पद्मावत हिंसा : तलवार और झंडा लेकर निकले उपद्रवियों के पीछे आखिर दोषी कौन ?

पद्मावत हिंसा : तलवार और झंडा लेकर निकले उपद्रवियों के पीछे आखिर दोषी कौन ?फोटो साभार: इंटरनेट

फिल्म ‘पद्मावत’ पर करणी सेना ने देश के संविधान और शांति व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल उठा दिए हैं। सड़कों पर गाड़ियां जलाई गईं, स्कूल बस में बच्चों पर हमले किए गए, सरकारी इमारतों पर चढ़कर संगठन का झंडा फहराया गया, फिल्म के पोस्टर चौराहों पर जलाए गए, सड़कों पर गुंडागर्दी की गई… और एक फिल्म के लिए देश की शांति व्यवस्था को दांव पर लगा दिया गया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि देश में उत्पात मचा रहे इन उपद्रवियों के पीछे आखिर दोषी कौन है? आखिर संविधान के सामने धर्म, जाति कितनी बड़ी चुनौती बन चुकी है?

फिल्म पर क्यों मचा है बवाल

फिल्म ‘पद्मावत’ पर विरोध के सुर रानी पद्मावती और सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी के प्रेम प्रसंगों को लेकर सामने आए। राजस्थान के राजपूतों की आन-बान-शान के लिए 10 साल पहले बने संगठन करणी सेना ने फिल्म में दोनों के बीच प्रेम प्रसंगों के सीन फिल्माए जाने पर विरोध जताया, और जयपुर में फिल्म की शूटिंग के दौरान तोड़फोड़ करने के साथ-साथ निर्माता संजय लीला भंसाली के साथ बदसलूकी भी की गई। सोशल मीडिया से लेकर देश की शीर्ष न्यायालय में मामला जाने के बावजूद विरोध बढ़ता गया और करणी सेना के लोगों ने उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान में सड़कों पर जमकर उत्पात मचाया।

संगठन के कैसे-कैसे बयान

हमने लोगों से इनाम के तौर पर करोड़ों रुपए की धनराशि इकट्ठा की है और जो भी दीपिका पादुकोण की नाक काट कर लाएगा, उसे यह धनराशि इनाम के तौर पर दिया जाएगा।
गजेंद्र सिंह राजावत, अध्यक्ष, क्षत्रिय महासभा

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हम कहते कम हैं करते ज्यादा हैं, हमारा यह संकल्प है कि देशभर में फिल्म लगने नहीं देंगे।
लोकेंद्र सिंह कालवी, अध्यक्ष, राजपूत करणी सेना

फिल्म पद्मावती यदि रिलीज होती है तो दीपिका पादुकोण और संजय लीला भंसाली की गर्दन काटने वाले को पांच करोड़ का नगद ईनाम दिया जाएगा।
अभिषेक सोम, अध्यक्ष, अखिल भारतीय युवा क्षत्रिय

यदि फिल्म रिलीज हुई तो दीपिका पादुकोण और संजय लीला भंसाली को देश छोड़ना होगा क्योंकि यदि वह देश में रहे तो कोई भी ताकत, कितनी भी फोर्स लगा लें या मोदी खुद भी उनका बचाव करें, नहीं बचा पाएंगे।
अभिषेक सोम, अध्यक्ष, भारतीय युवा क्षत्रिय महासभा

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मीडिया के खिलाफ भी उठे सवाल

इस मामले में मीडिया की भूमिका और उसकी समाज के प्रति संवेदनशीलता पर भी सवाल उठाए गए। सोशल मीडिया पर लोगों ने मीडिया के खिलाफ भी गुस्सा जाहिर किया और सवाल किए कि आखिर क्यों धर्म और जाति के नाम पर ऐसे भड़काऊ भाषण देने वाले संगठनों को मीडिया ने टीवी चैनलों में प्राइम टाइम में जगह दी और टीआरपी के लिए ऐसे मुद्दों को बड़ा बनाकर दिखाया गया।

धर्म और जाति के नाम पर उत्पात मचाने वाले ऐसे संगठनों के लोगों पर सरकार को सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि ऐसे संगठन समाज के लिए कभी धर्म और जाति के नाम पर सवाल न खड़े करें। समाज में संविधान का पालन हो, इसके लिए सरकार को हर जरूरी कदम उठाना चाहिए ताकि हम संविधान आधारित समाज बन पाए।
सोहन राम यादव, समाजशास्त्री, वाराणसी हिन्दू विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश

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कैसी है राज्य सरकारों की कानून व्यवस्था?

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड की ओर से फिल्म को लेकर आपत्तियां दूर किए जाने के बाद फिल्म पद्मावत को 25 जनवरी, 2017 में देशभर में रिलीज करने और राज्य सरकारों को विरोध प्रदर्शनों को लेकर कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने का आदेश दिया। मगर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और हरियाणा की राज्य सरकारों ने संविधान की सर्वोच्चता के सम्मान को दांव पर रखकर फिल्म को रिलीज नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट ने इन राज्य सरकारों के खिलाफ आदेश की अवमानना किए जाने पर मामला दर्ज करने के आदेश दिए। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि क्या राज्य सरकारें कानून व्यवस्था को बनाए रखने में नाकाम साबित हुई हैं। आखिर इन पर कानून व्यवस्था का अंकुश कमजोर क्यों?

हमारे देश की सबसे बड़ी विशेषता धर्मनिरेपक्षता ही है, मैं भी एक राजपूत हूं, मगर महिलाओं और बच्चों पर हमला करना सही नहीं है, सरकार को ऐसे लोगों के खिलाफ कठोरता से पेश आना चाहिए।
प्रीतिश सिंह, नई दिल्ली

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सड़कों पर उतरे उपद्रवियों को किसकी शह?

फिल्म के विरोध में सड़कों पर उतरे करणी सेना संगठन के लोगों को आखिर किसकी शह है? फिल्म को लेकर राजनीतिक साजिश की बू आने का खुलासा एक प्रतिष्ठित अंग्रेजी चैनल रिपब्लिक टीवी के स्टिंग ऑपरेशन में सामने आया, जिसके बाद करणी सेना के साथ राजनीतिक साजिश पर सवाल उठ रहे हैं। स्टिंग ऑपरेशन महाराष्ट्र के भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधायक राज पुरोहित पर किया गया। इसमें राज पुरोहित ने स्वीकार किया कि करणी सेना को हमने ही खुला छोड़ा है ताकि चुनाव में राजस्थान जीत सकें। सरकार उन्हें नुकसान पहुंचाने के मूड में नहीं है।“

संविधान के आगे धर्म, जाति बड़ी चुनौती

यह पहली बार नहीं है, जब किसी संगठन के लोगों ने सड़कों पर उतरकर उत्पात मचाया हो, इससे पहले भी धर्म और जाति के नाम पर कई संगठन देश में हंगामा मचाते आए हैं और ऐसे ही छोटे-बड़े संगठन कानून हाथ में लेकर संविधान को चुनौती देते हैं। करणी सेना भी ऐसे ही संगठनों में एक बार फिर सामने आई है, ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि देश में धर्म, जाति के नाम पर कानून व्यवस्था को तोड़ रहे ऐसे संगठन संविधान के आगे कितनी बड़ी चुनौती है और कब तक ऐसे संगठन सड़कों पर उतरकर हिंसा फैलाते रहेंगे।

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