बलात्कार के बाद सीरीज पार्ट-3 'बिटिया जब घटना को याद करती है तो रोने लगती है'

सीरीज के तीसरे भाग में उस नौ साल की बेटी के माता-पिता की तकलीफ है जिनकी बच्ची के साथ 65 साल के व्यक्ति ने रेप किया था। ये माता-पिता नहीं चाहते इस घटना के संदर्भ में कोई भी उनकी बच्ची से बात करे, क्योंकि घटना का जिक्र होते ही बच्ची रोने लगती है। इसलिए इस भाग में पीड़िता के अभिभावकों से बातचीत की गई है।

Neetu SinghNeetu Singh   21 Nov 2019 9:16 AM GMT

बलात्कार के बाद सीरीज पार्ट-3

नीतू सिंह/मोहित शुक्ला

सीतापुर। "हमारी फूल जैसी बच्ची को उस आदमी ने ऐसा जख्म दिया है जिसे वो कभी नहीं भूल पायेगी। घटना के 3 साल हो गये हैं जब वो उसे याद करती है तो रोने लगती है। उसका दर्द मुझसे देखा नहीं जाता, लेकिन क्या करें, ये घाव जीवनभर के हैं।" दरिंदगी का शिकार हुई बच्ची की मां ने अपनी बेबसी और नाराजगी के साथ बात शुरु की।

ये उस मां की तकलीफ है जिनकी नौ साल की बेटी के साथ घर के ठीक सामने रहने वाले 65 साल के व्यक्ति ने दुष्कर्म किया। जिसे वो बाबा कहकर बुलाया करती थी। पीड़िता की मां ने बताया, "वो अब न तो खेलती है, न ही खुश रहती है। हम लोग उसके सामने कोई इस तरह की बात नहीं करते जिससे उसे उस दिन की याद आए। घटना के पांच छह महीने हम लोग घर के अन्दर ही रहे। बाहर निकलने की हिम्मत ही नहीं हुई। बच्ची को रिश्तेदारी में भेज दिया है जिन्हें इस हादसे के बारे में कोई जानकारी नहीं है। हम नहीं चाहते मेरी बेटी से कोई भी इस घटना को लेकर बात करे।"

इसलिए 'सीरीज बलात्कार के बाद' की इस तीसरी कड़ी में हमने पीड़िता से बात नहीं की।

मामला उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के पिसावां ब्लॉक के एक गांव का है। जून 2017 में 9 साल की एक बच्ची अपनी दादी के साथ दोपहर 3-4 बजे के करीब बकरियां चराने गयी थी। दादी अपनी पोती को बकरी देखने को कहकर जलाने के लिए लकड़ी बीनने चली गईं। उसी समय घर के ठीक सामने रहने वाला एक 65 वर्षीय व्यक्ति बच्ची का मुंह दबाकर पास के गन्ने के खेत में ले गया जहां उसके साथ दुष्कर्म किया। बच्ची को मरणासन्न स्थिति में छोड़कर वो वहां से भगा गया। आरोपी अभी तक जेल में है इस बात की तसल्ली पीड़िता के परिवार को जरुर है लेकिन उस घटना के जख्म अभी तक भरे नहीं हैं।

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ये हैं 9 साल की बच्ची के पिता जो बेटी के दर्द से तकलीफ में हैं

"हम अपने घर में भी धीरे-धीरे बातें करते हैं। घटना को तीन साल हो गये हैं। बेटे की शादी हुई है तो बहू को भी इसके बारे में नहीं बताया है। तब बिटिया पांचवीं में पढ़ती थी अभी अरबी सीख रही है। घटना के बाद वो बेहोश हो गयी। होश आने के बाद जैसे-तैसे वो घर तक पहुंच पाई।" पीड़िता की मां ने बताया।

वो आगे बताती हैं, "उसकी हालत बहुत नाजुक थी। उसके प्राइवेट पार्ट बुरी तरह से जख्मी थे। एक साल तक लगातार इलाज करवाया तब उसे कुछ हुआ। अभी भी सिर और पेट में दर्द रहता है। शुरुआत में पुलिस आती थी तो उन्हें देखकर रोने लगती थी। इसलिए अब हम किसी बाहरी को उससे मिलने नहीं देते।"

पीड़िता के पिता राजमिस्त्री हैं। वे इस बात को लेकर चिंतित रहते हैं कि उनकी बिटिया की शादी कैसी होगी, कौन करेगा उससे शादी। वे कहते हैं, " घटना के बाद ही बेटी को गांव से दूर भेज दिया था क्योंकि डर के कारण कहीं बाहर नहीं निकलती थी। शादी विवाह भी करना है इसलिए हम उस दिन को याद ही नहीं करना चाहते। जिस आदमी ने मेरी बेटी के साथ हैवानियत की घटना के दो-तीन दिन पहले उसे ही अपने घर की जिम्मेदारी सौंप कर बाहर गया था। लौटकर आया तो ये सब पता चला।"

