तो प्याज उगाना छोड़ देंगे किसान

तो प्याज उगाना छोड़ देंगे किसानफोटो: पीटीआई

लखनऊ। प्याज एक बार सुर्खियों में हैं। दिल्ली समेत देशभर के बाजारों में प्याज 50 रुपए से लेकर 80 रुपए में बिक रहा है, जिसको लेकर उपभोक्ताओं में नाराजगी है। दूसरी ओर प्याज के इस बढ़े हुए दामों का कोई फायदा प्याज उगाने वाले किसानों को नहीं मिल रहा है।

किसानों ने दी है धमकी

प्याज का दाम बढ़ाकर जमाखोर और बिचौलिए मालामाल हो रहे हैं, ऐसे में किसानों ने धमकी दी है कि आने वाले समय में वह प्याज की खेती से तौबा कर लेंगे। भारतीय सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष श्रीराम गाडवे कहते हैं, ''एक किलो प्याज पैदा करने में किसान को 7 से लेकर 10 रुपए की लागत आती है, लेकिन प्याज जब पैदा हो जाता है तो वह 3 से लेकर 5 रुपए में बिकता है। आढ़ती प्याज की जमोखरी करके वही प्याज कुछ महीनों में 50 रुपए से ज्यादा दाम पर बेचते हैं। ऐसे किसानों को सिर्फ नुकसान होता है। ऐसे में देशभर के कई किसानों ने तय किया है कि वे अब प्याज की खेती नहीं करेंगे।''

सरकार हर बार रहती है नाकाम

प्याज को बढ़े और घटे दामों को लेकर पिछले कई दशक से विवाद चल रहा है, लेकिन सरकार प्याज के दामों पर हर बार नियंत्रण करने में नाकाम रहती है। कुछ महीना पहले ही मध्य प्रदेश के मंदसौर में प्याज को लेकर किसानों को बड़ा आंदोलन करना पड़ा था क्योंकि मंडियों में किसानों को तीन रुपए प्रति किलो से भी कम कीमत पर प्याज बेचना पड़ रहा था। ऐसे में किसानों को प्याज की लागत तक नहीं निकल पा रही थी। इस आंदोलन के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने पहली बार प्याज की खरीद को लेकर न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया था।

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फसल को खुदवाना तक की लागत नहीं निकल रही थी

मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के कनाडिया गाँव किसान दिलीप पाटीदार बताते हैं, ''प्याज के बढ़े हुए दामों को लेकर आजकल सुनता हूं तो दिमाग खराब हो जाता है, कुछ महीना नहीं हुए जब अपने चार बीघे में प्याज की फसल को खुदवाना तक की लागत नहीं निकल रही थी। सवा दो रुपए किलो प्याज बेचने पर हम लोग मजबूर थे। स्थिति यह है कि प्याज उगाने से अभी तक घाटे में हूं। आज वहीं प्याज 50 से लेकर 80 रुपए किलो बिक रही है।''

प्याज की पैदावार तो बढ़ रही लेकिन…

बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान संस्थान के कृषि अर्थशास्त्र विभाग के एग्रीबिजनेस मैनेजमेंट के प्रोफेसर और क्वार्डिनेटर डॉ. राकेश सिंह ने बताया, ''देश में प्याज की पैदावार तो बढ़ती जा रही, लेकिन इसका लाभ न तो टमाटर उगाने वाले किसानों को हो रहा और न ही आम उपभोक्ताओं को।''

सच्चाई कभी सामने लाने की कोशिश नहीं की

डॉ. सिंह बताते हैं, “प्याज की जमाखोरी करके व्यापारी और बिचौलियों ने प्याज के नाम पर खूब पैसा बनाया। सरकार से लेकर विपक्ष तक ने प्याज के नाम पर सिर्फ राजनीति की लेकिन प्याज के नाम पर देश में क्या हो रहा है, इसकी सच्चाई कभी सामने लाने की कोशिश नहीं की।“

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भारत प्याज उत्पादन में दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा देश

भारत दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा प्याज उत्पादन देश है। भारतीय प्याज अपने तीखेपन के लिए मशहूर है और पूरे साल उपलब्ध रहती है। भारतीय प्याज की दो फसल चक्र हैं, पहली फसल नवंबर से जनवरी में तैयार होती है और दूसरी जनवरी से मई तक तैयार होती है। देश में मुख्य प्याज उत्पादक राज्यों में महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, गुजरात, बिहार, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और तमिलनाडु हैं। महाराष्ट्र 28.32 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ प्याज उत्पादन में पहले स्थान पर है।

भारत से 80 देशों में किया निर्यात

कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण यानि एपीडा की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय प्याज की दुनिया भर में बहुत मांग है। इस वर्ष 2016-17 के दौरान भारत से 80 देशों में 24,15,757.11 मीट्रिक टन ताजे प्याज का निर्यात करके 3106.50 करोड़ रुपए यानि 464.02 मिलियन अमरीकी डॉलर अर्जित किए हैं।

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प्याज उगाने वाला किसान तो बर्बाद हो गया

प्याज के इस बढ़े हुए निर्यात से प्याज किसानों को कोई फायदा नहीं हुआ। मध्य प्रदेश के किसान नेता केदार सिरोही ने प्याज उगाने वाले किसानों का दर्द आंकड़ों से समझाते हुए बताया, ''मई-जून महीने में जब किसानों को प्याज मंडियों में बेचना था, तब मंडियों में प्याज का रेट सवा सौ रुपए कुंतल से लेकर ढाई-तीन सौ रुपए था। किसाने को अपना प्याज मंडी पहुंचाने में ही 100 रुपए की लागत प्रति कुंतल लग जाती थी, लेकिन आज प्याज 600 से 700 रुपए कुंतल बिक रहा है। ऐसे में प्याज उगाने वाला किसान तो बर्बाद हो गया।''

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