चुप्पी तोड़ने के लिए निर्भया के गांव रवाना हुईं ये 15 लड़कियां 

Neetu SinghNeetu Singh   18 Dec 2017 12:05 PM GMT

चुप्पी तोड़ने के लिए निर्भया के गांव रवाना हुईं ये 15 लड़कियां कैबनेट मंत्री और निर्भया के माता-पिता साइकिल यात्रा को रवाना करते हुए 

लखनऊ। निर्भया की पांचवीं बरसी पर लखनऊ से 14 दिवसीय निर्भया ज्योति यात्रा को कैबिनेट मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। 15 लड़कियों द्वारा शुरू की गयी ये साइकिल यात्रा उत्तर प्रदेश के नौ जिले से होकर 29 दिसम्बर को निर्भया के पैतृक गांव मडोरा पहुंचेगी।

16 दिसम्बर 2012 को दिल्ली में हुई दर्दनाक निर्भया घटना के पांच साल पूरे हो गये। इस घटना के बाद महिलाओं और किशोरियों की उठी की आवाज़ से सुरक्षा के तमाम कठोर कानून और नई योजनायें बनी। बावजूद इसके निर्भया जैसी न जाने कितनी घटनाएं घटीं।

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महिलाओं की यौन हिंसा के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए साइकिल यात्रा का आयोजन रेड ब्रिगेड ट्रस्ट, निर्भया ज्योति ट्रस्ट नई दिल्ली, महिला आैर बाल विकास कल्याण, महिला समाख्या के साझा प्रयास से लखनऊ के 1090 से रवाना की गयी। इस रैली का उद्देश्य यूपी के नौ जिलों में जगह-जगह नुक्कड़ नाटक, हिंसा के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए प्रेरित करना है।

सेवानिवृत्त पुलिस निरीक्षक सत्या सिंह कैबनेट मंत्री रीता बहुगुणा जोशी को पुष्प भेट करते हुए

साइकिल यात्रा की रवानगी पर लखनऊ आयी निर्भया की माँ आशा देवी ने कहा, “मैं उन माँ बाप का शुक्रगुजार करती हूँ जिन्होंने अपनी बेटियों को निर्भया को न्याय दिलाने के लिए घर से बहार निकलने की आजादी दी है। मेरी बेटी तो इस दुनिया में नहीं रही लेकिन किसी और बेटी के साथ इस तरह की घटना न हो। ये साइकिल यात्रा मेरे गांव तक ये बेटियां लेकर जायेंगी, इससे समाज में बेटियों को आगे बढ़ाने का हिंसा के साथ आवाज़ उठाने का सन्देश जाएगा।”

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निर्भया की माँ आशा देवी

इस कार्यक्रम में आयीं महिला एवम बाल विकास की कल्याण की कैबिनट मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने कहा, “निर्भया घटना पूरे विश्व में एक साहस की प्रतिमूर्ति के तौर पर स्वीकार की गयी। शहर हो या गांव अब लड़कियां समझ गयी हैं कि उन्हें हिंसा सहना नहीं है बल्कि आवाज़ भी उठाना है। हर किसी को ये समझना होगा कि जब लड़कियां घर से बाहर निकलती हैं तो वो अपनी अस्मिता बेचने के लिए नहीं बल्कि सम्मान पाने के लिए निकलती हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “महिलाओं की सुरक्षा के लिए निर्भया फंड से केंद्र सरकार ने 83 करोड़ का बजट 50 गुलाबी बसों को चलाने के लिए दिया है। जल्द ही ये बसें महिलाओं के लिए चलनी शुरू हो जायेंगी। हमारी लड़ाई लिंग से नहीं मानसिकता से है, महिला हिंसा किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं होगी। ये साइकिल रैली की बेटियां समाज को हिंसा के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए प्रेरित करेंगी।”

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कैबनेट मंत्री रीता बहुगुणा जोशी कार्यक्रम के दौरान लड़कियों को हिंसा के खिलाफ चुप्पी तोड़ने के लिए प्रेरित करते हुए

साइकिल रैली में भाग ले रहीं अंकिता मित्रा (22 वर्ष) ने कहा, “हर एक लड़की आगे बढ़े, किसी भी लड़की को किसी से डरने की जरूरत नहीं है। एक समय था जब हम भी बहुत डरते थे पर जबसे बोलना शुरू किया है तबसे लड़कों ने हमें छेड़ना बंद कर दिया है। लोग दूर से ही देखकर कहते हैं इनसे मत बोलना ये रेड ब्रिगेड की तेज तरार जबाब देनी वाली लड़कियां हैं।” इस साईकिल यात्रा में अंकिता की तरह रेड ब्रिगेड की 15 लड़कियां शामिल है।

निर्भया के पापा बद्रीनाथ सिंह हस्ताक्षर करते हुए

रेड ब्रिगेड की ट्रस्टी पूजा विश्वकर्मा ने बताया, “निर्भया की याद में हमारी संस्था हर साल साइकिल रैली निकालती है, इस बार ये रैली बड़े स्तर पर निकल रही है। ये लड़कियां उदाहरण होंगी उन तमाम लड़कियों के लिए जो आज भी घर से बाहर निकलने में संकोच करती हैं।” वहीं कार्यक्रम में शामिल हुई महिला समाख्या की राज्य परियोजना निदेशक स्मृति सिंह ने कहा, “अगर समाज की हर बेटी हिंसा के खिलाफ आवाज़ उठाये तो ये घटनाएँ निश्चित तौर पर कम होंगी। जब तक हम खुद अपने लिए आवाज़ नहीं उठाएंगे सरकार की तमाम योजनायें हमारे लिए तब तक कुछ नहीं कर सकती हैं।”

रीता बहुगुणा जोशी निर्भया के माता-पिता को गुलदस्ता भेंट करते हुए

राजधानी लखनऊ से शुरू हुई ये 14 दिवसीय यात्रा उत्तर प्रदेश के नौ जिले रायबरेली, प्रातापगढ़, इलाहाबाद, भदोही, वाराणसी, गाजीपुर, मऊ होते हुए बलिया निर्भया के पैतृक गांव मडोरा कला में सम्पन्न होगी। यह यात्रा 702 किलोमीटर की है। इस कार्यक्रम में रेड ब्रिगेड ट्रस्ट के फाउंडर अजय पटेल, सेवानिवृत्त पुलिस निरीक्षक सत्या सिंह, निर्भया के माता-पिता, बलिया से आये रागिनी के माता-पिता, महिला समाख्या की टीम आदि लोग शामिल रहे।

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नुक्कड़ नाटक करती टीम

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