State of Global Air 2025: जहरीली और प्रदूषित हवा से क्यों घट रही है युवाओं की उम्र?
क्या आप जानते हैं कि जिस हवा में हम रोज़ सांस लेते हैं, वही अब हमारी सबसे बड़ी दुश्मन बन गई है? 'स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2025' रिपोर्ट के मुताबिक, हाई ब्लड प्रेशर के बाद, प्रदूषित हवा मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। इसका सबसे बुरा असर भारत के युवाओं पर पड़ रहा है।
क्या कहती है State of Global Air 2025 की रिपोर्ट?
रिपोर्ट कहती है कि हमारे देश के युवाओं की औसतन उम्र करीब 2 से 3 साल तक कम हो रही है, सिर्फ इस गंदी हवा की वजह से। “रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया की करीब 36% आबादी ऐसी हवा में सांस ले रही है जो बहुत खराब है”। इससे सबसे ज़्यादा नुकसान गरीब और मिडिल इनकम वाले देशों को हो रहा है। मतलब, दुनिया में वायु प्रदूषण से जितनी मौतें होती हैं, उनमें से 90% इन्हीं देशों में होती हैं। सिर्फ भारत और चीन में ही 20 लाख से ज़्यादा लोग 2023 में प्रदूषित हवा की वजह से मरे और पूरी दुनिया में करीब 79 लाख लोग सिर्फ हवा की वजह से अपनी जान गंवा बैठे।”
प्रदूषित हवा से कौन-कौन सी बीमारियाँ होती हैं?
आज के टाइम में ब्लड प्रेशर के बाद, गंदी हवा जल्दी मौत की दूसरी सबसे बड़ी वजह बन गई है। रिपोर्ट बताती है कि ज़्यादातर लोग दिल, फेफड़े और डायबिटीज़ जैसी बीमारियों से मर रहे हैं और इन बीमारियों के बढ़ने की वज़ह बन रही है यही प्रदूषित हवा। यहाँ तक कि डिमेंशिया यानी भूलने की बीमारी से भी 6 लाख से ज़्यादा लोगों की मौत सिर्फ प्रदूषण की वजह से हुई है। साफ है कि जो हवा हम रोज़ ले रहे हैं, वही हमें धीरे-धीरे बीमार कर रही है।
लगातार प्रदूषण बढ़ने के कारण क्या हैं?
“असल में हमारे शहरों की हवा में PM2.5 जैसे छोटे-छोटे जहरीले कण भर चुके हैं। ये इतने छोटे होते हैं कि सीधा फेफड़ों के अंदर तक पहुँच जाते हैं और वहीं बस जाते हैं। इसके पीछे तीन तरह के मेजर कारण हैं जिनकी वजह से लोगों को प्रदूषण संबंधि बीमारियाँ हो रही हैं।"
पहला कारण है बढ़ता प्रदूषण- मोटर गाड़ियाँ, फैक्ट्रियाँ, ट्रैफिक, कंस्ट्रक्शन, खेतों में पराली जलाना, ये सब मिलकर हवा को ज़हरीला बना रहे हैं।
दूसरा कारण हमारी रोज़मर्रा की लाइफस्टाइल- सुबह-शाम प्रदूषित हवा में दौड़ना (morning walk), ट्रैफिक में फँसकर सफर करना, सब कुछ इस प्रदूषित हवा के बीच हो रहा है।
तीसरा कारण घर की अंदर की हवा का प्रदूषित हो जाना- रसोई का धुआँ, बायोमास ईंधन, धूल इत्यादि मिलकर महिलाओं और बच्चों को भी सांस की तकलीफ़ें दे रहे हैं।
क्या-क्या तकलीफ़ें हो सकती हैं?
लगातार खाँसी, सांस लेने में दिक्कत, सीने में जलन ये शुरुआती लक्षण हैं। लंबे समय तक ये लक्षण फेफड़ों को कमजोर बना देते हैं, अस्थमा और कैंसर का खतरा बढ़ा देते हैं और ज़िंदगी की उम्र घटा देते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली जैसे इलाकों में लोगों की उम्र 8 साल तक कम हो सकती है- सिर्फ हवा की वजह से।
प्रदूषित हवा से खुद को कैसे बचाएँ?
- शुरुआत खुद से करनी होगी
- जब हवा ज़्यादा खराब हो, तो बाहर जाते वक्त N95 मास्क पहनें।
- घर में पौधे लगाएँ, खिड़कियाँ खोलकर वेंटिलेशन रखें, धुआँ और धूल से बचें।
लेकिन सिर्फ इतना काफी नहीं है हमें सरकार और नीति निर्माताओं से भी माँग करनी होगी कि वाहनों का धुआँ कम हो, कंस्ट्रक्शन नियंत्रित हो, पराली जलाने पर सख्त रोक लगे (पराली के इस्तेमाल के दूसरे तरीकों पर जोर दिया जाए और सबसे ज़रूरी साफ हवा को प्राथमिकता दी जाए।
State of Global Air 2025 की रिपोर्ट में क्या मुख्य बातें बताई गई हैं?
रिपोर्ट दर्शाती है कि भारत के युवाओं की औसतन उम्र 2 से 3 साल कम हो रही है, मुख्य रूप से प्रदूषण के कारण। दुनिया की लगभग 36% आबादी ऐसी हवा में सांस ले रही है जो अत्यंत खराब है और गरीब एवं मध्यम आय वाले देशों को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है।- प्रदूषित हवा से कौन-कौन सी बीमारियाँ हो सकती हैं?
प्रदूषित हवा से सबसे सामान्य बीमारियों में दिल, फेफड़े और डायबिटीज़ जैसी समस्याएँ होती हैं। इसके अलावा, धूम्रपान और वायु प्रदूषण के कारण डिमेंशिया जैसी गंभीर बीमारियाँ भी पाई जाती हैं। - प्रदूषण के बढ़ने के प्रमुख कारण कौन-कौन से हैं?
प्रदूषण के बढ़ने के प्रमुख कारणों में मोटर गाड़ियों का उपयोग, फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआँ, कंस्ट्रक्शन गतिविधियाँ और खेतों में पराली जलाना शामिल हैं। इसके अलावा, दैनिक जीवनशैली और घर के भीतर के प्रदूषण के कारण भी ये समस्या बढ़ रही है।