By Preeti Nahar
क्या आप जानते हैं कि जो हरा चारा गर्मी में किसान अपने पशुओं को खिला रहा है वो जानलेवा हो सकता है? जी हां, गर्मी में पशुओं के लिए हरा चारा बेहद जरूरी होता है, क्योंकि यह पोषण देने के साथ-साथ उन्हें हीट स्ट्रेस से बचाने में मदद करता है। हालांकि, ज्वार और बाजरा जैसे कुछ चारे में पानी की कमी, फसल पर तनाव या गलत समय पर कटाई के कारण जहरीले तत्व बन सकते हैं, जो जानलेवा होते हैं। जानिए कि आखिर हरे चारे को पशुओं के लिए सुरक्षित तरीके से कैसे खिलाएं और जहरीले चारे से कैसे बचें?
क्या आप जानते हैं कि जो हरा चारा गर्मी में किसान अपने पशुओं को खिला रहा है वो जानलेवा हो सकता है? जी हां, गर्मी में पशुओं के लिए हरा चारा बेहद जरूरी होता है, क्योंकि यह पोषण देने के साथ-साथ उन्हें हीट स्ट्रेस से बचाने में मदद करता है। हालांकि, ज्वार और बाजरा जैसे कुछ चारे में पानी की कमी, फसल पर तनाव या गलत समय पर कटाई के कारण जहरीले तत्व बन सकते हैं, जो जानलेवा होते हैं। जानिए कि आखिर हरे चारे को पशुओं के लिए सुरक्षित तरीके से कैसे खिलाएं और जहरीले चारे से कैसे बचें?
By Gaon Connection
मछलियों के प्राकृतिक प्रजनन और जलीय संसाधनों के संरक्षण के लिए इस राज्य में नदियों एवं उनसे जुड़े जलाशयों में मछली पकड़ने पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया है। इस अवधि के दौरान अवैध रूप से मछली पकड़ने या परिवहन करने पर जेल और जुर्माने की कार्रवाई हो सकती है। सरकार का उद्देश्य मत्स्य उत्पादन बढ़ाना, जैव विविधता की रक्षा करना और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाना है।
मछलियों के प्राकृतिक प्रजनन और जलीय संसाधनों के संरक्षण के लिए इस राज्य में नदियों एवं उनसे जुड़े जलाशयों में मछली पकड़ने पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया है। इस अवधि के दौरान अवैध रूप से मछली पकड़ने या परिवहन करने पर जेल और जुर्माने की कार्रवाई हो सकती है। सरकार का उद्देश्य मत्स्य उत्पादन बढ़ाना, जैव विविधता की रक्षा करना और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाना है।
By Preeti Nahar
मानसून की बारिश जहाँ किसानों के लिए राहत लेकर आती है, वहीं पशुपालकों के लिए कई बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देती है। इन्हीं में से एक है गलघोंटू (हेमरेजिक सेप्टीसीमिया) बीमारी, जो गाय, भैंस और अन्य दुधारू पशुओं के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। पशु चिकित्सकों का कहना है कि समय पर टीकाकरण और साफ-सफाई अपनाकर इस बीमारी से बड़े नुकसान को रोका जा सकता है।
मानसून की बारिश जहाँ किसानों के लिए राहत लेकर आती है, वहीं पशुपालकों के लिए कई बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देती है। इन्हीं में से एक है गलघोंटू (हेमरेजिक सेप्टीसीमिया) बीमारी, जो गाय, भैंस और अन्य दुधारू पशुओं के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। पशु चिकित्सकों का कहना है कि समय पर टीकाकरण और साफ-सफाई अपनाकर इस बीमारी से बड़े नुकसान को रोका जा सकता है।
By Gaon Connection
उत्तर प्रदेश सरकार बकरी, भेड़ और सूकर पालन को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए 17 और 18 जून को लखनऊ में "यूपी स्मॉल लाइवस्टॉक कॉन्क्लेव 2026" का आयोजन होगा। यह आयोजन किसानों, युवाओं और उद्यमियों को नए अवसर प्रदान करेगा। इसमें पशु स्वास्थ्य, चारा विकास और मूल्य संवर्धन जैसे विषयों पर चर्चा होगी। सफल पशुपालकों को सम्मानित किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश सरकार बकरी, भेड़ और सूकर पालन को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए 17 और 18 जून को लखनऊ में "यूपी स्मॉल लाइवस्टॉक कॉन्क्लेव 2026" का आयोजन होगा। यह आयोजन किसानों, युवाओं और उद्यमियों को नए अवसर प्रदान करेगा। इसमें पशु स्वास्थ्य, चारा विकास और मूल्य संवर्धन जैसे विषयों पर चर्चा होगी। सफल पशुपालकों को सम्मानित किया जाएगा।
