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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने कृषि क्षेत्र में आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी के सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए संतुलित और विज्ञान आधारित नियामक व्यवस्था की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है। नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में जैव-प्रौद्योगिकी आधारित फसलों के लिए मौजूदा नियामक ढाँचे को आधुनिक बनाने पर चर्चा हुई। बैठक में पारदर्शी, समयबद्ध और जोखिम-आधारित स्वीकृति प्रक्रिया अपनाने की वकालत की गई, ताकि किसानों की आय बढ़े, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा मज़बूत हो और भारतीय कृषि वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बन सके।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने कृषि क्षेत्र में आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी के सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए संतुलित और विज्ञान आधारित नियामक व्यवस्था की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है। नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में जैव-प्रौद्योगिकी आधारित फसलों के लिए मौजूदा नियामक ढाँचे को आधुनिक बनाने पर चर्चा हुई। बैठक में पारदर्शी, समयबद्ध और जोखिम-आधारित स्वीकृति प्रक्रिया अपनाने की वकालत की गई, ताकि किसानों की आय बढ़े, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा मज़बूत हो और भारतीय कृषि वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बन सके।
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बिहार सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 'बगीचों में कीट प्रबंधन योजना' शुरू की है। इस योजना के तहत आम, अमरूद और लीची उत्पादक किसानों को वैज्ञानिक तरीके से कीट एवं रोग नियंत्रण के लिए दो चरणों में कीटनाशकों के छिड़काव पर 75% तक अनुदान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य फलों की गुणवत्ता में सुधार, उत्पादन बढ़ाना, खेती की लागत कम करना और किसानों की आय में वृद्धि करना है। इच्छुक किसान उद्यानिकी विभाग के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन कर योजना का लाभ ले सकते हैं।
बिहार सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 'बगीचों में कीट प्रबंधन योजना' शुरू की है। इस योजना के तहत आम, अमरूद और लीची उत्पादक किसानों को वैज्ञानिक तरीके से कीट एवं रोग नियंत्रण के लिए दो चरणों में कीटनाशकों के छिड़काव पर 75% तक अनुदान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य फलों की गुणवत्ता में सुधार, उत्पादन बढ़ाना, खेती की लागत कम करना और किसानों की आय में वृद्धि करना है। इच्छुक किसान उद्यानिकी विभाग के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन कर योजना का लाभ ले सकते हैं।
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आंध्र प्रदेश में मानसून की 51% भारी कमी के कारण कृष्णा और गोदावरी बेसिन के जलाशयों में जलस्तर खतरनाक रूप से गिर गया है। जून 2027 तक पेयजल आपूर्ति सुरक्षित रखने के लिए जल संसाधन विभाग ने कृष्णा डेल्टा के किसानों से इस खरीफ सीज़न में धान की खेती छोड़कर कम पानी वाली फसलें उगाने की अपील की है। पानी की किल्लत को देखते हुए सरकार ने सिंचाई और उद्योगों के बजाय पीने के पानी को प्राथमिक दर्जा दिया है।
आंध्र प्रदेश में मानसून की 51% भारी कमी के कारण कृष्णा और गोदावरी बेसिन के जलाशयों में जलस्तर खतरनाक रूप से गिर गया है। जून 2027 तक पेयजल आपूर्ति सुरक्षित रखने के लिए जल संसाधन विभाग ने कृष्णा डेल्टा के किसानों से इस खरीफ सीज़न में धान की खेती छोड़कर कम पानी वाली फसलें उगाने की अपील की है। पानी की किल्लत को देखते हुए सरकार ने सिंचाई और उद्योगों के बजाय पीने के पानी को प्राथमिक दर्जा दिया है।
