पढ़ाई के साथ-साथ बच्चे सीख रहे कबाड़ से कलाकारी

घर की बेकार चीजों से सजावटी सामान बना हुनर दिखा रहे बच्चे। कोई बेकार पानी की बोतल से बनाता है गुलदस्ता तो कोई कपड़ों से कतरन से बनाता है कठपुतली

पढ़ाई के साथ-साथ बच्चे सीख रहे कबाड़ से कलाकारी

मुजफ्फरनगर। कोई भी चीज बेकार नहीं होती है। इस बात को साबित कर रही हैं जनपद के एक स्कूल प्रधानाध्यापिका और वहां की शिक्षिकाएं। इन लोगों ने बच्चों का हुनर निखारने की अनोखी पहल शुरू की है। इस स्कूल के बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ घर की बेकार चीजों से सजावटी सामान बनाकर अपना हुनर दिखा रहे हैं।

अक्सर देखने में आता है कि सामानों को उपयोग करने के बाद उसके डब्बे, बोतल, अखबार बेकार हो जाते हैं। हम लोग उनको फेंक देते हैं। उनकी जगह कूड़ेदान में हो जाती हैं। लेकिन जपनद के विकास खंड सदर मुजफ्फरनगर के गांव निराना के प्राथमिक विद्यालय के बच्चे घर के बेकार सामानों से सजावटी सामान और उपहार बनाकर यह संदेश दे रहे कि कोई भी सामान खराब नहीं होता है।

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विद्यालय की प्रधानाध्यापिका प्रवीन शर्मा ने बताया, "अक्सर देखने में आता है कि लोग पानी की बोतल, मिठाई के डब्बे, कपड़ों की कतरन और शादी के कार्ड का उपयोग करने के बाद उसे बेकार समझने लगते हैं। कई बार हम लोग उसे रद्दी समझ कर कूडे़दान में डाल देते हैं।

लेकिन हम लोग इन्ही बेकार हो चुके सामानों से अपने स्कूल के बच्चों द्वारा सजावटी सामान और उपहार बनाना सिखाते हैं। हमारे स्कूल के बच्चे भी घर में पड़े बेकार सामान से एक से बढ़कर एक शानदार सजावटी सामान बनाते हैं।"

कक्षा पांच के छात्र शिवा ने बताया, "हम लोग अब घर पर उपयोग हो चुके सामानों को फेंकते नहीं हैं, उन्हें संभाल कर रख लेते हैं। जब मैडम कहती हैं तो हम लोग उसे विद्यालय लाते हैं। पानी के बोतल से मैं बहुत अच्छा फूल बना लेता हूं। हम लोगों की बनाई चीजों से पूरे स्कूल सजाया गया है।"

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वहीं कक्षा चार की छात्रा नजमा से ने बताया, "मेरे पर सिलाई का काम होता है। कई बार अम्मी कपड़ों के कतरन को फेंक देती थीं, क्योंकि उनका कहना था कि ये बेकार हैं।

लेकिन मेरे स्कूल में मैडम ने बताया कि कोई भी सामान बेकार नहीं होती है। हर चीज काम की होती है। मैंने घर के बेकार पड़े कपड़ों के कतरन से रंग बिरंगी कठपुतलियां बनाई हैं। मेरी कठपुतली की हर कोई तारीफ करता है।"

अभिभावक रेखा ने बताया, "हमारे घर में पहले थर्माकोल, पेपर, खराब प्लास्टिक की बोतलों को फेंक दिया जाता था। लेकिन अब हमारे बच्चे इन्हीं चीजों से खूबसूरत सजावटी सामान बना रहे हैं। हमें भी अच्छा लगता है कि हमारे बच्चों में एक अलग से हुनर पैदा हो रही है। स्कूल की मैडम लोग बहुत अच्छी हैं।"

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प्रधानाध्यापिका ने बताया, "हम लोग खाली समय का प्रयोग ऐसे रचनात्मक कार्यों में लगाते हैं। मेरा मामना है कि घर का कोई भी सामान खराब नहीं होता है। ऐसे कार्यों से बच्चों का कौशल विकास होता है। हमारे स्कूल के बच्चों ने बेकार पेपर से गुलदस्ते, वॉल हैंगिंग फोटो फ्रेम जैसे तमाम खूबसूरत सामान तैयार किए हैं।"

गांव के प्रधान मो. इत्खार का कहना है,"ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों में प्रतिभा की कमी नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र में बहुत प्रतिभाएं हैं। केवल उनकी परख करके प्रोत्साहन देने की है। हमारे गांव के स्कूल की शिक्षिकाओं की मेहनत से आज गांव का हर बच्चा हुनरमंद हो गया है। "

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