मध्य प्रदेश : 2018 में शिवराज की राह में किसानों की नाराजगी बन सकती है रोड़ा ?

Arvind ShuklaArvind Shukla   4 Jan 2018 8:03 PM GMT

मध्य प्रदेश : 2018 में शिवराज की राह में किसानों की नाराजगी बन सकती है रोड़ा ?शिवराज सिंह चौहान

मध्य प्रदेश में इस साल के आखिर में चुनाव होने हैं, लेकिन वहां कई किसान संगठन 2017 की तरह आंदोलन की तैयारी में हैं। ऐसे मेें सवाल उठता है क्या गुजरात की तरह यहां भी किसान चुनाव पर असर डालेंगे...

लखनऊ/ भोपाल। लगातार 14 वर्षों से मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल रहे शिवराज सिंह चौहान के लिए आगे की राह आसान नजर नहीं आती है। वर्ष 2017 किसान आंदोलनों का साल रहा है, इसकी शुरुआत मध्य प्रदेश से हुई। गुजरात के चुनावों में अपना गुस्सा दिखा चुके किसान 2018 में होने वाले चुनावों में मध्य प्रदेश में भी असर दिखा सकते हैं, क्योंकि यहां फिर एक बड़े आंदोलन की सुगबुगाहट हो रही है।

विधानसभा चुनावों के लिए किसान इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि चना, प्याज, मसूर और दहलनी फसलों के गढ़ मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह सरकार ने लगातार पांचवीं बार कृषि कर्मण पुरस्कार जीता। लेकिन फसल का सही मूल्य न मिलने, प्राकृतिक आपदाओं में फसल खराब होने से 160 से ज्यादा किसानों की कथित आत्महत्या की ख़बरें पूरे देश में छाई रहीं। विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाया है।

पिछले 20-25 वर्षों में खड़े हुए देश के सबसे बड़े किसान आंदोलन की शुरुआत 2017 में मध्य प्रदेश से हुई थी। चुनावी साल में शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ किसान संगठनों ने असहयोग आंदोलन की तैयारी शुरु कर दी है। सितंबर 2017 में अनाज और दूध के लाभकारी मूल्य को लेकर देशभर में आंदोलन शुरु हुए। मध्य प्रदेश में इस आंदोलन की अगुवाई करने वाले आम किसान यूनियन ने फरवरी 2018 आंदोलन के लिए तैयारी तेज कर दी है। किसानों ने कहा वो सरकार को किसी तरह का कर्जा वापस नहीं करेंगे।

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एक और आंदोलन क्यों ? क्या ये चुनावी साल में शिवराज सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश है? इस सवाल के जवाब यूनियन के केदार सिरोही अपनी एक फेसबुक पोस्ट का जिक्र करते हैं। “230 विधायकों वाले मध्य प्रदेश में सिर्फ 79 विधायकों ने विधानसभा में कृषि कल्याण, कृषि विकास और पशुपालन को लेकर सिर्फ 117 सवाल पूछे। वो भी किसी ने एक किसी ने दो.. ये हाल तब है जबकि अक्सर किसानों की आत्महत्या, मंडियों में किसान की उपज की खरीद न हो और कर्ज वसूली से परेशान किसानों की ख़बरें आती है। अब इनका हिसाब चुनावी साल में सरकार और विधायकों को तो देना ही होगा।”

केदार सिरोही ने अपने फेसबुक पर सवाल पूछने वाले विधायकों की लिस्ट जारी कर लोगों से उन्हें आमजन तक पहुंचाने की अपील की है ताकि आने वाले चुनावों में विधायक और पार्टियों से सवाल जवाब हो सकें। सदन में सबसे ज्याद सवाल हर्ष यादव ने 6 तो शैलेंद्र पटेल ने पांच सवाल उठाए। बाकी सबसे ज्यादा संख्या 1 ही सवाल पूछने वालों का है। ये मुद्दा इसलिए गंभीर होती है क्योंकि मध्य प्रदेश के ज्यादातर किसान खुद को किसान बताते हैं, लेकिन सवाल के नाम पर कन्नी काट जाते हैं। शिवराज सरकार के करीब साढे चार साल पूरे होने को हैं। ऐसे में अब बाकी बचे बजट सत्र और मानसून सत्र में भी न के बराबर सवाल उठने की उम्मीद है।

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मध्य प्रदेश की राजनीति को बारीकी से समझने वाले हिंदुस्तान टाइस्म, इंडियन एक्सप्रेस और इंडिया टुडे समेत कई बड़े मीडिया ग्रुप में लंबा अनुभव रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार एनके सिंह कहते हैं, “ फसल की पूरी बिक्री, किसानों की आत्महत्या जैसे प्रदेश मे कई गंभीर मुद्दे हैं, बीजेपी विधायकों ने सवाल नहीं पूछे ये समझ में आता है, लेकिन कांग्रेस ने क्यों नहीं पूछे ये और गंभीर मामला है। बीजेपी विधायकों से पहले से पहले आलाकमान ने कह दिया था, सदन में ऐसे सवाल न पूछे जाएं, जिससे पार्टी सरकार और पार्टी दोनों असहज हों।’

