बजट 2018 : “ ये फुटबॉल बजट है ”

Arvind ShuklaArvind Shukla   2 Feb 2018 10:51 AM GMT

बजट 2018 : “ ये फुटबॉल बजट है ”बजट पर मध्य प्रदेश की प्रतिक्रिया।

लखनऊ/भोपाल। नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली एनडीए सरकार के 2018-19 को किसानों और ग्रामीणों का बजट बताया जा रहा है। पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली फिर प्रधानमंत्री ने बार-बार जोर देखकर कहा कि ये बजट किसानों और गांव का बजट है। हम किसानों की आमदनी 2022 तक दोगुनी करेंगे और हर फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य देंगे।

बजट को लेकर कहा जा रहा है ये आने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर लॉलीपॉप है। इस वर्ष मध्य प्रदेश में भी विधानसभा चुनाव होने हैं। गांव कनेक्शन ने प्रदेश के किसानों और खेती के कारोबार से जुड़े जानकारों और किसान नेताओं से बात कर उनकी प्रतिक्रिया ली।

मध्य प्रदेश में किसानों को लेकर लड़ाई लड़ने वाले संगठन आम किसान यूनियन से कृषि विशेषज्ञ केदार सिरोही इसे फुटबॉल बजट बताते हैं। वो फोन पर बताते हैं, “शहर के लोगों को लग रहा है बजट किसानों और ग्रामीणों के लिए है, लेकिन किसान की तरह से देखिए तो ये शहर और उद्योगपतियों का बजट है।

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सरकार ने सभी फसलों (नोटिफाइड) को एमएसपी देने की बात की है, लेकिन रिपोर्ट बताती हैं कि सिर्फ 6 फीसदी को एमएसपी का लाभ मिलता है तो बाकी 94 फीसदी के लिए क्या है। मध्य प्रदेश के किसान कर्जमाफी की उम्मीद में थे उन्हें निराशा हुई।” केदार के मुताबिक सरकार ने स्वाइल हेल्थ कार्ड का बजट घटाया जबकि देश को उसकी जरूरत है, यानि सरकार का कोई रोडमैप नहीं है।

शहर के लोगों को लग रहा है बजट किसानों और ग्रामीणों के लिए है, लेकिन किसान की तरह से देखिए तो ये शहर और उद्योगपतियों का बजट है। इसीलिए मैं इसे फुटबॉल बजट कह रहा हू।
केदार सिरोही , आम किसान यूनियन, मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक दशा और दिशा पर नजर रखने वाले एनके सिंह कहते हैं, “जो दिख रहा है वो राजनीतिक किस्म का रिएक्शन लग रहा है। क्योंकि सरकार लगातार किसानों की आमदनी दोगुनी करने का बात करती रही है, लेकिन वो जमीन पर होता नजर नहीं आया। इस बीच किसानों की दशा और खराब ही हुई है।

जो दिख रहा है वो राजनीतिक किस्म का रिएक्शन लग रहा है। क्योंकि सरकार लगातार किसानों की आमदनी दोगुनी करने का बात करती रही है, लेकिन वो जमीन पर होता नजर नहीं आया। इस बीच किसानों की दशा और खराब ही हुई है- एनके सिंह, वरिष्ट पत्रकार, मध्य प्रदेश

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दूसरा गुजरात के नतीजों ने सरकार को सोचने पर मजबूर किया होगा, इसलिए बजट का स्वरूप ऐसा है।’ वो आगे बताते हैं, अगर बात मध्य प्रदेश की करें तो यहां भी शिवराज की किसान उपयोगी तमाम कोशिशों के बावजूद फीडबैक अच्छा नहीं है। अब भावांतर को ही लें तो मैंने एक अंग्रेजी अख़बार में पढ़ा कि योजना के तहत जैसे ही सोयाबीन की खरीद बंद हुई, उसके दाम बढ़ गए, यानि सरकार कारोबारियों पर नियंत्रण करने में नाकाम है।”

बजट भाषण पढ़ते वित्तमंत्री अरुण जेटली।

वहीं पन्ना जिले के आकाश बहरे मानते हैं कि बजट में गांव और किसान की बात खूब हुई है। वो कहते हैं, “पिछले चार बरसों में सरकार के कदमों से तो नहीं लगा कि 2022 तक सरकार किसानों की आय दोगुनी कर पाएगी। किसानों के प्रति सरकार का रवैया भी हौसला बढ़ाने वाला नहीं रहा। अभी टीकमगढ़ में प्रदर्शन कर रहे किसानों को बुरी तरह मारा-पीटा गया। सरकार को पता है किसान नाराज हैं, जल्द ही चुनाव होने वाले हैं इसलिए किसानों का दिल जीतने के लिए यह सरकार लोकलुभावन बजट लाई है।”

