By Umang
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप प्रदेश की गोशालाओं के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा शुरू करने का निर्णय लिया है। प्रत्येक जिले की गोशालाओं का वैज्ञानिक प्रबंधन, स्वच्छता, गोवंश संरक्षण, पोषण, दुग्ध उत्पादन, जनसहभागिता और आत्मनिर्भरता जैसे मानकों पर मूल्यांकन किया जाएगा। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली गोशालाओं को पुरस्कृत किया जाएगा और उनके सफल मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू करने की दिशा में काम होगा। आयोग गोशालाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए बायोगैस, गोबर-गोमूत्र आधारित उत्पादों और प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा देगा।
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप प्रदेश की गोशालाओं के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा शुरू करने का निर्णय लिया है। प्रत्येक जिले की गोशालाओं का वैज्ञानिक प्रबंधन, स्वच्छता, गोवंश संरक्षण, पोषण, दुग्ध उत्पादन, जनसहभागिता और आत्मनिर्भरता जैसे मानकों पर मूल्यांकन किया जाएगा। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली गोशालाओं को पुरस्कृत किया जाएगा और उनके सफल मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू करने की दिशा में काम होगा। आयोग गोशालाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए बायोगैस, गोबर-गोमूत्र आधारित उत्पादों और प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा देगा।
By Gaon Connection
देश में बदलते मौसम और पशु आहार की बढ़ती कीमतों ने मुर्गी पालन को प्रभावित किया है। भीषण गर्मी और अनियमित मानसून के कारण अंडे और चिकन का उत्पादन घट गया है। इसके परिणामस्वरूप, उपभोक्ताओं को अंडे और चिकन के लिए अधिक भुगतान करना पड़ रहा है। पोल्ट्री उत्पादन लागत में वृद्धि छोटे और मध्यम किसानों के लिए आर्थिक दबाव बढ़ा रही है।
देश में बदलते मौसम और पशु आहार की बढ़ती कीमतों ने मुर्गी पालन को प्रभावित किया है। भीषण गर्मी और अनियमित मानसून के कारण अंडे और चिकन का उत्पादन घट गया है। इसके परिणामस्वरूप, उपभोक्ताओं को अंडे और चिकन के लिए अधिक भुगतान करना पड़ रहा है। पोल्ट्री उत्पादन लागत में वृद्धि छोटे और मध्यम किसानों के लिए आर्थिक दबाव बढ़ा रही है।
By Gaon Connection
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के दौरान अपने भाषण में मुर्रा भैंस का ज़िक्र किया। इसके बाद यह नस्ल फिर चर्चा में आ गई। हरियाणा की पहचान मानी जाने वाली मुर्रा भैंस को भारतीय डेयरी सेक्टर में 'ब्लैक गोल्ड' यानी 'काला सोना' कहा जाता है। देश ही नहीं, विदेशों में भी इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। आखिर इस नस्ल में ऐसी क्या खासियत है कि पशुपालक इसके लिए लाखों रुपये तक खर्च करने को तैयार रहते हैं? आइए जानते हैं कि मुर्रा भैंस क्यों इतनी खास मानी जाती है, इसकी पहचान कैसे करें और यह किसानों के लिए कमाई का बड़ा ज़रिया कैसे बनी हुई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के दौरान अपने भाषण में मुर्रा भैंस का ज़िक्र किया। इसके बाद यह नस्ल फिर चर्चा में आ गई। हरियाणा की पहचान मानी जाने वाली मुर्रा भैंस को भारतीय डेयरी सेक्टर में 'ब्लैक गोल्ड' यानी 'काला सोना' कहा जाता है। देश ही नहीं, विदेशों में भी इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। आखिर इस नस्ल में ऐसी क्या खासियत है कि पशुपालक इसके लिए लाखों रुपये तक खर्च करने को तैयार रहते हैं? आइए जानते हैं कि मुर्रा भैंस क्यों इतनी खास मानी जाती है, इसकी पहचान कैसे करें और यह किसानों के लिए कमाई का बड़ा ज़रिया कैसे बनी हुई है।
