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नागालैंड के किसानों की ज़िंदगी बदल रहा है युवा किसान का बनाया सस्ता सोलर ड्रायर
नागालैंड के किसानों की ज़िंदगी बदल रहा है युवा किसान का बनाया सस्ता सोलर ड्रायर

By Divendra Singh

नागालैंड के एक युवा किसान ने ऐसा सोलर ड्रायर बनाया है, जिसने पहाड़ी इलाकों में फसल खराब होने की समस्या को कमाई के अवसर में बदल दिया है। बिना बिजली, कम लागत और पर्यावरण के अनुकूल इस तकनीक से सैकड़ों किसान अपनी उत्पादन सुरक्षित रखकर बढ़िया दाम पा रहे हैं।

नागालैंड के एक युवा किसान ने ऐसा सोलर ड्रायर बनाया है, जिसने पहाड़ी इलाकों में फसल खराब होने की समस्या को कमाई के अवसर में बदल दिया है। बिना बिजली, कम लागत और पर्यावरण के अनुकूल इस तकनीक से सैकड़ों किसान अपनी उत्पादन सुरक्षित रखकर बढ़िया दाम पा रहे हैं।

Sunita Williams ने 27 साल बाद NASA को कहा अलविदा
Sunita Williams ने 27 साल बाद NASA को कहा अलविदा

By Gaurav Rai

सुनीता विलियम्स ने मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर अंतरिक्ष तक का सफर तय किया। NASA में 27 साल की सेवा, 608 दिन अंतरिक्ष में बिताने और कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाने वाली सुनीता की कहानी यह सिखाती है कि हालात चाहे जैसे हों, अगर सपने सच्चे हों तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं होती।

सुनीता विलियम्स ने मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर अंतरिक्ष तक का सफर तय किया। NASA में 27 साल की सेवा, 608 दिन अंतरिक्ष में बिताने और कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाने वाली सुनीता की कहानी यह सिखाती है कि हालात चाहे जैसे हों, अगर सपने सच्चे हों तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं होती।

मेघालय के बंशैलांग मुखिम: लोक संगीत की टूटती परंपरा को बचाने वाले सुरों के जादूगर
मेघालय के बंशैलांग मुखिम: लोक संगीत की टूटती परंपरा को बचाने वाले सुरों के जादूगर

By Gaon Connection

मेघालय के स्मिट गाँव में हर दिन लोक संगीत की धुनें पहाड़ों से बातें करती हैं। इस आवाज़ को ज़िंदा रखने की जिम्मेदारी उठाई है बंशैलांग मुखिम ने, जिन्होंने खासी लोक संगीत और भाषा को बचाने के लिए एक म्यूज़िक इंस्टीट्यूट शुरू किया।

मेघालय के स्मिट गाँव में हर दिन लोक संगीत की धुनें पहाड़ों से बातें करती हैं। इस आवाज़ को ज़िंदा रखने की जिम्मेदारी उठाई है बंशैलांग मुखिम ने, जिन्होंने खासी लोक संगीत और भाषा को बचाने के लिए एक म्यूज़िक इंस्टीट्यूट शुरू किया।

आदिवासियों ने बचा रखी है सदियों पुरानी कला
आदिवासियों ने बचा रखी है सदियों पुरानी कला

अगर आपने इतिहास में मोहन जोदड़ो के बारे में पढ़ा होगा तो आपको वहां पर खुदाई में मिली डांसिंग गर्ल की कांस्य प्रतिमा भी याद होगी। मोहन जोदड़ो सभ्यता के कई सौ साल बाद भी बस्तर की ढोकरा शिल्प कला आज भी उस कला को जिंदा रखे हुए है। छत्तीसगढ़ के कोंडागाँव के भेलवापारा मोहल्ले में ऐसे सैकड़ों परिवार हैं जो ढोकरा शिल्पकला से मूर्तियों में जान डाल देते हैं। इन शिल्पकारों की बदौलत ढोकरा शिल्प की पहचान देश-विदेश तक हो गई है।

