Read latest updates about "स्वच्छता कनेक्शन" - Page 1

  • बच्चों को प्रेरित कर ग्रामीणों को स्वच्छता का पाठ पढ़ा रही यह शिक्षिका

    गोरखपुर। एक महिला अध्यापक ने न सिर्फ बच्चों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाकर उन्हें घर में शौचालय बनवाने के लिए प्रेरित किया, बल्कि इस दिशा में उनकी छोटी-छोटी कोशिशों से प्रभावित होकर ग्रामीणों ने शौचालय के महत्व को समझ कर अपने घर भी शौचालय बनवाया। गोरखपुर के खोराबार ब्लॉक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय...

  • दिव्यांग बेटी के लिए मां ने पाई-पाई जोड़ बनवाया शौचालय

    परसपुर चौबे (सोनभद्र)। किसी मां के लिए शायद इससे बड़ा दु:ख कुछ नहीं होगा कि उसकी बेटी घिसट-घिसट के चलती हो और उसे हर काम के लिए किसी और का सहारा लेना पड़ता हो। शौच के लिए भी उसे अपने मां के कंधे पर बैठ कर खेतों में जाना पड़ता हो। अपनी बेटी के इस दु:ख को देखते हुए उस मां ने एक नजीर पेश की जो अपने आप...

  • दादी की सीख ने पोते को बनाया स्वच्छता का नायक

    लखनऊ। इंसान अगर किसी काम को करने की ठाने ले तो उसे करके ही मानता है, गौतम के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ जब उसके दिमाग में दादी की कही बात इस तरह घर कर गयी कि वह स्वच्छता का नायक बन गया। सोनभद्र के राबर्ट्सगंज क्षेत्र के ममुआ गाँव में 70 साल की बुजुर्ग राजकुमारी अपने तीन पोतों गौतम, गौरव और रवि के साथ...

  • गाँव को शौच मुक्त कराने में जुटा युवक, खुले में शौच न जाने का लिया संकल्प

    सीतापुर। ' मेरे घर का शौचालय काफी समय से बंद पड़ा था। घर के सभी लोग खुले में शौच के लिए जाते थे। लेकिन जब मुझे खुले में शौच जाने से होने वाली बीमारियों के बारे में पता चला तो मैंने अपने खराब शौचालय को ठीक कराकर उसका प्रयोग करने लगा।' ये कहना है विकास खंड कसमंडा के गांव रेंगामऊ निवासी देवी का। देवी...

  • गांव को 'खुले में शौच मुक्त' करने के लिए इस युवा ने उठाया ये कदम

    जौनपुर। जहां सोच वहां शौचालय। इस बात को साबित किया है नेवादा काजी के युवा प्रधान ने। प्रधान के अथक प्रयास से पूरा गांव खुले में शौच मुक्त हो चुका है। गांव के विकास के लिए इस युवा प्रधान ने अपनी अच्छी खासी नौकरी भी छोड़ दी। विकास खंड बक्सा के गांव नेवादा काजी के युवा प्रधान अमित सिंह ने बताया, '...

  • दिव्यांग बेटी के लिए मां ने पाई-पाई जोड़ तीन साल में बनवाया शौचालय

    लखनऊ। किसी मां के लिए शायद इससे बड़ा दुख कुछ नहीं होगा कि उसकी बेटी घिसट-घिसट के चलती हो और उसे हर काम के लिए किसी और का सहारा लेना पड़ता हो। शौच के लिए भी उसे अपने मां के कंधों पर बैठ कर खेतों में जाना पड़ता हो। अपनी बेटी के इस दुख को देखते हुए उस मां ने एक नजीर पेश की जो अपने आप में मिसाल है। ...

  • खुले में शौच नहीं जाना चाहती थी चमेली, सरकारी मदद का इंतजार किए बिना बनाया कपड़े का शौचालय

    चिरैया (बलरामपुर)। अशिक्षा के अंधकार में जी रही चमेली की दुनिया बहुत छोटी थी। खेतों में काम करना, घर में रोटी बनाना और गाँव की एक साधारण महिला की तरह ज़िंदगी जीना। लेकिन एक दिन महिलाओं की मीटिंग से वापस आते समय उसका मन बहुत बेचैन था। चमेली के मन में यह बेचैनी अनायास ही नहीं थी, बल्कि उसे समझ आ गया...

  • जहां नहीं पहुंची बिजली वहां पहुंचा शौचालय

    लखनऊ। कहते हैं अगर मन में कुछ करने का जज्बा हो तो कोई भी काम आसान हो जाता है। यह बात सुरसती पर बिल्कुल सटीक बैठतीहै जिसने उस गाँव में लोगों को शौचालय के लिए प्रेरित किया जहां बिजली-पानी जैसी बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं थीं।सुरसती सोनभद्र जिले के नगवा ब्लॉक में स्थित गाँव गोंगा की निवासी हैं। इस...

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