By Umang
उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना को मंज़ूरी दे दी है। योजना के तहत 60 करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2026-27 में 2.28 लाख से अधिक पशुओं का बीमा कराया जाएगा। बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा सरकार और 15 प्रतिशत लाभार्थी देगा। महामारी, दैविक आपदा, दुर्घटना या स्थायी विकलांगता की स्थिति में आर्थिक सहायता मिलेगी। योजना प्रदेश के सभी 75 ज़िलों में लागू होगी।
उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना को मंज़ूरी दे दी है। योजना के तहत 60 करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2026-27 में 2.28 लाख से अधिक पशुओं का बीमा कराया जाएगा। बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा सरकार और 15 प्रतिशत लाभार्थी देगा। महामारी, दैविक आपदा, दुर्घटना या स्थायी विकलांगता की स्थिति में आर्थिक सहायता मिलेगी। योजना प्रदेश के सभी 75 ज़िलों में लागू होगी।
By Gaon Connection
मथुरा में आयोजित महिलाओं के नेतृत्व वाले बकरी उद्यमों पर राष्ट्रीय कार्यशाला में विशेषज्ञों ने भारत के बकरी पालन क्षेत्र में वैज्ञानिक नवाचार, महिला नेतृत्व वाले उद्यमों और एकीकृत वैल्यू चेन विकसित करने पर ज़ोर दिया। बेहतर नस्ल, गुणवत्तापूर्ण चारा, पशु स्वास्थ्य सेवाओं, वित्तीय सहायता और संगठित बाज़ार को किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण रोज़गार सृजित करने और महिला सशक्तिकरण के लिए अहम बताया गया।
मथुरा में आयोजित महिलाओं के नेतृत्व वाले बकरी उद्यमों पर राष्ट्रीय कार्यशाला में विशेषज्ञों ने भारत के बकरी पालन क्षेत्र में वैज्ञानिक नवाचार, महिला नेतृत्व वाले उद्यमों और एकीकृत वैल्यू चेन विकसित करने पर ज़ोर दिया। बेहतर नस्ल, गुणवत्तापूर्ण चारा, पशु स्वास्थ्य सेवाओं, वित्तीय सहायता और संगठित बाज़ार को किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण रोज़गार सृजित करने और महिला सशक्तिकरण के लिए अहम बताया गया।
By Preeti Nahar
बकरी पालन में अच्छी नस्ल, सही समय पर प्रजनन और बेहतर उत्पादन की कमी किसानों के लिए बड़ी चुनौती रही है। अब कृत्रिम गर्भाधान और हीट सिंक्रोनाइजेशन जैसी आधुनिक तकनीकों से बकरी पालकों को नस्ल सुधार और ज्यादा मुनाफे का रास्ता मिलेगा। उत्तर प्रदेश में इस तकनीक को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है, जिससे छोटे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
बकरी पालन में अच्छी नस्ल, सही समय पर प्रजनन और बेहतर उत्पादन की कमी किसानों के लिए बड़ी चुनौती रही है। अब कृत्रिम गर्भाधान और हीट सिंक्रोनाइजेशन जैसी आधुनिक तकनीकों से बकरी पालकों को नस्ल सुधार और ज्यादा मुनाफे का रास्ता मिलेगा। उत्तर प्रदेश में इस तकनीक को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है, जिससे छोटे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
By Umang
लखनऊ में शुरू हुए यूपी स्मॉल लाइवस्टॉक कॉन्क्लेव में प्रदेशभर के पशुपालक, उद्यमी और विशेषज्ञ जुटे हैं। इटावा के पशुपालक शिव कुमार यादव अपने 5 लाख रुपये क़ीमत वाले जमुनापारी बकरे ‘युवराज’ के साथ पहुँचे, जिसने लोगों का ध्यान खींचा। कॉन्क्लेव में पशुपालन आधारित आय, उद्यमिता और नई तकनीकों पर चर्चा हो रही है।
