कबाड़ में पड़ी पुरानी चीजों से बच्चों को दे रहे शिक्षा, ऐसे शिक्षकों किया गया सम्मानित

कन्नौज (यूपी)। गाड़ियों के टायर को लोग फेक देते हैं, लेकिन अगर वही बेकार टायर आपकी गद्दी बन जाए तो क्या बात है। यूपी के कई जिलों से आए बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने शहर के बोर्डिंग ग्राउंड पर शिक्षा में शून्य निवेश नवाचार को लेकर प्रदर्शनी लगाई। बेहतर काम करने वाले शिक्षिकों को सम्मानित भी किया गया।

इस कार्यक्रम में प्रदर्शनी लगाए प्राथमिक विद्यालय सरायप्रताप ब्लॉक सौरिख, कन्नौज के शिक्षक पंकज सिंह ने बताया, ''गाड़ी का टायरों को लोग फेंक देते हैं जिससे बरसात के दिनों में उनमें पानी भर जाता है और बीमारियां पनपती हैं। टायर को जलाने से प्रदूषण फैलता है। इसलिए हमने टायर से बच्चों के लिए खेलने की गाड़ी और बैठने के लिए गद्दी बनाई है। यह स्वच्छ भारत मिशन का भी साथ देगा।''

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आगे बताया, ''प्लास्टिक को लोग फेंक देते हैं, लेकिन इससे हम लोगों ने गुलदस्ते और गौरैया संरक्षण का इंतजाम किया है। विद्यालय परिवार ने मिलकर कुछ अन्य भी प्रयोग किए हैं।''


प्राथमिक विद्यालय नाहिली प्रथम ब्लॉक घिरोर जिला मैनपुरी से आए एक शिक्षक ने बताया, ''हमने ऐसी मुद्रा को भी संजोकर रखा है जो अब चलन में नहीं है। बच्चे पूछ देते हैं कि एक पैसा कैसा था या दस पैसा किस तरह का बना था। विदेशी सिक्के समेत काफी सिक्के हमारे पास हैं। इससे बच्चों को जानकारी मिलती है।''

आगे बताया, ''कन्नौज में कई टीएलएम लगे हुए हैं। शून्य निवेश से बच्चों को अधिक से अधिक जानकारी दे सकें, आपस में सीख सकें, यही इसका उद्देश्य है।''

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यूपीएस मंझना ब्लॉक शमशाबाद जनपद फर्रूखाबाद से आई शिक्षिका ओमी वर्मा ने बताया, ''शिक्षा में सुधार के लिए जीरो इन्वेस्टमेंट के तहत यह प्रदर्शनी लगाई गई हैं। इसमें सहारनपुर, कन्नौज, फर्रूखाबाद, अलीगढ़, मैनपुरी आदि जिलों से शिक्षक-शिक्षिकाएं आई हैं। ज्यादा से ज्यादा बच्चों को सरल तरह से सिखाना उद्देश्य है।''


उन्होंने आगे बताया, ''कार्टून विधा समाप्त होती जा रही है। जीवित रहे इसके लिए बेसिक विभाग में शुरू की है। जो बच्चे कार्टून में भविष्य बनाता चाहते हैं उनके लिए भी कारगर है। कार्टून के माध्यम से बच्चों को जल्दी याद हो जाता है। चेप्टर याद नहीं रहता। इस विधा से वेश तैयार होगा। इसमें कोई खर्च भी नहीं होगा।''

प्राथमिक विद्यालय माहरिया ब्लॉक गुगरापुर कन्नौज की ओर से सौर परिवार का मॉडल चर्चा का विषय रहा। उच्च प्राथमिक विद्यालय तिर्वागंज की प्रधानाध्यापिका वीना द्विवेदी ने ग्रह, हृदय की संरचना, स्वच्छ भारत मिशन आदि के मॉडल दिखाए।

डीएम रवीन्द्र कुमार ने बताया, ''सरकारी विद्यालयों में बहुत परिवर्तन आया है। वही सुविधाएं हैं जो प्राइवेट में होती है। हमारे जिले के कई विद्यालयों ने सिद्ध किया है और कई प्राइवेट स्कूल बंद हो गए हैं। प्रदर्शनी में गणित विषय, मात्रा का ज्ञान, वस्तुओं और एबीसीडी को सीखने के सरल मॉडल थे।''


डीएम ने आगे कहा, ''अधिकांश लोगों ने बहुत अच्छा काम किया है। बच्चों को बहुत लाभ होगा। शिक्षक-शिक्षिका आसानी से अपनी बात बच्चों तक पहुंचा सकेंगे। पहले इसमें वक्त लगता था और वह समझ भी नहीं पाते थे।''

आगे कहा,''नए प्रयोग के नाम पर निजी स्कूल बहुत सी फीस लेते हैं, लेकिन यहां के नवाचार शून्य निवेश पर हैं। नवाचारों की कोई सीमा नहीं है। शिक्षक-शिक्षकाएं 11 ही नहीं 100-200 नवाचार लेकर जाएं। पूरे देश में कन्नौज का नाम हो और एक्सपेयरीमेंट कर दें।''

बीएसए दीपिका चतुर्वेदी ने बताया, ''कन्नौज से 80, मैनपुरी से 15, एटा से दो, सहारनपुर से एक, फर्रूखाबाद से 10 और फतेहपुर को मिलाकर करीब एक सैकड़ा स्टाल शिक्षक-शिक्षिकाओं ने लगाए थे। इनको सम्मानित भी किया गया।''

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