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मानसून के दूसरे चरण की बारिश ने उत्तर भारत के किसानों को राहत दी है। उड़द की बुवाई का रकबा पिछले साल की तुलना में आठ प्रतिशत बढ़ा है। उत्तर प्रदेश में उड़द की खेती में सबसे अधिक 75% की वृद्धि हुई है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में बारिश की कमी से बुवाई पिछड़ गई है। उत्तर भारत की अच्छी बुवाई देश में दालों की उपलब्धता को संतुलित रखेगी।
मानसून के दूसरे चरण की बारिश ने उत्तर भारत के किसानों को राहत दी है। उड़द की बुवाई का रकबा पिछले साल की तुलना में आठ प्रतिशत बढ़ा है। उत्तर प्रदेश में उड़द की खेती में सबसे अधिक 75% की वृद्धि हुई है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में बारिश की कमी से बुवाई पिछड़ गई है। उत्तर भारत की अच्छी बुवाई देश में दालों की उपलब्धता को संतुलित रखेगी।
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बदलते मौसम, अनिश्चित मानसून और अल नीनो जैसे जलवायु कारकों का असर अब किसानों की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ रहा है। खरीफ़ सीज़न में बारिश की कमी के कारण कई फसलों की बुवाई प्रभावित हुई, जिससे किसानों की लागत और आर्थिक दबाव बढ़ा है। ऐसी परिस्थितियों में दोबारा बुवाई, अतिरिक्त सिंचाई और घरेलू खर्चों का बोझ बढ़ने से कर्ज़ चुकाना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में किसानों के लिए केवल कृषि ऋण ही नहीं, बल्कि बचत, फसल बीमा, लचीली ऋण व्यवस्था और समय पर वित्तीय सहायता भी महत्वपूर्ण होती जा रही है, ताकि वे मौसम से जुड़े जोखिमों का बेहतर ढंग से सामना कर सकें।
बदलते मौसम, अनिश्चित मानसून और अल नीनो जैसे जलवायु कारकों का असर अब किसानों की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ रहा है। खरीफ़ सीज़न में बारिश की कमी के कारण कई फसलों की बुवाई प्रभावित हुई, जिससे किसानों की लागत और आर्थिक दबाव बढ़ा है। ऐसी परिस्थितियों में दोबारा बुवाई, अतिरिक्त सिंचाई और घरेलू खर्चों का बोझ बढ़ने से कर्ज़ चुकाना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में किसानों के लिए केवल कृषि ऋण ही नहीं, बल्कि बचत, फसल बीमा, लचीली ऋण व्यवस्था और समय पर वित्तीय सहायता भी महत्वपूर्ण होती जा रही है, ताकि वे मौसम से जुड़े जोखिमों का बेहतर ढंग से सामना कर सकें।
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केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि फ़िलहाल उर्वरक सब्सिडी सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजने की कोई योजना नहीं है। सरकार के अनुसार, पात्र किसानों का डेटाबेस अभी पूरी तरह तैयार नहीं है, इसलिए मौजूदा डीबीटी व्यवस्था ही जारी रहेगी, जिसके तहत आधार प्रमाणीकरण के बाद उर्वरक कंपनियों को सब्सिडी का भुगतान किया जाता है। सरकार ने यह भी बताया कि खरीफ़ 2026 के दौरान उत्तर प्रदेश में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है।
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि फ़िलहाल उर्वरक सब्सिडी सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजने की कोई योजना नहीं है। सरकार के अनुसार, पात्र किसानों का डेटाबेस अभी पूरी तरह तैयार नहीं है, इसलिए मौजूदा डीबीटी व्यवस्था ही जारी रहेगी, जिसके तहत आधार प्रमाणीकरण के बाद उर्वरक कंपनियों को सब्सिडी का भुगतान किया जाता है। सरकार ने यह भी बताया कि खरीफ़ 2026 के दौरान उत्तर प्रदेश में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है।
