गांव कनेक्शन विशेष : यूपी में जर्जर तार और बिजली की लुकाछिपी गाँवों की समस्या

गांव कनेक्शन विशेष : यूपी में जर्जर तार और बिजली की लुकाछिपी गाँवों की समस्याग्रामीणों से बिजली की आंख मिचौली खत्म ही नहीं हो रही।

स्वयं प्रोजेक्ट टीम

लखनऊ। प्रदेश सरकार गाँवों में 18 घंटे बिजली देने का दावा पूरा करने की कोशिश में है, मगर जर्जर तार, लो वोल्टेज और पुराने संसाधनों के कारण ग्रामीणों से बिजली की आंख मिचौली खत्म ही नहीं हो रही।

प्रदेश सरकार ने जिला मुख्यालय को 24 घंटे, तहसीलों को 20 घंटे और गाँवों को 18 घंटे बिजली आपूर्ति के निर्देश दिए हैं, मगर बिजली आपूर्ति करने में विभाग के अधिकारियों का पसीना छूट रहा है। इस सब में से सबसे बड़ी समस्या है पुराने ट्रांसफार्मर, सब स्टेशनों की कम क्षमता और विभागीय कर्मचारियों की कमी।

गाँवों को मिलने वाली बिजली से ग्रामीण कितना संतुष्ट हैं, और उनकी राय जानने के लिए गाँव कनेक्शन ने 11 जिलों में पड़ताल की।मेरठ के हस्तिनापुर ब्लॉक के गाँव रानीनंगला निवासी रतिराम (37 वर्ष) बताते हैं, “18 घंटे के दावे सिर्फ कागजों में चल रहे हैं, जब से सरकार बनी है एक दिन भी गाँव में पूरी बिजली नहीं मिली।”

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वहीं, पूर्वांचल से गोरखपुर के ब्रह्मपुर ब्लॉक के गाँव ब्रह्मपुर के कृष्णमोहन दुबे (39 वर्ष) ने बताया,“गाँव में बिजली आपूर्ति समय से नहीं है, रात में बिजली कभी बिजली आती है तो कभी नहीं, ऊपर से लो वोल्टेज की भी समस्या है। इसे दुरुस्त करने की जरूरत है।”

फिलहाल, उत्तर प्रदेश की विद्युत आपूर्ति भार करीब 15 हजार मेगावाट है, जो मई-जून की गर्मियों में 18-19 हजार मेगावाट तक पहुंच जाती है। जबकि इस दौरान राज्य के सरकारी ताप और पन बिजली परियोजनाओं से महज 4000-4,500 मेगावाट बिजली पैदा होती है। प्राइवेट बिजलीघरों का उत्पादन भी 5,000 मेगावाट के आसपास है।

केंद्र सरकार के बिजली घरों में यूपी का कोटा करीब 6,000 मेगावाट है, जिसमें उसे करीब 5,000 मेगावाट बिजली मिल रही है। इस तरह यूपी के पास करीब 14,500 मेगावाट बिजली का प्रबंध है। बाकी जरूरत पूरी करने के लिए उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने करीब 3,000 मेगावाट बिजली खरीद के दीर्घकालिक और अल्पकालिक करार किए हैं। इस तरह खरीदी गई बिजली कई बार काफी महंगी पड़ती है।

सिद्धार्थनगर के ग्रामीण क्षेत्र बढ़नी ब्लॉक के रामप्रसाद (40 वर्ष) बताते हैं, ‘‘गाँव में न दोपहर में बिजली रहती है, न रात में खाने या सोने के समय रहती है और जब आती है, तो लोकल फॉल्ट के नाम पर बार-बार कटौती और समस्या बढ़ा देती है।“

गोरखपुर के पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के मुख्य अभियंता एके सिंह बताते हैं,“लंबे समय से जर्जर तार, ट्रांसफार्मर में दिक्कत और सब स्टेशनों की कम क्षमता के कारण कुछ दिक्कतें आ रही हैं। अभी गाँवों को 16 घंटे बिजली आपूर्ति हो रही है। स्थानीय समस्या के चलते दो घंटे का अंतर हो रहा है। तहसील व जिला मुख्यालय को भी शासनादेश के अनुसार बिजली दी जा रही है। फाल्ट व मरम्मत कार्य के चलते अभी कुछ व्यवधान आ रहा है। काम तेजी से चल रहा है। शीघ्र ही सभी समस्याओं कासमाधान कर दिया जाएगा।“

