मोबाइल पर जानकारियां जुटाकर किसान कर रहे खेती, बढ़ गई पैदावार

इन ऐप्स की मदद से किसान कर रहे खेती, बढ़ गई पैदावार

मोबाइल पर जानकारियां जुटाकर किसान कर रहे खेती, बढ़ गई पैदावारनेट की उपलब्धता से किसान कर रहे मोबाइल एेप का ज्यादा उपयोग।

समय के साथ-साथ किसान भी आुधनिक हो रहे हैं। मोबाइल के बढ़ते उपयोग से इंटरनेट की पहुंच अब देश के दूर-दराज इलाकों में भी है। ऐसे में किसान भी इसका लाभ ले रहे हैं। वसंत चौमले महाराष्ट्र के औरंगाबाद के एक छोटे से गांव चंगतपुरी से हैं। वे कई सालों से खेती कर रहे हैं। 32 साल के वसंत खेती की जानकारी के लिए आरएमएल एग्टेक मोबाइल एप की सहायता लेते हैं। ऐप में जानकारी तस्वीरों की माध्यम से भी दी जाती हैं जो काफी मददगार होती है।

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चौमले कहते हैं "मैं प्रतिदिन लगभग 10 मिनट मोबाइल ऐप का प्रयोग करता हूं। इसमें खेतों को पानी कब दें, बारिश का पुर्वानुमान और खादों की मात्रा के बारे में जानकारी लेता हूं।" चौमले छोटे लेकिन उस समूह से संबंध रखते हैं जो मोबाइल ऐप की मदद से खेती की जानकारी ले रहा है। ये किसान विशेषज्ञों द्वारा दी जाने वाली जमीनी स्तर की रिपोर्ट को अमल में ला रहे हैं और पैदावार बढ़ाकर ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं।

इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार कृषि-तकनीक उद्यमों में एक्सेल के सहयोगी एग्रोस्टार, आरएमएल एजीटेक, असपाडा इन्वेस्टमेंट्स-ईएम 3 एग्री सर्विसेज और एबोनो सहित कई अन्य ऐसे ऐप का संचालन कर रहे हैं। ऐप संचालकों का कहना है कि ऐप के माध्यमों से किसान ज्यादा से ज्यादा जानकारी चाहते हैं। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी और बढ़ती जा रही है।

एग्रोस्टार के संस्थापक श्रदुल शेठ कहते हैं "ये अभी शुरुआत है। किसानों के बच्चे जो 20 से 30 के बीच हैं, वे मोबाइल ऐप का ज्यादा उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में हम ऐसे ऐप पर भी काम कर रहे हैं जो अगर नेट की रफ्तार धीमी भी हो तो भी आसानी से चल सके। हमारे कृषि के ऐप पर हर महीने 30 प्रतिशत सक्रिय उपयोगकर्ता बढ़ रहे हैं।"

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सेठ के मुताबिक "हमारे ऐप की मदद से औरंगाबाद जिले के सिलौद गांव के किसानों की आय 2016 से अब तक दोगुनी हो गई। यहां के किसानों ने हमारे विशेषज्ञों की जमीनी रिपोर्ट को अपनाया। जो किसान बागवानी से पहले एक लाख रुपए तक कमाते थे, अब ढाई लाख रुपए तक की सालाना कमाई कर रहे हैं।"

आरएमएल एगटेक के संस्थापक राजीप तेवतिया कहते हैं "हमारी कंपनी का टारगेट 25 से 45 वर्ष के किसान हैं। जिन एक लाख 50 हजार किसानों ने हमारे ऐप को डाउनलोड किया है, उसमें लगभग 35 प्रतिशत किसान उसका प्रयोग हर महीने कर रहे हैं। हमारा एप फ्री तो है ही साथ में घास नियंत्रण जैसी बारीकी जानकारी के लिए हम कुछ पैसे भी लेते हैं। हम हर महीने ऐसे 1000 हजार को अपने ऐप से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं जो हमारी उपयोगी जानकारी के लिए पैसे खर्च कर सकें।"

इस कंपनी ने हाल ही में आरएएल किसान मैक्स नामक एक ऐप लॉन्च किया, जिसकी कीमत 6,000 रुपए है। यह किसानों को सही फसल और बीज की किस्मों का चयन करने, पोषण प्रबंधन और फसल संरक्षण पर निर्णय लेने के साथ ही बाजार में उपज बेचने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

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एक और कृषि तकनीक उद्यम ईएम 3 भुगतान के बदले उपयोग सुविधा की शुरुआत की है। जिसमें मोबाइल ऐप के अलावा कॉल सेंटर की सुविधा मिल रही है। खेती चक्र, भूमि विकास, बीज बोने, बुवाई और बाद के फसल के बारे में पूरी जानकारी दी जाती है। इस कॉल सेंटर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अदित्तिया माल कहते हैं "हम अब भी किसानों को ऑफलाइन तरीके से जानकारी देने का प्रयास कर रहे हैं। हमारे कॉल सेंटर से जानकारी लेने वाले किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही है।"

"किसान 1500 रुपए प्रति एकड़ खर्च करके लेजर तकनीक जैसी सुविधाओं के माध्यम से अपनी जमीन को बराबर करवा सकते हैं। ईएम 3 के मुताबिक अगर एक किसान चावल की नर्सरी स्थापित करना चाहता है तो कीमत 3,500 रुपए प्रति एकड़ तक जा सकती है। मध्यप्रदेश में लगभग 35,000 किसान ऐसा कर चुके हैं। किसान आम तौर पर कृषि की जानकारी के पीछे विज्ञान की सराहना करते हैं। उन्हें लगता है डेटा विज्ञान और भविष्यवाणियों से ही ऐसा होता है।" ये कहना है एबोनो के संस्थापक विवेक राजकुमार का। एबोनो नीलगिरि पहाड़ियों के किसानों पर काम करती है।

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राजकुमार के मुताबिक " ऐबोनो के क्लाउड-कनेक्टेड मंच ने इससे जुड़े किसानों की आय दोगुनी करने में मदद की है।" वे आगे कहते हैं, "एक एकड़ में 3 टन लेटिष पैदा करने वाले किसान अब 6 से 10 टन का उत्पादन कर रहे हैं। एबोनो के विशेषज्ञों द्वारा दी जाने वाली जानकारी से 2-4 लाख रुपए प्रति वर्ष कमाने वाले किसान अब 4-6 लाख रुपए कमाते हैं। आइबोनो के लोग ऑन ग्राउंड काम करते हैं और वहां से मिले आंकड़ों के अनुसार ही किसानों को जानकारी देते हैं।

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