बरेली: मलेरिया, टायफाइड ने इतना जानलेवा रूप कैसे ले लिया ?

बरेली में बुखार से हो रही मौतों ने दहशत सा माहौल बना दिया है। बीमारी के लिए स्वास्थ्य विभाग को जिम्मेदार बताया जा रहा है। लेकिन जब गांव कनेक्शन ने इसकी पड़ताल की तो सच्चाई कुछ और ही निकली।

बरेली: मलेरिया, टायफाइड ने इतना जानलेवा रूप कैसे ले लिया ?

अखा (बरेली)। बरेली का बुखार आजकल अखबारों की सुर्खियों में है। डॉक्टर साफ कर चुके हैं कि ये कोई रहस्यमयी बुखार नहीं है, बल्कि मलेरिया और टायफाइड है। ऐसे में ये सवाल भी उठता है कि सैकड़ों लोग इस बुखार की चपेट में आये कैसे, इसके लिए जिम्मेदार कौन है ?

बरेली जिला मुख्यालय से ४० किमी दूर मझगवां ब्लॉक के गांवों में बुखार पीड़ितों की संख्या सबसे ज्यादा है। 67 गांवों 1000 से ज्यादा लोग इस संक्रमिम बुखार की चपेट में जबकि 19 जान गंवा चुके हैं। संक्रिमत गांवों में 17 तो इसी ब्लॉक के हैं।

गांव के बाहर हरे रंग के बोर्ड लिखा है गांव अखा। गांव की आबादी लगभग 1000 है। गांव के अंदर घुसते ही एक तालाब मिला, जिसके चारों ओर गंदगी फैली हुई है। सड़क भी कूड़े से पटी पड़ी है, नाली का पानी बह रहा है। नालियां बजबजा रही हैं। इसी गांव के 30 वर्षीय राजीव की मौत पिछले दिनों बुखार के कारण हो गयी थी।


राजीव की मौत के बारे में हम पता लगाने के लिए उसके घर पहुंचे, जहां मिट्टी के टीले पर राजीव के चाचा सुभाष सिंह (45 वर्ष) बैठे हुए हैं। उन्होंने हमें बताया "कुछ दिन पहले हमारे भतीजे को बुखार आया था, वो बुखार तीन-चार दिन रहा। दवाई हम यहीं गांव के पास के डॉक्टर से लेते रहे। दवाई खाने पर बुखार उतर जाता था। लेकिन एक दिन जब राजीव नहाने के बाद खाना खाने बैठा तो उसे उलझन महसूस हुई। मामले की गंभीरता लेते हुए हम उसे प्राइवेट अस्पताल लेकर गये। अस्पताल के गेट पर ही वो गिर गया, फिर कभी उठ नहीं पाया।"

इलाज में देरी का कारण पूछने पर कहते हैं "गांव वाले डॉक्टर के पास दिखाने से वह ठीक हो जा रहा था तो हमने सोचा कि और कहीं क्या दिखाएं।" लेकिन सुभाष सिंह को अब इसका अफसोस है।

ये भी पढ़ें- बरेली और बदायूं में मलेरिया, टायफाइड से अब तक 19 की मौत, 1063 लोग चपेट में

राजीव के घर से कुछ दूरी पर गंदी नालियों के किनारे एक 12 साल का विकास का घर है जो पिछले 20 दिनों से बुखार की चपेट में है। विकास के पिता पर्वत (45) बताते हैं "हमारे बेटे को 20 दिन से बुखार आ रहा है। हम यहीं के डॉक्टर को दिखा रहे हैं। दवाई खाने से बुखार उतर जाता है। एक्सरे भी करवा लिया है।" एक्सरे क्यों करवाया और किसे दिखाया तो बोलते हैं "हमने सोचा करवा लेते हैं, कहीं पेट में कोई दिक्कत तो नहीं। एक्सरे अभी किसी को दिखाया नहीं है।"

इस घर के कुछ दूरी पर अपने घर के बाहर एक बुज़ुर्ग महिला बैठी हैं जिनका नाम सुधा (70), उनका नाती भी इसी बीमारी की चपेट में है। सुधा बताती हैं "हमारे नाती (उनकी लड़की का बेटा) को दो-तीन दिन से बुखार आ रहा है। गांव के डॉक्टर को दिखा रहे हैं। दो दिन से इसके पापा आए नहीं हैं तो कौन ले जाए। घर में हम और बहू हैं।"


गांव के लोग जिस डॉक्टर पर इतना विश्वास कर रहे हैं हम उनसे मिलने के लिए पहुंचे। गांव के बाहर ही सड़क किनारे टीन के शटर वाली दुकान में एक मेज पर ढेर सारी दवाइयां रखी हैं, एक कुर्सी पड़ी है। दवा लेने वालों की भीड़ लगी है। दुकान के भीतर एक हरे रंग का पर्दा लगा है और उसके पीछे एक बेंच पड़ी है। डॉक्टर साहब अभी कहीं गये हैं।

थोड़ी दूर पर ऐसा ही एक और क्लीनिक है। वहां के डॉक्टर से जब हमने बात करने की कोशिश की तो उन्होंने व्यस्तता की बात कहके पीछा छुड़ा लिया और नाम भी नहीं बताया। लेकिन सुधा देवी ने बताया कि ये बंगाली डॉक्टर हैं, हम इन्हीं से इलाज करवाते हैं।

गांव में गंदगी को देखकर ऐसा लगता है कि यहां कई महीनों से सफाई ही नहीं हुई है। इस बारे में गांव के ही हरिनंदन (55) कहते हैं "गांव में सफाई न जाने कबसे नहीं हुई है। इसका अंदाजा आप नाली देखकर लगा सकते हैं। सफाईकर्मी अपने मन का है, कभी उसका मूड हुआ तो सफाई कर जाता है।" हरिनंदर आगे बताते हैं कि बीमारी फैलने के बाद स्वास्थ्य टीम है, दवाइयां भी बांटी गयीं।"

ये भी पढ़ें- ग्राउंड रिपोर्ट: सीतापुर में रहस्यमयी बुखार से हुई मौतों का सच क्या है ?

