यूपी के किसान ने कर्जमाफी का लाभ लेने से किया इनकार, पीएम और सीएम से की अनोखी अपील, जिसे सुन आप भी कहेंगे वाह

यूपी के किसान ने कर्जमाफी का लाभ लेने से किया इनकार,  पीएम और सीएम से की अनोखी अपील, जिसे सुन आप भी कहेंगे वाहबैंक मैनेजर को कर्जमाफी देने का प्रार्थना पत्र देते नागा कुशवाहा। अंगौछा डाले हुए।

“हम मैनेजर साहब से कहलेबानी (कहा) जो कर्जा लिए बानी वो कुछ चुकाएंगे.. हमको माफी नाही चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और योगी जी अपील बा कि ई पैसा का कौनो (किसी) उचित जगह लगाई लें।’ नागा कुशवाहा (60 वर्ष) गांव कनेक्शन को फोन पर भोजपुरी में बताते हैं।

कुशीनगर (उत्तर प्रदेश)। देश के कई राज्यों में कर्ज़ के बोझ के तले दबे किसान खुदकुशी कर रहे हैं। यूपी, पंजाब और महाराष्ट्र के बाद पूरे देश में कर्जमाफी की मांग उठ रही है, इसी बीच एक किसान ने कर्ज़माफी का लाभ लेने से इनकार कर दिया है।

“उन दिनों बैंक में बैंक में बहुत भीड़ थी, तभी एक शख्स आया और बोला मुझे ये कर्जमाफी नहीं चाहिए। मैं अपना कर्ज चुकाने में सक्षम हूं, खुद चुका दूंगा।” राकेश कुमार गुप्ता, शाखा प्रबंधक, पूर्वांचल ग्रामीण बैंक, दुधई (कुशीनगर) गांव कनेक्शन को बताते हैं।

जिस बैंक में 157 रुपए की गैस सब्सिडी खाते में आई कि नहीं, ये पूछने के लिए भीड़ लगी रहती है, उस इलाके का एक किसान कर्जमाफी का लाभ लेना नहीं चाहता था, थोड़ी हैरानी हुई। लेकिन ये अच्छा संकेत है। जो जरुरत मंद है वही कर्जमाफी लें ताकि बाकी किसानों को लाभ हो सके।
राकेश कुमार गुप्ता, शाखा प्रबंधक, दुधई, कुशीनगर, उत्तर प्रदेश

राकेश गुप्ता की बैंक उत्तर प्रदेश के सबसे पिछड़े जिलों में शामिल पूर्वांचल के कुशीनगर में है। जहां महीनों से किसान इसलिए आ रहे हैं, कि उन्हें पता चल जाए उनका कर्जमाफ हुआ है कि नहीं। वो आगे बताते हैं, “ जिस बैंक में 157 रुपए की गैस सब्सिडी खाते में आई कि नहीं, ये पूछने के लिए भीड़ लगी रहती है, उस इलाके का एक किसान अपने किसान क्रेडिट कार्ड पर सरकार से मिले कर्जमाफी का लाभ छोड़ना चाहता था, पहले तो भरोसा नहीं हुआ लेकिन फिर उसे पास बुलाया और पूरी बात समझी।’

“हम मैनेजर साहब से कहलेबानी (कहा) जो कर्जा लिए बानी वो कुछ चुकाएंगे.. हमको माफी नाही चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और योगी जी अपील बा कि ई पैसा का कौनो (किसी) उचित जगह लगाई लें।’ नागा कुशवाहा (60 वर्ष) गांव कनेक्शन को फोन पर भोजपुरी में बताते हैं।

नागा कुशवाहा का प्रार्थना पत्र।

उस दिन कुशीनगर की इस ब्रांच में काफी देर तक एक आम से किसान नागा कुशवाहा की बात होती रही। नागा कुशवाहा दुहदी विकास खंड के पृथ्वीपुर गांव में रहने वाले छोटी जोत के किसान हैं। उन्होंने वर्ष 2013 में एक लाख 6 हजार रुपए का केसीसी कर्ज लिया था, जिसे वो समय-समय पर चुकाते रहे हैं।

