उत्तर प्रदेश

यूपी: प्रधानों को ढूढ़े नही मिल रहे मनरेगा मजदूर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में दिन प्रतिदिन मनरेगा मजदूरों का मोह मनरेगा से भंग होता जा रहा है और मनरेगा मजदूर गांव से दूर शहर जाकर दिहाड़ी करने पर मजबूर हैं।

भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा उत्तर प्रदेश में जमीनी स्तर पर दिन प्रतिदिन कमजोर होती जा रही है। केंद्र सरकार ने पूरे देश के सभी राज्यों में मनरेगा मजदूरों की मजदूरी में वृद्धि की, लेकिन उत्तर प्रदेश में मनरेगा मजदूरों की मजदूरी में वृद्धि नही की गयी, साथ ही मनरेगा मजदूरों की बकाया मजदूरी भी नही दी जा रही है ,मनरेगा मजदूरों का कहना हैं कि कभी भी समय पर मजदूरी नही मिलती मनरेगा के सहारे रहे तो बच्चे भूखे मर जाएंगे ,जॉब कार्ड पर एक परिवार को साल में 100 दिन रोजगार मिलना चाहिए वो भी कभी पूरा नही मिलता।

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न्यूनतम मजदूरी से भी कम है मनरेगा मजदूर की मजदूरी

एग्रीकल्चर वेग्स ऑफ इण्डिया 2015-16 के अनुसार उत्तर प्रदेश में दिहाड़ी मजदूर की औसत मजदूरी 238.40 रुपए है और मनरेगा कार्यक्रम के तहत आज भी उत्तर प्रदेश की मजदूरी 175 रुपए मात्र है ,अमूमन यही हाल देश के सभी राज्यों में है। पूरे देश में हर राज्य में मनरेगा मजदूरी न्यूनतम मजदूरी से कम है तेलंगाना। राज्य में मनरेगा मजदूरी और न्यूनतम मजदूरी से 3 रुपए कम है वहीं लक्ष्यदीप में मनरेगा मजदूरी न्यूनतम मजदूरी से 164 रुपए कम है।

सीतापुर जनपद के ग्राम पारा के निर्भय बताते हैं, "हम लोग मनरेगा में काम करने नही जाते, वहां एक तो मजदूरी कम है दूसरे कभी समय से मिलती भी नही अधिकांश मनरेगा मजदूर पैसे से परेशांन ही रहते है। गाँव के ज्यादातर लड़के शहर को दिहाड़ी करने निकल जाते है। शहर में एक दिन की दिहाड़ी 250-से 300 तक मिल जाती है 50 रुपए आने जाने का खर्चा भी निकाल दो तो 250 रुपए बच जाते है। शहर में काम करने के बाद शाम को मजदूरी नकद मिल भी जाती है।"

लखनऊ जनपद ग्राम सोनवा की प्रधान चुन्नी दीक्षित का बताती हैं, "छह महीने से मनरेगा मजदूरों को मजदूरी नही मिली है पहले बताया गया था की आवास के निर्माण में प्रधान से कोई मतलब नही है फिर हुआ की उसमे नरेगा मजदूर काम करेंगे। हकीकत ये हैं कि मजदूरी सिर्फ 175 रुपए है वो भी कभी समय से मिलती नही शाम को काम करने के बाद मनरेगा मजदूर प्रधान को घेरते है।"

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चुन्नी आगे बताती हैं, "गाँव में मजबूर महिलाओं के अलावा कोई मनरेगा में काम करने को तैयार नहीं है। लेबर अड्डे पर 250 दिहाड़ी मिलती है ज्यादातर लोग वही निकल जाते है। मनरेगा में मजदूर कम पैसे पर काम क्यों करे जब उसे बाहर ज्यादा पैसे मिल रहे है। मैंने अपने गाँव में मज़बूरी में काम बंद करा दिया है जब तक मनरेगा मजदूरों की बकाया मजदूरी नही मील जाती तब तक आगे कोई काम नही होगा।"

उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के ब्लाक हिलौली के असरी खेड़ा गाँव के प्रधान मुकेश त्रिपाठी ने बताया "गाँव के 32 मजदूरों ने छह महीने पहले करीब 25 से 30 दिन तक काम किया जिसमे सिर्फ पांच मजदूरों को ग्यारह दिन की मजदूरी अब तक मिली है। उसमे भी गरीब मजदूरों के साथ एक दिक्कत और आ रही है मजदूर पैसे आते ही मजदूरी निकाल लेते है। दुबारा मजदूरी बैंक खाते में आने पर बैंक मिनिमम बैलेंस के नाम पर पैसे काट लेते है।"

अपनी बात को जारी रखते हुए मुकेश आगे बताते हैं, "ब्लाक में मजदूरों को लेखा जोखा जमा करा दिया है पर ब्लाक के अधिकारियो का कहना हैं कि फंड कम पड़ गया है। 15 अप्रैल के बाद देखते है। अब हालत ये हैं कि मनरेगा में काम करने के लिए मजदूर ढूढे नही मिल रहे जिनका पैसा बकाया है वो लोग काम करने की तैयार नही है।"

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इस बारे में उन्नाव जिले की हिलौली विकास खंड के खंड विकास अधिकारी सपना अवस्थी ने बताया "स्टेट अकाउंट में पैसे न होने की वजह से मनरेगा मजदूरो के भुगतान में दिक्कत आ रही है दो दिन पहले मीटिंग में डी सी मनरेगा उन्नाव शेष मणि सिंह में बताया की जल्द ही पैसा मिलने की उम्मीद है।"

लखनऊ जनपद के डी सी मनरेगा राजमणि वर्मा ने बताया "मनरेगा मजदूरों की मजदूरी बकाया है फण्ड उपलब्ध न होने की वजह से भुगतान रुका हुआ था ,मुख्यालय से फण्ड रिलीज हो गया है जल्द ही मजदूरी का भुगतान मजदूरों के खाते में कर दिया जायेगा।"

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