बीएचयू लाठीचार्ज : एसओ लाइन हाजिर, सीओ की छुट्टी, लेकिन किसके गले बंधेगी घंटी ? 

बीएचयू लाठीचार्ज : एसओ लाइन हाजिर, सीओ की छुट्टी, लेकिन किसके गले बंधेगी घंटी ? BHU में छात्र प्रदर्शन के दौरान आगजनी  

बनारस। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय परिसर में 'बढ़ती छेड़खानी' के खिलाफ सुरक्षा की मांग कर रही छात्राओं पर लाठीचार्ज के मामले पर शुरू हुआ बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एडीजी वाराणसी जोन विश्वजीत महापात्रा और कमिश्नर नितिन रमेश को बीएचयू मामले की जांच सौंपी है।


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एडीजी वाराणसी जोन विश्वजीत महापात्रा बताते हैं, "बीएचयू के छात्र-छात्रओं को बयान दर्ज कराया ज रहा है। बीएचयू में माहौल बिगड़ने के समय उपस्थित पुलिसकर्मियों से भी पूछताछ की जा रही है कि किन परिस्थितियों में पुलिसकर्मियों को छात्र-छात्राओं के ऊपर लाठी चार्ज करने की नौबत आई। बीएचयू मामले में प्रथमदृष्‍टया मामले को ठीक से हैंडल न करने के लिए लंका के थाना प्रभारी, भेलूपुर के सर्किल अधिकारी और एक एडिशनल सिटी मजिस्‍ट्रेट (एसीएम) को हटा दिया गया है। जांच की जा रही है जिसकी रिपोर्ट जल्द से जल्द भेजी जाएगी।"

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वाराणसी के कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण बताते हैं, "सभी पक्षों के बयान दर्ज कराए जा रहे हैं। जांच रिपोर्ट आने पर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए जल्द से जल्द शासन को जांच रिपोर्ट सौंपी जाएगी।"

छात्राओं का प्रदर्शन

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बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने विश्वविद्यालय में हुए हंगामे के बाद कहा कि छात्रों का हंगामा विश्वविद्यालय को बदनाम करने की साजिश है। शनिवार रात को परिसर हिंसा में बाहरी लोग शामिल थे। त्रिपाठी ने कहा कि छेड़खानी के घटना के दिन ही हमारे सुरक्षा अधिकारी ने एफआईआर दर्ज कर ली थी। हमने घटना की जांच के लिए उच्च स्तरीय जांच कमेटी बनायी है जो अपने काम में लगी हुई है। उन्होंने कहा, उपद्रव की घटना बाहरी लोगों की देन है। हमारे विश्वविद्यालय के छात्रावास में करीब 25 हजार छात्र रहते है और हमें इस बात की ख़ुशी है, वे उपद्रव में शामिल नहीं थे। कुछ लोगों को विश्वविद्यालय का मान लेना सही नहीं होगा। विश्वविद्यालय में बाहरी लोगों का प्रवेश तब से है जब से विश्वविद्यालय बना है। अब हम कोशिश करेंगे कि विश्वविद्यालय परिसर में बाहर के लोगों का आना-जाना बंद किया जाये।

जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्रा ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ और संपूर्णानंद विश्वविद्यालय सहित संबद्ध सभी महाविद्यालयों को सोमवार से बंद करने का निर्देश दिया है।

क्या था घटनाक्रम

विश्वविद्यालय परिसर में छात्राओं से बढ़ती छेड़खानी की घटनाओं के ख़िलाफ़ विद्यार्थी गुरुवार से ही विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। इस विरोध-प्रदर्शन की शुरूआत तब हुई जब कला संकाय की एक छात्रा के साथ हॉस्टल लौटते समय मोटरसाइकिल सवार तीन लोगों ने कथित तौर पर छेड़खानी की।

शिकायतकर्ता के अनुसार जब उसने उनके प्रयासों का प्रतिकार किया तो तीन लोगों ने उसके साथ गाली-गलौज की और उसके बाद भाग गए. छात्रा का आरोप है कि घटनास्थल से तकरीबन 100 मीटर की दूरी पर मौजूद सुरक्षा गार्डों ने उन लोगों को रोकने के लिये कुछ भी नहीं किया।

लाठीचार्ज में घायल छात्र- फोटो साभार BHU Buzz।

उसने अपने वरिष्ठ छात्रों को इस बारे में बताने की जगह वार्डन को घटना की जानकारी दी। जिस पर वॉर्डन ने उससे ही सवाल किया कि वह इतनी देर से हॉस्टल क्यों लौट रही थी। वॉर्डन के इस जवाब ने छात्रा के साथियों को नाराज़ कर दिया और वे गुरुवार की मध्यरात्रि को परिसर के मुख्य द्वार पर धरना पर बैठ गए।

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बीएचयू छात्राओं का आरोप है कि उन्हें परिसर में नियमित छेड़खानी करने वालों का सामना करना पड़ता है और विश्वविद्यालय प्रशासन असामाजिक तत्वों को रोकने के लिये कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।

पुलिस और बीएचयू प्रोफेसरों ने छात्राओं को शांत करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने अपना प्रदर्शन समाप्त नहीं किया और विश्वविद्यालय के कुलपति से आश्वासन की मांग की।

BHU कैंपस में चलती हुई बाइक।

1200 छात्र-छात्राओं पर केस

इस बीच वाराणसी पुलिस ने बीएचयू परिसर में हिंसक वारदात और शांति भंग के आरोपों के तहत 1200 अज्ञात छात्र-छात्राओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। वहीं यूनिवर्सिटी कैंपस में लाठीचार्ज के लिए पहली नजर में दोषी पाए गए लंका थाने के इंचार्ज, भेलूपुर के सीओ और एक अतिरिक्त सिटी मजिस्ट्रेट को हटा दिया गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पूरे मामले पर आईजी पुलिस से रिपोर्ट मांगी है।

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