किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए ‘विकल्प कारोबार’

Mithilesh DubeyMithilesh Dubey   14 Jan 2018 4:12 PM GMT

किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए ‘विकल्प कारोबार’खुशहाल किसान। (फोटो डेली सीएसआर से साभार)

किसानों की आय 2022 तक दोगुनी कैसे हो, इसके लिए सरकार हर जतन कर रही है। इसी के तहत सरकार किसानों को बाजार तक पहुंचाने की भी पहल कर रही है, ताकि उनका मुनाफा बढ़े और नुकसान की भरपाई हो सके। इसके लिए लंबे समय से प्रतीक्षित कृषि जिंसों पर विकल्प सौदे की शुरुआत मकर संक्रांति से हो रही है।

कमोडिटी एक्सचेंज नेशनल कमोडिटी और डेरिवेटिव्स एक्सचेंज लिमिटेड (एनसीडीईएक्स) पर मकर संक्रांति से ग्वार बीज का विकल्प अनुबंध कारोबार की शुरुआत वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज किया। इस मौके वित्त मंत्री ने कहा “भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। वृद्धि का लाभ विभन्नि क्षेत्रों को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर लोग कृषि पर निर्भर हैं। यदि कृषि क्षेत्र को वृद्धि का लाभ नहीं दिखता है, तो यह तर्कसंगत तथा समानता वाला नहीं होगा।”

जिंस एक्सचेंज में ग्वारसीड के विकल्प कारोबार की शुरुआत करते वित्त मंत्री अरुण जेटली

वहीं इस मौके पर एक्सचेंज ने दावा किया कि कृषि जिंसों में ऑप्शंस (विकल्प) ट्रेडिंग शुरू होने से किसानों को फायदा होगा। कृषि जिंसों में विकल्प ट्रेडिंग की तैयारी एनसीडीईएक्स पिछले पांच महीने से कर रहा था।

मुंबई स्थित ब्रोकरेज फर्म ट्रस्टलाइन के राजीव कपूर कहते हैं "विकल्प कारोबार किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगा। ये कैसे काम करता है ये भी लोगों को जानना जरूरी है। यह वायदा कारोबार की तरह का डेरिवेटिव्स (व्युत्पन्न) प्रॉडक्ट होता है। लेकिन इसमें खरीदार का जोखिम सीमित लेकिन प्रॉफिट अनलिमिटेड होता है।”

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समीर बताते हैं “फ्यूचर ट्रेडिंग में हेजिंग (हेजिंग वह तकनीक है जो किसी निवेशक के निवेश संबंधी जोखिम को कम कर देती है) का विकल्प नहीं मिलता है लेकिन विकल्प में यह सुविधा है। एक तरह से इसमें कुछ प्रीमियम चुकाकर नुकसान का बीमा कवर मिलता है। यह बिल्कुल उसी तरह होता है जैसे कार में स्क्रेच आ जाता है या चोरी या एक्सीडेंट हो जाने पर कुछ प्रीमियम चुकाने पर बीमा कंपनी नुकसान क भरपाई करती है। उसी तरह ऑप्शन ट्रेडिंग में कुछ प्रीमियम चुकाने से नुकसान सीमित हो जाता है।"

राजीव कपूर आगे कहते हैं "इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है। वायदा कारोबार में आप 30 हजार के भाव पर गोल्ड की एक लॉट खरीदते हैं। लेकिन सोने का भाव 1000 रुपए टूट जाता है और 29 हजार तक आ जाता है तो एक लॉट पर आपको एक लाख रुपए का नुकसान उठाना पड़ता है। वहीं, ऑप्शन ट्रेडिंग में अगर आपने कॉल विकल्प खरीदा है तो 50 रुपए प्रति दस ग्राम प्रीमियम चुकाकर यह नुकसान घटकर सिर्फ 5000 रुपए रह जाता है।"

