By Gaon Connection
केंद्र सरकार ने 2026-27 से 2030-31 तक के लिए 'कपास उत्पादकता मिशन' शुरू किया है, जिसके तहत गुजरात को 134.80 करोड़ रुपये का बजट मिला है। राज्य के 21 कपास उत्पादक ज़िलों में एक लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को मिशन में शामिल किया जाएगा। आधुनिक खेती अपनाने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर 7,500 से 14,000 रुपये तक की सहायता मिलेगी। पात्र किसान 10 जुलाई 2026 से i-Khedut पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं।
केंद्र सरकार ने 2026-27 से 2030-31 तक के लिए 'कपास उत्पादकता मिशन' शुरू किया है, जिसके तहत गुजरात को 134.80 करोड़ रुपये का बजट मिला है। राज्य के 21 कपास उत्पादक ज़िलों में एक लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को मिशन में शामिल किया जाएगा। आधुनिक खेती अपनाने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर 7,500 से 14,000 रुपये तक की सहायता मिलेगी। पात्र किसान 10 जुलाई 2026 से i-Khedut पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं।
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देश में मानसून की तेज़ बारिश से वर्षा का घाटा एक सप्ताह में 38 प्रतिशत से घटकर 15 प्रतिशत रह गया है। हालांकि, कैपिटल 360 की रिपोर्ट के अनुसार खरीफ़ फसलों की बुआई अब भी पिछले साल के मुकाबले 20.8 प्रतिशत पीछे है। तिलहन, कपास, दलहन, मोटे अनाज और धान की बुआई में गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले दिनों में बारिश का वितरण और बुआई की रफ़्तार ही कृषि उत्पादन की दिशा तय करेगी।
देश में मानसून की तेज़ बारिश से वर्षा का घाटा एक सप्ताह में 38 प्रतिशत से घटकर 15 प्रतिशत रह गया है। हालांकि, कैपिटल 360 की रिपोर्ट के अनुसार खरीफ़ फसलों की बुआई अब भी पिछले साल के मुकाबले 20.8 प्रतिशत पीछे है। तिलहन, कपास, दलहन, मोटे अनाज और धान की बुआई में गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले दिनों में बारिश का वितरण और बुआई की रफ़्तार ही कृषि उत्पादन की दिशा तय करेगी।
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भारत में जलवायु परिवर्तन का असर खेती पर लगातार बढ़ रहा है। अनियमित मानसून, बढ़ता तापमान, सूखा और एल नीनो जैसी परिस्थितियाँ कृषि के लिए नई चुनौतियाँ पैदा कर रही हैं। फ़र्टिलाइज़र एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (एफ़एआईएफ़ए) की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में देश के अधिकांश दिनों में चरम मौसम की घटनाएँ दर्ज की गईं, जिससे करोड़ों हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित हुई। ऐसे हालात में फसल विविधीकरण, मिट्टी और जल संरक्षण, आधुनिक तकनीक तथा सरकारी योजनाओं के बेहतर उपयोग के ज़रिए खेती को जलवायु जोखिमों के प्रति अधिक मज़बूत और टिकाऊ बनाने पर ज़ोर दिया जा रहा है।
भारत में जलवायु परिवर्तन का असर खेती पर लगातार बढ़ रहा है। अनियमित मानसून, बढ़ता तापमान, सूखा और एल नीनो जैसी परिस्थितियाँ कृषि के लिए नई चुनौतियाँ पैदा कर रही हैं। फ़र्टिलाइज़र एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (एफ़एआईएफ़ए) की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में देश के अधिकांश दिनों में चरम मौसम की घटनाएँ दर्ज की गईं, जिससे करोड़ों हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित हुई। ऐसे हालात में फसल विविधीकरण, मिट्टी और जल संरक्षण, आधुनिक तकनीक तथा सरकारी योजनाओं के बेहतर उपयोग के ज़रिए खेती को जलवायु जोखिमों के प्रति अधिक मज़बूत और टिकाऊ बनाने पर ज़ोर दिया जा रहा है।
