By Divendra Singh
अविशान भेड़ भारत में विकसित की गई एक ऐसी नस्ल, जो अपनी प्रजनन क्षमता और बेहतर मांस उत्पादन के लिए जानी जाती है। जानते हैं कैसे ये नस्ल कम लागत में किसानों की आमदनी बढ़ा सकती है।
अविशान भेड़ भारत में विकसित की गई एक ऐसी नस्ल, जो अपनी प्रजनन क्षमता और बेहतर मांस उत्पादन के लिए जानी जाती है। जानते हैं कैसे ये नस्ल कम लागत में किसानों की आमदनी बढ़ा सकती है।
By Divendra Singh
अरुणाचल प्रदेश के ज़ीरो में पहली बार रेनबो ट्राउट के ‘आईड ओवा’ की पायलट हैचिंग शुरू हुई है। यह कदम हिमाचल, कश्मीर, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों में कोल्ड-वॉटर फिशरीज को मजबूत करने, किसानों की आमदनी बढ़ाने और आधुनिक एक्वाकल्चर को बढ़ावा देने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
अरुणाचल प्रदेश के ज़ीरो में पहली बार रेनबो ट्राउट के ‘आईड ओवा’ की पायलट हैचिंग शुरू हुई है। यह कदम हिमाचल, कश्मीर, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों में कोल्ड-वॉटर फिशरीज को मजबूत करने, किसानों की आमदनी बढ़ाने और आधुनिक एक्वाकल्चर को बढ़ावा देने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
By Divendra Singh
बिहार के जलभराव वाले गाँवों में ICAR द्वारा विकसित बकरी आधारित एकीकृत खेती प्रणाली किसानों के लिए नई उम्मीद बन रही है। इस मॉडल में बकरी पालन, मछली उत्पादन, फसल और बागवानी को जोड़कर एक ही खेत से सालभर आमदनी का रास्ता खोला गया है।
बिहार के जलभराव वाले गाँवों में ICAR द्वारा विकसित बकरी आधारित एकीकृत खेती प्रणाली किसानों के लिए नई उम्मीद बन रही है। इस मॉडल में बकरी पालन, मछली उत्पादन, फसल और बागवानी को जोड़कर एक ही खेत से सालभर आमदनी का रास्ता खोला गया है।
By Preeti Nahar
सरकार ने देसी पशुधन नस्लों की कमी को एक गंभीर चिंता का विषय माना है। इसी को ध्यान में रखते हुए, 2008 में 242 नस्लों को पंजीकृत किया गया था और अब 2047 तक सभी देसी नस्लों का 100 फीसदी पंजीकरण करने का लक्ष्य रखा गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), दिल्ली में देसी पुशधन के संरक्षण को लेकर कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम में स्वदेशी पशु नस्लों के संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को वर्ष 2025 के लिए नस्ल संरक्षण पुरस्कार से नवाजा गया।
सरकार ने देसी पशुधन नस्लों की कमी को एक गंभीर चिंता का विषय माना है। इसी को ध्यान में रखते हुए, 2008 में 242 नस्लों को पंजीकृत किया गया था और अब 2047 तक सभी देसी नस्लों का 100 फीसदी पंजीकरण करने का लक्ष्य रखा गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), दिल्ली में देसी पुशधन के संरक्षण को लेकर कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम में स्वदेशी पशु नस्लों के संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को वर्ष 2025 के लिए नस्ल संरक्षण पुरस्कार से नवाजा गया।
By Divendra Singh
असम के लखीमपुर ज़िले के किसान जितुल बुरागोहेन ने दशकों तक पारंपरिक तरीकों से देसी लुइट भैंस नस्ल की आनुवंशिक शुद्धता और अस्तित्व को बचाए रखा। ब्रह्मपुत्र के तटों और टापुओं पर पलने वाली यह नस्ल बाढ़, कम संसाधन और कठिन परिस्थितियों में भी टिकने की क्षमता रखती है। उनके इसी समर्पण को राष्ट्रीय पहचान मिली है।