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कमोडिटी में इसके पहले सोना विकल्प कारोबार की शुरुआत की गई है। सेबी ने कमोडिटी ऑप्शंस ट्रेडिंग की मंजूरी पिछले साल जून में ही दे दी थी। इसके तहत सिर्फ एक ही अनुबंध को मंजूरी मिली है। सेबी की मंजूरी मिलने के एक महीने बाद देश के सबसे बड़े कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स ने अक्टूबर 2017 में गोल्ड ऑप्शंस की शुरुआत की है। एमसीएक्स पर शुरू हुए विकल्प कारोबार में सोने का एक अनुबंध है और एनसीडीईएक्स पर ग्वार के तीन अनुबंध पर विकल्प सौदे शुरू किए जाएंगे। कृषि जिंसों में ग्वार पहला जिंस होगा जिसमें विकल्प कारोबार शुरू होगा।

एनसीडीईएक्स की वेबसाइट पर प्रेस विज्ञप्ति के जरिये एनसीडीईएक्स के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ समीर शाह कहते हैं "इस नए हेजिंग टूल को प्रारंभ करने की अनुमति सेबी से पहले ही मिल चुकी थी। इससे किसानों के लिए जोखिम का स्तर कम हो सकता है और उन्हें अपने उत्पाद की बेहतर कीमतें मिल सकेंगी। यह ऑप्शंस कीमतों में गिरावट के दौरान किसानों को बचाने के साथ-साथ कीमतों में बढ़ोतरी के दौरान उन्हें उच्च कीमतों पर अपने उत्पाद बेचने का अवसर प्रदान कर सकता है। इस तरह कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद यह टूल किसानों के लिए हर लिहाज से फायदेमंद साबित होगा।

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समीर शाह आगे कहते हैं "आगामी फरवरी, मार्च और अप्रैल के महीनों में समाप्त होने वाले विकल्प अनुबंध कारोबार 14 जनवरी से ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध होंगे। ग्वार बीज ऑप्शंस यूरोपीय शैली के होंगे, जो कि 50 पैसे प्रति क्विंटल के टिक साइज के होंगे। एग्री ऑप्शंस की समाप्ति तिथि, महीने के अंतिम बुधवार को होगी जो कि वायदा अनुबंध की समाप्ति महीने से पहले होगी। यदि बुधवार को अवकाश होता है तो समाप्ति तिथि एक्सचेंज के अगले कारोबारी दिन को होगी।

ग्वालियर के कमोडिटी व्यापारी और विशेषज्ञ रवि सिंघानियां कहते हैं "वायदा के मुकाबले ऑप्शंस ट्रेडिंग करना आसान होगा। इससे किसानों को नुकसान कम और मुनाफा अधिक होने की संभावनाएं पैदा होगी। किसान इसका फायदा उठा सके इसीलिए एक्सचेंज ने जागरुकता अभियान लंबे समय से शुरू किया था। कमोडिटी ऑप्शंस में सिर्फ खरीदार होते हैं।

चढ़ते हुए बाजार में कॉल (धारक को समापन अवधि से पहले किसी भी समय स्ट्राइक मूल्य पर अंतनिर्हित स्टॉक खरीदने का अधिकार देता है) और गिरते हुए में पुट (पुट ऑप्शन वह है जिसमें कोई व्यक्ति बाद में होने वाली मूल्य गिरावट के लिए कोई स्टॉक सुनिश्चित कर सकता है, यदि आपके स्टॉक का मूल्य कम होता है, तो आप अपना पुट ऑप्शन लेकर इसे पूर्व में निर्धारित मूल्य स्तर पर बेच सकते हैं) खरीदा जाता है।

रवि आगे कहते हैं “कॉल ऑप्शंस वायदा के तहत बढ़ते दाम से सुरक्षा के लिए हेजिंग की जा सकती है जिसमें असीमित मुनाफे का मौका होता है, वहीं पुट ऑप्शन के तहत सीमित मुनाफे की संभावना के साथ गिरती कीमतों से सुरक्षा मिलती है। ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने की स्थिति में बचे सौदे वायदा में बदल जाएंगे, इसके बाद उनके ऊपर वायदा के नियम लागू होंगे।"

(स्ट्राइक मूल्य: स्ट्राइक मूल्य वह निश्चित मूल्य है जिस पर स्टॉक ऑप्शन का कोई धारक स्टॉक खरीद सकता है)

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