मध्य प्रदेश के छोटे और बड़े किसानों की समस्याओं की समस्याओं को अलग कहते हुए वो कहते हैं, “छोटा किसान ज्यादा परेशान है। कांग्रेस के जो विधायक और नेता हैं वो या तो बड़े किसान हैं या उनके संपर्क हैं इसलिए ज्यादातर को छोटे किसानों के मुद्दों में दिलचस्पी नहीं। या फिर वो सवाल पूछे जाते हैं जो मीडिया में सुर्खियां बनें।’

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हालांकि कांग्रेस जबलपुर पश्चिम से कांग्रेस विधायक तरुण भनोट के अलग तर्क देते हैं। “ जिस सरकार में किसानों के सीने पर गोलियां चलवाई गईं हों वहां आप विधायकों के सदन में किसानों के मुद्दे पर सवाल उठाने और उन्हें हल कराने की बात कैसे कर सकते हैं। पिछले सत्र में कांग्रेस विधायक 4 दिन तक सोते रहे, क्योंकि हमें बोलने का मौका नहीं दिया गया।’

भनोट आगे कहते हैं, “मध्य प्रदेश का किसान कर्ज में दबा हुआ है। कांग्रेस सदन से लेकर जमीन तक उनकी लड़ाई लड़ेगी। प्रदेश स्तर पर कांग्रेस अविश्ववास प्रस्ताव लाने पर विचार कर रही है, इसे वरिष्ठ नेताओं के पास भेजा गया है।”

29 नवंबर 2005 से लगातार सत्ता संभाल रहे शिवराज को किसानों के बीच का जमीनी नेता कहा जाता है। अपनी इसी पहचान के चलते उन्होंने कांग्रेस की सियासी जमीन पर कब्जाने के सहारे 14 साल से लगातार सत्ता में हैं।

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एनके सिंह कहते हैं, “मध्य प्रदेश छोटे किसानों की बहुलता और आदिवासी इलाका है। करीब 20 साल पहले मुख्यमंत्री रहते दिग्विजय सिंह ने बटाईदारों और छोटे किसानों के लिए कई योजनाएं शुरु की थी, वो सिक्किम के मॉडल पर चल पड़े थे, कई राज्यों के दौरे भी उन्होंने किए थे। लेकिन बाद में वो सुस्त पड़ गए। शिवराज जमीनी आमदी हैं, किसान और ग्रामीण उन्हें अपने बीच का समझते हैं, वो उनके मुद्दे भी समझते हैं अब बात प्राथमिकताओं और उपेक्षाओं के बीच की है।’

अपनी बात को सरल करते हुए वो कहते हैं, “ किसानों की सबसे बड़ी समस्या ये हैं खेती की लागत बढ़ गई है, पहले केंद्र सरकार सब्सिडी देती रहती थी, अब ये सरकार इस मूड में बिल्कुल नहीं लगती है, इसलिए भावांतर जैसी कई योजनाओं को चलाने के बाद भी शिवराज से किसान पूरी तरह खुश नजर नहीं आते हैं।’

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लेकिन नाराजगी कांग्रेस को लेकर भी है, हरदा जिले के जागरुक किसान आशीष वर्मा कहते हैं, आज तो फिर भी बिजली मिल रही है, कांग्रेस के जमाने में तो किसान अंधेरे में था। शिवराज की भावांतर जैसी योजनाएं अच्छी हैं, लेकिन वो ठीक से किसान तक नहीं पहुंच पा रही हैं। आप मुफ्त में गरीबों को तीरथ करवा रहे हो, लेकिन उससे अच्छा था किसानों को आर्थिक रुप से सशक्त करते। ऐसी फसलों किसानों को बताए जाने की जरुरत है, जिससे वो कमाई कर सकें।

कृषि कल्याण, कृषि विकास और पशुपालन पर विधायकों द्वारा पूछे गए प्रश्नों की संख्या और प्रश्न क्रमांक 117 सवाल पूछे गए

