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  • जैविक खेती से लहलहाएगी फसल, पर्यावरण रहेगा सुरक्षित

    सीतापुर। प्रतिस्पर्धा के इस युग में यदि आपका उत्पाद बाजार के अन्य उत्पादों की तुलना में गुणवत्ता (स्वाद, रंग,चमक, ताजगी, जहरमुक्त) में अन्य से बेहतर होगा तो दाम ज्यादा मिलेगा और बाजार में प्राथमिकता से बिक भी जाएगा। कृषि लागत में वृद्धि का प्रमुख कारण है कि किसानों का बीज खाद दवा पर निर्भर हो जाना।...

  • 'अगर एक दिन लकड़ी न बिके तो पति और बच्चे भूखे रह जाएंगे' 

    बीहड़ और पहाड़ी क्षेत्रों में रोजगार का कोई साधन न होने की वजह से यहां की महिलाएं जंगलों से लकड़ी बीनकर लाती हैं और उन्हें बेचकर अपने बच्चों को दो वक्त की रोटी का इंतजाम कर पाती हैं।चित्रकूट-ललितपुर। देश में ऐसे सैकड़ों परिवार हैं जो रोज रोटी के लिए जुगाड़ करते हैं.. उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के...

  • बुंदेलखंड में उद्यमियों के लिए प्रदेश सरकार ने खोला खजाना

    लखनऊ/बुंदेलखंड। बुंदेलखंड में औद्योगिक विकास के लिए राज्य सरकार उद्यमियों को रियायती दर पर जमीन उपलब्ध कराएगी। यह घोषणा प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने बुंदेलखंड चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री व टीम इनोवेशन के प्रतिनिधियों के साथ हुई एक बैठक में की।इनोवेशन टीम के निदेशक सचिन...

  • क्या आप जानते हैं कितनी तरह की हैं आल्हा की कहानियां

    हम सभी ने कभी न कभी आल्हा जरूर सुना होगा, जिसकी शुरूआत बुंदेलखंड के महोबा में हुई थी, लेकिन कम ही लोग जानते होंगे की आल्हा के पचास से अधिक भाग हैं। आल्हा लोकगीत की एक विधा है, जिसकी शुरूआत बुंदेलखंड के महोबा में हुई थी, आल्हा व उदल महोबा के राजा परमाल के सेनापति थे। बस यही से आल्हा गीत...

  • कौन थी राजकुमारी बेला, जिसके गौने में खत्म हो गई थी राजा परमाल की सेना

    चौहान व चंदेल राजपूतों राजाओं के बीच हुए युद्ध के बारे में तो सब जानते हैं, लेकिन इन्हीं के बीच कुछ ऐसे भी नाम हैं जो इतिहास के पन्नों में कहीं खो गए, उन्हीं में से एक नाम है राजकुमारी बेला।पृथ्वीराज चौहान की बेटी थी, राजकुमारी बेला, बुंदेलखंड के मशहूर लोकगीतों में इनके बारे में सुना जा सकता है।...

  • सूखे चित्रकूट में उम्मीद की हरियाली, बारह साल में गाँव में लगा दी बाग

    मऊ (चित्रकूट)। बुंदेलखंड का चित्रकूट जिला के किसान भले ही पिछले कई वर्षों से सूखे की मार झेल रहे हों, लेकिन इसी जिले में एक गाँव ऐसा भी है, जहां बहुत हरियाली है। इस गाँव के एक शख्स ने बड़ी बाग लगा दी है। इस बाग में पांच सौ से भी अधिक पेड़ लगे हैं।चित्रकूट जिला मुख्यालय से लगभग 30 किमी. दूर मऊ ब्लॉक...

  • बुंदेलखंड: पानी बचाकर ये गाँव बन गया जलग्राम

    जब देशभर से पानी की किल्लत की ख़बरें आ रही हैं, मुझे 2016 में की बुंदेलखंड में 1000 घंटे सीरीज के दौरान की गई ये ख़बर याद आ रही है.. एक गांव की कहानी जो उदाहरण बन सकता है। जखनी (बांदा)। पचास हजार से ज्यादा तालाबों वाले बुंदेलखंड में ज्यादातर तालाब सूखे है। भूगर्भ का जलस्तर सैकड़ों फीट नीचे चला...

  • इन्हीं तालाबों में ज़िंदा है बुंदेलखंड का भविष्य

    गाँव कनेक्शन ने वर्ष 2016 में “बुंदेलखंड में 1000 घंटे वो कहानियां जो कही नहीं गईं” शीर्षक नाम से एक सीरीज चलाई थी इसी सीरीज की एक खबर जो हमारे मुख्य संवाददाता अरविंद शुक्ला ने बंदेलखंड में पानी की समस्या और तालाबों पर की गई खबर प्रकाशित की गई थी। नोट- संभव है कि अभी वर्तमान में वहां के हालात और...

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