अयोध्या में 15 साल पुरानी रामनामी तलवार को फिर धार दे गए योगी

अयोध्या में 15 साल पुरानी रामनामी तलवार को फिर धार दे गए योगीअयोध्या में सीएम योगी आदित्यनाथ।

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को अपने अयोध्या दौरे में 15 साल पुरानी रामनामी तलवार को और तराश दिया है। 1991 के बाद जबसे प्रदेश में भाजपा की सरकार बनना शुरू हुई, मुख्यमंत्रियों का अयोध्या से नाता बना रहा। अयोध्या के दम से भाजपा की 2002 तक लखनऊ से लेकर दिल्ली तक कई बार सरकार बनी।

भाजपा के मुख्यमंत्री चाहे कल्याण सिंह रहें या राजनाथ सिंह दोनों ही समय समय पर अयोध्या जाकर सियासत को धार देते रहे। मगर सीएम योगी ने जिस तरह से अयोध्या के विकास के लिए 350 करोड़ की योजनाओं की घोषणा की। सपा सरकार में प्रतिबंधित की गई 84 कोसी परिक्रमा को बहाल करने की बात की। सरयू महोत्सव और सरयू आरती को शुरू करने का एलान कर दिया। इसके साथ ही योगी ने राम मंदिर को लेकर भी कह दिया कि बहुत जल्द ही आपसी बातचीत के जरिए रामजन्मभूमि पर मंदिर का निर्माण किया जाएगा। बीजेपी के हिंदुत्वादी एजेंडे को अयोध्या में और धार दी गई। जिसका इस्तेमाल 2019 के लोकसभा चुनाव में किया जाएगा।

ये भी पढ़ें- ईंट भरकर राम मंदिर बनाने पहुंचे मुस्लिम, जय श्री राम के नारे से गूंजी अयोध्या नगरी

योगी आदित्यनाथ

साल 1987 में राम जन्मभूमि का ताला खुला था, उसके बाद से उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश की राजनीति में रामनगरी अयोध्या का कद अचानक बढ़ गया था। इसके बाद 1990 में कारसेवा, 1991 मे कारसेवा सत्याग्रह, 1992 में विवादित ढांचा ध्वंस तक अयोध्या हमेशा सुर्खियों में बनी रही। इसके बाद में भाजपा की सरकारें अयोध्या, रामलला, राम जन्मभूमि के एजेंडे के इर्द-गिर्द ही बनती रहीं। इस दौरान यूपी में भाजपा की तीन बार सरकार बनी।

ये भी पढ़ें- अयोध्या में बंद चल रही रामलीला का मंचन शीघ्र शुरू करें : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

केंद्र में भी तीन बार भाजपा ने सत्ता हासिल की थी। 1991 से लेकर 2002 तक भाजपा के नेता बढ़-चढ़ कर अयोध्या जाते रहते थे। कल्याण सिंह, राजनाथ सिंह, लालकृष्ण आडवाणी, विनय कटियार, उमा भारती इनमें सबसे आगे हुआ करते थे। मगर धीरे धीरे संख्या में कमी आती गई। भाजपा यूपी सहित केंद्र की सत्ता से दूर हुई। केंद्र में करीब एक दशक और उप्र में डेढ़ दशक तक भाजपा की सरकार नहीं रही। अब जबकि केंद्र और राज्य दोनों जगह भाजपा की सरकार है तब नये सिरे से अयोध्या के मुद्दे को धार देने की तैयारी की जा रही है।

योगी आदित्यनाथ ने राममंदिर के मुद्दे को नहीं रखा अनछुआ

योगी आदित्यनाथ ने राममंदिर के मुद्दे को अनछुआ नहीं रखा है। उन्होंने मुस्कुराकर संतों के बीच कहा कि मुझे पता है आप लोग क्या चाहते हो। बोले सभी पक्षों से बातचीत कर के अयोध्या में भव्य मंदिर का निर्माण रामजन्मभूमि पर किया जाएगा। आखिर में अपने भाषण का अंत उन्होंने जय श्री राम के उद्घोष के साथ अपना मत साफ कर दिया।

ये भी पढ़ें- किसानों की मदद करेंगे ये सरकारी व्हाट्सएप्प ग्रुप, ऐसे होगा काम

मुख्यमंत्री आदित्यनाथ का पहला अयोध्या दौरा।

अखिलेश सरकार में रोकी गई 84 कोसी परिक्रमा फिर शुरू होगी

अखिलेश सरकार के समय में 84 कोसी परिक्रमा जो बस्ती से अयोध्या को होती थी, उस पर रोक लगाई थी। मगर 84 कोसी परिक्रमा मार्ग को बेहतर करने की घोषणा कर के सीएम योगी ने पिछली सरकार के एक और फैसले को रोकने का एलान कर दिया है।

“उपेक्षित अयोध्या में जगी आस, होगा विकास”

“भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि भाजपा मुख्यमंत्री के दौरे से अयोध्यावासियों सहित समूचे देश-प्रदेश में आशा का संचार हुआ है कि अब अयोध्या के दिन बहुरेंगे। अयोध्या धार्मिक-ऐतिहासिक-सांस्कृतिक दृष्टि से वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण स्थान रखता है लेकिन यह दुर्भाग्य है कि पूववर्ती सरकारों ने अयोध्या में पयर्टन की तमाम संभावनाओं को दरकिनार कर बदहाल दशा में छोड़ रखा था।

पिछले तीन वर्षो में केन्द्र की योजनाएं भी राज्य सरकार की उपेक्षा के नाते परवान नहीं चढ़ सकी। मुख्यमंत्री ने साढ़े तीन सौ करोड़ रुपए से अयोध्या के विकास की घोषणा कर जनता का मन मोह लिया है। सरयू नदी के घाटों के पुननिर्माण व स्ट्रीट लाइटों के जगमग में भव्य सरयू आरती देशी-विदेशी पयर्टकों को आकर्षित करेगी। अयोध्या को नगर निगम बनाकर चित्रकूट से एक्सप्रेस-वे के माध्यम से जोड़ने का ऐलान कर राज्य सरकार पहले ही लोक कल्याण संकल्प पत्र के संकल्प पर आगे बढ़ चुकी है। सरयू महोत्सव से अयोध्या के चर्तुदिक विकास की संभावनाएं बढ़ेगी।”

संबंधित वीडियो.. अयोध्या के लोग बोले, मंदिर-मस्जिद विवाद से कहीं ज्यादा बड़ी हैं राम की नगरी की समस्याएं

First Published: 2017-05-31 20:53:58.0

Share it
Share it
Share it
Top