बारिश की कमी से खेत सूने! खरीफ़ बुआई 21 फ़ीसदी घटी, जानें धान से तिलहन तक सभी प्रमुख फ़सलों की बुआई कितने फ़ीसदी पिछड़ी
बारिश की कमी से खेत सूने! खरीफ़ बुआई 21 फ़ीसदी घटी, जानें धान से तिलहन तक सभी प्रमुख फ़सलों की बुआई कितने फ़ीसदी पिछड़ी

By Umang

कमज़ोर और असमान मानसून के कारण इस वर्ष खरीफ़ फ़सलों की बुआई पिछले साल की तुलना में 21 फ़ीसदी पीछे चल रही है। धान, दलहन, तिलहन, मोटे अनाज और कपास सभी प्रमुख फ़सलों का रकबा घटा है, जबकि गन्ने और जूट-मेस्टा की बुआई में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालाँकि, मध्य भारत में मानसून के सक्रिय होने से आने वाले दिनों में बुआई की रफ़्तार बढ़ने की उम्मीद है। वहीं, आईएमडी ने जुलाई में सामान्य से कम वर्षा का अनुमान जताया है, जिससे बारिश पर निर्भर क्षेत्रों में चिंता बनी हुई है।

कमज़ोर और असमान मानसून के कारण इस वर्ष खरीफ़ फ़सलों की बुआई पिछले साल की तुलना में 21 फ़ीसदी पीछे चल रही है। धान, दलहन, तिलहन, मोटे अनाज और कपास सभी प्रमुख फ़सलों का रकबा घटा है, जबकि गन्ने और जूट-मेस्टा की बुआई में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालाँकि, मध्य भारत में मानसून के सक्रिय होने से आने वाले दिनों में बुआई की रफ़्तार बढ़ने की उम्मीद है। वहीं, आईएमडी ने जुलाई में सामान्य से कम वर्षा का अनुमान जताया है, जिससे बारिश पर निर्भर क्षेत्रों में चिंता बनी हुई है।

PM Fasal Bima Yojana: जानिए आवेदन का पूरा तरीका, एक हेक्टेयर फसल के लिए कितना देना होगा प्रीमियम और कितना मिलेगा कवर
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By Umang

1 जुलाई से देशभर में फसल बीमा माह की शुरुआत हो गई है, जो 31 जुलाई तक चलेगा। इस अभियान का उद्देश्य किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जोड़ना है। खरीफ़ फसलों के लिए किसानों को केवल 2% प्रीमियम देना होता है, जबकि शेष राशि सरकार वहन करती है। किसान ऑनलाइन, CSC, बैंक या Crop Insurance ऐप के जरिए आवेदन कर प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान पर मुआवज़ा प्राप्त कर सकते हैं।

1 जुलाई से देशभर में फसल बीमा माह की शुरुआत हो गई है, जो 31 जुलाई तक चलेगा। इस अभियान का उद्देश्य किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जोड़ना है। खरीफ़ फसलों के लिए किसानों को केवल 2% प्रीमियम देना होता है, जबकि शेष राशि सरकार वहन करती है। किसान ऑनलाइन, CSC, बैंक या Crop Insurance ऐप के जरिए आवेदन कर प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान पर मुआवज़ा प्राप्त कर सकते हैं।

ज्वार-बाजरा की खेती पर मिलेगा ₹15,000 तक अनुदान, हरियाणा के 10 ज़िलों के किसान उठा सकते हैं लाभ, ऐसे करें आवेदन
ज्वार-बाजरा की खेती पर मिलेगा ₹15,000 तक अनुदान, हरियाणा के 10 ज़िलों के किसान उठा सकते हैं लाभ, ऐसे करें आवेदन

By Umang

हरियाणा सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (पोषक-अनाज) के तहत ज्वार और बाजरा की खेती करने वाले किसानों के लिए अनुदान योजना शुरू की है। किसान 18 जुलाई 2026 तक agriharyana. gov. in पर आवेदन कर सकते हैं। योजना के तहत प्रदर्शन प्लांट, प्रमाणित बीज, पोषक तत्व प्रबंधन और पौध संरक्षण पर आर्थिक सहायता मिलेगी। यह योजना हरियाणा के 10 ज़िलों में लागू की गई है।