सोहनलाल बाल्मिक (कुल प्रश्न -2) -328,1043
कुंवर विक्रम सिंह (कुल प्रश्न -1) -809
हर्ष यादव -(कुल प्रश्न -6) 903 ,1376,1957,249,438,2245
जीतू पटवारी (कुल प्रश्न -3) -362 एवं 2735,1643
नारायण सिह कुशवाह -(कुल प्रश्न -1) 559
आरिफ अकिल (कुल प्रश्न -3) -728,959,1637
बाबूलाल गौर (कुल प्रश्न -1) -52 पशुपालन
उमर सिघर (कुल प्रश्न -1) 1227
लाखन सिंह यादव (कुल प्रश्न -1) 1810
नीलेश अवस्थी (कुल प्रश्न -1) 1059
अशोक रोहानी (कुल प्रश्न -1) -2012 पशुपालन
मुरलीधर पाटीदार (कुल प्रश्न -1) -193 पशुपालन
राजेंद्र पाण्डेय (कुल प्रश्न -1) 3263
कमलेश्वर पटेल (कुल प्रश्न -1) -2395
महेंद्र सिंह (कुल प्रश्न -1) -2939
सतीश मालवीय -(कुल प्रश्न -1) 485
कालू सिंह ठाकुर (कुल प्रश्न -1) -2476
जीतेन्द्र सिंह गहलोत (कुल प्रश्न -1)-68
शैलेन्द्र पटेल (कुल प्रश्न -5)-2093 ,62,4559,320,1654
नारायण त्रिपाठी (कुल प्रश्न -1)-1904
पन्ना लाल शक्य (कुल प्रश्न -2)-1789,पशुपालन 632,
प्रमिला सिंह (कुल प्रश्न -1)-789
सत्यपाल सिंह (कुल प्रश्न -1)-960
रामकिशोर दोगने (कुल प्रश्न -1)-1007
महेंद्र सिंह (कुल प्रश्न -1)-2935
हितेंद्र सिंह (कुल प्रश्न -1)-1943
बहादुर सिंह चौहान (कुल प्रश्न -1)-1773
रामपाल सिंह (कुल प्रश्न -1)-851 पशुपालन
यादवेन्द्र सिंह (कुल प्रश्न -1)-39
विजय सिंह सोलंकी(कुल प्रश्न -1)-253
राजेंद्र पाण्डेय (कुल प्रश्न -2)-454,504
पारुल साहू (कुल प्रश्न -2)-387,491
शुखेंद्र सिंह (कुल प्रश्न -2)-354,1214
ममता मीणा (कुल प्रश्न -3)-96,587,876
देविंदर वर्मा (कुल प्रश्न -1)-1978
संजय पाठक (कुल प्रश्न -2)-177,311
गोविन्द सिंह (कुल प्रश्न -3)486,63,43
राम लल्लू (कुल प्रश्न -1)-201
मति चंदा गौर (कुल प्रश्न -1)-344
नारायण सिंह (कुल प्रश्न -2)543,764
शंकरलाल तिवारी (कुल प्रश्न -3)–167,54,6238
संदीप जायसवाल (कुल प्रश्न -1)-1770
मुकेश पंड्या (कुल प्रश्न -1)6924
योगिता (कुल प्रश्न -1)3225
अजय सिंह (कुल प्रश्न -1)4774,1203
सतीश मालवीय (कुल प्रश्न -1)-463
झुमा सोलंकी (कुल प्रश्न -1)-5897
हरदीप सिंह डंग (कुल प्रश्न -1)-575
बलबीर सिंह (कुल प्रश्न -1)-1181
रमेश पटेल (कुल प्रश्न -2)-5397,790
उमा देवी खटिक (कुल प्रश्न -1)-1981
सरस्वती सिंह (कुल प्रश्न -1)-5036
घनश्याम पिनोरिया (कुल प्रश्न -1)5013
सत्यप्रकाश (कुल प्रश्न -1)3815
सुशील कुमार तिवारी (कुल प्रश्न -1)-1494
सुदेश राय (कुल प्रश्न -2)– 3838,1451
मुकेश नायक (कुल प्रश्न -1)-510
संजय उइके (कुल प्रश्न -2)-1990,248
लखन पटेल (कुल प्रश्न -1)-3706
गिरीश भंडारी (कुल प्रश्न -1)-5036
मधु भगत (कुल प्रश्न -1)-497
बाला बच्हन (कुल प्रश्न -3)-837,286,578
ठाकुरदास नागवंशी-(कुल प्रश्न -1)-484
गोपाल सिंह चौहान (कुल प्रश्न -1)-656
शुशील कुमार तिवारी (कुल प्रश्न -1)-658
सचिन यादव (कुल प्रश्न -1)-1669
रामनिवास रावत (कुल प्रश्न -2)-1828,330,
शैलेन्द्र जैन (कुल प्रश्न -2)-1298 पशुपालन,976
राजकुमार मेव (कुल प्रश्न -1)-6429
दिनेश राय (कुल प्रश्न -3)132 ,221,732
यादवेंद सिंह-(कुल प्रश्न -1) 51
सुशील कुमार तिवारी (कुल प्रश्न -1)202
संगीता (कुल प्रश्न -1)193
कुँवर सौरभ सिंह (कुल प्रश्न -1)-31
विश्वाश सारंग (कुल प्रश्न -1)-13
मति शालिनी त्यागी (कुल प्रश्न -1)-216
मोती कश्यप (कुल प्रश्न -1)117
निशंक जैन (कुल प्रश्न -1)242
नीलेश अवस्थी (कुल प्रश्न -1)76
जयवर्धन सिंह (कुल प्रश्न -2)272,1239
बहादुर सिंह चौहान (कुल प्रश्न -1)-6140

(लिस्ट केदार सिरोही की फेसबुक वॉल से साभार)

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