By Gaon Connection
केंद्र सरकार ने नेफ़ेड और एनसीसीएफ़ के लिए प्याज़ खरीद मूल्य 2,175 रुपये से बढ़ाकर 2,335 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। साथ ही यूआरएस श्रेणी हटाकर केवल ग्रेड-ए और 45-65 मिलीमीटर आकार वाले प्याज़ की खरीद का फ़ैसला किया है। किसान संगठनों ने इसे नाकाफ़ी बताते हुए कहा कि बढ़ती लागत और भंडारण में 30 प्रतिशत तक नुकसान के कारण किसानों को घाटा हो रहा है। उन्होंने खरीद मूल्य 3,000 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की है।
केंद्र सरकार ने नेफ़ेड और एनसीसीएफ़ के लिए प्याज़ खरीद मूल्य 2,175 रुपये से बढ़ाकर 2,335 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। साथ ही यूआरएस श्रेणी हटाकर केवल ग्रेड-ए और 45-65 मिलीमीटर आकार वाले प्याज़ की खरीद का फ़ैसला किया है। किसान संगठनों ने इसे नाकाफ़ी बताते हुए कहा कि बढ़ती लागत और भंडारण में 30 प्रतिशत तक नुकसान के कारण किसानों को घाटा हो रहा है। उन्होंने खरीद मूल्य 3,000 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की है।
By Umang
उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों में यूरिया और डीएपी खाद की कमी को लेकर किसानों की परेशानियाँ बढ़ रही हैं। 'गाँव कनेक्शन' की ग्राउंड रिपोर्ट में बाराबंकी के बी-पैक्स समिति लिमिटेड, निंदूरा में किसानों ने खाद की कमी, वितरण में देरी और निजी बाज़ार में महँगे दाम पर खाद मिलने की शिकायत की। वहीं समिति में खाद वितरण के दौरान रजिस्टर में प्रविष्टि नहीं मिलने और कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा सचिव की अनुपस्थिति में खाद वितरण किए जाने जैसे सवाल भी सामने आए। हालांकि कुछ किसानों ने समय पर खाद मिलने की बात भी कही।
उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों में यूरिया और डीएपी खाद की कमी को लेकर किसानों की परेशानियाँ बढ़ रही हैं। 'गाँव कनेक्शन' की ग्राउंड रिपोर्ट में बाराबंकी के बी-पैक्स समिति लिमिटेड, निंदूरा में किसानों ने खाद की कमी, वितरण में देरी और निजी बाज़ार में महँगे दाम पर खाद मिलने की शिकायत की। वहीं समिति में खाद वितरण के दौरान रजिस्टर में प्रविष्टि नहीं मिलने और कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा सचिव की अनुपस्थिति में खाद वितरण किए जाने जैसे सवाल भी सामने आए। हालांकि कुछ किसानों ने समय पर खाद मिलने की बात भी कही।
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मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों के आंदोलन के बाद पात्र किसानों से मूँग खरीद की सीमा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दी है। साथ ही खरीद की अंतिम तारीख 20 अगस्त और स्लॉट बुकिंग की अंतिम तारीख 10 अगस्त तक बढ़ा दी गई है। उर्वरक वितरण की ई-टोकन व्यवस्था को समीक्षा तक तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है। सरकार के इन आश्वासनों के बाद संयुक्त किसान मोर्चा और अन्य किसान संगठनों ने आंदोलन वापस ले लिया। वहीं केंद्र ने स्पष्ट किया कि पीएम-आशा योजना के तहत तय सीमा से अधिक खरीद राज्य सरकार को अपने स्तर पर करनी होगी।
मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों के आंदोलन के बाद पात्र किसानों से मूँग खरीद की सीमा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दी है। साथ ही खरीद की अंतिम तारीख 20 अगस्त और स्लॉट बुकिंग की अंतिम तारीख 10 अगस्त तक बढ़ा दी गई है। उर्वरक वितरण की ई-टोकन व्यवस्था को समीक्षा तक तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है। सरकार के इन आश्वासनों के बाद संयुक्त किसान मोर्चा और अन्य किसान संगठनों ने आंदोलन वापस ले लिया। वहीं केंद्र ने स्पष्ट किया कि पीएम-आशा योजना के तहत तय सीमा से अधिक खरीद राज्य सरकार को अपने स्तर पर करनी होगी।
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उत्तर प्रदेश में कम बारिश के बावजूद खरीफ फसलों की बुआई लक्ष्य के 95 प्रतिशत तक पहुँच गई है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि 110 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले लगभग 107 लाख हेक्टेयर में बुआई पूरी हो चुकी है। सरकार ने समय पर बीज, उर्वरक और सिंचाई की व्यवस्था कर किसानों को राहत दी है। रबी सीजन के लिए प्रमाणित बीज वितरण, कृषि यंत्रों पर अनुदान और ई-लॉटरी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। मंत्री ने दावा किया कि प्रदेश में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है और योगी सरकार पिछली सपा सरकार की तुलना में 34 लाख मीट्रिक टन अधिक उर्वरक उपलब्ध करा रही है।
