डेयरी व्यवसाय में मजदूरों की जगह ले रही हैं आधुनिक मशीनें

डेयरी व्यवसाय में मजदूरों की जगह ले रही हैं आधुनिक मशीनेंआधुनिकता के दौर में डेयरी क्षेत्रों में भी बदलाव आने लगा है।

बढ़ते आधुनिकता के दौर में डेयरी क्षेत्रों में भी बदलाव आने लगा है। जहां लोग डेयरी में काम करने के लिए मजदूर रखते थे वहीं अब मशीनों का प्रयोग कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में बरेली जिले से 30 किमी. दूर भोजीपुरा ब्लॉक के प्रहलादपुर गाँव में रहने वाले रूपेंद्र (40 वर्ष) बताते हैं, हमारी डेयरी में दूध निकालने की मशीन, दूध को ठंडा रखने की मशीन, पशुओं को गर्मियों में ठंडा रखने के लिए फोगर सिस्टम जैसे कई उपकरण लगे हैं। इन सभी मशीनों से पैसे की तो बचत हो रही है और लोगों तक अच्छा दूध भी पंहुच रहा है।

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भारत में दूध उत्पादन व्यवसाय छोटे और बड़े दोनों स्तर पर सबसे ज्यादा फैला हुआ है। उत्तर प्रदेश दुग्ध उत्पादन में देशभर में नंबर एक बना हुआ है। साल 2015-16 में यूपी 23.33 मिलियन टन उत्पादन के साथ उत्तर प्रदेश भारत में पहले नंबर पर रहा। देश में दूध के कुल उत्पादन में यूपी का योगदान करीब 18 फीसदी है। डेयरी उद्योग में प्रयोग होने वाले उपकरणों को बनाने वाली डेयरी फार्म सोल्यूशन कंपनी के एमडी आशीष पांडेय ने बताया, ‘वर्ष 2011 के बाद से मशीनों को प्रयोग डेयरी क्षेत्रों में ज्यादा होने लगा है। जिनके पास 10 से ज्यादा पशु हैं वो मशीनों का इस्तमाल कर रहे हैं। उसके बाद धीरे-धीरे यूपी में बढ़ गया।’

कई मजदूरों को दूध निकालने व अन्य काम के लिए लगाना पड़ता है और रोज मेहताना भी देना पड़ता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। मशीनों के प्रयोग से काफी बचत भी हुई है। मशीनों के जरिए हाइजैनिक दूध भी मिल रहा है।
उमेश सिंह (35वर्ष), डेयरी संचालक, मेरठ

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हाइटेक मशीनों से हो रहा डेयरी का व्यवसाय

बरेली जिला मुख्यालय से लगभग 30 किमी दूर क्यारा ब्लॉक के गैनी रोड पर चार एकड़ में अवधेश कुमार गोला (35 वर्ष) ने प्रदेश की पहली हाईटेक डेयरी बनाई है। ये डेयरी मशीनों और कंप्यूटर के बलबूते पर संचालित हो रही हैं। पशुओं के खाने पीने से लेकर स्वास्थ्य संबंधी पूरी जानकारी मशीनों से ही मिलती है। करीब सवा दो करोड़ की लागत से तैयार हुई डेयरी में जर्मनी, इजराइल और टर्की के तमाम उपकरण लगे हुए हैं।

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