" हमारा धर्म अलग है लेकिन मैंने कभी भेद नहीं किया। उसकी बेटियां मुझे भैया कहती थीं। हर रक्षाबंधन पर राखी बांधती थी, विश्वास नहीं होता कि वो आदमी हमारी बच्ची के साथ ऐसा कर सकता है। अब तो हमारा रिश्तों से भरोसा उठ गया है।"

छेड़खानी और दुष्कर्म जैसे मामलों में पीड़िता के पुनर्वास के लिए राज्य सरकार की तरफ से मिलने वाली मुआवजा राशि के बारे में जब पीड़िता के पिता से पूछा तो वो बोले, "मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है और न ही मुझे किसी ने बताया। हम इस मामले में इतना परेशान हो गये कि इन सब चीजों से कोई मतलब ही नहीं रहा। आरोपी के घर वालों ने कई बार समझौता कराने की कोशिश की पर जब हम लोगों की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला तो धमकी दी। हमने सोच लिया इससे बुरा मेरे साथ कुछ नहीं हो सकता इसलिए हमें अब कोई डर भय नहीं।"

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सीतापुर जिले के जिला प्रोबेशन अधिकारी अश्वनी कुमार तिवारी ने गांव कनेक्शन को फोन पर बताया, "हमारे पास कोई ऐसा कर्मचारी नहीं है जिसको भेजकर डिटेल मंगवाएं। मुआवजे की राशि के लिए पहले तो ग्राम प्रधान को सूचित करके पीड़िता की डिटेल मंगवा लेते थे लेकिन अब इस तरह के मामलों में जो नोडल पुलिस अफसर हैं वो चार्जशीट अपलोड करेंगे फिर नोडल मेडिकल अफसर के पास मामला जाएगा इसके बाद फिर मेरे पास आएगा।" इस पीड़िता के केस में इतना वक़्त क्यों लगा इस पर उन्होंने कहा, "इस मामले में चार्जशीट देर से लगी होगी इसलिए देरी हुई।"

जिला प्रोबेशन अधिकारी के अनुसार चार्जशीट देर से लगी इसलिए मुआवजे की राशि मिलने में देरी हुई। इस बात को पुख्ता करने के लिए जब हमने सिविल कोर्ट के वकील अभय प्रताप सिंह से बात की तो उन्होंने बताया, "अगर किसी मामले में आरोपी तुरंत गिरफ्तार हो जाता है तो उसकी चार्जशीट देर से लगने की कोई संभावना नहीं रहती। हर हाल 60 से 90 दिन के अन्दर चार्जशीट लग गयी होगी।" वहीं मुआवजे में मिलने वाली राशि पर उन्होंने कहा, "पीड़ित पक्ष जिले में डीपीओ (जिला प्रोबेशन अधिकारी) के पास जाकर एफआईआर, पीड़िता की बैंक डिटेल, आधार कार्ड और एफीडेबिट इस सभी की फोटो कॉपी जाकर जमा कर दे तो वहां से मुआवजा में मिलने वाली राशि की पूरी प्रासेस हो जाती है।"

पीड़िता की मां ने बताया, "हर जगह बच्ची को बार-बार लेकर जाना पड़ता है। उसे अच्छा नहीं लगता पर मजबूरी में ये सब करना पड़ता है। बच्ची मानसिक रूप से ठीक नहीं है। हम उसे बहुत समझाते हैं लेकिन क्या करें।"

इस तरह के गम्भीर मामलों में पीड़िता को जिले स्तर पर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की तरफ से काउंसलर उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे पीड़िता के पुनर्वास में मदद मिल सके।

जब चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के बारे में अश्वनी कुमार से पूछा तो वो कहने लगे, "इसके अध्यक्ष डीपी सिंह हैं, हम अभी मीटिंग में व्यस्त हैं, बाद में बात करेंगे।" वहीं वकील अभय प्रताप कहते हैं, "पीड़िता को काउंसलर की सुविधा जिले स्तर पर उपलब्ध है इस विषय में न तो केस लड़ रहे प्राइवेट वकील को कोई जानकारी है और न ही आम जन मानस को। सरकार ने योजना तो बना दी है पर जनमानस तक इसकी जानकारी हो इसके लिए कोई एजेंसी नहीं बनाई। चाइल्ड वेलफेयर कमेटी तबतक बच्ची की देखरेख करती है जबतक पीड़िता को जरूरत होती है।"

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