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वेस्ट यूपी पावर कार्पोरेशन के एमडी अभिषेक प्रकाश बताते है सरकार के आदेशों को पूरा करने की कोशिश की जा रही है। कुछ जगह ओवरलोड या मेंटीनेंस के चलते यदि अघोषित कटौती हो रही है, तो संबंधित अधिकारी से बात शेड्यूल ठीक कराया जाएगा।

यूपी के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया बिजली विभाग के 21 हजार करोड़ रुपये के घाटे में होने के बावजूद राज्य सरकार विद्युत दरों में वृद्धि नहीं करेगी। बिजली चोरी और अनियमितता पर रोक लगाकर घाटे की भरपाई की जाएगी।

पूर्वांचल की बिजली आपूर्ति में कई रोड़े

गोरखपुर। पूर्वांचल की बिजली आपूर्ति में कई रोड़े हैं, इसमें जर्जर बिजली के तार, पुराने ट्रांसफार्मर और सब स्टेशन की कम क्षमता के अलावा कर्मचारियों की कमी महत्वपूर्ण समस्या है, जिन्हें दुरुस्त किए बिना जिला मुख्यालय से लेकर तहसील व गाँवों तक भरपूर बिजली आपूर्ति नहीं की जा सकती। हालांकि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की ओर से शासन स्तर पर इसकी भरपाई के लिए लगातार मांग भी की जा रही है।

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शहर के महादेव झारखंडी के गोरक्षनगर निवासी अभिमन्यु कुमार सिंह (उम्र 37 वर्ष) ने बताया, “शाम छह बजे से रात 11 बजे तक लो वोल्टेज की समस्या से काफी दिक्कत हो रही है। इलेक्ट्रानिक उपकरण खराब हो रहे हैं। घर में काफी सावधानी बरतनी पड़ रही है।” शासनादेश के अनुसार, जिला मुख्यालय को 24 घंटे, तहसीलों को 20 घंटे और गाँवों को 18 घंटे बिजली आपूर्ति करनी है, लेकिन पूर्वांचल में लंबे समय से बिजली व्यवस्था की हालत बदहाल है, जिसे अचानक दुरुस्त कर देना संभव नहीं है, लेकिन विभाग का प्रयास है कि यह शासनादेश के अनुसार बिजली आपूर्ति की जाए। इसके लिए बिजली आपूर्ति करने में विभाग को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।

बड़हलगंज ब्लॉक के खड़ेसरी निवासी शिवाकांत तिवारी (57 वर्ष) ने बताया, “16 घंटे बिजली मिल पा रही है। इस दौरान लो वोल्टेज से लेकर बिजली के आने-जाने का क्रम जारी रहता है। काफी दिक्कत हो रही है। रात 11 बजे से चार घंटे तक बिजली सुचारू रहती है।” ब्रह्मपुर ब्लॉक के ब्रह्मपुर निवासी कृष्णमोहन दुबे (39 वर्ष) ने बताया, “बिजली आपूर्ति ठीक ढंग से नहीं हो रही है, रात में खाने-पीने के समय बिजली के आने-जाने का क्रम जारी रहता है। लो वोल्टेज की भी समस्या बरकरार है। इसे दुरुस्त करने की जरूरत है।”

लो वोल्टेज व बिजली की आंख मिचौली से बढ़ी परेशानी

शाम छह बजे से रात दस बजे तक लो वोल्टेज की समस्या से शहरी व ग्रामीण अंचल के लोगों को जूझना पड़ रहा है। वहीं कहने को तो गाँवों में 18 घंटे की जगह ईमानदारी से 16 घंटे बिजली आपूर्ति की जा रही है, लेकिन शाम होते ही रात दस बजे तक गाँवों में बिजली की लुकाछिपी व आंख मिचौनी से लोग तंग आ चुके हैं। इसके अलावा गाँवों में जर्जर तार खेतों में लटके पड़े हैं, जिन्हें ठीक करने की सख्त दरकार है।

