गोरखपुर में बच्चों की मौत के मामले में डीएम की जांच रिपोर्ट में इन 3 को ठहराया गया दोषी

गोरखपुर में बच्चों की मौत के मामले में डीएम की जांच रिपोर्ट में इन 3 को ठहराया गया दोषीआक्सीजन कंपनी कठघरे में..

गोरखपुर। गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत के मामले की जांच रिपोर्ट को जिलाधिकारी ने सौंप दिया है। इस जांच रिपोर्ट में डीएम ने तीन को ज़िम्मेदार ठहराया है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, ऑक्सीजन सिलेंडर सप्लाई करने वाली कंपनी पुष्पा सेल्स और ऑक्सीजन यूनिट के इंचार्ज डॉक्टर सतीश को लापरवाही का जिम्मेदार हैं।

जिलाधिकारी की रिपोर्ट में ऑक्सीजन सप्लायर कंपनी को भुगतान न होने के पीछे वित्तीय अनियमितता करने की मंशा का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया कि कंपनी ऑक्सीजन सिलेंडर की सप्लाई रोकने के लिए जिम्मेदार है। मासूम बच्चों की जिंदगी को देखते हुए कंपनी को ऑक्सीजन सिलेंडर की सप्लाई नहीं बंद करनी चाहिए थी।

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रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि मामले को लेकर डॉ. सतीश को लिखित रूप से अवगत भी कराया गया था, लेकिन उन्होंने ऑक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति में बाधा पैदा की। वह ऑक्सीजन सिलेंडर की सप्लाई के लिए जिम्मेदार हैं, लिहाजा वह इसके लिए दोषी हैं। इसके अलावा स्टॉक बुक में लेनदेन का पूरा ब्योरा भी नहीं लिखा गया। सतीश की ओर से स्टॉक बुक का न तो अवलोकन किया गया और न ही उसमें हस्ताक्षार किया गया, जो सतीश की लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने इसको गंभीरता से नहीं लिया और घोर लापरवाही बरती।

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रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. राजीव कुमार मिश्रा, प्राचार्य- मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने मुख्यमंत्री के निरीक्षण को दौरान एक बार भी ऑक्सीजन के संकट की चर्चा नहीं की। यही नहीं 10 अगस्त को ही वह स्वयं भी छुट्टी पर चले गए। उन्होंने न तो स्वयं इस दिक्कत को गंभीरता से लिया और न ही अपने बाद के अधिकारियों को इससे उपाय पाने के लिए निर्देशित किया। इसलिए वह भी इसके लिए ज़िम्मेदार हैं।

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गोरखपुर में हुई इस त्रासदी के बाद स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने प्रिसिंपल राजीव मिश्रा को सस्पेंड कर दिया गया था। हालांकि मिश्रा ने इसके लिए ऑक्सीजन सप्लायर कंपनी को ही दोषी ठहराया था। इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने गोरखपुर का दौरा किया था।

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