महिला अध्यापक बच्चों को पढ़ा रही स्वच्छता का पाठ

अध्यापिका और हेल्थ नोडल टीचर श्वेता सिंह अपने विद्यालय के बच्चों को खेलकूद के माध्यम से और पिक्चर के द्वारा बच्चों को स्वच्छता के पाठ पढ़ा रही हैं। इसके साथ ही शौचालय बनवाने और उसका प्रयोग करने वाले लोगों को बच्चों से सम्मानित कर स्वच्छ भारत मिशन को आगे बढ़ा रही हैं

महिला अध्यापक बच्चों को पढ़ा रही स्वच्छता का पाठ

गोरखपुर। खोराबार ब्लॉक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय सिकटौर विद्यालय की अध्यापिका और हेल्थ नोडल टीचर श्वेता सिंह अपने विद्यालय के बच्चों को खेलकूद के माध्यम से और पिक्चर के द्वारा बच्चों को स्वच्छता के पाठ पढ़ा रही हैं। इसके साथ ही शौचालय बनवाने और उसका प्रयोग करने वाले लोगों को बच्चों से सम्मानित कर स्वच्छ भारत मिशन को आगे बढ़ा रही हैं।

श्वेता बताती हैं, "पहले हमारे विद्यालय में बच्चे ऐसे ही चले आते थे और समय-समय पर काफी बीमार पड़ जाते थे, लेकिन जबसे बच्चों को सफाई के प्रति जानकारी दी जाने लगी हैं, तबसे वो सीख गये हैं कि उन्हें कैसे कपड़े पहनकर आना है, कैसे खाने से पहले हाथ धुलना है। गोरखपुर में जेई ओर एईएस का काफी प्रकोप है, इसलिए लोगों को समझाने के लिए मैने बच्चों का सहारा लिया। मेरे द्वारा समझाए बच्चे अपने घरों में मम्मी पापा को समझाते हैं। शौचालय के प्रयोग को लेकर मैं तरह-तरह के गेम खिलवाती हूं। बच्चों के हाथ धुलने पर गीत बनाया है जो बच्चों के साथ मैं गाती हूं।"

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श्वेता सिंह ने आगे बताया, " पहले लोग शौचालय नहीं बनवा रहे थे, जहां बने थे वो लोग उनका उपयोग नहीं कर रहे थे, इसके लिए हमें जुगत सूझी और बच्चों से शादी के कार्ड पर स्टार बनाया। उसके बाद बच्चों ने अपने मम्मी पापा को शौचालय उपयोग करने पर स्टार लगाया। उसका असर यह हुआ कि जिन घरों में लोग शौचालय नहीं उपयोग कर रहे थे वहां बच्चों ने जिद की कि उपयोग करें। तकि आगे उन्हें सम्मानित किया जा सके। खुद के बच्चों ने जब अपने माता पिता को स्टार लगाया तो उनकी खुशी का भी ठिकाना नहीं रहा।"


श्वेता ने आगे बताया, " मैंने क्लास में बच्चों से पूछा कि किसके किसके यहां शौचालय बने हैं, किसके यहां नहीं? जिनके यहां बने थे उनके लिए ताली बजवाई और जिनके यहां नहीं बने थे उनसे घर में शौचालय बनवाने को कहा। बच्चों ने दो अक्टूबर को शौचालय के प्रयोग पर गांव में नुक्कड़ नाटक किया। बच्चों पूरे गाँव में प्रयास किया और रैलियां भी निकालीं। उसका नतीजा यह रहा कि पैसा भी नहीं आया फिर भी लोगों ने शौचालय बनवा लिया। "

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चित्र और कहानियों के माध्यम से करती हैं जागरूक

ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को स्वच्छता के लिए समझाना आसान काम नहीं होता है। इसके लिए श्वेता ने चित्र और कहानियों का सहारा लिया, जिसका काफी सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहा है। लोगों को जो बातें बताई जाती हैं लोग उसका अनुकरण भी करते हैं। श्वेता ने इंटरनेट और बाजार से बहुत से चित्र खरीद कर लाई हैं। श्वेता ने अपने विद्यालय में भी सफाई को प्रेरित करती तस्वीरें लगा रखी हैं।


सिकटौर की रहने वाली मुन्नी देवी(38वर्ष) ने बताया," श्वेता दीदी हम लोगों को सफाई और शौचालय प्रयोग करने की बात कहती थीं, लेकिन लोग उनकी बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते थे। फिर एक दिन उन्होंने कुछ फोटो दिखाया। फोटो में यह दिखाया गया था कि सफाई से न रहने पर क्या-क्या परेशानियां हो सकती हैं। गंदगी से बीमारियां पैदा होती हैं। खुले में शौच जाने के नुकसान बताए गए थे। तब हम महिलाओं को यह बात समझ में आ गई कि गंदगी में नहीं रहना है।"

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बच्चों को लेकर निकालती हैं रैली

ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए श्वेता अपने स्कूल के बच्चों का भी सहारा लेती हैं। समय-समय पर बच्चों को लेकर गांव में स्वच्छता रैली निकालती हैं। बच्चों को सफाई के महत्व को बताती हैं और अपने घर के सभी लोगों को भी इसके लिए जगारूक करने की बात कहती हैं। श्वेता के इस प्रयास का असर है कि गाँव की महिलाएं अब बिना हाथ धुले खाना नहीं पकाती हैं। घर के लोग भी बिना हाथ धुले खाना नहीं खाते हैं। शौच के बाद हाथ जरूर धुलते हैं।

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