मैनपुरी: 'मेरी बेटी आत्महत्या नहीं कर सकती, सीबीआई जांच हो'

साधना पांडेय उस बदनसीब लड़की की मां हैं, जो पढ़ाई में होनहार थी लेकिन अपने परिवार का सहारा न बन सकी। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी के भोगांव स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय के छात्रावास में रहकर 11वीं में पढ़ाई करने वाली अनुष्का पांडेय 16 सितंबर-2019 को स्कूल परिसर में ही फंदे से लटकती मिली।

Neetu SinghNeetu Singh   24 Sep 2019 12:00 PM GMT

मैनपुरी: मेरी बेटी आत्महत्या नहीं कर सकती, सीबीआई जांच हो

लखनऊ। "मैं तब तक भूख हड़ताल पर बैठी रहूंगी जब तक मेरी बेटी को न्याय नहीं मिलेगा। मेरी बेटी तनाव में मरने वालों में से नहीं थी। दसवीं में उसके 93 प्रतिशत नम्बर आये थे। मेरी इतनी होनहार बेटी चली गयी मुझे सिर्फ न्याय चाहिए," बेटी की मौत के बाद न्याय के लिए भूख हड़ताल पर बैठी माँ साधना पांडेय ने फोन पर गाँव कनेक्शन से कहा।

साधना पांडेय उस बदनसीब लड़की की मां हैं, जो पढ़ाई में होनहार थी लेकिन अपने परिवार का सहारा न बन सकी। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी के भोगांव स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय के छात्रावास में रहकर 11वीं में पढ़ाई करने वाली अनुष्का पांडेय 16 सितंबर-2019 को स्कूल परिसर में ही फंदे से लटकती मिली। अनुष्का के परिवारवालों का आरोप है कि उनकी बेटी की हत्या हुई है।

घटना के बाद से ही जवाहर नवोदय विद्यालय की प्रिंसिपल सुषमा सागर फरार हैं। पुलिस की जांच से असंतुष्ट और भूख हड़ताल पर बैठा छात्रा का परिवार सीबीआई जांच की मांग कर रहा है।

"मेरी बेटी को मरे इतने दिन हो गये हैं लेकिन प्रशासन की तरफ से हमें अभी तक कोई संतोषजनक जबाब नहीं मिला। पुलिस से जब भी पूछो वो यही कह रही है कि हमारा प्रयास चल रहा है। रविवार की शाम फोन पर बिटिया से बात हुई तो बातचीत में ऐसा नहीं लगा कि वो परेशान है," मृतक छात्रा की मां साधना पांडेय ने बताया।

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अनुष्का की मौत की सीबीआई से जांच कराने की मांग हो रही है

जिस दिन अनुष्का की मौत हुई उस दिन के घटनाक्रम को बताते हुए साधना पांडेय ने कहा, "मेरी बच्ची नहीं रही, इसकी जानकारी मुझे स्कूल से किसी ने नहीं दी। मेरे एक रिश्तेदार ने सुबह जिला अस्पताल से फोन करके मुझे वहां बुलाया। जब मैं वहां पहुंची तब पता चला कि वो नहीं रही। मुझे रेप की आशंका है। हमने नामजद रिपोर्ट दर्ज़ करवाई है इसके बाद भी अभी तक कोई गिरफ्तार नहीं हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी हेर-फेर किया गया है।"

इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर मैनपुरी में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं, लोग सड़कों पर उतर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी जांच की मांग को लेकर आवाज तेज हो रही है।

इस मामले में अब तक हुई पुलिस की कार्रवाई की जानकारी देते हुए सीओ भोगांव प्रयांक जैन ने गाँव कनेक्शन को फोन पर बताया, "पोस्टमार्टम रिपोर्ट, स्कूली बच्चों के बयान और सुसाइड नोट के आधार पर जांच चल रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में लटकने और दम घुटने की वजह से मौत सामने आई है।"

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परिवारवालों का आरोप है कि अनुष्का के शरीर पर कई निशान थे और शव का रंग नीला पड़ गया था। इस पर सीओ ने कहा, "अगर शव पांच से सात घंटे तक रखा होता है तो ऊपर का खून नीचे आ जाता है जिससे रंग हल्का नीला या पीला पड़ जाता है। जांच चल रही है, जब स्पष्ट हो जाए मामला क्या है, तभी तो किसी को जेल भेजा जाएगा। सुसाइड नोट में भी उसने किसी नाम का जिक्र नहीं किया है। पुलिस और प्रशासन पर भरोसा रखिए, दोषियों को जरूर जेल भेजा जाएगा।"