हरियाणा सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (पोषक-अनाज) के तहत ज्वार और बाजरा की खेती करने वाले किसानों के लिए अनुदान योजना शुरू की है। किसान 18 जुलाई 2026 तक agriharyana. gov. in पर आवेदन कर सकते हैं। योजना के तहत प्रदर्शन प्लांट, प्रमाणित बीज, पोषक तत्व प्रबंधन और पौध संरक्षण पर आर्थिक सहायता मिलेगी। यह योजना हरियाणा के 10 ज़िलों में लागू की गई है।

भारतीय आमों को मिला नया विदेशी बाज़ार, पहली बार आइसलैंड पहुँचा दशहरी, चौसा और लंगड़ा आम; बढ़ीं निर्यात की उम्मीदें
भारतीय आमों को मिला नया विदेशी बाज़ार, पहली बार आइसलैंड पहुँचा दशहरी, चौसा और लंगड़ा आम; बढ़ीं निर्यात की उम्मीदें

By Gaon Connection

भारत ने पहली बार आइसलैंड में भारतीय आमों के प्रचार-प्रसार के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। रेक्याविक और अक्यूरेरी में हुए आयोजन में दशहरी, चौसा, लंगड़ा और केसर आमों का प्रदर्शन किया गया। आयातकों और कारोबारियों ने भारतीय आमों की गुणवत्ता की सराहना की। आइसलैंड में बढ़ती माँग को देखते हुए भारतीय आमों के निर्यात की नई संभावनाएँ खुलने की उम्मीद है।

भारत ने पहली बार आइसलैंड में भारतीय आमों के प्रचार-प्रसार के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। रेक्याविक और अक्यूरेरी में हुए आयोजन में दशहरी, चौसा, लंगड़ा और केसर आमों का प्रदर्शन किया गया। आयातकों और कारोबारियों ने भारतीय आमों की गुणवत्ता की सराहना की। आइसलैंड में बढ़ती माँग को देखते हुए भारतीय आमों के निर्यात की नई संभावनाएँ खुलने की उम्मीद है।

खेत में उतरे केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, छात्रों के साथ की धान की रोपाई, बोले-दफ़्तरों से नहीं, खेतों से चलता है कृषि मंत्रालय
खेत में उतरे केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, छात्रों के साथ की धान की रोपाई, बोले-दफ़्तरों से नहीं, खेतों से चलता है कृषि मंत्रालय

By Umang

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उत्तराखंड के पंतनगर में कृषि विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं के साथ धान की रोपाई की और कहा कि खेती केवल किताबों से नहीं, बल्कि खेत में उतरकर सीखी जाती है। उन्होंने 'खेत बचाओ अभियान' में हिस्सा लेते हुए हरित कृषि, अनुसंधान और किसानों से जुड़ाव पर ज़ोर दिया। साथ ही पूर्व छात्र सम्मेलन में कृषि को राष्ट्रनिर्माण का आधार बताया और पौधरोपण का संदेश दिया।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उत्तराखंड के पंतनगर में कृषि विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं के साथ धान की रोपाई की और कहा कि खेती केवल किताबों से नहीं, बल्कि खेत में उतरकर सीखी जाती है। उन्होंने 'खेत बचाओ अभियान' में हिस्सा लेते हुए हरित कृषि, अनुसंधान और किसानों से जुड़ाव पर ज़ोर दिया। साथ ही पूर्व छात्र सम्मेलन में कृषि को राष्ट्रनिर्माण का आधार बताया और पौधरोपण का संदेश दिया।

7 फ़ीट की लौकी और ढाई फ़ीट की सेम उगाने वाले किसान रघुपत सिंह को मिला मरणोपरांत पद्मश्री सम्मान, जानें उनकी कहानी
7 फ़ीट की लौकी और ढाई फ़ीट की सेम उगाने वाले किसान रघुपत सिंह को मिला मरणोपरांत पद्मश्री सम्मान, जानें उनकी कहानी

