'सेव इंडियन फार्मर्स' की अनोखी पहल, किसानों को बना रहे आत्मनिर्भर, महिलाओं के लिए शुरू कर रहे कम्युनिटी किचन

सेव इंडियन फार्मर्स की अनोखी पहल, किसानों को बना रहे आत्मनिर्भर, महिलाओं के लिए शुरू कर रहे कम्युनिटी किचनसेव इंडियन फार्मर्स की पूरी टीम।

नई दिल्ली। देश में किसानों की स्थिति से सभी रूबरू हैं, लेकिन अगर आंकड़ों पर गौर करें तो ये और भी चौंकाने वाले हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) के एक आंकड़ें के अनुसार '2014-2015 के बीच देश में किसानों की आत्महत्याएं 42% बढ़ गई। सर्वे में पाया गया कि 2014 में किसानों की कुल 5,650 आत्महत्या दर्ज हुई, जबकि नवीनतम आंकड़ों में यह आंकड़ा बढ़कर 8007 तक पहुंच गया है। इसमें 3030 आत्महत्या के मामले के साथ महाराष्ट्र का ग्राफ देश में (37.8%) के साथ सर्वाधिक है। तेलंगाना 1,358 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर और कर्नाटक 1197 के साथ तीसरे नंबर पर है। महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक के छह राज्यों में कुल किसान आत्महत्याओं का 94.1% हिस्सा है।'

जी हां, इन आंकड़ों को पढ़कर आप भी आश्चर्य चकित हुए होंगे। लेकिन बहुत ही कम लोग होते हैं, जो ऐसे आंकड़े जानने के बाद किसानों की मदद की सोचते हैं। ऐसे ही एक खास शख्स हैं न्यू जर्सी के रहने वाले हेमंत जोशी। हेमंत आज अपनी संस्था 'सेव इंडियन फार्मर्स' के माध्यम से हजारों किसानों की जिंदगी बदल रहे हैं।

सेव इंडियन फार्मर्स।

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पेशे से डाटा साइंटिस्ट हेमंत को भी एक दिन ऐसा ही एक आंकड़ा जानने को मिला, लेकिन वे सिर्फ चौंके नहीं, बल्कि किसानों के लिए कुछ करने की ठान कर प्रयास भी शुरू किए। खुद हेमंत बताते हैं कि ये बात 2009 की है। जब उन्हें पता चला कि प्रत्येक 41 मिनट में एक किसान आत्महत्या करता है, तो वे इस बारे में सोचने के लिए मजबूर हो गए। आखिरकार उन्होंने ठान लिया कि उन्हें ऐसे किसानों की मदद करनी है।

एक बोर्ड पर उन्होंने इस आंकड़े को लिखा कि 'प्रत्येक 41 मिनट में एक किसान भारत में आत्महत्या करता है' और न्यू जर्सी के मेट्रो स्टेशन पर जाकर रोजाना 45 मिनट तक उस बोर्ड को हाथ में लेकर खड़े होने लगे। मकसद साफ था और भी भारतीयों को साथ जोड़ना जिससे अभियान की शुरूआत कर सके।

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कुछ महीनों बाद एक शख्स आगे आया और वह हेमंत का पुराना दोस्त निकला। उनके पूछने पर की यहां क्या कर रहे हो, हेमंत ने बताया कि वो भारतीय किसानों के जीवन में कुछ बदलाव लाना चाहते हैं। उनका मित्र उनके उद्देश्य से बहुत प्रभावित हुआ पर उसने कहा ऐसे बोर्ड हाथ में लेने से किसी का भला नहीं होगा, बल्कि कुछ ठोस कार्य करते हैं। फिर 1 से 2 और 2 से कई और इनके साथ जुड़े और कारवा बढ़ता गया। खास बात ये कि तब फेसबुक और वाट्सअप का प्रचलन ज़्यादा नहीं था।

'सेव इंडियन फार्मर्स' की स्थापना की

हेमंत और उनके साथियों ने 'सेव इंडियन फार्मर्स' की स्थापना की। यह एक ऐसी संस्था थी, जो अप्रवासी भारतीयों द्वारा बनायीं गयी पर पूर्ण रूप से भारतीय किसानों और ग्रामीणों के लिए समर्पित है। फण्ड रेजिंग इवेंट्स व अन्य कई फाउंडेशन से मिलने वाले रुपये कि मदद से इस संस्था ने भारत के किसानों व ग्रामीणों की सहायता शुरू की।