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गोरखपुर के पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के मुख्य अभियंता एके सिंह ने बताया शासनादेश के अनुसार मंडल के गाँव, तहसील व जिला मुख्यालय को बिजली आपूर्ति करने का प्रयास जारी है। लंबे समय से जर्जर तार, ट्रांसफार्मर में दिक्कत और सब स्टेशनों की कम क्षमता के कारण कुछ दिक्कतें आ रही हैं। अभी गाँवों को 16 घंटे बिजली आपूर्ति हो रही है। स्थानीय समस्या के चलते दो घंटे का अंतर हो रहा है। तहसील व जिला मुख्यालय को भी शासनादेश के अनुसार बिजली दी जा रही है।

पिछली सरकार की अपेक्षा ज्यादा मिल रही बिजली

गाजियाबाद। जिले के सभी ब्लाकों में स्थानीय लोगों और किसानों ने बिजली को लेकर अपनी राय व्यक्त की। भोजपुर में किसानों ने जहां योगी सरकार के 100 दिन के कामकाज में बिजली सप्लाई को लेकर प्रसन्नता व्यक्त की, वहीं लोनी ब्लाक के ज्यादातर किसान भी बिजली सप्लाई से संतुष्ट नजर आए। उधर, मुरादनगर में कुछ घटनाओं को लेकर बिजली विभाग से लोगों को शिकायत है, जबकि रजापुर ब्लाक में ज्यादातर किसान बिजली व्यवस्था से खुश नजर आए।

अगर कुल मिलाकर देखा जाए तो गाजियाबाद में ज्यादातर किसान योगी सरकार के बिजली व्यवस्था से संतुष्ट नजर आए। भोजपुर ब्लाक के अकबर अली (48 वर्ष) का कहना है, “पिछली सरकार की अपेक्षा वर्तमान सरकार ने बिजली व्यवस्था को लेकर अब तक जो भी काम किया है हम उससे बहुत संतुष्ट हैं।

गाँवों को 18 घंटे बिजली आज तक के इतिहास में किसी सरकार ने नहीं दी, लेकिन योगी सरकार गाँवों को 18 घंटे बिजली दे रही है। अब इससे किसान समय पर सिंचाई भी कर रहे हैं।” लोनी ब्लाक से सबसे युवा ग्राम प्रधान सोहित बिजली की सप्लाई को लेकर संतुष्ट नजर आए। रजापुर ब्लाक के नूरपुर गाँव के किसान महेंद्रपाल (50 वर्ष) का कहना है, “गाँवों में बिजली आने से हम बहुत खुश हैं। जानवरों की चोरी बहुत बड़ी समस्या थी इस क्षेत्र की बिजली आने व पुलिस टीम के लगातार गस्त करने से अब वो समस्या दूर हो गई है।”

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गाजियाबाद के मुख्य अभियंता सुनील गुप्ता ने बताया नए कनेक्शन के लिए शासन के द्वारा जो लक्ष्य तय किया गया था उसकी अपेक्षा 156 फीसदी टारगेट पूरा कर लिया गया है। 451 ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य हमें दिया गया था और विभाग द्वारा अब तक 476 ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई जा चुकी है। इसके साथ-साथ जिले में 10 नए बिजली घर बनकार तैयार कर चालू करा लिए गए हैं। गाजियाबाद के सांसद ने पिलखुंआ में बने 10वें आईडीपीएस बिजलीघर का उद्घाटन किया है। ये सभी कार्य पिछले 100 दिनों में पूरे किए गए हैं।

आदेश के बावजूद भी नहीं मिल रही समय से बिजली

कन्नौज। जिला मुख्यालय से करीब 28 किमी दूर गुगरापुर ब्लॉक क्षेत्र के भवानीपुर निवासी जयपाल वर्मा (36 वर्ष) कहते हैं, ‘‘बिजली का कोई समय नहीं है। आती-जाती रहती है। हम अपने खेत में पानी लगाने जाते हैं तो दो घंटे के काम के लिए चार घंटे बैठना पड़ता है।’’ कित्तियापुर निवासी गौतम दोहरे (48) वर्ष का कहना है, ‘‘गाँव में जब बिजली की जरूरत होती तब नहीं आती। शाम को खाने के समय भी बिजली नहीं आती।’’

