By Umang
उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना को मंज़ूरी दे दी है। योजना के तहत 60 करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2026-27 में 2.28 लाख से अधिक पशुओं का बीमा कराया जाएगा। बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा सरकार और 15 प्रतिशत लाभार्थी देगा। महामारी, दैविक आपदा, दुर्घटना या स्थायी विकलांगता की स्थिति में आर्थिक सहायता मिलेगी। योजना प्रदेश के सभी 75 ज़िलों में लागू होगी।
उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना को मंज़ूरी दे दी है। योजना के तहत 60 करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2026-27 में 2.28 लाख से अधिक पशुओं का बीमा कराया जाएगा। बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा सरकार और 15 प्रतिशत लाभार्थी देगा। महामारी, दैविक आपदा, दुर्घटना या स्थायी विकलांगता की स्थिति में आर्थिक सहायता मिलेगी। योजना प्रदेश के सभी 75 ज़िलों में लागू होगी।
By Gaon Connection
मथुरा में आयोजित महिलाओं के नेतृत्व वाले बकरी उद्यमों पर राष्ट्रीय कार्यशाला में विशेषज्ञों ने भारत के बकरी पालन क्षेत्र में वैज्ञानिक नवाचार, महिला नेतृत्व वाले उद्यमों और एकीकृत वैल्यू चेन विकसित करने पर ज़ोर दिया। बेहतर नस्ल, गुणवत्तापूर्ण चारा, पशु स्वास्थ्य सेवाओं, वित्तीय सहायता और संगठित बाज़ार को किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण रोज़गार सृजित करने और महिला सशक्तिकरण के लिए अहम बताया गया।
मथुरा में आयोजित महिलाओं के नेतृत्व वाले बकरी उद्यमों पर राष्ट्रीय कार्यशाला में विशेषज्ञों ने भारत के बकरी पालन क्षेत्र में वैज्ञानिक नवाचार, महिला नेतृत्व वाले उद्यमों और एकीकृत वैल्यू चेन विकसित करने पर ज़ोर दिया। बेहतर नस्ल, गुणवत्तापूर्ण चारा, पशु स्वास्थ्य सेवाओं, वित्तीय सहायता और संगठित बाज़ार को किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण रोज़गार सृजित करने और महिला सशक्तिकरण के लिए अहम बताया गया।
By Preeti Nahar
बकरी पालन में अच्छी नस्ल, सही समय पर प्रजनन और बेहतर उत्पादन की कमी किसानों के लिए बड़ी चुनौती रही है। अब कृत्रिम गर्भाधान और हीट सिंक्रोनाइजेशन जैसी आधुनिक तकनीकों से बकरी पालकों को नस्ल सुधार और ज्यादा मुनाफे का रास्ता मिलेगा। उत्तर प्रदेश में इस तकनीक को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है, जिससे छोटे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
बकरी पालन में अच्छी नस्ल, सही समय पर प्रजनन और बेहतर उत्पादन की कमी किसानों के लिए बड़ी चुनौती रही है। अब कृत्रिम गर्भाधान और हीट सिंक्रोनाइजेशन जैसी आधुनिक तकनीकों से बकरी पालकों को नस्ल सुधार और ज्यादा मुनाफे का रास्ता मिलेगा। उत्तर प्रदेश में इस तकनीक को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है, जिससे छोटे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
By Umang
लखनऊ में शुरू हुए यूपी स्मॉल लाइवस्टॉक कॉन्क्लेव में प्रदेशभर के पशुपालक, उद्यमी और विशेषज्ञ जुटे हैं। इटावा के पशुपालक शिव कुमार यादव अपने 5 लाख रुपये क़ीमत वाले जमुनापारी बकरे ‘युवराज’ के साथ पहुँचे, जिसने लोगों का ध्यान खींचा। कॉन्क्लेव में पशुपालन आधारित आय, उद्यमिता और नई तकनीकों पर चर्चा हो रही है।
लखनऊ में शुरू हुए यूपी स्मॉल लाइवस्टॉक कॉन्क्लेव में प्रदेशभर के पशुपालक, उद्यमी और विशेषज्ञ जुटे हैं। इटावा के पशुपालक शिव कुमार यादव अपने 5 लाख रुपये क़ीमत वाले जमुनापारी बकरे ‘युवराज’ के साथ पहुँचे, जिसने लोगों का ध्यान खींचा। कॉन्क्लेव में पशुपालन आधारित आय, उद्यमिता और नई तकनीकों पर चर्चा हो रही है।
By Preeti Nahar
जून के महीने में मौसम में लगातार बदलाव देखा जा रहा हैष कभी बहुत अधिक गर्मी तो कभी बारिश आ जाती है। ऐसे में जो किसान दुधारू पशु रखते हैं उनको अपने पशुओं के चारे में सतर्कता बरतनी चाहिए। क्योंकि ख़राब चारा खाने से पशुओं में कीटोसिस नामक बीमारी हो जाती है। जानिए इस तरह की बीमारी में पशु में किस तरह के लक्षण देखे जाते हैं और उनके रोकथाम के तरीके क्या है ये भी जानिए।
जून के महीने में मौसम में लगातार बदलाव देखा जा रहा हैष कभी बहुत अधिक गर्मी तो कभी बारिश आ जाती है। ऐसे में जो किसान दुधारू पशु रखते हैं उनको अपने पशुओं के चारे में सतर्कता बरतनी चाहिए। क्योंकि ख़राब चारा खाने से पशुओं में कीटोसिस नामक बीमारी हो जाती है। जानिए इस तरह की बीमारी में पशु में किस तरह के लक्षण देखे जाते हैं और उनके रोकथाम के तरीके क्या है ये भी जानिए।
By Preeti Nahar
क्या आप जानते हैं कि जो हरा चारा गर्मी में किसान अपने पशुओं को खिला रहा है वो जानलेवा हो सकता है? जी हां, गर्मी में पशुओं के लिए हरा चारा बेहद जरूरी होता है, क्योंकि यह पोषण देने के साथ-साथ उन्हें हीट स्ट्रेस से बचाने में मदद करता है। हालांकि, ज्वार और बाजरा जैसे कुछ चारे में पानी की कमी, फसल पर तनाव या गलत समय पर कटाई के कारण जहरीले तत्व बन सकते हैं, जो जानलेवा होते हैं। जानिए कि आखिर हरे चारे को पशुओं के लिए सुरक्षित तरीके से कैसे खिलाएं और जहरीले चारे से कैसे बचें?
