मेरी बेटी के दोषियों तक को इस देश में फांसी नहीं हुई, बाकी बात छोड़िए: निर्भया की मां

मेरी बेटी के दोषियों तक को इस देश में फांसी नहीं हुई, बाकी बात छोड़िए:  निर्भया की मांज्योति (निर्भया) की माँ आशा देवी  

लखनऊ। “मेरी बेटी के साथ हुई घटना के आज पांच साल हो गये लेकिन देश में स्थिति जस की तस है। नियम बने, कायदे-कानून बने लेकिन उसका जमीनी असर देखने को नहीं मिला। मेरी बेटी की तरह अबतक न जाने कितनी बिटियां इस दुनिया से चली गईं, पर शायद ही किसी माँ-बाप को न्याय मिला हो। ज्योति (निर्भया) के दोषियों को अभी तक फांसी की सजा नहीं हुई, बाकी की तो बात ही छोड़ दीजिए।” इतना कहते हुए ज्योति सिंह (निर्भया) की माँ आशा देवी भावुक हो गईं।

16 दिसम्बर 2012 को दिल्ली में 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा ज्योति सिंह का बस में सामूहिक रेप के बाद अपराधियों ने सड़क पर फेक दिया था। घटना के 13 दिन बाद इलाज के दौरान ज्योति की सिंगापुर में मौत हो गयी। लखनऊ आए ज्योति के माता-पिता ने गाँव कनेक्शन से बातचीत की।

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ज्योति के पिता बद्रीनाथ सिंह ने कहा, “मैं इस देश का वो अभागा पिता हूँ जिसने इन हाथों से बेटी के पीले हाथ करने की बजाए उसको दफन किया। मेरी बेटी जब सड़क पर पड़ी थी तो न जाने कितनी गाड़ियाँ वहां से गुजरी, लोग शीशा उठाकर अपनी गाड़ी से देखकर निकलते गयें। कुछ लोग फोटो खींचते रहे, वीडियो बनाते रहे, मैं सभी से यही गुजारिश करूंगा आप जहां भी हों जैसे भी हों, जितना सम्भव हो सके इस तरह के मामलों में मदद के लिए जरुर आगे आएं।”

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ज्योति की माँ आशा देवी पिता बद्रीनाथ सिंह

बद्रीनाथ ने हर पिता की तरह अपनी बेटी के लिए तमाम सपने संजोए थे, बात करते-करते वो बार-बार भावुक हो रहे थे। उनके शब्दों में रोष था पर आवाज़ में भावुकता थी, “जिन हाथों से मैंने अपनी बेटी को खिलाया, पाल-पोसकर इतना बड़ा किया, आज उसके दोषियों को जिन्दा देखकर मेरा खून खौलता है। पर अफ़सोस मैं कुछ कर नहीं पा रहा हूँ। सभी से हाथ जोड़कर विनती करता हूँ, आप सब ऐसा माहौल बनाए जिससे बेटियों को घर से बाहर निकलने में सोचना न पड़े। हर पिता अपनी बेटी को बाहर पढ़ाने के लिए बेफिक्र होकर भेज सके, मेरी तरह उसे अपनी बेटी न खोना पड़े।”

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ज्योति के माता-पिता हस्ताक्षर करते हुए

साईकिल रैली में शामिल होने आये बद्रीनाथ का इतना कहते हुए गला भर आया, “बेटी के साथ हुई घटना के बाद मैं कुछ ऐसा करना चाहता था जिससे किसी और बेटी के साथ इस तरह की घटना न हो पाती, पर अफ़सोस मैं कुछ नहीं कर पाया। मैं पहला पिता नहीं हूँ जो इस तरह की घटना से दु:खी हो, मेरी तरह हजारों पिता आज इस तरह के दर्द से गुजर रहे हैं।”

बेटी के दोषियों को अभी तक फांसी की सजा न मिलने से आशा देवी और बद्रीनाथ दु:खी हैं। आशा देवी ने कहा, “जब सब जगह से आदेश हो गया है फिर भी अभी तक दोषियों को फांसी की सजा क्यों नहीं मिली, ये बात मेरे अभी तक समझ में नहीं आयी है। घटना के बाद सरकार ने जो भी वादे किए वो अभी तक पूरे नहीं हुए। सबसे जरूरी था हमारे गांव का अस्पताल और इंटर कालेज वो भे पूरा नहीं हुआ।”

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आशा देवी साइकिल रैली में बेटी की सुरक्षा के लिए अपील करते हुए

उन्होंने आगे कहा, “अस्पताल और स्कूल का उद्घाटन निर्भया के नाम से हो, दोषियों को जल्द से जल्द फांसी की सजा मिले। ये लड़ाई सिर्फ हमारी नहीं है, सभी की है क्योंकि हर पुरुष कहीं न कहीं महिला से जुड़ा हुआ है। चाहें वो बेटी हो, माँ हो, पत्नी हो, बहन हो कहीं न कही इन सबकी सुरक्षा करना हम सबकी जिम्मेदारी है।”

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रीता बहुगुणा जोशी से बातचीत करते हुए आशा देवी

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