By Umang
देश में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने तमिलनाडु के कोयंबटूर में मानव-वन्यजीव संघर्ष पर उत्कृष्टता केंद्र (सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस) का उद्घाटन किया है। इसके साथ ही राष्ट्रीय मानव-वन्यजीव संघर्ष पोर्टल भी लॉन्च किया गया, जिससे देशभर में ऐसी घटनाओं के डेटा प्रबंधन, निगरानी और बेहतर समाधान में मदद मिलेगी। सरकार का कहना है कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक शोध और स्थानीय समुदायों की भागीदारी के ज़रिए इंसानों और वन्यजीवों के बीच टकराव कम करने की दिशा में काम किया जाएगा। साथ ही बाघ, तेंदुए और हाथियों से जुड़े संघर्षों के लिए नई रणनीति तैयार करने पर भी ज़ोर दिया गया है।
देश में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने तमिलनाडु के कोयंबटूर में मानव-वन्यजीव संघर्ष पर उत्कृष्टता केंद्र (सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस) का उद्घाटन किया है। इसके साथ ही राष्ट्रीय मानव-वन्यजीव संघर्ष पोर्टल भी लॉन्च किया गया, जिससे देशभर में ऐसी घटनाओं के डेटा प्रबंधन, निगरानी और बेहतर समाधान में मदद मिलेगी। सरकार का कहना है कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक शोध और स्थानीय समुदायों की भागीदारी के ज़रिए इंसानों और वन्यजीवों के बीच टकराव कम करने की दिशा में काम किया जाएगा। साथ ही बाघ, तेंदुए और हाथियों से जुड़े संघर्षों के लिए नई रणनीति तैयार करने पर भी ज़ोर दिया गया है।
By Gaon Connection
देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून के सक्रिय होने से कुल वर्षा घाटा घटकर 15 प्रतिशत रह गया है, लेकिन कई कृषि प्रधान ज़िलों में अब भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की जा रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, उत्तर प्रदेश और बिहार के कई वर्षा आधारित क्षेत्रों में मिट्टी में नमी की कमी बनी हुई है। यदि आने वाले महीनों में बारिश का समान वितरण नहीं हुआ, तो खरीफ़ फसलों के उत्पादन, कृषि विकास और खाद्य महँगाई पर असर पड़ सकता है।
देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून के सक्रिय होने से कुल वर्षा घाटा घटकर 15 प्रतिशत रह गया है, लेकिन कई कृषि प्रधान ज़िलों में अब भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की जा रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, उत्तर प्रदेश और बिहार के कई वर्षा आधारित क्षेत्रों में मिट्टी में नमी की कमी बनी हुई है। यदि आने वाले महीनों में बारिश का समान वितरण नहीं हुआ, तो खरीफ़ फसलों के उत्पादन, कृषि विकास और खाद्य महँगाई पर असर पड़ सकता है।
By Umang
बेहतर बाज़ार भाव और एमएसपी से अधिक कीमत मिलने के कारण इस खरीफ़ सीज़न किसानों का रुझान फिर से सोयाबीन की खेती की ओर बढ़ रहा है। सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के अनुसार, इस वर्ष देश में सोयाबीन का रक़बा पिछले साल की तुलना में 5 से 7 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में अधिकांश लक्ष्य क्षेत्र में बुवाई पूरी हो चुकी है। संगठन का मानना है कि यदि अगले तीन महीनों तक पर्याप्त बारिश होती रही, तो इस वर्ष सोयाबीन का उत्पादन पिछले सीज़न से बेहतर रहने की संभावना है।
बेहतर बाज़ार भाव और एमएसपी से अधिक कीमत मिलने के कारण इस खरीफ़ सीज़न किसानों का रुझान फिर से सोयाबीन की खेती की ओर बढ़ रहा है। सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के अनुसार, इस वर्ष देश में सोयाबीन का रक़बा पिछले साल की तुलना में 5 से 7 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में अधिकांश लक्ष्य क्षेत्र में बुवाई पूरी हो चुकी है। संगठन का मानना है कि यदि अगले तीन महीनों तक पर्याप्त बारिश होती रही, तो इस वर्ष सोयाबीन का उत्पादन पिछले सीज़न से बेहतर रहने की संभावना है।
By Umang