क्या आप जानते हैं कि जो हरा चारा गर्मी में किसान अपने पशुओं को खिला रहा है वो जानलेवा हो सकता है? जी हां, गर्मी में पशुओं के लिए हरा चारा बेहद जरूरी होता है, क्योंकि यह पोषण देने के साथ-साथ उन्हें हीट स्ट्रेस से बचाने में मदद करता है। हालांकि, ज्वार और बाजरा जैसे कुछ चारे में पानी की कमी, फसल पर तनाव या गलत समय पर कटाई के कारण जहरीले तत्व बन सकते हैं, जो जानलेवा होते हैं। जानिए कि आखिर हरे चारे को पशुओं के लिए सुरक्षित तरीके से कैसे खिलाएं और जहरीले चारे से कैसे बचें?
By Gaon Connection
मछलियों के प्राकृतिक प्रजनन और जलीय संसाधनों के संरक्षण के लिए इस राज्य में नदियों एवं उनसे जुड़े जलाशयों में मछली पकड़ने पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया है। इस अवधि के दौरान अवैध रूप से मछली पकड़ने या परिवहन करने पर जेल और जुर्माने की कार्रवाई हो सकती है। सरकार का उद्देश्य मत्स्य उत्पादन बढ़ाना, जैव विविधता की रक्षा करना और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाना है।
मछलियों के प्राकृतिक प्रजनन और जलीय संसाधनों के संरक्षण के लिए इस राज्य में नदियों एवं उनसे जुड़े जलाशयों में मछली पकड़ने पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया है। इस अवधि के दौरान अवैध रूप से मछली पकड़ने या परिवहन करने पर जेल और जुर्माने की कार्रवाई हो सकती है। सरकार का उद्देश्य मत्स्य उत्पादन बढ़ाना, जैव विविधता की रक्षा करना और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाना है।
By Preeti Nahar
मानसून की बारिश जहाँ किसानों के लिए राहत लेकर आती है, वहीं पशुपालकों के लिए कई बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देती है। इन्हीं में से एक है गलघोंटू (हेमरेजिक सेप्टीसीमिया) बीमारी, जो गाय, भैंस और अन्य दुधारू पशुओं के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। पशु चिकित्सकों का कहना है कि समय पर टीकाकरण और साफ-सफाई अपनाकर इस बीमारी से बड़े नुकसान को रोका जा सकता है।
मानसून की बारिश जहाँ किसानों के लिए राहत लेकर आती है, वहीं पशुपालकों के लिए कई बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देती है। इन्हीं में से एक है गलघोंटू (हेमरेजिक सेप्टीसीमिया) बीमारी, जो गाय, भैंस और अन्य दुधारू पशुओं के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। पशु चिकित्सकों का कहना है कि समय पर टीकाकरण और साफ-सफाई अपनाकर इस बीमारी से बड़े नुकसान को रोका जा सकता है।
By Gaon Connection
उत्तर प्रदेश सरकार बकरी, भेड़ और सूकर पालन को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए 17 और 18 जून को लखनऊ में "यूपी स्मॉल लाइवस्टॉक कॉन्क्लेव 2026" का आयोजन होगा। यह आयोजन किसानों, युवाओं और उद्यमियों को नए अवसर प्रदान करेगा। इसमें पशु स्वास्थ्य, चारा विकास और मूल्य संवर्धन जैसे विषयों पर चर्चा होगी। सफल पशुपालकों को सम्मानित किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश सरकार बकरी, भेड़ और सूकर पालन को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए 17 और 18 जून को लखनऊ में "यूपी स्मॉल लाइवस्टॉक कॉन्क्लेव 2026" का आयोजन होगा। यह आयोजन किसानों, युवाओं और उद्यमियों को नए अवसर प्रदान करेगा। इसमें पशु स्वास्थ्य, चारा विकास और मूल्य संवर्धन जैसे विषयों पर चर्चा होगी। सफल पशुपालकों को सम्मानित किया जाएगा।
By Gaon Connection
भारत में रिकॉर्ड दूध उत्पादन के बावजूद भीषण गर्मी और जलवायु परिवर्तन डेयरी क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक गर्मी से दूध उत्पादन में 30 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। पशुओं को ठंडा रखने की बढ़ती लागत किसानों की आय पर दबाव डाल रही है। वैज्ञानिक गर्मी सहन करने वाली नस्लों और नई तकनीकों पर काम कर रहे हैं।
भारत में रिकॉर्ड दूध उत्पादन के बावजूद भीषण गर्मी और जलवायु परिवर्तन डेयरी क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक गर्मी से दूध उत्पादन में 30 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। पशुओं को ठंडा रखने की बढ़ती लागत किसानों की आय पर दबाव डाल रही है। वैज्ञानिक गर्मी सहन करने वाली नस्लों और नई तकनीकों पर काम कर रहे हैं।
By Swati
By Gaon Connection
By Lata Mishra
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By Umang
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