दूसरी ओर क्षेत्र के मोहनपुर गाँव में पांच दिन से बिजली के तार और खंभे टूटे पड़े हैं। इनको सही नहीं किया गया है, जिससे ग्रामीण इलाकों की बत्ती गुल है। कन्नौज जिला मुख्यालय से करीब 70 किमी दूर बसे सौरिख ब्लॉक क्षेत्र के नरहा हविलिया निवासी विक्रम सिंह (28 वर्ष) कहते हैं, ‘‘बिजली करीब 16 घंटे आती है।’’ सेकूपुर निवासी रामपाल (45 वर्ष) बताते हैं, ‘‘लगभग 15-16 घंटे बिजली मिलती है, लेकिन कभी-कभी लगातार पांच-छह घंटे बिजली नहीं रहती है। जो परेशानी का सबब बनती है।’’ दूसरी ओर तिर्वा क्षेत्र में भी बिजली की कभी-कभी अघोषित कटौती होती है। इससे महिलाएं और बच्चे उबल जाते हैं। बुजुर्ग भी बेहाल हो उठते हैं।

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बिजली कटौती व लो वोल्टेज की समस्या ने जनता को रुलाया

लखनऊ। माल-मलिहाबाद फलपट्टी क्षेत्र को 21 घण्टे बिजली उपलब्ध कराने का दावा झूठ साबित हो गया। यहां 18 घंटे बिजली उपलब्ध कराने के लिए पुनः नया रोस्टर लागू किया गया है, फिर भी अघोषित कटौती के चलते महज 8 से 9 घंटे ही बिजली आपूर्ति की जा रही है।

माल निवासी किसान देवेंद्र सिंह(65 वर्ष) का कहना है, “किसानों को पर्याप्त बिजली न उपलब्ध हो पाने से धान की रोपाई, जानवरों का चारा अन्य प्रकार की फसलों को उगाने व उनकी सिंचाई करने में काफी दिक्कत हो रही है।” वहीं रामनगर निवासी श्रीराम (50 वर्ष) का कहना है, “बिजली की यही स्थित रही तो किसान भूखमरी की कगार पर पहुंच जाएगा।”

मोहनलालगंज के ग्राम पुरहिया निवासी कल्लु मिश्र (45 वर्ष) ने बताया, “फिलहाल तो लाइट पहले से सही आ रही है, लेकिन 18 घंटे पूरी लाइट नहीं आ रही है।” वहीं मलिहाबाद क्षेत्र के भुसौली गाँव निवासी पप्पू द्विवेदी ने बताया, “लाइट का रोस्टर सही नहीं है। किसान यूनियन के प्रदर्शन में बिजली विभाग के बड़े अधिकारियों ने 18 घंटे लाइट का आश्वासन दिया था, लेकिन वायदे के अनुसार विद्युत आपूर्ति नहीं की।” बीकेटी ब्लॉक के ग्राम दुघरा निवासी गोला बताते हैं, “बिजली से कोई शिकायत नहीं है। बिजली 24 घंटे आ रही है।”

बीकेटी के अधिशाषी अभियंता रामप्रकाश बताते है क्षेत्र में 24 घंटे विद्युत आपूर्ति की जा रही है। कोशिश है उपभोक्ताओं को किसी दिक्कत का सामना न करना पड़े।

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खोखले दिख रहे सरकार के वादे

बागपत। योगी सरकार ने गाँवों को 18 घण्टे बिजली देने की घोषणा तो की थी लेकिन इसका असर जनपद बागपत के ग्रामीण इलाकों में नहीं दिख रहा है। यहां पर मात्र 10 से बारह घण्टे ही बिजली की आपूर्ति की जा रही है, जिससे गर्मी के दिनों में लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बड़ौत निवासी राहुल चौहान (45 वर्ष) ने बताया, “सरकार के सारे वादे खोखले नज़र आ रहे हैं। बड़ौत तहसील है, जिसमें 20 घंटे क्या 12 घंटे भी आपूर्ति नहीं हो रही।” दहा गाँव निवासी अजय कुमार (51 वर्ष ) ने बताया, “गाँव में 18 घंटे का वादा था। हमें तो आज भी 10 घंटे ही बिजली मिलती है। अगर ट्रांसफार्मर खराब हो जाता है तो कई कई दिन लग जाते हैं।”

