गन्ना बकाया: "चीनी मिल पर मेरा 6 लाख बाकी था, फिर भी मैं उधार लेकर इलाज करवा रहा था और 3 लाख के लोन पर ब्याज दे रहा था"

किसान आंदोलन के बीच गन्ना किसानों के बकाये का मुद्दा सुर्खियों में है। संसद में सवाल उठा है। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के किसानों के करोड़ों रुपए चीनी मिलों पर बकाए को लेकर नोटिस जारी किया है। सबसे ज्यादा बकाया यूपी की चीनी मिलों पर हैं, जहां लगातार तीसरे साल गन्ने का रेट नहीं बढ़ाया गया है। गन्ने के गढ़ पश्चिमी यूपी में प्रियंका गांधी किसान महा पंचायत भी कर रही हैं।

Arvind ShuklaArvind Shukla   15 Feb 2021 6:39 AM GMT

गन्ना बकाया: चीनी मिल पर मेरा 6 लाख बाकी था, फिर भी मैं उधार लेकर इलाज करवा रहा था और 3 लाख के लोन पर ब्याज दे रहा थायूपी लगातार तीसरे साल नहीं बढ़ा गन्ने का रेट, आज भी किसानों के 10 हजार करोड़ से ज्यादा चीनी मिलों पर हैं बकाया। फोटो- अरविंद शुक्ला

"पिछले साल हमारा चीनी मिल पर 6 लाख रुपए बकाया था। मैंने खेती और दूसरे खर्चों के लिए 3 लाख रुपए का केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) लोन लिया था जिस पर ब्याज दे रहा था। ऐसी खेती का क्या फायदा जिसमें समय पर बच्चों की फीस न दे सको, घर का खर्च उधार लेकर चले। मेरे परिवार में 15 एकड़ में गन्ने की खेती होती थी, इस बार रकबा घटा दिया है। अब 4 एकड़ में केला लगाएंगे," यूपी के गन्ना किसान आलोक मिश्रा ने बताया। आलोक, देश का चीनी का कटोरा कहे जाने लखीमपुर खीरी जिले के फत्तेपुर गांव में रहते हैं, जो खमरिया चीनी मिल के अंतर्गत आता है।

गन्ने के बकाया को लेकर आलोक कहते हैं, "पिछले साल जो मेरा बकाया था उसका भुगतान खमरिया चीनी मिल (गोविंद चीनी मिल) ने इस वर्ष किया है जबकि हमारा 3 लाख रुपए का गन्ना इस बार मिल जा चुका है। चुनाव के दौरान मोदी जी (नरेंद्र मोदी) लखीमपुर आए थे कह कहे थे, 14 दिन में गन्ने का भुगतान करवाएंगे, हम कहते हैं 14 महीने में ही पूरा भुगतान करवा दीजिए।"

यूपी समेत पूरे देश में गन्ना किसानों के बकाए के भुगतान के लिए एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को यूपी और महाराष्ट्र समेत 15 गन्ना उत्पादक राज्यों को 12 फरवरी को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश एसए बोबड़े की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के सामने दायर याचिका के मुताबिक 10 सितंबर 2020 तक देशभर के गन्ना किसानों का करीब 15,683 करोड़ रुपए बकाया है। इसमे सबसे अधिक 10,174 करोड़ रुपए उत्तर प्रदेश के किसानों का है। याचिका में कहा गया है कि गन्ने का भुगतान न होने से किसान आत्महत्या को मजबूर हो जाते हैं। बकाए का भुगतान न करने वाली चीनी मिलों को डिफाल्टर घोषित कर एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।

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इससे पहले 9 फरवरी को लोकसभा में एक सवाल के जवाब में उपभोक्ता, मामले खाद्य एवं सार्वजानिक वितरण मंत्रालय ने बताया 31 जनवरी 2021 तक देशभर की चीनी मिलों पर किसानों का 16,883 करोड़ रुपए बकाया है। अकेले चालू सीजन 2020-21 में सबसे ज्यादा यूपी की चीनी मिलों पर 7,555.9 करोड़, दूसरे नंबर पर कर्नाटक 3,585.18 करोड़ रुपए और तीसरे नंबर पर महाराष्ट्र के किसानों के मिलों पर 2,030.31 करोड़ रुपए बाकी हैं।