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बिहार सरकार ने गन्ना बीज विकास योजना के लिए ऑनलाइन पोर्टल शुरू कर दिया है। राज्य के किसान 22 अगस्त तक आवेदन कर प्रमाणित और सत्यापित गन्ना बीज अनुदानित दरों पर प्राप्त कर सकते हैं। योजना के तहत सामान्य वर्ग के किसानों को ₹260 प्रति क्विंटल और अनुसूचित जाति एवं जनजाति के किसानों को ₹310 प्रति क्विंटल का अनुदान मिलेगा। इसके अलावा आधार बीज उत्पादन के लिए अधिकतम ₹70,000 प्रति हेक्टेयर तक की सहायता भी दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य गन्ना उत्पादन बढ़ाना, किसानों की आय में सुधार करना और चीनी मिलों के लिए पर्याप्त कच्चा माल उपलब्ध कराना है।
बिहार सरकार ने गन्ना बीज विकास योजना के लिए ऑनलाइन पोर्टल शुरू कर दिया है। राज्य के किसान 22 अगस्त तक आवेदन कर प्रमाणित और सत्यापित गन्ना बीज अनुदानित दरों पर प्राप्त कर सकते हैं। योजना के तहत सामान्य वर्ग के किसानों को ₹260 प्रति क्विंटल और अनुसूचित जाति एवं जनजाति के किसानों को ₹310 प्रति क्विंटल का अनुदान मिलेगा। इसके अलावा आधार बीज उत्पादन के लिए अधिकतम ₹70,000 प्रति हेक्टेयर तक की सहायता भी दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य गन्ना उत्पादन बढ़ाना, किसानों की आय में सुधार करना और चीनी मिलों के लिए पर्याप्त कच्चा माल उपलब्ध कराना है।
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खरीफ मौसम में सोयाबीन की बुआई में देरी हुई, जिसकी वजह से बारिश की अनिश्चितता किसानों के लिए एक चिंता का कारण बनी है। जैसे-जैसे जुलाई में बारिश में सुधार आया, बुआई की गति बढ़ी है। पूरे साल की फसल क्षेत्रफल पिछले साल के बराबर रहने की आशा है। सोयाबीन के उत्पादन पर बाजार की पैनी नजर है, जो खाद्य तेलों की उपलब्धता को प्रभावित करेगा।
खरीफ मौसम में सोयाबीन की बुआई में देरी हुई, जिसकी वजह से बारिश की अनिश्चितता किसानों के लिए एक चिंता का कारण बनी है। जैसे-जैसे जुलाई में बारिश में सुधार आया, बुआई की गति बढ़ी है। पूरे साल की फसल क्षेत्रफल पिछले साल के बराबर रहने की आशा है। सोयाबीन के उत्पादन पर बाजार की पैनी नजर है, जो खाद्य तेलों की उपलब्धता को प्रभावित करेगा।
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मध्य प्रदेश में मक्के की बुवाई बढ़ी है, लेकिन कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में गिरावट दर्ज की गई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम की स्थिति आगे उत्पादन तय करेगी
मध्य प्रदेश में मक्के की बुवाई बढ़ी है, लेकिन कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में गिरावट दर्ज की गई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम की स्थिति आगे उत्पादन तय करेगी
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नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक लाहिड़ी ने कहा कि किसानों को केवल धान और गेहूँ की खेती तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि बाज़ार की माँग के अनुसार खेती करने वाले कारोबारी की तरह सोचना होगा। उन्होंने कृषि में आधुनिक तकनीक, फसल विविधीकरण, वैल्यू एडिशन, एफपीओ, वैश्विक बाज़ार से जुड़ाव और जलवायु-अनुकूल खेती को किसानों की आय बढ़ाने का प्रमुख रास्ता बताया।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक लाहिड़ी ने कहा कि किसानों को केवल धान और गेहूँ की खेती तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि बाज़ार की माँग के अनुसार खेती करने वाले कारोबारी की तरह सोचना होगा। उन्होंने कृषि में आधुनिक तकनीक, फसल विविधीकरण, वैल्यू एडिशन, एफपीओ, वैश्विक बाज़ार से जुड़ाव और जलवायु-अनुकूल खेती को किसानों की आय बढ़ाने का प्रमुख रास्ता बताया।
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