Budget 2026: जानिए क्या हुआ सस्ता और क्या हुआ महँगा, आपकी जेब पर क्या पड़ेगा असर?
वित्त मंत्री के बजट पेश के करने के बाद सबकी नज़रें इसी पर टिकी हुईं हैं कि उनके लिए क्या महँगा हुआ है और क्या हुआ है सस्ता? चलिए जानते हैं।
केंद्रीय बजट 2026 के बाद आम लोगों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि रोज़मर्रा की चीजों की कीमतों पर इसका क्या असर पड़ेगा। इस बार सरकार ने कई उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी, टैक्स और आयात शुल्क में बदलाव किए हैं। इसका सीधा असर बाज़ार की कीमतों पर दिखाई देने लगा है। कुछ ज़रूरी और उपयोगी सामान सस्ते हुए हैं, जिससे आम परिवारों को राहत मिली है, जबकि कुछ सेक्टर में महंगाई बढ़ी है, जिससे खर्च का दबाव भी बढ़ सकता है।
बजट 2026 में सबसे बड़ी राहत स्वास्थ्य क्षेत्र को मिली है। कैंसर और शुगर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाइयों पर टैक्स कम किया गया है। इससे इन दवाओं की कीमतें घटने की उम्मीद है। इसका सीधा फायदा उन लाखों मरीजों को मिलेगा जो हर महीने महंगी दवाइयों पर निर्भर रहते हैं। सरकार का उद्देश्य इलाज को सस्ता और सुलभ बनाना है ताकि आम परिवारों पर मेडिकल खर्च का बोझ कम हो।
इस बजट में सोलर पैनल और उससे जुड़े उपकरणों को सस्ता किया गया है। इससे घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगवाना आसान होगा। ग्रामीण इलाकों और किसानों के लिए यह कदम खास तौर पर फायदेमंद है क्योंकि इससे बिजली का खर्च घटेगा और सिंचाई जैसे कामों में सस्ती ऊर्जा उपलब्ध होगी। सरकार का फोकस साफ तौर पर स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में है।
माइक्रोवेव ओवन, मोबाइल फोन और ई-वाहनों की बैटरी, जूते, लेदर प्रोडक्ट और खेल-कूद से जुड़े सामानों पर टैक्स में राहत दी गई है। इससे मिडिल क्लास परिवारों के लिए ये चीजें पहले से सस्ती हो सकती हैं। इसके अलावा विदेशी यात्रा से जुड़ी कुछ सेवाओं पर भी शुल्क में कटौती का असर दिख सकता है, जिससे ट्रैवल सेक्टर को गति मिलेगी।
बायोगैस मिक्स्ड सीएनजी और कृषि से जुड़े कुछ उपकरणों को सस्ता करने से किसानों को भी राहत मिलने की उम्मीद है। इससे खेती की लागत कम हो सकती है और गांवों में स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा। सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए इन बदलावों को अहम मान रही है।
जहां एक ओर जरूरी सामान सस्ते हुए हैं, वहीं शराब पर टैक्स बढ़ने से इसकी कीमतें ऊपर जा सकती हैं। इसके अलावा स्क्रैप और खनिज जैसे सेक्टर में भी कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा सकती है। इससे निर्माण और इंडस्ट्रियल सेक्टर में लागत थोड़ी बढ़ सकती है।