उपभोक्ता, मामले खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, "चीनी मिलों द्वारा गन्ना उगाने वाले किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान एक सतत प्रक्रिया है। सरकार की कोशिशों के बाद भुगतान लगातार बढ़ा है।"

31 जनवरी 2021 तक देशभर की चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का बकाया रकम 16883 करोड़ रुपए है। सोर्स- लोकसभा में 9 फरवरी सरकार का लिखित जवाब।

इसी बीच यूपी सरकार ने 15 फरवरी को गन्ने पेराई सत्र 2020-21 के लिए गन्ना मूल्य घोषित को घोषित किया लेकिन ये लगातार तीसरा साल है जब कोई कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। मौजूदा पेराई सीजन में सामान्य गन्ने का रेट 315 रुपए क्विंटल जबकि अगैती प्रजाति का रेट 325 रुपए निर्धारित किया गया है। अस्वीकृत प्रजाति का रेट 310 रुपए प्रति क्विंटल ही रहेगा।

साल 2019-20 और 2018-19 में भी गन्ने का यही रेट था। पेराई सत्र 2017-18 में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने गन्ने के राज्य परामर्शित मूल्य (एसएपी) में 10 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की थी। गन्ने का रेट न बढ़ने से गन्ना किसानों में मायूसी है।

गन्ने का एसएपी नहीं बढ़ाए जाने के संबंध में उत्तर प्रदेश के गन्ना विभाग ने जारी बयान में कहा कि भारत सरकार द्वारा चीनी का एक्स फैक्टी मूल्य 3100 रुपए निर्धारित होने के बावजूद एसएसपी के दर ये भुगतान होने पर चीनी की उत्पादन लागत 32.50 रुपए किलो आ रही है। महाराष्ट्र की चीनी मिलें कम उत्पादन लागत के चलते 28-29 रुपए किलो में बिक्री कर रही हैं, जिससे यूपी में कम रेट पर चीनी बेचने का दवाब है। वर्तमान पेराई सत्र में रिकवरी 11.30 से घटकर 10.60 प्रतिशत होने से चीनी उत्पादन की लागत भी 200 रुपए क्विंटल बढ़ गई है। कोरोना में कम मांग के करण 50 लाख टन का कैरी ओवर स्टॉक मिलों के गोदामों में था और इस पेराई सत्र का कैरी ओवर स्टॉक और वर्तमान पेराई सत्र के अनुमानित उत्पादन 105-110 लाख टन के चलते चीनी मिलों पर कम रेट पर चीनी बेचने का दवाब है। इसलिए चीनी के बाजार मूल्यों पर दबाव, कम रिकवरी के चलते उत्पादन लागत बढ़ोतरी, किसानों के भुगतान के लिए नगद तरसला की विषम परिस्थितियों को देखते हुए गन्ना मूल्य की दरों में बढ़ोतरी करना अनुकूल नहीं था।


बकाए के भुगतान पर यूपी के गन्ना विभाग ने आंकड़ा जारी करते हुए ये भी बताया है कि कैसे उनकी सरकार के पूर्व की सरकारों से ज्यादा भुगतान कराया है। आंकड़ों के मुताबिक बहुजन समाज पार्टी के पांच साल के कार्यकाल में 52,131 करोड़, समाजवादी पार्टी के 5 साल में 95,215 करोड़ का भुगतान किया गया। जबकि बीजेपी के मौजूदा चार साल कार्यकाल में अब तक 122,251 करोड़ भुगतान हो चुका है।

4 साल पहले एक कुंतल (क्विंटल) गन्ने की छिलाई 20 रुपए थी जो अब 40 है। एक लीटर डीजल 60 रुपए का था जो अब 80 के आसपास है। 2 साल पहले मैं साल भार में बिजली का 7000 रुपए बिल देता था पिछले साल 23700 रुपए दिया था। गन्ने की खेती और किसान दोनों खत्म होने वाले हैं।- कुलवीर सिंह, गन्ना किसान बिजनौर