By Umang

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के किसान स्वर्गीय रघुपत सिंह को पारंपरिक बीजों के संरक्षण और टिकाऊ खेती में योगदान के लिए वर्ष 2026 में मरणोपरांत पद्मश्री सम्मान दिया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने यह सम्मान उनकी पत्नी प्रेमवती को प्रदान किया। रघुपत सिंह ने 100 से अधिक नई प्रजातियाँ विकसित कीं और तीन लाख से अधिक किसानों को खेती के नए प्रयोगों से जोड़ा।

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के किसान स्वर्गीय रघुपत सिंह को पारंपरिक बीजों के संरक्षण और टिकाऊ खेती में योगदान के लिए वर्ष 2026 में मरणोपरांत पद्मश्री सम्मान दिया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने यह सम्मान उनकी पत्नी प्रेमवती को प्रदान किया। रघुपत सिंह ने 100 से अधिक नई प्रजातियाँ विकसित कीं और तीन लाख से अधिक किसानों को खेती के नए प्रयोगों से जोड़ा।

झारखंड में धान बुवाई पर संकट: कम बारिश से किसान चिंतित, खरीफ मौसम पर मंडराया ख़तरा
झारखंड में धान बुवाई पर संकट: कम बारिश से किसान चिंतित, खरीफ मौसम पर मंडराया ख़तरा

By Preeti Nahar

झारखंड के किसान खरीफ मौसम में धान की बुवाई को लेकर काफी चिंतित हैं, क्योंकि जून में बारिश में 60% की कमी आई है। कई जिलों में नर्सरी के सूखने का खतरा बढ़ गया है। मानसून की धीमी गति और एल नीनो के प्रभाव के चलते, सरकार वैकल्पिक फसलों का समर्थन कर रही है और किसानों के लिए राहत पैकेज की मांग कर रही है।

झारखंड के किसान खरीफ मौसम में धान की बुवाई को लेकर काफी चिंतित हैं, क्योंकि जून में बारिश में 60% की कमी आई है। कई जिलों में नर्सरी के सूखने का खतरा बढ़ गया है। मानसून की धीमी गति और एल नीनो के प्रभाव के चलते, सरकार वैकल्पिक फसलों का समर्थन कर रही है और किसानों के लिए राहत पैकेज की मांग कर रही है।

किसानों को बड़ी राहत, अब 0% ब्याज वाले फसल ऋण की अदायगी के लिए मिलेगा पूरा एक साल, मध्य प्रदेश कैबिनेट ने दी मंज़ूरी
किसानों को बड़ी राहत, अब 0% ब्याज वाले फसल ऋण की अदायगी के लिए मिलेगा पूरा एक साल, मध्य प्रदेश कैबिनेट ने दी मंज़ूरी

By Gaon Connection

मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए शून्य ब्याज अल्पकालीन फसल ऋण की व्यवस्था में बदलाव किया है। अब खरीफ़ और रबी सीज़न के लिए अलग-अलग ड्यू डेट नहीं होगी। किसानों को वार्षिक एकल ऋण सीमा के तहत पहली ऋण निकासी की तारीख से 12 माह तक ऋण चुकाने का समय मिलेगा। समय पर भुगतान करने वालों को अतिरिक्त ब्याज अनुदान भी दिया जाएगा। इससे 35 से 40 लाख किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए शून्य ब्याज अल्पकालीन फसल ऋण की व्यवस्था में बदलाव किया है। अब खरीफ़ और रबी सीज़न के लिए अलग-अलग ड्यू डेट नहीं होगी। किसानों को वार्षिक एकल ऋण सीमा के तहत पहली ऋण निकासी की तारीख से 12 माह तक ऋण चुकाने का समय मिलेगा। समय पर भुगतान करने वालों को अतिरिक्त ब्याज अनुदान भी दिया जाएगा। इससे 35 से 40 लाख किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

कमज़ोर मानसून की चिंता के बीच किसानों ने बढ़ाया दांव, खरीफ़ रकबा बढ़कर 119.90 लाख हेक्टेयर, किस फसल की कितनी बुवाई?
कमज़ोर मानसून की चिंता के बीच किसानों ने बढ़ाया दांव, खरीफ़ रकबा बढ़कर 119.90 लाख हेक्टेयर, किस फसल की कितनी बुवाई?