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उत्तर प्रदेश में खरीफ़ सीज़न 2026 से पहले अनुदानित बीज वितरण अभियान का 93 प्रतिशत लक्ष्य पूरा कर लिया गया है। कृषि विभाग के अनुसार, 1,97,575 क्विंटल के लक्ष्य के मुकाबले 1,83,104 क्विंटल प्रमाणित बीज किसानों तक पहुँचाए जा चुके हैं। धान और ढैंचा के बीजों का लगभग पूरा वितरण हो गया है, जबकि दलहन, तिलहन और मोटे अनाज के बीज भी बड़े पैमाने पर किसानों तक पहुँचे हैं। सरकार का कहना है कि समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने, सिंचाई, कृषि यंत्रीकरण, फसल बीमा और एमएसपी पर खरीद जैसी व्यवस्थाओं को मज़बूत कर खेती को अधिक लाभकारी बनाने पर ज़ोर दिया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में खरीफ़ सीज़न 2026 से पहले अनुदानित बीज वितरण अभियान का 93 प्रतिशत लक्ष्य पूरा कर लिया गया है। कृषि विभाग के अनुसार, 1,97,575 क्विंटल के लक्ष्य के मुकाबले 1,83,104 क्विंटल प्रमाणित बीज किसानों तक पहुँचाए जा चुके हैं। धान और ढैंचा के बीजों का लगभग पूरा वितरण हो गया है, जबकि दलहन, तिलहन और मोटे अनाज के बीज भी बड़े पैमाने पर किसानों तक पहुँचे हैं। सरकार का कहना है कि समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने, सिंचाई, कृषि यंत्रीकरण, फसल बीमा और एमएसपी पर खरीद जैसी व्यवस्थाओं को मज़बूत कर खेती को अधिक लाभकारी बनाने पर ज़ोर दिया जा रहा है।
By Umang
बेहतर बाज़ार भाव और एमएसपी से अधिक कीमत मिलने के कारण इस खरीफ़ सीज़न किसानों का रुझान फिर से सोयाबीन की खेती की ओर बढ़ रहा है। सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के अनुसार, इस वर्ष देश में सोयाबीन का रक़बा पिछले साल की तुलना में 5 से 7 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में अधिकांश लक्ष्य क्षेत्र में बुवाई पूरी हो चुकी है। संगठन का मानना है कि यदि अगले तीन महीनों तक पर्याप्त बारिश होती रही, तो इस वर्ष सोयाबीन का उत्पादन पिछले सीज़न से बेहतर रहने की संभावना है।
बेहतर बाज़ार भाव और एमएसपी से अधिक कीमत मिलने के कारण इस खरीफ़ सीज़न किसानों का रुझान फिर से सोयाबीन की खेती की ओर बढ़ रहा है। सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के अनुसार, इस वर्ष देश में सोयाबीन का रक़बा पिछले साल की तुलना में 5 से 7 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में अधिकांश लक्ष्य क्षेत्र में बुवाई पूरी हो चुकी है। संगठन का मानना है कि यदि अगले तीन महीनों तक पर्याप्त बारिश होती रही, तो इस वर्ष सोयाबीन का उत्पादन पिछले सीज़न से बेहतर रहने की संभावना है।
By Umang
झारखंड के गुमला और देवघर से 2 मीट्रिक टन आम्रपाली आम दुबई के लुलु स्टोर्स भेजे गए हैं। एपीईडीए की पहल से हुए इस निर्यात में महिला FPO की अहम भूमिका रही। स्थानीय बाज़ार की तुलना में किसानों को करीब 180 प्रतिशत अधिक कीमत मिली। आम बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत विकसित बागों से लिए गए थे। एपीईडीए ने किसानों को प्रशिक्षण देकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों और निर्यात प्रक्रिया के लिए भी तैयार किया।
झारखंड के गुमला और देवघर से 2 मीट्रिक टन आम्रपाली आम दुबई के लुलु स्टोर्स भेजे गए हैं। एपीईडीए की पहल से हुए इस निर्यात में महिला FPO की अहम भूमिका रही। स्थानीय बाज़ार की तुलना में किसानों को करीब 180 प्रतिशत अधिक कीमत मिली। आम बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत विकसित बागों से लिए गए थे। एपीईडीए ने किसानों को प्रशिक्षण देकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों और निर्यात प्रक्रिया के लिए भी तैयार किया।