अगर आपने इतिहास में मोहन जोदड़ो के बारे में पढ़ा होगा तो आपको वहां पर खुदाई में मिली डांसिंग गर्ल की कांस्य प्रतिमा भी याद होगी। मोहन जोदड़ो सभ्यता के कई सौ साल बाद भी बस्तर की ढोकरा शिल्प कला आज भी उस कला को जिंदा रखे हुए है। छत्तीसगढ़ के कोंडागाँव के भेलवापारा मोहल्ले में ऐसे सैकड़ों परिवार हैं जो ढोकरा शिल्पकला से मूर्तियों में जान डाल देते हैं। इन शिल्पकारों की बदौलत ढोकरा शिल्प की पहचान देश-विदेश तक हो गई है।

बीज बचेंगे तभी तो खेती बचेगी, कर्नाटक की संगीता शर्मा की अनोखी मुहिम
बीज बचेंगे तभी तो खेती बचेगी, कर्नाटक की संगीता शर्मा की अनोखी मुहिम

By Gaon Connection

जलवायु परिवर्तन और रासायनिक खेती के दौर में जब देसी बीज तेजी से गायब हो रहे हैं, कर्नाटक के एक गाँव में संगीता शर्मा चुपचाप खेती का भविष्य बचा रही हैं। 800 से अधिक पारंपरिक बीजों को सहेजकर उन्होंने एक सीड बैंक बनाया है, जिससे किसान दोबारा टिकाऊ और सुरक्षित खेती की ओर लौट सकें।

जलवायु परिवर्तन और रासायनिक खेती के दौर में जब देसी बीज तेजी से गायब हो रहे हैं, कर्नाटक के एक गाँव में संगीता शर्मा चुपचाप खेती का भविष्य बचा रही हैं। 800 से अधिक पारंपरिक बीजों को सहेजकर उन्होंने एक सीड बैंक बनाया है, जिससे किसान दोबारा टिकाऊ और सुरक्षित खेती की ओर लौट सकें।

झाबुआ के गांधी: जिन्होंने ग्राम स्वराज को ज़मीन पर उतार दिया
झाबुआ के गांधी: जिन्होंने ग्राम स्वराज को ज़मीन पर उतार दिया

By Gaon Connection

महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज का सपना आज भी ज़िंदा है मध्य प्रदेश के झाबुआ ज़िले में। पद्मश्री महेश शर्मा पिछले 25 वर्षों से आदिवासी गाँवों में पानी, खेती, शिक्षा और रोज़गार के ज़रिये आत्मनिर्भरता का मॉडल खड़ा कर रहे हैं।

महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज का सपना आज भी ज़िंदा है मध्य प्रदेश के झाबुआ ज़िले में। पद्मश्री महेश शर्मा पिछले 25 वर्षों से आदिवासी गाँवों में पानी, खेती, शिक्षा और रोज़गार के ज़रिये आत्मनिर्भरता का मॉडल खड़ा कर रहे हैं।

इंजीनियर से किसान तक, एग्रोफॉरेस्ट्री के ज़रिए मिट्टी बचाने निकले सिद्धेश सकोरे
इंजीनियर से किसान तक, एग्रोफॉरेस्ट्री के ज़रिए मिट्टी बचाने निकले सिद्धेश सकोरे

By Gaon Connection

खेती का भविष्य क्या होना चाहिए? खेती से आमदनी कैसे बढ़े? और क्या ऐसा कोई रास्ता है जहाँ किसान को मिट्टी भी बचानी न पड़े और पेट भी पालना पड़े, इन सवालों के जवाब अक्सर फाइलों, सेमिनारों और रिपोर्टों में ढूंढे जाते हैं। लेकिन महाराष्ट्र के एक गाँव में ये जवाब खेतों में उग रहे हैं। वहाँ एक युवा किसान न सिर्फ अपने लिए, बल्कि औरों के लिए भी इस तलाश में लगा है कि खेती को फिर से सम्मान, स्थिरता और मुनाफ़ा कैसे लौटाया जाए। इस यात्रा का नाम है एग्रोफॉरेस्ट्री, और इस यात्रा के केंद्र में हैं सिद्धेश सकोरे।

