताया, " पंजाब के किसान ट्रैक्टर ट्राली से पहुंचेगे बाकि आसपास राज्यों (हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड) के किसान सड़क और रेल मार्ग से दिल्ली पहुंचेगे। ये प्रदर्शन शांति पूर्वक होगा।"

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार कोरोना के दौरान 6 जून को विधेयक के रुप में कृषि सुधार के लिए तीन नए बिल लाई थी। इनमें खुला बाजार मंडी और समझौता खेती और खाद्य वस्तुओं के भंडारण आदि से जुड़े कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) बिल ( Farmers' Produce Trade & Commerce (Promotion & Facilitation) Bill 2020, कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक, 2020 Farmers (Empowerment & Protection) Agreement on Price Assurance & Farm Services Bill 2020 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 2020 (The Essential Commodities (Amendment) Bill) 2020 शामिल थे, जिन्हें भारी विरोध के बीच संसद में पास कराया गया और 27 सितंबर को राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद देशभर में कानून बनकर लागू हैं।

पंजाब और हरियाणा समेत कई राज्यों के किसान संगठन और किसानों हितों के पैरोंकार लगातार इसका विरोध कर रहे हैं। पंजाब में एक अक्टूबर से ट्रेन सेवाएं बंद हैं। 13 नवंबर को पंजाब की 29 किसान यूनियन के संगठन दिल्ली में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और पीयूष गोयल से मिले थे लेकिन कोई बात नहीं बन पाई।

किसान संगठन तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लेकर कानून बनाने और प्रस्ताविक बिजली बिल को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। केंद्र सरकार साफ कर चुकी है कि नए कृषि कानून किसानों की भलाई और कृषि में अमूलचूल लाने वाले हैं इसलिए इन्हें वापस नहीं लिया जाएगा। वहीं दिल्ली कूच का ऐलान कर चुके किसान संगठन दिल्ली में निर्याणक लड़ाई के लिए अनिश्चित कालीन प्रदर्शन के लिए तैयार हैं।

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संयुक्त किसान मोर्चा के तहत दिल्ली कूच के प्रमुख आयोजकों में राष्ट्रीय किसान महासंघ, भारतीय किसान यूनियन (चढूनी), भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) और अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति, स्वराज अभियान, शेतकरी संघटन समेत देश के कई राज्यों से किसान संगठन शामिल हैं। अभिमन्यु कोहाड़ के मुताबिक दिल्ली कूच में पंजाब की 30 कृषि संगठन के अलावा पूरे देश से करीब 500 संगठन शामिल होंगे।

अभिमन्यु कोहाड़ ने गांव कनेक्शन को बताया, "कोरोना और आवागमन को देखते हुए किसान संगठनों से सामूहिक रुप से निर्णय लिया है कि दिल्ली के करीबी राज्यों के किसान दिल्ली आएंगे जबकि दक्षिण के राज्य स्थानीय स्तर पर प्रदर्शन करेंगे। जैसे कर्नाटक में गन्ना किसान एसोसिएशन 27 नवंबर को जेलभरो आंदोलन करेगी।'

बृहस्पतिवार को हुई बैठक में पंजाब में केंद्र सरकार द्वारा आर्थिक नाकेबंदी खोलने, मालगाड़ियों को तुरंत शुरु करने और किसान आंदोलन के दौरान देश में जहां भी किसानों पर मुकदमें दर्ज किए गए हैं उन्हें वापस लिया जाए।

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