"अखा गांव के हर घर में बुखार पीड़ित मिल जाएगा। एक महीने में बड़े, बच्चों को मिलाकर 30-35 लोगों की मौत भी हो चुकी है।" सुभाष सिंह ने बताया।

इसी ब्लॉक के गांव जैनपुर कदराबाद में भी कई लोग बुखार से पीड़ित हैं। गांव में प्रवेश करते ही एक पीपल का पेड़ है जिसके नीचे कई लोग बैठे बातें कर रहे थें। उन्हीं लोगों में से बद्रीप्रसाद (65) कहते हैं "भैया पूछो, मत यहां कोई बचा ही नहीं जिसे बुखार न हो। मुझे खुद पिछले पांच दिनों से बुखार है, उतर ही नहीं रहा।" दवा के बारे में पूछने पर कहते हैं "अब कौन इतनी दूर जिला अस्पताल दवा लेने जाएगा। यहीं दवा ले रहे हैं।"


इस गांव की भी वही हाल है। चारों ओर नालियां बजबजा रही हैं। गांव के ही राजेंद्र सिंह (45), उनकी पत्नी और बेटे को भी काफी दिनों से बुखार आ रहा है। राजेंद्र बताते हैं "हमें, हमारी पत्नी रामबाला (40) बेटे अभिषेक (15 वर्ष) को काफी दिनों से बुखार आ रहा है। लगभग 10 हजार रुपए तो दवा में बर्बाद हो चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई राहत नहीं है।" सरकारी अस्पताल जाने की बात पर बोले "100-200 रुपए लग जाते हैं जाने और आने में। कौन जाए वहां।"

गांव में लोगों की बीमारियों के प्रति लापरवाही के बारे में आंगनबाड़ी कार्यकत्री मीरा देवी बताती हैं " गांव के काफी लोग बुखार से पीड़ित हैं और इसकी वजह समय पर इलाज न करवाना भी है। गांव में सफाई कभी-कभी हो जाती है। छिड़काव अभी तक तो नहीं हुआ है। दवाई बांटने के लिए गांव में अभी तक कोई टीम नहीं आयी है। गांव के लोगों में जागरुकता की कमी है।


हम बुखार के मरीजों की स्थिति जानने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मझगवां पहुंचे। स्वास्थ्य केंद्र पर खूब भीड़ थी। पर्चा बनने वाले काउंटर पर धक्का-मुक्की जैसी स्थिति थी। "अब स्थिति काबू में आ रही है। एक हफ्ते पहले नए और पुराने मरीज़ों को मिलाकर 1500 तक मरीज़ आ जाते थे लेकिन अब यह संख्या 1000 हो गयी है। इतने मरीज़ों को देखने के लिए इस अस्पताल में चार डॉक्टर हैं। हमारा एक डॉक्टर एक दिन 300-400 तक मरीज़ों को देख रहा है।" प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. वैभव राठौर बताते हैं।

ये भी पढ़ें- दिमाग़ी बुखार के सबसे बड़े शिकार वो नहीं जो मर गए, बल्कि वो हैं जो बच गए

बीमारी फैलने की वजह पूछने पर डॉ. वैभव थोड़ा नाराज होते बताते हैं "गाँव में सबसे पहले बीमारी फैली क्यों? क्योंकि प्रधान ने सही समय पर सफाई नहीं करवाई थी। सही सफाई न होने के कारण बारिश के समय स्थिति बिगड़ जाती है। यह बुखार टायफाइड, मलेरिया है जो कि मच्छर से फैलता है और मच्छर गंदगी में होता है। अगर यह गंदगी न होती और दवाई का छिड़काव हुआ होता तो इतने लोग बुखार की चपेट में नहीं आते।"

वहीं मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बरेली जिले का निरीक्षण किया। बुखार के मामले में लापरवाही न बरते जाने की सलाह दी। जबकि बरेली के जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. पंकज कुमार जैन को सस्पेंड किया गया है और नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक कुमार को पद से हटाया गया है। बरेली जिला अस्पताल के महिला व पुरुष मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को कार्य में लापरवाही न बरतने की चेतावनी दी गई है।

गंदगी और दवाई न छिड़के जाने की वजह पूछने के बारे में खण्ड विकास अधिकारी (बीडीओ) एपी वर्मा मझगवां बताते हैं "अगले दो-तीन दिनों में सभी गांव में सफाई और दवा का छिड़काव हो जाएगा।"

इन ब्लॉक के इतने गांवों में हैं बुखार पीड़ित

ब्लॉक गांव

मझगवां 18

फरीदपुर 14

विथरी 7

रामनगर 5

कुआडंडा 3

फतेहगंज 2

क्यारा 3

भेजीपुरा 1

मीरगंज १


Share it
Top