खेती का भविष्य क्या होना चाहिए? खेती से आमदनी कैसे बढ़े? और क्या ऐसा कोई रास्ता है जहाँ किसान को मिट्टी भी बचानी न पड़े और पेट भी पालना पड़े, इन सवालों के जवाब अक्सर फाइलों, सेमिनारों और रिपोर्टों में ढूंढे जाते हैं। लेकिन महाराष्ट्र के एक गाँव में ये जवाब खेतों में उग रहे हैं। वहाँ एक युवा किसान न सिर्फ अपने लिए, बल्कि औरों के लिए भी इस तलाश में लगा है कि खेती को फिर से सम्मान, स्थिरता और मुनाफ़ा कैसे लौटाया जाए। इस यात्रा का नाम है एग्रोफॉरेस्ट्री, और इस यात्रा के केंद्र में हैं सिद्धेश सकोरे।

यक्षगान को बचाने की लड़ाई
यक्षगान को बचाने की लड़ाई

एक समय था, जब कर्नाटक के गाँवों में रात ढलते ही हवा बदल जाती थी। धान के खेतों के बीच, खुले आसमान के नीचे, मृदंग की थाप, मंजीरे की झंकार और घुंघरुओं की मधुर आवाज़ गूँज उठती थी। वही आवाज़, जो लोगों को खेतों से, घरों से, चौपालों से खींचकर एक जगह ले आती थी, यक्षगान।

एक समय था, जब कर्नाटक के गाँवों में रात ढलते ही हवा बदल जाती थी। धान के खेतों के बीच, खुले आसमान के नीचे, मृदंग की थाप, मंजीरे की झंकार और घुंघरुओं की मधुर आवाज़ गूँज उठती थी। वही आवाज़, जो लोगों को खेतों से, घरों से, चौपालों से खींचकर एक जगह ले आती थी, यक्षगान।

पंजाब का बेबे-बापू स्कूल: जब बुज़ुर्ग पहली बार क्लासरूम पहुँचे
पंजाब का बेबे-बापू स्कूल: जब बुज़ुर्ग पहली बार क्लासरूम पहुँचे

By Gaon Connection

बचपन में पढ़ाई का मौका न मिलने वाले बुज़ुर्ग अब पंजाब के भटिंडा ज़िले के बेबे-बापू स्कूल में पहली बार क्लासरूम का अनुभव कर रहे हैं। जो लोग पूरी ज़िंदगी अपने बच्चों को पढ़ाने में लगे रहे, वे आज खुद अक्षरों से दोस्ती कर रहे हैं, अंगूठे से दस्तख़त तक का यह सफ़र आत्मसम्मान और उम्मीद की कहानी है।

बचपन में पढ़ाई का मौका न मिलने वाले बुज़ुर्ग अब पंजाब के भटिंडा ज़िले के बेबे-बापू स्कूल में पहली बार क्लासरूम का अनुभव कर रहे हैं। जो लोग पूरी ज़िंदगी अपने बच्चों को पढ़ाने में लगे रहे, वे आज खुद अक्षरों से दोस्ती कर रहे हैं, अंगूठे से दस्तख़त तक का यह सफ़र आत्मसम्मान और उम्मीद की कहानी है।

बंद कमरे में नहीं, बाग में भी उगा सकते हैं मशरूम, जानिए उगाने की पूरी विधि
बंद कमरे में नहीं, बाग में भी उगा सकते हैं मशरूम, जानिए उगाने की पूरी विधि

By Divendra Singh

मशरूम की खेती को अब तक अंधेरे कमरे और रसायनों से जोड़कर देखा जाता रहा है, लेकिन छत्तीसगढ़ के महासमुंद ज़िले के किसान राजेंद्र कुमार साहू ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने आम के बाग में, खुले वातावरण में ऑयस्टर और पैडी स्ट्रॉ मशरूम उगाकर न सिर्फ़ रोज़ाना 10,000 रुपये तक की कमाई का रास्ता बनाया, बल्कि पराली जलाने जैसी गंभीर समस्या का भी समाधान पेश किया।

मशरूम की खेती को अब तक अंधेरे कमरे और रसायनों से जोड़कर देखा जाता रहा है, लेकिन छत्तीसगढ़ के महासमुंद ज़िले के किसान राजेंद्र कुमार साहू ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने आम के बाग में, खुले वातावरण में ऑयस्टर और पैडी स्ट्रॉ मशरूम उगाकर न सिर्फ़ रोज़ाना 10,000 रुपये तक की कमाई का रास्ता बनाया, बल्कि पराली जलाने जैसी गंभीर समस्या का भी समाधान पेश किया।

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