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भारत में रिकॉर्ड दूध उत्पादन के बावजूद भीषण गर्मी और जलवायु परिवर्तन डेयरी क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक गर्मी से दूध उत्पादन में 30 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। पशुओं को ठंडा रखने की बढ़ती लागत किसानों की आय पर दबाव डाल रही है। वैज्ञानिक गर्मी सहन करने वाली नस्लों और नई तकनीकों पर काम कर रहे हैं।
भारत में रिकॉर्ड दूध उत्पादन के बावजूद भीषण गर्मी और जलवायु परिवर्तन डेयरी क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक गर्मी से दूध उत्पादन में 30 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। पशुओं को ठंडा रखने की बढ़ती लागत किसानों की आय पर दबाव डाल रही है। वैज्ञानिक गर्मी सहन करने वाली नस्लों और नई तकनीकों पर काम कर रहे हैं।
By Gaon Connection
हरियाणा सरकार ने मुर्रा नस्ल के संरक्षण और सुधार के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए हैं। उच्च दुग्ध उत्पादन करने वाली भैंसों की पहचान, उनके बछड़ों का वैज्ञानिक पालन-पोषण, कृत्रिम गर्भाधान और किसानों को नकद प्रोत्साहन जैसी योजनाओं के जरिए नस्ल सुधार को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस पहल से दूध उत्पादन में वृद्धि हुई है और हजारों किसानों को आर्थिक लाभ मिला है।
हरियाणा सरकार ने मुर्रा नस्ल के संरक्षण और सुधार के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए हैं। उच्च दुग्ध उत्पादन करने वाली भैंसों की पहचान, उनके बछड़ों का वैज्ञानिक पालन-पोषण, कृत्रिम गर्भाधान और किसानों को नकद प्रोत्साहन जैसी योजनाओं के जरिए नस्ल सुधार को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस पहल से दूध उत्पादन में वृद्धि हुई है और हजारों किसानों को आर्थिक लाभ मिला है।
By Gaon Connection
विश्व दुग्ध दिवस हर वर्ष 1 जून को दूध के पोषण, खाद्य सुरक्षा और डेयरी किसानों के योगदान को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। डेयरी क्षेत्र किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है, जिनके तहत पशुपालकों को सब्सिडी, प्रोत्साहन राशि, बैंक ऋण और डेयरी इकाइयों की स्थापना के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
विश्व दुग्ध दिवस हर वर्ष 1 जून को दूध के पोषण, खाद्य सुरक्षा और डेयरी किसानों के योगदान को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। डेयरी क्षेत्र किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है, जिनके तहत पशुपालकों को सब्सिडी, प्रोत्साहन राशि, बैंक ऋण और डेयरी इकाइयों की स्थापना के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
By Preeti Nahar
हरियाणा सरकार ने पशुपालकों के लिए बड़ी राहत देते हुए पशु चिकित्सा मोबाइल वैन सेवा को और मजबूत करने का फैसला लिया है। अब अगर किसी पशु की तबीयत खराब होती है तो पशुपालक एक टोल-फ्री नंबर पर कॉल कर सकेंगे। इसके बाद मोबाइल वेटरनरी वैन पशुपालकों के घर पहुंचकर 30 मिनट के भीतर इलाज सुविधा उपलब्ध कराएगी। फिलहाल यह सेवा सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक उपलब्ध रहेगी, जिसे आगे चलकर 24 घंटे तक विस्तारित किया जाएगा। जानिए कितना है टोल फ्री नंबर?