चौधरी कुलवीर सिंह (60 वर्ष) यूपी के बिजनौर जिले के प्रगतिशील गन्ना किसान हैं वो कहते हैं, 4 साल पहले एक कुंतल (क्विंटल) गन्ने की छिलाई 20 रुपए थी जो अब 40 है। एक लीटर डीजल 60 रुपए का था जो अब 80 के आसपास है। 2 साल पहले मैं साल भार में बिजली का 7000 रुपए बिल देता था पिछले साल 23700 रुपए दिया था। गन्ने का रेट न बढ़ने का मतलब है कि रेट घटा दिया गया क्योंकि लागत तो तेजी से बढ़ रही है। ऐसे खेती खत्म हो जाएगी। मैं पिछले साल से गन्ने की खेती घटा रहा हूं।" कुलवीर सिंह के पास 25 एकड़ गन्ना था जिसे घटाकर वो अब 20 एकड़ कर रहे हैं।

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अपने गन्ने के खेत में कुलवीर सिंह, वो आधुनिक तरीकों से खेती करते हैं। कई जिलों के किसान उनके यहां सीखने भी आते हैं। फाइल फोटो

गन्ना किसानों को लेकर कोर्ट में लंबे समय से लड़ाई लड़ रहे राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के संयोजक वीएम सिंह ने गन्ने के बकाया और बकाए पर ब्जाय भुगतान आदि को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका लगाई है। जिस पर अगले हफ्ते सुनवाई हो सकती है। वीएम सिंह गांव कनेक्शन को बताते हैं, "जब तक चीनी मिलों पर 14 दिनों के बाद भुगतान पर ब्याज को लागू नहीं करवाया जाएगा वो किसानों का पैसा समय पर नहीं देंगे। हम लोग घरों का बिजली का बिल समय पर भरते हैं क्योंकि पता है कि अगर नहीं दिया तो कनेक्शन कट जाएगा, जुर्माना लगेगा और हो सकता है जेल भी हो जाएगी।"

किसानों को भुगतान में देरी पर सरकार ने लोकसभा में बताया, "पिछले तीन वर्षों में चीनी का उपभोग की मांग की तुलना में उत्पादन बढ़ता गया है, और चीनी के एक्स मूल्य में मंदी रही जिससे चीनी मिलों की नगदी पर प्रतिकूल असर पड़ा और किसानों की बकाए की राशि बढती गई है।"

किसानों के बकाए के भुगतान और शुगर मिल इंड्रस्टी को लेकर बात करने पर भारतीय शुगर के प्रेसिडेंट (टेक्निकल) और डेक्कन शुगर के वाइस प्रेसिडेंट (टेक्निकल) विक्रम शिंदे कहते हैं, "चीनी मिलें लगातार घाटे में जा रही हैं। एक टन रॉ गन्ने की कीमत 3,000 रुपए तक आती है जबकि चीनी बिक रही है 28 रुपए किलो। ऐसे में मिल कैसे चलेगी।" शिंदे के मुताबिक वो खुद महाराष्ट्र के सोलापुर में गन्ने की खेती करते हैं और वो हर साल 1,200 टन गन्ना चीनी मिल को देते हैं। शिंदे कहते हैं महाराष्ट्र में चीनी मिलों की हालत खराब है वहां तो एक महीना भी पैसा लेट हो जाए तो जेल जाने की नौबत आ जाती है। चीनी का रेट सरकार ने 31 रुपए किलो घोषित किया था लेकिन कई मिल वालों ने 28 रुपए में बेची है क्योंकि उन्हें किसानों के बकाए का भुगतान करना है।

"चीनी मिलें लगातार घाटे में जा रही हैं। एक टन रॉ गन्ने की कीमत 3,000 रुपए तक आती है जबकि चीनी बिक रही है 28 रुपए किलो। ऐसे में मिल कैसे चलेगी। सरकार को चीनी का रेट बढ़ाना चाहिए। सरकार ने गन्ने के रस से सीधे एथेनॉल बनाने की इजाजत दी है। तो आने वाले 3-4 वर्षों में गन्ना किसान और इंडस्ट्री के लिए गन्ने की खेती फायदेमंद होगी- विक्रम शिंदे, प्रेसिडेंट, भारतीय शुगर (टेक्निकल), सोलापुर, महाराष्ट्र

शुगर मिल इंड्रस्टी की हालत पर वीएम सिंह कहते हैं, "चीनी मिल वाले कहते हैं घाटा हो रहा है। अगर घाटा हो रहा है तो चीनी मिलों की संख्या इन्होंने कैसे बढ़ा ली। ये लोग सरकार से पैकेज लेते हैं और किसानों को इंतजार करवाते हैं।"

