किसान मुक्ति सम्मेलन : एक बार पूरे देश के किसानों का कर्ज़ा माफ किया जाए 

किसान मुक्ति सम्मेलन :  एक बार पूरे देश के किसानों का कर्ज़ा माफ किया जाए किसान मुक्ति सम्मेलन में किसानों को संबोधित करते डॉ. सुनीलम ।

केंद्रीय बजट और नरेंद्र मोदी सरकार को किसान विरोधी बताते हुए अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने जगह-जगह बजट की प्रतियां जलाने का ऐलान किया है। उपज का लाभकारी मूल्य और देशभर के किसानों की संपूर्ण कर्ज़माफी को लकर लखनऊ में 192 किसान संगठनों ने किसान मुक्ति सम्मेलन में हुंकार भरी। समिति ने ऐलान किया कि सिर्फ लखनऊ में देशभर में ऐसे 500 सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है।

दिल्ली में किसान मुक्ति संसद के बाद यूपी की राजधानी लखनऊ में हुए इस सम्मेलन में किसान नेताओं ने पंजाब की तरह उत्तर प्रदेश में भी खेती के लिए पांच हार्स पावर बिजली किसानों को मुफ्त दिए जाने और तत्काल सभी किसानों का पूरा कर्ज़ माफ करने की मांग की है।

किसान मुक्ति यात्रा के राष्ट्रीय संयोजक, किसान नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम ने केंद्र सरकार और पीएम पर किसानों से धोखेबाजी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “किसान की आमदनी बढ़ना तो दूर सरकार की नीतियों के चलते किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल बेचने को मजबूर होते हैं। केवल एक सीजन में 9 फसलों के 32 हजार करोड़ की लूट किसानों से होती है। कैसे होती है, इसमें हमने से सिर्फ उन फसलों का जोड़ा था, जो एमएसमपी के नीचे फसलों की खरीद होती है। इसमें सी2 जोड़ा नहीं गया था।”

उन्होंने कहा , “पिछले साल दिल्ली में जो 3 लाख किसानों ने हुंकार भरी थी, उसका परिणाम था कि केंद्र सरकार को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लेकर बोलना पड़ा, लेकिन जिन फसलों की एमएसपी लागत से 50 फीसदी ज्यादा देने की बात हुई है, उनके लिए बजट का आवंटन नहीं हुआ, अगर ऐसा होता तो कम से 34 करोड़ रुपए एक सीजन के लिए देने चाहिए थे।’’ (देखिए वीडियो)

मंदसौर कांड के बाद देशभर के किसान संगठन एक मंचपर आए थे, नवंबर 2017 में हुई विशाल किसान मुक्ति संसद के बाद अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति की ओर से हर राज्य में किसान मुक्ति सम्मेलन किया जा रहा है। इस सम्मेलन में मुख्यरूप से तत्काल कर्ज़माफी और किसान की लागत का डेढ़ गुना मूल्य देने पर ज़ोर दिया गया है।

'' मोदी सरकार ने फसल बीमा योजना में ने किसानों से पहले 24 हज़ार करोड़ रुपए का प्रीमियम लिया और फिर उसके बदले में उन्हें महज़ आठ हज़ार करोड़ रुपए ही वापस किए। बजट में भी किसानों के लिए कुछ भी खास नहीं दिया।'' सरकार के बजट को किसानों से की गई ठगी बताते हुए डॉ. सुनीलम ने आगे कहा।

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सम्मेलन में शामिल हुए देशभर के बड़े किसान नेता।

किसान मुक्ति सम्मेलन किसान नेता सरदार बीएम सिंह और किसानों की हक के लिए शुरू हुए नर्मदा आंदोलन में अहम भूमिका निभा चुकी जानीमानी समाजसेविका मेधा पाटकर भी शामिल हुई। महाराष्ट्र के बड़े किसान नेता और सांसद राजू शेट्टी, किसान नेता अतुल अंजान समेत कई राज्यों के किसान नेता और संगठन शामिल हुए।