स्थानीय पुलिस की जांच पर भरोसा न जताते हुए अनुष्का के मामा अंकुर पाठक ने कहा, "ये मामला सिर्फ मेरी भांजी की मौत का नहीं है, नवोदय विद्यालय में गाँव-देहात के वो बच्चे पढ़ते हैं जो पढ़ने में तो मेधावी होते हैं पर उनकी आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर होती है। अगर उनका बच्चा यहाँ सुरक्षित नहीं होगा तो वो कहाँ पढ़ाएंगे?" आगे कहते हैं, "जिलास्तर पर नवोदय विद्यालय की मैनेजमेंट कमेटी का अध्यक्ष जिलाधिकारी होता है, इसलिए प्रशासन क्यों चाहेगा कि सरकार की बदनामी हो?

अंकुर आगे कहते हैं, "मेरा सवाल सिर्फ एक ही है, ऐसा नवोदय विद्यालय में क्या होता है कि बच्चे मर रहे हैं या आत्महत्या कर रहे हैं और इन मौतों के लिए सरकार ने क्या प्रयास किये हैं?"

इंडियन एक्सप्रेस ने पिछले साल अपनी एक स्टोरी में बताया था कि जवाहर नवोदय विद्यालय परिसर में देशभर में 2013 से 2017 के बीच 50 बच्चों ने आत्महत्या की है। उन्हें यह जानकारी आरटीआई के जरिये मिली थी।

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अनुष्का की मौत के बाद न्याय की मांग करते लोग

अनुष्का के परिवार का आरोप है इस घटना में संदेह की स्थिति स्कूलवालों ने खुद पैदा की है। साधना पाण्डेय ने कहा, "स्कूल प्रशासन के अनुसार मेरी बच्ची ने फांसी लगाकर आत्महत्या की है, इसकी जानकारी मुझे स्कूल वालों ने क्यों नहीं दी? अगर मेरे एक रिश्तेदार अस्पताल में उस वक़्त न होते तो मुझ पता भी नहीं चलता मेरी बेटी के साथ क्या हुआ। आखिर ऐसा क्यों किया गया? दूसरा जिस कमरे में बच्ची ने फांसी लगाई वो मुख्य द्वार से पहला कमरा है उसके बगल के कमरे में 24 लड़कियाँ रहती हैं। वहां कभी भी कोई आ जा सकता है।"

जिला अस्पताल में प्रधानाचार्या सुषमा सागर और अनुष्का के परिवार के बीच इस बात को लेकर झड़प भी हुई कि उन्होंने इसकी सूचना परिवारवालों को क्यों नहीं दी। एक वीडियो में प्रिंसिपल सुषमा सागर कहती दिख रही हैं, "बच्ची का फोन नम्बर मेरे पास नहीं था, वहां जो टीचर हैं उनके पास है। घटना की सूचना जिलाधिकारी को दे दी। बच्चे की जान बचाना मेरा पहला कर्तव्य था, बाकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आ जाएगा।"

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रिश्ते में अनुष्का के मामा विजय मिश्रा सुबह साढ़े छह बजे जिला अस्पताल की इमरजेंसी में अपनी पत्नी को दिखाने गए थे। वहीं, उन्हें नवोदय के एक स्टाफ जो उनके जानने वाले थे वो अनुष्का के पास ले गये। विजय मिश्रा ने बताया, "बच्ची को देखकर मेरे तो हाथ-पैर फूल गये। उसके कई जगह निशान थे देखकर लग रहा था वो सो रही है। तब मैंने उसकी माँ को फोन करके अस्पताल में बुलाया तब तक उसके मरने की खबर किसी को नहीं थी। मैंने रजिस्टर चेक किया उसमें उसे सुबह 6.25 पर भर्ती किया गया था, रजिस्टर में उसे मृत दिखाया गया था।"

विजय मिश्रा कहते हैं, "अगर पुलिस को सुसाइड नोट मिला है, तो उसकी जानकारी परिवारवालों को क्यों नहीं दी? पंचनामा रिपोर्ट में उसके शरीर में कई चोट के निशान हैं और शव नीला था जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसका जिक्र ही नहीं है। बच्ची के परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है अनुष्का और छोटा भाई ये दोनों पढ़ने में बहुत मेधावी थे।"


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