सौ दिन में बदले 760 ट्रांसफार्मर

एटा। जनपद में योगी सरकार के 100 दिन के कार्यकाल में विद्युत आपूर्ति सही रही। शहर, कस्बों व देहात क्षेत्रों में रोस्टर के मुताबिक बिजली आपूर्ति दी जा रही है। विद्युत उपकरणों के बदलने की तो शहर व कस्बाई क्षेत्रों में विद्युत उपकरण बदलने में दो से तीन दिन लग रहे हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में काफी शिकायतों के बाद भी विद्युत उपकरण नहीं बदले जाते। विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक, 100 दिन में तकरीबन 760 विद्युत ट्रांसफार्मर बदले जा चुके हैं।

पिछले एक पखवाड़े को छोड़ दिया जाए तो जनपद के निधौलीकलां, मारहरा, अलीगंज, जैथरा, जलेसर, शीतलपुर, सकीट व अवागढ़ ब्लॉक में विद्युत सप्लाई 16 से 18 घंटे मिल रही है। जलेसर ब्लॉक ताज एरिया में होने के कारण यहां बिजली का रोस्टर 20 से 22 घंटे का है।

जलेसर निवासी अजय प्रताप (38 वर्ष) का कहना है, ‘‘ताज एरिया में होने के कारण जलेसर में बिजली की समस्या कम रहती है। यहां पहले भी 20 से 22 घंटे बिजली मिला करती थी।” वहीं अलीगंज में विद्युत सप्लाई 18 से 20 घंटे मिल रही है। आंधी व बारिश के दौरान बिजली आपूर्ति में गड़बड़ी हो जाती है।

अलीगंज निवासी रानू चौहान (28 वर्ष) कहते हैं, ‘‘योगी सरकार के 100 दिनों में अलीगंज में बिजली की सप्लाई अच्छी मिली हैं, 18 से 20 घंटे बिजली मिल रही है।” शीतलपुर ब्लॉक के समसपुर गाँव में पिछले कई रोज से विद्युत ट्रांसफार्मर फुंके हुए हैं, लेकिन वह अभी तक नहीं बदले गए। गाँव के इनाम सिंह (55 वर्ष) कहते हैं, ‘‘कई बार विद्युत अधिकारियों से शिकायत की लेकिन ट्रांसफार्मर नहीं बदला गया।”

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विद्युत विभाग के एसडीओ आदित्य पांडे ने बताया जो भी शिकायतें विद्युत उपकरण की मिलती हैं, उनका 48 घंटें में समाधान करा दिया जाता है, रोस्टर के मुताबिक बिजली आपूर्ति दी जा रही है।

अलीगंज के जेई अमित गुप्ता ने बताया अलीगंज क्षेत्र में 100 दिन में शिकायत के बाद 30 ट्रांसफार्मर बदले जा चुके हैं, शिकायत मिलने के बाद 48 घंटे में विद्युत उपकरण सही करा दिए जाते हैं, सबसे अधिक शिकायतें सरकारी टयूबवेल की रहती हैं।

मरम्मत के नाम पर बिजली की कटौती

मेरठ। गर्मी के मौसम में बिजली लोगों के साथ खूब आंख मिचैली खेल रही है। शहर से लेकर देहात तक रोजाना बिजली की अघोषित कटौती और लो वोल्टेज ने जीना मुहाल कर दिया है। शहर की कुछ कालोनियों में मेंटीनेंस के नाम पर कई-कई घंटे बिजली काट ली जाती है।

हस्तिनापुर ब्लाक के गाँव रानीनंगला, पाली, लतीफपुर, गणेशपुर आदि में रात और दिन में मिलाकर करीब 10 घंटे भी बिजली आपूर्ति नहीं हो पा रही है, जिसके चलते जहां एक और धान की रोपाई लेट हो रही है, वहीं गन्ना भी सूखने के कगार पर है। दिन में जितनी देर बिजली आती है। गणेशपुर निवासी बरण सिंह (43 वर्ष) बताते हैं, “पहले ही धान की रोपाई लेट हो चुकी है, जो रोपाई हुई भी है वो सूखने की कगार पर है।”