मेधा पाटेकर ने कई राज्यों से आए किसानों को संबोधित करते हुए कहा,'' सरकार का बजट 2018, सरकार की नीतियां किसान की विरोधी हैं। इसमें किसान और मजदूरों की बहुत योजनाओं का नाम लिया गया, लेकिन हर योजना में पीएम का नाम है, उन्होंने कहा गौर करने वाली बात ये है कि कुल बजट आवंटन में कृषि मंत्रालय को मात्र 2.5 फीसदी ही दिया गया है।’

#FBLive मेधा पाटकर, किसान मुक्ति सम्मेलन, लखनऊ

Posted by Gaon Connection on Tuesday, February 20, 2018

मध्य प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र तक किसान आत्महत्या कर रहे हैं। मध्य प्रदेश में किसानों से ज्यादा मजदूरों ने आत्महत्याएं की हैं, लेकिन जिस देश में किसान की आत्यहत्या पर गौर न हो वहां मजदूरों की कौन सुनेगा। मेधा पाटकर ने यूपी में हो रही इनवेस्टर्स मीट को लेकर खर्च किए जा रहे पैसों पर एतराज जताते हुए कहा इतने अनापशनाप पैसे खर्च हो रहे हैं, लेकिन ये सरकार किसान का पूरा कर्जा माफ नहीं कर रही है। ये मोदी और योगी का धोखा है।’ पाटकर ने कहा कि एनडीए सिर्फ 30 फीसदी वोट लेकर सत्ता में है लेकिन 70 फीसदी लोग उनके साथ नहीं है। ऐसे में मोदी किस आधार पर 2022 तक आमदनी दोगुनी होने की बात कर रही हैं उन्होंने सामने बैठी जनता से पूछा क्या आप ने मोदी सरकार को 2022 तक के लिए वोट दिया था।

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और लखनऊ में सम्मेलन के आयोजक चौधरी ऋषि पाल अम्बावता ने कहा , '' उत्तर प्रदेश में अभी तक किसानों को पेंशन देने की कोई भी सरकारी पहल नहीं की गई है। यूपी सरकार को दिल्ली और हरियाणा की तरह ही प्रदेश के किसानों को प्रतिमाह 2,500 रुपए किसान वृधा पेंशन देनी चाहिए और किसान आयोग का गठन करना चाहिए।''

किसान मुक्ति सम्मेलन में शामिल हुए कई राज्यों से आए सैकड़ों किसान।

सम्मेलन में भारतीय किसान यूनियन ने यह मांग रखी कि पूरे देश में किसानों का कर्ज माफ किया जाए। अगर सरकार किसानों को तत्काल रूप से कर्ज़ मुक्त न किया गया तो, यूनियन आने समय में अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेगा।

किसान मुक्ति सम्मेलन में शामिल हुए भारतीय किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार बीएम सिंह ने कहा कि सरकार ने 15 फरवरी 2015 में सुप्रीम कोर्ट में दिए गए अपने हलफनामे में यह कहा थी कि हम किसानों को उनकी लागत का डेढ़ गुना का दाम नहीं दे सकते हैं। आज वही सरकार अपने बजट में किसानों को उनके लागत मूल्य का डेढ़ गुना देने की बात कह रही है। पर उसमें भी वो पूरा रेट देने को तैयार नहीं है। हम चाहते हैं कि सरकार किसानों को स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के हिसाब से फसल का सही मूल्य दे।

सम्मेलन में शामिल हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय सचिव और स्वामीनाथन आयोग के सदस्य रह चुके अतुल कुमार अंजान ने किसानों ने कहा, “ आज 73 फीसदी लोग गाँवों में रहते हैं, जिनमें से अधिकतर लोग किसान हैं पर हम अभी संगठित हो पाए हैं। देश के किसानों को संगठित होना पड़ेगा। तभी किसान अपनी हक की लड़ाई लड़ पाएंगे।’’

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