हमारी आदत हो गयी है किसानों की समस्याओं को न्यूज पेपर में पढ़ना और पेज पलट कर भूल जाना। इसे सोच को बदलने की जरूरत है। 60% ग्रामीण आबादी वाले इस देश में देश को किसानों की जरूरत है और उन्हें हमारी
हेमंत जोशी, संस्थापक, सेव इंडियन फार्मर्स

सेव इंडियन फार्मर्स।

'सेव इंडियन फार्मर्स' ने 2015 में 40 किसानों को आर्गेनिक फार्मिंग सिखाने से शुरूआत की और अब देश के विभिन्न हिस्सों में ग्रामीणों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए अग्रसर है। 'सेव इंडियन फार्मर्स' ने न सिर्फ कई किसानों की आत्महत्या की कोशिश को विफल किया, बल्कि उनके उत्थान के लिए हर संभव प्रयास किया।

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हेमंत बताते हैं कि 'सेव इंडियन फार्मर्स' का मुख्यतः 2 मिशन है। पहला भारतीय किसानों की वर्त्तमान परिस्थितियों के बारे में देश में और देश के बाहर जागरूकता फैलाना और दूसरा ग्रामीणों के जीवन में पूर्ण साकारात्मक बदलाव लाना। संस्था की भागीदारी ग्रामीणों से जुड़े हर क्षेत्र जैसे पानी, स्वास्थ्य, खेती, स्वच्छता, आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को आर्थिक मदद और उन्हें रोजगार और जीवन यापन के नए अवसर देना समेत अन्य क्षेत्रों में मदद करना है।

संस्था के संस्थापक हेमंत कहते है " हमारी आदत हो गयी है किसानों की समस्याओं को न्यूज पेपर में पढ़ना और पेज पलट कर भूल जाना। इसे सोच को 60% ग्रामीण आबादी वाले इस देश में देश को उनकी जरूरत है और उन्हें हमारी"

कई दूसरे देशों में रहने वाले एनआरआई भी करते हैं सेव  इंडियन फार्मर की मदद। बुंदेलखंड के एक गांव में जानी विश्वनाथकई दूसरे देशों में रहने वाले एनआरआई भी करते हैं सेव इंडियन फार्मर की मदद। बुंदेलखंड के एक गांव में जानी विश्वनाथ



ऋण माफ करना समस्या का हल नहीं

जब बात आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों का पुनरुत्थान की आती है, तो हेमंत साफ कहते है कि किसान को ऋण से मुक्ति देना कभी इस समस्या का हल नहीं बन सकता। अगर आप आकड़े देखें तो यूपीए सरकार द्वारा कर्जा माफ किए जाने पर भी किसानों की स्थिति में बदलाव नहीं आया। इसलिए हमें जरूरत है उनके पैसे और मेहनत को सही तरीके से खास दिशा में व्यवस्थित करने की।

वे कहते हैं हमने पिछले साल भारत में 19 किसानों को भैंस दिलवाई। बाद में पता किया तो उसमें से 16 किसानों ने भैंसे बेच दी कर्ज चुकाने के लिए, जबकि अन्य तीन को भी किसी तरह रोका गया। ऐसे में वे मानते हैं कि किसानों को दूर तक सोचने के तरीके देखने होंगे, पुराने ढर्रे पर चलने की बजाये उनको खुद स्वावलंबी बनाना होगा।

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इसी उद्देश्य के तहत 'सेव इंडियन फार्मर्स' बुंदेलखंड में 1200 महिलाओं के साथ कम्युनिटी किचन का कार्यक्रम शुरू कर रहे हैं। यह विशेषकर वृद्ध और शारीरिक रूप से अयोग्य महिलाओं के लिए कार्यक्रम है। इसके तहत संस्था वहां की महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर रहे हैं। साथ ही कई स्वयं सहायता समूह भी बनाये हैं। (ये खबर मूल रुप से वर्ष २०१७ में गांव कनेक्शन अख़बार में प्रकाशित की गई थी)

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