इन कालोनियों में भी कटौती

शहर क्षेत्र की जाकिर कालोनी, श्यामनगर, शिवशक्तिनगर कालोनी में भी दो-दो घंटे तक बिजली की कटौती हो रही है। जाकिर कालोनी निवासी सादाब (32 वर्ष) ने बताया, “ईद तक तो लाइट ठीक थी, लेकिन पिछले दो दिनों से तीन-तीन घंटे तक बिजली कटौती ने रुला कर रख दिया। बिजलीघर में शिकायत की तो मेंटीनेंस बताकर उन्हें टरका दिया गया।”

वेस्ट यूपी पावर कार्पोरेशन के एमडी अभिषेक प्रकाश ने बताया सरकार के आदेशों का पालन करने की कोशिश की जा रही है। कुछ जगह ओवरलोड या मेंटीनेंस के चलते यदि अघोषित कटौती हो रही है, तो संबंधित अधिकारी से बात शेडयूल ठीक कराया जाएगा।

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कब आती है कब जाती है, कुछ पता नहीं चलता

सिद्धार्थनगर। जनपद में बिजली आपूर्ति का हाल बहुत खराब है। यहां बिजली कब आए कब जाए कुछ पता नहीं रहता। जिला मुख्यालय से 50 किमी दूर पश्चिम में स्थित बढ़नी ब्लाक में घंटों अघोषित बिजली कटौती से उपभोक्ता बेहाल हैं। तहसील मुख्यालय पर मात्र 10 से 12 और ग्रामीण इलाकों में मात्र 8 से 10 घंटे ही बिजली आपूर्ति मिल पा रही है।

ग्रामीण क्षेत्र बढ़नी ब्लाक के निवासी रामप्रसाद (40 वर्ष) बताते हैं, ‘‘यहां तो बेसमय बिजली आती है। न दोपहर में रहती है, न रात में खाने या सोने के समय रहती है और जब आती है, तो लोकल फाल्ट के नाम पर बार-बार कटौती कर और समस्या बढ़ा देती है।’’इस सन्दर्भ में अधिशाषी अभियन्ता से सम्पर्क करने का प्रयास किया गया तो मोबाइल बंद था।

शहर में 14 तो गाँव में सिर्फ 10 घंटे मिल रही बिजली

औरैया। बिजली की आंख मिचौली से जिले के लोगों का जीना दूभर हो गया है। बिजली के समय न आने से शहर के कलकारखाने जहां नहीं चल पा रहे है, वहीं ग्रामीण क्षेत्र में किसानों की फसलों की सिंचाई नहीं हो पा रही है। 24 घंटे बिजली देने का वादा करने वाली योगी सरकार के दावे जिले में खोखले साबित हो रहे हैं। ब्लाक सहार के गाँव पुर्वा दानशाह निवासी राकेश कुमार (45 वर्ष) बताते हैं, “बिजली की आंख मिचौली के कारण फसल की सिंचाई भी समय से नहीं हो पा रही है।”

अधिशाषी अभियंता दीपक कुमार ने बताया शहर में 20 तो ग्रामीण क्षेत्र में 16 घंटे विद्युत आपूर्ति की जा रही है। कम आपूर्ति, समय से न होना ये सब कारण फाल्ट होना और ट्रांसफार्मर के फुंकने पर समस्या खड़ी हो रही है, जिसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।

रिपोर्टिंग टीम:-

गोरखपुर से जितेंद्र तिवारी, मेरठ से सुंदर चंदेल, सिद्धार्थनगर से त्रिशला पाठक, बागपत से मोहित सैनी, औरैया से इश्त्याक खान, गाजियाबाद से पंकज त्रिपाठी, लखनऊ से अश्वनी दिवेदी, कन्नौज से शुभम मिश्र, एटा से मो. आमिल, इलाहाबाद से ओपी सिंह, वाराणसी से विनोद शर्मा

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