असम के लखीमपुर ज़िले के किसान जितुल बुरागोहेन ने दशकों तक पारंपरिक तरीकों से देसी लुइट भैंस नस्ल की आनुवंशिक शुद्धता और अस्तित्व को बचाए रखा। ब्रह्मपुत्र के तटों और टापुओं पर पलने वाली यह नस्ल बाढ़, कम संसाधन और कठिन परिस्थितियों में भी टिकने की क्षमता रखती है। उनके इसी समर्पण को राष्ट्रीय पहचान मिली है।
By Gaon Connection
कभी सिर्फ़ गुज़ारे भर का साधन माने जाने वाला मत्स्य पालन आज भारत में रोज़गार, आय और सुरक्षा का मज़बूत आधार बन रहा है। सरकारी योजनाओं, बेहतर तकनीक और बाज़ार तक पहुँच से मछुआरों और मछली पालने वाले किसानों की ज़िंदगी में बड़ा बदलाव आया है।
कभी सिर्फ़ गुज़ारे भर का साधन माने जाने वाला मत्स्य पालन आज भारत में रोज़गार, आय और सुरक्षा का मज़बूत आधार बन रहा है। सरकारी योजनाओं, बेहतर तकनीक और बाज़ार तक पहुँच से मछुआरों और मछली पालने वाले किसानों की ज़िंदगी में बड़ा बदलाव आया है।
By Preeti Nahar
किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए, सरकार ने एक नई पहल शुरू की है: पशु किसान क्रेडिट कार्ड योजना। इस योजना के तहत किसान आसानी से गाय, भैंस, बकरी या मुर्गी खरीद कर अपने व्यावसायिक सफर की शुरुआत कर सकते हैं।
किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए, सरकार ने एक नई पहल शुरू की है: पशु किसान क्रेडिट कार्ड योजना। इस योजना के तहत किसान आसानी से गाय, भैंस, बकरी या मुर्गी खरीद कर अपने व्यावसायिक सफर की शुरुआत कर सकते हैं।
By Gaon Connection
भारत की स्वदेशी मछली प्रजातियाँ सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि जैव विविधता, स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण आजीविका की रीढ़ हैं। कुछ गिनी-चुनी प्रजातियों पर निर्भरता बढ़ने से जोखिम भी बढ़ा है।
भारत की स्वदेशी मछली प्रजातियाँ सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि जैव विविधता, स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण आजीविका की रीढ़ हैं। कुछ गिनी-चुनी प्रजातियों पर निर्भरता बढ़ने से जोखिम भी बढ़ा है।
By Gaon Connection
मौसम बदलने पर पशु अक्सर बीमार पड़ जाते हैं, लेकिन पशुपालक को पता नहीं चल पाता कि उन्हें कौन-सी बीमारी हुई है। ऐसे में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के IVRI का “रोग नियंत्रण एप” आपके पशु के लिए मददगार साबित हो सकता है।
मौसम बदलने पर पशु अक्सर बीमार पड़ जाते हैं, लेकिन पशुपालक को पता नहीं चल पाता कि उन्हें कौन-सी बीमारी हुई है। ऐसे में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के IVRI का “रोग नियंत्रण एप” आपके पशु के लिए मददगार साबित हो सकता है।
By Divendra Singh
फ्रांस में लंपी स्किन डिज़ीज़ के नाम पर मवेशियों की सामूहिक हत्या के खिलाफ किसान सड़कों पर हैं। सरकार इसे बीमारी नियंत्रण बता रही है, जबकि किसान इसे अपनी आजीविका और भावनात्मक दुनिया पर हमला मानते हैं। यह कहानी सिर्फ़ फ्रांस की नहीं, बल्कि भारत समेत उन सभी देशों की है, जहाँ पशुपालन लाखों परिवारों की ज़िंदगी का आधार है।
फ्रांस में लंपी स्किन डिज़ीज़ के नाम पर मवेशियों की सामूहिक हत्या के खिलाफ किसान सड़कों पर हैं। सरकार इसे बीमारी नियंत्रण बता रही है, जबकि किसान इसे अपनी आजीविका और भावनात्मक दुनिया पर हमला मानते हैं। यह कहानी सिर्फ़ फ्रांस की नहीं, बल्कि भारत समेत उन सभी देशों की है, जहाँ पशुपालन लाखों परिवारों की ज़िंदगी का आधार है।
By Gaon Connection
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By Divendra Singh
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By Gaon Connection
By Gaon Connection
By Preeti Nahar