देशभर में दक्षिण-पश्चिम मानसून सक्रिय रहने से दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में भारी बारिश का दौर जारी है। आईएमडी ने कई क्षेत्रों के लिए ऑरेंज अलर्ट और भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है। लगातार बारिश से जलभराव, ट्रैफ़िक जाम, भूस्खलन और जनजीवन प्रभावित हुआ है। हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन का ख़तरा बना हुआ है, जबकि उत्तर प्रदेश और आसपास बने निम्न दबाव क्षेत्र के कारण अगले कुछ दिनों तक उत्तर और मध्य भारत में बारिश जारी रहने की संभावना है।
देशभर में दक्षिण-पश्चिम मानसून सक्रिय रहने से दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में भारी बारिश का दौर जारी है। आईएमडी ने कई क्षेत्रों के लिए ऑरेंज अलर्ट और भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है। लगातार बारिश से जलभराव, ट्रैफ़िक जाम, भूस्खलन और जनजीवन प्रभावित हुआ है। हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन का ख़तरा बना हुआ है, जबकि उत्तर प्रदेश और आसपास बने निम्न दबाव क्षेत्र के कारण अगले कुछ दिनों तक उत्तर और मध्य भारत में बारिश जारी रहने की संभावना है।
By Gaon Connection
भारत में एथेनॉल उत्पादन का स्वरूप तेज़ी से बदल रहा है। ऑल इंडिया डिस्टिलर्स' एसोसिएशन (एआईडीए) के अनुसार, जून 2026 तक देश की लगभग 67 प्रतिशत एथेनॉल आपूर्ति अनाज आधारित स्रोतों से हुई, जिसमें मक्का सबसे बड़ा फ़ीडस्टॉक बनकर उभरा है। गन्ने पर निर्भरता कम होने से एथेनॉल उद्योग अधिक संतुलित और मज़बूत बन रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे किसानों को नए बाज़ार मिलेंगे, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ेगी और सरकार के एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को भी गति मिलेगी।
भारत में एथेनॉल उत्पादन का स्वरूप तेज़ी से बदल रहा है। ऑल इंडिया डिस्टिलर्स' एसोसिएशन (एआईडीए) के अनुसार, जून 2026 तक देश की लगभग 67 प्रतिशत एथेनॉल आपूर्ति अनाज आधारित स्रोतों से हुई, जिसमें मक्का सबसे बड़ा फ़ीडस्टॉक बनकर उभरा है। गन्ने पर निर्भरता कम होने से एथेनॉल उद्योग अधिक संतुलित और मज़बूत बन रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे किसानों को नए बाज़ार मिलेंगे, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ेगी और सरकार के एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को भी गति मिलेगी।
By Lata Mishra
क्या कोई किसान सिर्फ़ एक लहसुन को बेहतर बनाने में 10 साल लगा सकता है? ब्रिटेन के किसान ग्राहम बैरट ने ऐसा ही किया। लगभग एक दशक तक लगातार चयन और प्रयोग के बाद उन्होंने 1.75 किलोग्राम वज़न वाला हाथी लहसुन (Elephant Garlic) उगाकर Guinness World Record बनाया। यही नहीं, उसी दिन 28 ग्राम की स्नो पी (Snow Pea) उगाकर उन्होंने दूसरा विश्व रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। यह कहानी खेती में धैर्य, प्रयोग और लगातार सुधार की मिसाल है।
क्या कोई किसान सिर्फ़ एक लहसुन को बेहतर बनाने में 10 साल लगा सकता है? ब्रिटेन के किसान ग्राहम बैरट ने ऐसा ही किया। लगभग एक दशक तक लगातार चयन और प्रयोग के बाद उन्होंने 1.75 किलोग्राम वज़न वाला हाथी लहसुन (Elephant Garlic) उगाकर Guinness World Record बनाया। यही नहीं, उसी दिन 28 ग्राम की स्नो पी (Snow Pea) उगाकर उन्होंने दूसरा विश्व रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। यह कहानी खेती में धैर्य, प्रयोग और लगातार सुधार की मिसाल है।
By Gaon Connection
देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून के सक्रिय होने के बाद जुलाई में कपास की बुवाई ने तेज़ी पकड़ ली है। शुरुआती देरी के बावजूद महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख राज्यों में अच्छी बारिश से बुवाई में सुधार हुआ है, हालांकि कुल रक़बा अभी भी पिछले वर्ष से कम है। कई किसान बेहतर दाम मिलने की उम्मीद में धान की जगह कपास और दलहन की खेती की ओर रुख़ कर रहे हैं। वहीं खरीफ़ सीज़न की बुवाई भी रफ़्तार पकड़ रही है और कृषि विशेषज्ञ इस वर्ष अच्छी पैदावार की उम्मीद जता रहे हैं।
देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून के सक्रिय होने के बाद जुलाई में कपास की बुवाई ने तेज़ी पकड़ ली है। शुरुआती देरी के बावजूद महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख राज्यों में अच्छी बारिश से बुवाई में सुधार हुआ है, हालांकि कुल रक़बा अभी भी पिछले वर्ष से कम है। कई किसान बेहतर दाम मिलने की उम्मीद में धान की जगह कपास और दलहन की खेती की ओर रुख़ कर रहे हैं। वहीं खरीफ़ सीज़न की बुवाई भी रफ़्तार पकड़ रही है और कृषि विशेषज्ञ इस वर्ष अच्छी पैदावार की उम्मीद जता रहे हैं।
By Gaon Connection
उत्तर प्रदेश सरकार ने खरीफ़ सीज़न के दौरान किसानों को खाद की कमी न होने का भरोसा दिया है। राज्य में 31 लाख टन से अधिक उर्वरकों का भंडार उपलब्ध है और केंद्र सरकार के साथ समन्वय कर निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। सरकार ने किसानों से फ़ार्मर रजिस्ट्री कराने और अनावश्यक खाद का भंडारण न करने की अपील की है। वहीं, कालाबाज़ारी और जमाखोरी रोकने के लिए सख़्त कार्रवाई जारी है। सरकार ने इस वर्ष खरीफ़ बुवाई और खाद्यान्न उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि का लक्ष्य भी निर्धारित किया है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने खरीफ़ सीज़न के दौरान किसानों को खाद की कमी न होने का भरोसा दिया है। राज्य में 31 लाख टन से अधिक उर्वरकों का भंडार उपलब्ध है और केंद्र सरकार के साथ समन्वय कर निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। सरकार ने किसानों से फ़ार्मर रजिस्ट्री कराने और अनावश्यक खाद का भंडारण न करने की अपील की है। वहीं, कालाबाज़ारी और जमाखोरी रोकने के लिए सख़्त कार्रवाई जारी है। सरकार ने इस वर्ष खरीफ़ बुवाई और खाद्यान्न उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि का लक्ष्य भी निर्धारित किया है।
By Umang
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून 9 जुलाई को पूरे देश में पहुँच गया, जो सामान्य तिथि से एक दिन देरी से है। हालांकि जुलाई के पहले नौ दिनों में देशभर में सामान्य से 38 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है, जिससे जून की कमी के बाद खरीफ़ फसलों की बुआई में तेज़ी आने की उम्मीद है। फिलहाल 1 जून से 9 जुलाई के बीच देश में कुल वर्षा सामान्य से 14 प्रतिशत कम रही है और खरीफ़ बुआई का रकबा पिछले वर्ष की तुलना में 21 प्रतिशत कम दर्ज किया गया है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून 9 जुलाई को पूरे देश में पहुँच गया, जो सामान्य तिथि से एक दिन देरी से है। हालांकि जुलाई के पहले नौ दिनों में देशभर में सामान्य से 38 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है, जिससे जून की कमी के बाद खरीफ़ फसलों की बुआई में तेज़ी आने की उम्मीद है। फिलहाल 1 जून से 9 जुलाई के बीच देश में कुल वर्षा सामान्य से 14 प्रतिशत कम रही है और खरीफ़ बुआई का रकबा पिछले वर्ष की तुलना में 21 प्रतिशत कम दर्ज किया गया है।
By Umang
क्रिसिल इंटेलिजेंस की ताज़ा ‘रोटी राइस रेट’ रिपोर्ट के अनुसार जून 2026 में घर पर तैयार होने वाली शाकाहारी थाली की लागत सालाना आधार पर 5 प्रतिशत और मांसाहारी थाली की लागत 6 प्रतिशत बढ़ गई। टमाटर, प्याज़, खाद्य तेल, एलपीजी और ब्रॉयलर चिकन की बढ़ती कीमतों ने थाली को महँगा बनाया, जबकि आलू के सस्ता होने से लागत में कुछ राहत मिली। रिपोर्ट के अनुसार भीषण गर्मी और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने खाद्य कीमतों पर असर डाला है।
क्रिसिल इंटेलिजेंस की ताज़ा ‘रोटी राइस रेट’ रिपोर्ट के अनुसार जून 2026 में घर पर तैयार होने वाली शाकाहारी थाली की लागत सालाना आधार पर 5 प्रतिशत और मांसाहारी थाली की लागत 6 प्रतिशत बढ़ गई। टमाटर, प्याज़, खाद्य तेल, एलपीजी और ब्रॉयलर चिकन की बढ़ती कीमतों ने थाली को महँगा बनाया, जबकि आलू के सस्ता होने से लागत में कुछ राहत मिली। रिपोर्ट के अनुसार भीषण गर्मी और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने खाद्य कीमतों पर असर डाला है।
By Umang
By Gaon Connection
By Swati
By Umang
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By Swati
By Gaon Connection