देश के कई राज्यों से आए 25 किसानों ने सुनाई एरोमा मिशन से कमाई की कहानी

देश के कई राज्यों से आए 25 किसानों ने सुनाई एरोमा मिशन से कमाई की कहानी

लखनऊ। मेंथा, पामारोजा, खस और लेमनग्रास, जिरेनियम जैसी फसलों की खेती कर कैसे मुनाफा कमाया जा सकता है, देश के कई राज्यों से आए दो दर्जन किसानों और नव उद्यमियों ने सीमैप में अपने संघर्ष और मुनाफा की कहानी सुनाई।

किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए शुरू किए गए एरोमा मिशन के एक साल पूरा होने पर देश देश के विभिन्न राज्यों के किसान लखनऊ स्थित सीमैप में पहुंचे थे, जहां इन किसानों से विशेष प्रशिक्षण और उनकी उपलब्धियों पर चर्चा हुई। तमिलनाडु, ओडीशा, बिहार, गुजरात और महाराष्ट्र से लेकर झारखंड के दुर्गम इलाकों के 25 किसानों ने केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीएसआईआर-सीमैप) में मीडिया से एरोमा मिशन को लेकर अपने अनुभव भी शेयर किए।


तमिलनाडु के तटीय इलाके कडलूर के धन्नराज ने बताया, "पिछले 15 वर्षों से उनके इलाके में खस की खेती हो रही थी, लेकिन परंपरागत किस्मों से तेल काफी कम निकलता था, जिसके चलते किसान खेत को छोड़कर शहरों में नौकरी-मजदूरी करने जाने लगे थे, बाद में सीमैप की उन्नत किस्म की खेती से उनका मुनाफा 3-4 गुना बढ़ गया।' कडलूर में 20 गांवों में 500 एकड़ में खस की खेती हो रही है।

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वहीं बिहार में पटना से 250 किलोमीटर दूर कोसी इलाके के धर्मेंद्र यादव मेंथा से मुनाफा कमा रहे हैं। धर्मंद्र के मुताबिक मेंथा की फसल इस इलाके लिए वरदान साबित हुई है।" इस दौरान किसानों से सुसाइड जो विदर्भ और मराठवाड़ा से लेकर कच्च तक के किसानों अपनी नई खेती से उन्नति की कहानी बताई।

सीमैप के डॉक्टर आलोक कालरा ने बताया, "एक वर्ष में लगभग 800 हेक्टेयर में सगंध पौधों की खेती देश भर में विशेषकर सूखा-ग्रस्त, ऊसर एवं बाढ़-ग्रस्त क्षेत्रों में किया गया है। इससे लगभग 8 करोड़ मूल्य का सुगंधित तेल किसानों के द्वारा एरोमा उद्योग को दिया गया। एरोमा मिशन ने उनक इलाकों के किसानों को कमाई का एक जरिया दिया है जहां बाढ़ या सूखे के चलते खेती दुश्कर हो गई थी।"


सीमैप ने बस्तर, कच्छ, बिहार, दुधवा, कडलूर, ऊटी, बुंदेलखण्ड, विदर्भा, मराठवाड़ा, ओडीसा और लखनऊ में करीब 93 प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन कर उन्हें सगंध पौधों की खेती के लिए प्रेरित किया और पौध सामग्री वितरित की।

डॉ.कालरा ने कहा, " आने वाले दिनों में भारत को पामरोजा, खस तथा जिरेनियम में अग्रणी बनाएंगे।"

वहीं सीमैप के हीरक जयंती एवं एरोमा मिशन के एक वर्ष पूरे होने पर पद्म विभूषण-डॉ आर ए माशेलकर, पूर्व महानिदेशक, सीएसआईआर का व्याख्यान का भी आयोजन किया गया। किसानों से डॉ आर ए माशेलकर ने भी बातचीत की तथा विश्वास जताया कि सीमैप के प्रयासों से किसानों की आय कई गुना की जा सकती है। उन्होंने सीमैप द्वारा आम किसान के जीविकोपार्जन की सम्भावनाएं बढ़ाने पर संस्थान की भी प्रशंसा की। डॉ. माशेलकर ने एरोमा मिशन को "जीवन परिवर्तन मिशन" भी बताया।

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इस अवसर पर डॉ. माशेलकर द्वारा "फ्रॉम इंक्रिमेंटल टू डिस्रप्टिव गेम-चेंजिंग इनोवेशन" विषय पर व्याख्यान भी दिया गया। मुख्य कार्यक्रम में डॉ माशेलकर द्वारा अपने व्याख्यान में भारत को गेम-चेंजिंग इनोवेशन के द्वारा ही विकासशील से विकसित देश बन सकता है, जिसके लिए हमें युवा शक्ति को बढावा देना चाहिये।

सीएसआईआर-सीमैप के निदेशक प्रो. अनिल कु. त्रिपाठी द्वारा डॉ माशेलकर का स्वागत खस का गुलदस्ता व उससे बनी जैकेट देकर किया गया। प्रो. त्रिपाठी ने इस अवसर पर कहा कि संस्थान के वैज्ञानिकों का सदैव यही प्रयास रहता है कि वह विज्ञान द्वारा समाज के हित के लिये कार्य करे। इस अवसर पर क्लीन जर्म की टेक्नोलॉजी का एमओयू तथा तुलसी की प्रजाती सिम-शिशिर भी रिलीज की गयी। कार्यक्रम में डॉ नित्यानंद, डॉ काम्बोज, डॉ शाहने, डॉ आलोक धवन, डॉ तपस के कुंडु भी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ प्रीति श्रीवास्तव द्वारा किया गया।

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