लोकसभा में दिए गए जवाब के मुताबिक सरकार ने गन्ना किसानों (Sugar cane farmers) के भुगतान को सुचारू रखने के लिए साल 2016-17 से लेकर 2020-21 तक इंडस्ट्री को अलग-अलग मदों में सॉफ्ट लोन, चीनी के रखरखाव और बफर स्टॉक को बनाए रखने के लिए 14,070 करोड़ से ज्यादा रुपए के पैकेज दिए हैं।

लोकसभा में सरकार ने बताया कि गन्ना किसानों को भुगतान के लिए उनके प्रयासों का क्या रिजल्ट रहा। सौजन्य, लोकसभा सवाल

किसानों के भुगतान को लेकर भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) ने दिल्ली में किसान आंदोलन से पहले यूपी के मुजफ्फरनगर में 20 दिन तक धरना दिया था। बीकेयू के मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक कहते हैं, "हमारी सरकार से मांग है कि बकाये का 14 दिन के अंदर भुगतान और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक गन्ने का रेट दिया जाए। किसानों के करोड़ों रुपए चीनी मिलों पर बाकी हैं। आज तक जितने भी पैकेज सरकार से जारी हुए हैं चाहे वो निर्यात का हो, साफ्ट लोन हो या फिर चीनी रखरखाव आदि से संबंधित वो किसान के नाम पर चीनी मिलों को ही मिले हैं।"

चीनी मिलों पर किसानों के बकाया के मुद्दे पर सियासत भी तेज हो गई है। 22 फरवरी को यूपी का बजट पेश किया जाएगा। इसी बीच कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी Priyanaka Gandhi पश्चिमी यूपी, जहां कि सियासत भी गन्ने से जुड़ी है वहां एक के बाद एक कई किसान महापंयाचतें कर रही हैं। पिछले दिनों उन्होंने प्रियंका गांधी ने ट्वीट किया, "काले कानूनों में किसान हितों का दावा करने वाली भाजपा ने यूपी के गन्ना किसानों की दुर्गति कर दी है। वादा था 14 दिन में भुगतान का लेकिन किसानों के गन्ने का 10,000 करोड़ रुपए का भुगतान बकाया है।"

धान-गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की तरह केंद्र सरकार गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) तय करती है। लेकिन यूपी समेत कुछ प्रदेश सरकारें इसके ऊपर राज्य परामर्श मूल्य (SAP) तय करती हैं। एफआरपी वह न्यूनतम दाम होता है जो शुगर मिलों को किसान को देना ही पड़ता है। अगस्त 2020 में केंद्र सरकार ने एफआरपी में 10 रुपए क्विंटल की बढ़ोतरी की थी।

देश में 493 चीनी मिलें चालू हालत में हैं जबकि 202 बंद पड़ी हैं। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा, 182 चीनी मिलें हैं। उत्तर प्रदेश में 120 चीनी मिल चालू हैं जबकि 37 बंद पड़ी हैं। इसके बाद कर्नाटक में 65 चीनी मिल चालू हैं।

चीनी मिल इंडस्ट्री sugar industry और गन्ने के खेती के भविष्य पर विक्रम शिंदे कहते हैं, "चीनी की मांग कम है। इसका उपाय है कि ज्यादा से ज्यादा बाई प्रोडक्ट बनाए जाएं। कई जगह एथेनॉल बनाया जाने लगा है। पहले चीनी बनने के बाद बाद बचे मोलासिस (शीरा) से ही एथेनॉल ethanol बन सकता था लेकिन अब सीधे रस से एथेनॉल बनाने की अनुमति मिली है। जिससे चीनी मिलों को काफी सहूलियत होगी। तो मैं मानता हूं कि आने वाले 3-4 साल में चीनी मिल इंडस्ट्री और गन्ना किसानों के लिए अच्छे दिन आएंगे।"

यूपी में गन्ना किसानों के भुगतान और पेराई सत्र को लेकर यूपी के गन्ना अधिकारियों को संबंधित प्रश्न भेजे हैं गए हैं। उनका जवाब मिलने पर हम इस रिपोर्ट को अपडेट करेंगे।

इनपुट -मोहित शुक्ला, कम्युनिटी जर्नलिस्ट

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