By Umang

कमज़ोर मानसून और अल नीनो की आशंकाओं के बावजूद देश में खरीफ़ फसलों की बुवाई पिछले साल से आगे चल रही है। 19 जून 2026 तक कुल 119.90 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई, जो पिछले वर्ष से 1.95 लाख हेक्टेयर अधिक है। धान, दलहन, बाजरा और गन्ने का रकबा बढ़ा है, जबकि सोयाबीन, उड़द और कपास की बुवाई में कमी दर्ज की गई।

कमज़ोर मानसून और अल नीनो की आशंकाओं के बावजूद देश में खरीफ़ फसलों की बुवाई पिछले साल से आगे चल रही है। 19 जून 2026 तक कुल 119.90 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई, जो पिछले वर्ष से 1.95 लाख हेक्टेयर अधिक है। धान, दलहन, बाजरा और गन्ने का रकबा बढ़ा है, जबकि सोयाबीन, उड़द और कपास की बुवाई में कमी दर्ज की गई।

बिहार के 4 ज़िलों के किसानों को राहत, फसल नुकसान पर मिलेगा ₹22500 प्रति हेक्टेयर तक कृषि इनपुट अनुदान, जानिए क्या करना होगा
बिहार के 4 ज़िलों के किसानों को राहत, फसल नुकसान पर मिलेगा ₹22500 प्रति हेक्टेयर तक कृषि इनपुट अनुदान, जानिए क्या करना होगा

By Umang

बिहार सरकार ने 4 मई 2026 को आँधी-तूफ़ान, असामयिक वर्षापात और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के लिए कृषि इनपुट अनुदान योजना के तहत आवेदन प्रक्रिया शुरू की है। पूर्णिया, किशनगंज, मधुबनी और सुपौल ज़िलों के पात्र किसान 20 से 24 जून 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। अनुदान की राशि फसल श्रेणी के अनुसार सीधे किसानों के खातों में भेजी जाएगी।

बिहार सरकार ने 4 मई 2026 को आँधी-तूफ़ान, असामयिक वर्षापात और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के लिए कृषि इनपुट अनुदान योजना के तहत आवेदन प्रक्रिया शुरू की है। पूर्णिया, किशनगंज, मधुबनी और सुपौल ज़िलों के पात्र किसान 20 से 24 जून 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। अनुदान की राशि फसल श्रेणी के अनुसार सीधे किसानों के खातों में भेजी जाएगी।

शिवराज सिंह चौहान ने लॉन्च किया ‘प्रगति’ मिशन, गाँवों में तैयार होंगे 20 हज़ार कृषि-उद्यमी, इन 8 राज्यों के किसानों को मिलेगा फायदा

By Gaon Connection

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यूपी सरकार 12 जुलाई को मनाएगी ‘हरियाली का उत्सव’, पूरे प्रदेश में एक दिन में लगाए जाएंगे 35 करोड़ पौधे

By Gaon Connection

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गोबर से ग्रीन एनर्जी तैयार करेगी योगी सरकार! हर ज़िले में बनेंगे बायोगैस मॉडल विलेज, आईआईटी दिल्ली देगी तकनीकी सहयोग

By Gaon Connection

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गाँव की अनोखी पहल: साथ भोजन, दूर अकेलापन

By Swati

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By Umang

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दक्षिण कोरिया की तकनीक से गुजरात के इन ज़िलों में बनेंगे दो रबर डैम, 160 करोड़ आएगी लागत; जानिए पारंपरिक बाँध से क्यों हैं अलग

By Gaon Connection

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खरीफ़ सीज़न में खाद की कमी नहीं होगी, सरकार के पास 163.65 लाख टन भंडार; उत्पादन भी लक्ष्य से अधिक

By Gaon Connection

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