हरियाणा सरकार ने पशुपालकों के लिए बड़ी राहत देते हुए पशु चिकित्सा मोबाइल वैन सेवा को और मजबूत करने का फैसला लिया है। अब अगर किसी पशु की तबीयत खराब होती है तो पशुपालक एक टोल-फ्री नंबर पर कॉल कर सकेंगे। इसके बाद मोबाइल वेटरनरी वैन पशुपालकों के घर पहुंचकर 30 मिनट के भीतर इलाज सुविधा उपलब्ध कराएगी। फिलहाल यह सेवा सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक उपलब्ध रहेगी, जिसे आगे चलकर 24 घंटे तक विस्तारित किया जाएगा। जानिए कितना है टोल फ्री नंबर?
By Preeti Nahar
दुनिया में एक ऐसी दुर्लभ मुर्गी भी है जिसकी कीमत सुनकर बड़े-बड़े कारोबारी हैरान रह जाते हैं। काले रंग की यह खास नस्ल सिर्फ अपनी अनोखी पहचान के लिए नहीं, बल्कि करोड़ों के प्रीमियम पोल्ट्री बिजनेस का हिस्सा बनने की वजह से चर्चा में है। इसके अंडे से लेकर मांस तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी कीमत पर बिकते हैं और अमीरों के बीच इसे नया स्टेटस सिंबल माना जा रहा है। आखिर इस विदेशी नस्ल में ऐसा क्या खास है कि लोग लाखों रुपये खर्च करने को तैयार हैं?
दुनिया में एक ऐसी दुर्लभ मुर्गी भी है जिसकी कीमत सुनकर बड़े-बड़े कारोबारी हैरान रह जाते हैं। काले रंग की यह खास नस्ल सिर्फ अपनी अनोखी पहचान के लिए नहीं, बल्कि करोड़ों के प्रीमियम पोल्ट्री बिजनेस का हिस्सा बनने की वजह से चर्चा में है। इसके अंडे से लेकर मांस तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी कीमत पर बिकते हैं और अमीरों के बीच इसे नया स्टेटस सिंबल माना जा रहा है। आखिर इस विदेशी नस्ल में ऐसा क्या खास है कि लोग लाखों रुपये खर्च करने को तैयार हैं?
By Preeti Nahar
उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में कम लागत वाली हाइड्रोपोनिक्स तकनीक के जरिए हरे चारे का उत्पादन छोटे बकरी पालकों के लिए राहत बनकर उभरा है। द गोट ट्रस्ट की पहल से 150 से अधिक पशुपालक किसानों को लाभ मिल रहा है। इस तकनीक की खासियत यह है कि बिना मिट्टी, बिना खेत और बिना बिजली के मात्र सात दिनों में पौष्टिक हरा चारा तैयार हो रहा है। महिला उद्यमी इसे लगभग ₹5 प्रति किलो की दर से बेच रही हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय का स्रोत मिला है।
उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में कम लागत वाली हाइड्रोपोनिक्स तकनीक के जरिए हरे चारे का उत्पादन छोटे बकरी पालकों के लिए राहत बनकर उभरा है। द गोट ट्रस्ट की पहल से 150 से अधिक पशुपालक किसानों को लाभ मिल रहा है। इस तकनीक की खासियत यह है कि बिना मिट्टी, बिना खेत और बिना बिजली के मात्र सात दिनों में पौष्टिक हरा चारा तैयार हो रहा है। महिला उद्यमी इसे लगभग ₹5 प्रति किलो की दर से बेच रही हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय का स्रोत मिला है।
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