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया को 100 टन उच्च गुणवत्ता वाले ‘डीडब्ल्यूआर-162’ गेहूँ के बीज देने की घोषणा की। दोनों देशों ने खाद्य सुरक्षा, टिकाऊ कृषि और आधुनिक कृषि तकनीक में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। यात्रा के दौरान रक्षा, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य और कृषि समेत विभिन्न क्षेत्रों में 20 महत्वपूर्ण समझौते और घोषणाएँ भी हुईं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया को 100 टन उच्च गुणवत्ता वाले ‘डीडब्ल्यूआर-162’ गेहूँ के बीज देने की घोषणा की। दोनों देशों ने खाद्य सुरक्षा, टिकाऊ कृषि और आधुनिक कृषि तकनीक में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। यात्रा के दौरान रक्षा, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य और कृषि समेत विभिन्न क्षेत्रों में 20 महत्वपूर्ण समझौते और घोषणाएँ भी हुईं।
By Umang
कमज़ोर और असमान मानसून के कारण इस वर्ष खरीफ़ फ़सलों की बुआई पिछले साल की तुलना में 21 फ़ीसदी पीछे चल रही है। धान, दलहन, तिलहन, मोटे अनाज और कपास सभी प्रमुख फ़सलों का रकबा घटा है, जबकि गन्ने और जूट-मेस्टा की बुआई में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालाँकि, मध्य भारत में मानसून के सक्रिय होने से आने वाले दिनों में बुआई की रफ़्तार बढ़ने की उम्मीद है। वहीं, आईएमडी ने जुलाई में सामान्य से कम वर्षा का अनुमान जताया है, जिससे बारिश पर निर्भर क्षेत्रों में चिंता बनी हुई है।
कमज़ोर और असमान मानसून के कारण इस वर्ष खरीफ़ फ़सलों की बुआई पिछले साल की तुलना में 21 फ़ीसदी पीछे चल रही है। धान, दलहन, तिलहन, मोटे अनाज और कपास सभी प्रमुख फ़सलों का रकबा घटा है, जबकि गन्ने और जूट-मेस्टा की बुआई में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालाँकि, मध्य भारत में मानसून के सक्रिय होने से आने वाले दिनों में बुआई की रफ़्तार बढ़ने की उम्मीद है। वहीं, आईएमडी ने जुलाई में सामान्य से कम वर्षा का अनुमान जताया है, जिससे बारिश पर निर्भर क्षेत्रों में चिंता बनी हुई है।
By Umang
1 जुलाई से देशभर में फसल बीमा माह की शुरुआत हो गई है, जो 31 जुलाई तक चलेगा। इस अभियान का उद्देश्य किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जोड़ना है। खरीफ़ फसलों के लिए किसानों को केवल 2% प्रीमियम देना होता है, जबकि शेष राशि सरकार वहन करती है। किसान ऑनलाइन, CSC, बैंक या Crop Insurance ऐप के जरिए आवेदन कर प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान पर मुआवज़ा प्राप्त कर सकते हैं।
1 जुलाई से देशभर में फसल बीमा माह की शुरुआत हो गई है, जो 31 जुलाई तक चलेगा। इस अभियान का उद्देश्य किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जोड़ना है। खरीफ़ फसलों के लिए किसानों को केवल 2% प्रीमियम देना होता है, जबकि शेष राशि सरकार वहन करती है। किसान ऑनलाइन, CSC, बैंक या Crop Insurance ऐप के जरिए आवेदन कर प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान पर मुआवज़ा प्राप्त कर सकते हैं।
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हरियाणा सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (पोषक-अनाज) के तहत ज्वार और बाजरा की खेती करने वाले किसानों के लिए अनुदान योजना शुरू की है। किसान 18 जुलाई 2026 तक agriharyana. gov. in पर आवेदन कर सकते हैं। योजना के तहत प्रदर्शन प्लांट, प्रमाणित बीज, पोषक तत्व प्रबंधन और पौध संरक्षण पर आर्थिक सहायता मिलेगी। यह योजना हरियाणा के 10 ज़िलों में लागू की गई है।
हरियाणा सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (पोषक-अनाज) के तहत ज्वार और बाजरा की खेती करने वाले किसानों के लिए अनुदान योजना शुरू की है। किसान 18 जुलाई 2026 तक agriharyana. gov. in पर आवेदन कर सकते हैं। योजना के तहत प्रदर्शन प्लांट, प्रमाणित बीज, पोषक तत्व प्रबंधन और पौध संरक्षण पर आर्थिक सहायता मिलेगी। यह योजना हरियाणा के 10 ज़िलों में लागू की गई है।
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