आलू के बाद प्याज ने निकाले किसानों के आंसू, इंदौर में किसानों ने भेड़ों से चरवाई फसल 

आलू के बाद प्याज ने निकाले किसानों के आंसू, इंदौर में किसानों ने भेड़ों से चरवाई फसल मध्यप्रदेश के एक किसान ने लागत न निकलने पर अपने खेत में प्याज की फसल को भेड़ों से चरवा दिया

लखनऊ। देश में किसानों की हालत बद्तर होती जा रही है। आलू के बाद प्याज भी माटी मोल हो गया है। लागत न निकलने से परेशान मध्यप्रदेश में सैकड़ों किसानों ने अपने खेतों में खड़ी फसल जुतवा दी है तो कइयों ने पशुओं से चरवा दिया है। इंदौर में प्याज की कीमतें 50 पैसे प्रतिकिलो से लेकर तीन रुपए तक हैं।

मध्यप्रदेश के इंदौर में रहने वाले दिलीप पाटीदार (33 वर्ष) ने इंदौर से आगे कनाडिया गाँव में चार बीघे (पक्के) में प्याज लगाया था, लेकिन अब उनकी हिम्मत उसे खुदवाने की नहीं हो रही है। वे बताते हैं, “जो रेट चल रहा है मार्केट में उससे लागत तो दूर मजदूरी नहीं निकलेगी। एक बीघे पर करीब 30 हजार रुपए की लागत आती है। केंद्र सरकार की गलत नीतियों के चलते आलू के बाद प्याज किसान भी घाटा उठा रहा है।” मध्यप्रदेश में पिछले चार-पांच वर्षों में इस बार सबसे बेहतर उत्पादन हुआ है लेकिन किसान परेशान है।

इस रेट लागत तो दूर मजदूरी नहीं निकलेगी। एक बीघे पर करीब 30 हजार रुपए की लागत आती है। केंद्र सरकार की गलत नीतियों के चलते आलू के बाद प्याज किसान भी घाटा उठा रहा है।
दिलीप पाटीदार, प्याज उत्पादन किसान

मध्यप्रदेश में आम किसान यूनियन से जुड़े केदार सिरोही प्याज उगाने वाले किसानों का दर्द आंकड़ों से समझाते हैं, “मंडी में सवा सौ रुपए कुंतल से लेकर ढाई-तीन सौ तक का रेट है लेकिन एक बोरी प्याज निकालने में 50-60 रुपए मजदूरी, एक बोरी की कीमत 12-16 रुपए और 30 रुपए प्रति कुंतल पर ट्रांसपोर्टेशन का खर्चा आता है। यानि करीब 100 रुपए मंडी तक पहुंचने का खर्च है। ऐसे में किसान को क्या बचेगा इसीलिए किसान खेत में ही फसल छोड़ रहे हैं।

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देश में प्याज उत्पादन में महाराष्ट्र के बाद मध्यप्रदेश का नंबर आता है। यहां इंदौर, रतलाम, खांडवा, नीमच, धार और उज्जैन में बड़े पैमाने पर प्याज की खेती होती है। आम किसान यूनियन के मुताबिक एमपी में करीब 50-60 हजार हेक्टेयर प्याज का रकबा है लेकिन इस बार किसान अपनी फसल निकाल नहीं पा रहे हैं कई किसानों ने फसल को भेड़ों से चरवा दिया है। केदार बताते हैं, ‘भेड़ों से चरवाना किसान की मजबूरी है क्योंकि रोटावेटर चलाने का खर्च ही काफी आ जाता है।’

प्याज से एमपी के साथ नासिक के किसान भी परेशान हैं। नासिक में ज्यादा पैदावार होने विदेशों के साथ देशभर में प्याज जाता है लेकिन इस बार हर जगह उत्पादन ज्यादा है। दिल्ली में आजादपुर में मंडी के बड़े प्याज कारोबारी राजेंद्र शर्मा बताते हैं, ‘आज ही नहीं पिछले एक साल से प्याज किसान परेशान है, पिछले साल भी यही तीन से सात रुपए का रेट था, जबकि दो साल पहले 10-15 रुपए में प्याज बिका था।’

किसान इस तरह सुरक्षित रखते हैं प्याज

आलू के बाद प्याज का यूं माटी मोल बिकने की वजह पूछने पर वो बताते हैं, मौसम की मेहरबानी से उत्पादन काफी हुआ है। पिछले 30-40 वर्षों में पिछले दो वर्ष ऐसे गए हैं जब पाले से आलू-प्याज को नुकसान नहीं हुआ, जिससे उत्पादन बढ़ा है। दूसरे जिन देशों में प्याज निर्यात होता था जैसे बांग्लादेश और श्रीलंका भी अच्छा उत्पादन होने लगा है, इससे निर्यात पर असर पड़ा है।’

धान-गेहूं वाले किसानों की हालत गंभीर तो है ही वो किसान भी मर रहा है जो कुछ उबरने के लिए परंपरागत खेती से हटकर काम करता है। इस बार दोनों में किसानों को जबर्दस्त घाटा हुआ है।
केदार सिरोही, आम किसान यूनियन, मध्यप्रदेश

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इसी साल मार्च में गांव कनेक्शन ने इंदौर के ही ईश्वरखेडी गाँव निवासी राजकुमार चौधरी (28 वर्ष) की ख़बर प्रकाशित की थी, जिन्हें 50 बोरी आलू के बदले मंडी वालों को ही पैसे देने पड़े थे। इस बार वही हाल आलू का हो रहा है। यूपी से लेकर एमपी और पंजाब तक किसानों ने आलू माटी मोल (दो-चार रुपए किलो) बेच दिया है, ज्यादातर किसानों का आलू स्टोर में रखा है लेकिन उन्हें भी रेट की उम्मीद नहीं है। दिलीप पाटीदार कहते हैं, ‘उम्मीद नहीं है कोल्डस्टोरेज में किराया निकलेगा।’

इंदौर के खेत में प्याज चरती भेंडे। फोटो- फेसबुक साभार

यूपी में आलू किसानों का नहीं हुआ इलाज

यही हाल उत्तर प्रदेश में भी है, योगी आदित्यनाथ की सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर आलू खरीदने की घोषणा की लेकिन उसका फायदा ज्यादातर किसानों को नहीं मिला। कानपुर देहात में अभी इस तरह का कोई आदेश नहीं पहुंचा तो कन्नौज में सिर्फ बेहतर आलू (न ज्यादा बड़ा, न छोटा, बीज वाला) ही खरीदा जा रहा है, बाकी आलू को खरीदार नहीं मिल रहे। योगी सरार ने 478 रुपए प्रति कुंतल की दर पर एक लाख मिट्रिक टन आलू खरीदने का ऐलान किया था।

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फोटो-साभार

पाकिस्तान से विवाद का किसानों पर असर

भारत और पाकिस्तान के बीच आलू-प्याज समेत रोजाना सैकड़ों ट्रक खाद्यान्न का व्यापार होता था, लेकिन पिछले काफी समय से ये कारोबार बंद है। आजादपुर मंडी के कारोबारी राजेंद्र शर्मा कहते हैं, ‘नोटबंदी का भी कुछ असर रहा होगा, लेकिन पाकिस्तान प्याज, आलू, टमाटर और अदरक समेत कई सब्जियों का बड़ा आयातक था, अब कारोबार बंद होने का असर दोनों तरफ के किसानों पर पड़ा रहा है।’

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