लखनऊ में शुरू हुए यूपी स्मॉल लाइवस्टॉक कॉन्क्लेव में प्रदेशभर के पशुपालक, उद्यमी और विशेषज्ञ जुटे हैं। इटावा के पशुपालक शिव कुमार यादव अपने 5 लाख रुपये क़ीमत वाले जमुनापारी बकरे ‘युवराज’ के साथ पहुँचे, जिसने लोगों का ध्यान खींचा। कॉन्क्लेव में पशुपालन आधारित आय, उद्यमिता और नई तकनीकों पर चर्चा हो रही है।
By Preeti Nahar
जून के महीने में मौसम में लगातार बदलाव देखा जा रहा हैष कभी बहुत अधिक गर्मी तो कभी बारिश आ जाती है। ऐसे में जो किसान दुधारू पशु रखते हैं उनको अपने पशुओं के चारे में सतर्कता बरतनी चाहिए। क्योंकि ख़राब चारा खाने से पशुओं में कीटोसिस नामक बीमारी हो जाती है। जानिए इस तरह की बीमारी में पशु में किस तरह के लक्षण देखे जाते हैं और उनके रोकथाम के तरीके क्या है ये भी जानिए।
जून के महीने में मौसम में लगातार बदलाव देखा जा रहा हैष कभी बहुत अधिक गर्मी तो कभी बारिश आ जाती है। ऐसे में जो किसान दुधारू पशु रखते हैं उनको अपने पशुओं के चारे में सतर्कता बरतनी चाहिए। क्योंकि ख़राब चारा खाने से पशुओं में कीटोसिस नामक बीमारी हो जाती है। जानिए इस तरह की बीमारी में पशु में किस तरह के लक्षण देखे जाते हैं और उनके रोकथाम के तरीके क्या है ये भी जानिए।
By Preeti Nahar
क्या आप जानते हैं कि जो हरा चारा गर्मी में किसान अपने पशुओं को खिला रहा है वो जानलेवा हो सकता है? जी हां, गर्मी में पशुओं के लिए हरा चारा बेहद जरूरी होता है, क्योंकि यह पोषण देने के साथ-साथ उन्हें हीट स्ट्रेस से बचाने में मदद करता है। हालांकि, ज्वार और बाजरा जैसे कुछ चारे में पानी की कमी, फसल पर तनाव या गलत समय पर कटाई के कारण जहरीले तत्व बन सकते हैं, जो जानलेवा होते हैं। जानिए कि आखिर हरे चारे को पशुओं के लिए सुरक्षित तरीके से कैसे खिलाएं और जहरीले चारे से कैसे बचें?
क्या आप जानते हैं कि जो हरा चारा गर्मी में किसान अपने पशुओं को खिला रहा है वो जानलेवा हो सकता है? जी हां, गर्मी में पशुओं के लिए हरा चारा बेहद जरूरी होता है, क्योंकि यह पोषण देने के साथ-साथ उन्हें हीट स्ट्रेस से बचाने में मदद करता है। हालांकि, ज्वार और बाजरा जैसे कुछ चारे में पानी की कमी, फसल पर तनाव या गलत समय पर कटाई के कारण जहरीले तत्व बन सकते हैं, जो जानलेवा होते हैं। जानिए कि आखिर हरे चारे को पशुओं के लिए सुरक्षित तरीके से कैसे खिलाएं और जहरीले चारे से कैसे बचें?
By Gaon Connection
मछलियों के प्राकृतिक प्रजनन और जलीय संसाधनों के संरक्षण के लिए इस राज्य में नदियों एवं उनसे जुड़े जलाशयों में मछली पकड़ने पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया है। इस अवधि के दौरान अवैध रूप से मछली पकड़ने या परिवहन करने पर जेल और जुर्माने की कार्रवाई हो सकती है। सरकार का उद्देश्य मत्स्य उत्पादन बढ़ाना, जैव विविधता की रक्षा करना और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाना है।
मछलियों के प्राकृतिक प्रजनन और जलीय संसाधनों के संरक्षण के लिए इस राज्य में नदियों एवं उनसे जुड़े जलाशयों में मछली पकड़ने पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया है। इस अवधि के दौरान अवैध रूप से मछली पकड़ने या परिवहन करने पर जेल और जुर्माने की कार्रवाई हो सकती है। सरकार का उद्देश्य मत्स्य उत्पादन बढ़ाना, जैव विविधता की रक्षा करना और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाना है।
By Mansi
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