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मनीष बाफना प्रदेश की खेती किसानी पर लगातार नजर रखते हैं, उनका खुद का कृषि आधारित समाचार पत्र है। बजट के बारे में बात करते हुए वो कहते हैं, “बजट में किसानों के प्रति सरकार की चिंता तो दिखी है। पहली बार बजट में कृषि का इस तरह से जिक्र पहले किया गया है। लेकिन मैं इसे किसानों के आक्रोश और आने वाले समय में केंद्र और राज्यों में होने वाले चुनावों से जोड़कर देखता हूं। किसानों की मांग थी कि कम से कम उनकी लागत का ही मूल्य निकल आए, ऐसे में सरकार जब लागत पर 1.5 गुना मूल्य देने की बात कहती है तो किसानों को लगेगा कि सरकार उनके बारे में सोच रही है।”

पिछले चार बरसों में सरकार के कदमों से तो नहीं लगा कि 2022 तक सरकार किसानों की आय दोगुनी कर पाएगी।
आकाश बहरे, पन्ना, मध्य प्रदेश

वो आगे कहते हैं, “इस बार बागवानी और मछली पालन वगैरह पर भी ध्यान दिया गया है जो अच्छी बात है। लेकिन यह सब लॉन्ग टर्म में किसान को लाभ पहुंचाने वाले कदम हैं, जबकि किसान को शॉर्टटर्म में फायदा पहुंचाने वाले कदम की जरूरत थी। उदाहरण के लिए अगर 4-5 एकड़ की जोत वाले छोटे किसान के लिए विशेष पैकेज आता तो किसान को ज्यादा फायदा होता। ऐसे किसानों की तादाद 30 फीसदी के आसपास है। छोटे किसानों को उम्मीद थी कि तेलंगाना की तर्ज पर उसे प्रति एकड़ 5 हजार रुपए की मदद भी मिल जाती तो उसका जीवन आसान हो जाता। लेकिन ऐसा ना होने पर छोटा किसान जरुर निराश होगा।’

कृषि अर्थशास्त्री भगवान सिंह मीना बजट में किसान को फसल की लागत का डेढ़ गुना मूल्य और हर फसल का समर्थन मूल्य देने का समर्थन करते हुए कहते हैं, सरकार ने हर फसल पर लागत का डेढ़ गुना मूल्य देने की बात की है, ये अच्छा और स्वागत योग्य है लेकिन इसका कोई ब्लू प्रिंट नहीं है, क्योंकि आज भी कई फसलों के एमएसपी होने के बावजूद फसलें आधे दामों पर बिकती हैं।”

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कृषि अर्थशास्त्री भगवान सिंह मीना बजट में किसान को फसल की लागत का डेढ़ गुना मूल्य और हर फसल का समर्थन मूल्य देने का समर्थन करते हुए कहते हैं, ये स्वागत योग्य है लेकिन इसका कोई ब्लू प्रिंट नहीं है, क्योंकि आज भी कई फसलों के एमएसपी होने के बावजूद फसलें आधे दामों पर बिकती हैं।”

आम यूनियन से जुड़े युवा कार्यकर्ता और किसान राम इनानिया अपनी प्रतक्रिया में कहते हैं "किसानों को सुनिश्चित आय और पूर्ण कर्जमाफी की उम्मीद थी, लेकिन उसे कोई महत्व नहीं मिला। इसलिए मेरे जैसे किसानों के लिए बजट प्रभावी नहीं है।"

मध्य प्रदेश कृषि सपन्न राज्य है। देश का सबसे बड़ा कृषि पुरस्कार लगातार पांचवीं बार कृषि कर्मण मध्य प्रदेश को मिला है। लेकिन किसान कई इलाकों में नाखुश से नजर आते हैं।

पिछले वर्ष किसानों का आंदोलन मध्य प्रदेश से ही शुरु हुआ था, इसबार भी कई इलाकों में किसान सरकार से खफा होकर आंदोलन चला रहे हैं। भोपाल के ईंटखेडी गांव के रोहित ठाकुर कहते हैं, किसान को हर जगह ठगा जा रहा है क्योंकि पहले भावांतर में कम कीमत पर सोयाबीन बिकवा दी। अब भाव बढ़ गए हैं।”

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