नागा कुशवाहा के बड़े बेटे हरीलाल कुशवाहा (35 वर्ष) फोन पर गांव कनेक्शन को बताते हैं, “बाकी सब कर्जा दे डाले थे, 20-25 हजार का बचा है, वो भी चुका देंगे। मेरे खेत में अच्छी फसल हुई थी, कोई नुकसान नहीं हुआ फिर फालतू में क्यों सरकार के पैसे लें।”

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बाकी सब कर्जा दे डाले थे, 20-25 हजार का बचा है, वो भी चुका देंगे। मेरे खेत में अच्छी फसल हुई थी, कोई नुकसान नहीं हुआ फिर फालतू में क्यों सरकार के पैसे लें।
हरीलाल कुशवाहा, नागा कुशवाहा के बेटे

20-25 हजार बहुत बड़ी रकम नहीं लेकिन इतनी छोटी भी नहीं कर्जमाफी न लेने पर नागा कुशवाहा चर्चा का विषय न बनते। नागा के 3 बेटे हैं और करीब ढाई एकड़ जमीन पर खेती-बाड़ी से 13 लोगों की रोजी-रोटी चल रही है।

नागा कुशवाहा 10वीं तक पढ़े हैं, उनका एक बेटा एमए कर चुका है। तो दूसरा 12वीं पास कर चुका है। वो बताते हैं, “ हम सब लोग मिलकर खेती करते हैं, तरोई, घुईंया, गन्ना, आलू, धान सब उगाते हैं, उसी में जो खाने से बचता है, पास की बाजार में बेच आते हैं, जिससे घर का नमक-तेल आ जाता है।’ वो चाहते हैं उनके हिस्से के माफ हुए कर्जे का सरकार देश के विकास कार्य में इस्तेमाल करे।

हरीलाल आगे बताते हैं, पिता जी (नागा कुशवाहा) कहते हैं, उनके बाप-दादा ने कहा था मुफ्त का किसी का कुछ नहीं चाहिए। वो उन्हीं वसूलों पर चलते हैं, कहते हैं कि सरकार समय पर पैसे देती है.. यही बहुत है।”

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पूर्वांचल ग्रामीण बैंक की इस शाखा में 1913 किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड हैं। राजेश गुप्ता बताते हैं, ब्रांच में कुल केसीसी खातों में से मुश्किल से 200-300 लोग कर्ज जमा करते हैं। बाकी सब कर्जमाफी का इंतजार करते रहते हैं।

पूर्वांचल ग्रामीण बैंक की इस शाखा में 1913 किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड हैं। राजेश गुप्ता बताते हैं, ब्रांच में कुल केसीसी खातों में से मुश्किल से 200-300 लोग कर्ज जमा करते हैं। बाकी सब कर्जमाफी का इंतजार करते रहते हैं। फिर जबसे ये चुनाव और कर्ममाफी की बात चली किसान शायद ही किसी किसान ने पैसा चुकाया हो। ऐसे में नागा कुशवाहा जैसे किसान में कर्जमाफी न लेना एक अच्छा संकेत है। नागा कुशवाहा के बाद कई किसान बैंक में कर्ज़ माफी का न लेने की बात कर रहे हैं। “

ब्रांच मैनेजर को लेटर देते कुशवाहा। साथ में हैं उनके बेटे।

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बैंक मैनेजर आगे बताते हैं, “मैं बुंदेलखंड इलाके का रहने वाला हूं। वहां के किसानो को कर्जमाफी की ज्यादा जरुरत है। गैस सब्सिडी की तरह लोगों को चाहिए इन्हें जरुरत हो वही कर्जमाफी या सब्सिडी का लाभ लें, ताकि जरुरतमंदों को लाभ मिल सके।”

2014 प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने 2015 में एलपीसी गैस सब्सिडी छोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर व्यापक अभियान शुरु किया था, जिसमें पहले साल में ही सवा करोड़ लोगों ने गैस की सब्सिडी छोड़ दी थी, जबकि अभी ये संख्या काफी ज्यादा है।

रिपोर्टिंग सहयोग- वेदप्रकाश तिवारी, पडरौना, कुशीनगर

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