उत्तर प्रदेश में कम बारिश के बावजूद खरीफ फसलों की बुआई लक्ष्य के 95 प्रतिशत तक पहुँच गई है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि 110 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले लगभग 107 लाख हेक्टेयर में बुआई पूरी हो चुकी है। सरकार ने समय पर बीज, उर्वरक और सिंचाई की व्यवस्था कर किसानों को राहत दी है। रबी सीजन के लिए प्रमाणित बीज वितरण, कृषि यंत्रों पर अनुदान और ई-लॉटरी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। मंत्री ने दावा किया कि प्रदेश में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है और योगी सरकार पिछली सपा सरकार की तुलना में 34 लाख मीट्रिक टन अधिक उर्वरक उपलब्ध करा रही है।
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मध्य प्रदेश में मूंग की 100 प्रतिशत सरकारी खरीद की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन तेज़ हो गया है। हज़ारों किसान भोपाल के बाहरी इलाके में डेरा डाले हुए हैं और एमएसपी पर पूरी खरीद, खाद वितरण व्यवस्था में सुधार तथा किसानों से जुड़े लंबित मुद्दों के समाधान की मांग कर रहे हैं। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने एमएसपी पर मूंग खरीद में तेज़ी लाने की अपील की है, जबकि राज्य सरकार ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से हस्तक्षेप की मांग की है। कांग्रेस ने भी किसानों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से उनसे बातचीत कर उनकी जायज़ मांगों पर कार्रवाई करने की अपील की है।
मध्य प्रदेश में मूंग की 100 प्रतिशत सरकारी खरीद की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन तेज़ हो गया है। हज़ारों किसान भोपाल के बाहरी इलाके में डेरा डाले हुए हैं और एमएसपी पर पूरी खरीद, खाद वितरण व्यवस्था में सुधार तथा किसानों से जुड़े लंबित मुद्दों के समाधान की मांग कर रहे हैं। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने एमएसपी पर मूंग खरीद में तेज़ी लाने की अपील की है, जबकि राज्य सरकार ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से हस्तक्षेप की मांग की है। कांग्रेस ने भी किसानों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से उनसे बातचीत कर उनकी जायज़ मांगों पर कार्रवाई करने की अपील की है।
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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने कृषि क्षेत्र में आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी के सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए संतुलित और विज्ञान आधारित नियामक व्यवस्था की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है। नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में जैव-प्रौद्योगिकी आधारित फसलों के लिए मौजूदा नियामक ढाँचे को आधुनिक बनाने पर चर्चा हुई। बैठक में पारदर्शी, समयबद्ध और जोखिम-आधारित स्वीकृति प्रक्रिया अपनाने की वकालत की गई, ताकि किसानों की आय बढ़े, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा मज़बूत हो और भारतीय कृषि वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बन सके।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने कृषि क्षेत्र में आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी के सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए संतुलित और विज्ञान आधारित नियामक व्यवस्था की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है। नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में जैव-प्रौद्योगिकी आधारित फसलों के लिए मौजूदा नियामक ढाँचे को आधुनिक बनाने पर चर्चा हुई। बैठक में पारदर्शी, समयबद्ध और जोखिम-आधारित स्वीकृति प्रक्रिया अपनाने की वकालत की गई, ताकि किसानों की आय बढ़े, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा मज़बूत हो और भारतीय कृषि वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बन सके।
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बिहार सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 'बगीचों में कीट प्रबंधन योजना' शुरू की है। इस योजना के तहत आम, अमरूद और लीची उत्पादक किसानों को वैज्ञानिक तरीके से कीट एवं रोग नियंत्रण के लिए दो चरणों में कीटनाशकों के छिड़काव पर 75% तक अनुदान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य फलों की गुणवत्ता में सुधार, उत्पादन बढ़ाना, खेती की लागत कम करना और किसानों की आय में वृद्धि करना है। इच्छुक किसान उद्यानिकी विभाग के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन कर योजना का लाभ ले सकते हैं।
बिहार सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 'बगीचों में कीट प्रबंधन योजना' शुरू की है। इस योजना के तहत आम, अमरूद और लीची उत्पादक किसानों को वैज्ञानिक तरीके से कीट एवं रोग नियंत्रण के लिए दो चरणों में कीटनाशकों के छिड़काव पर 75% तक अनुदान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य फलों की गुणवत्ता में सुधार, उत्पादन बढ़ाना, खेती की लागत कम करना और किसानों की आय में वृद्धि करना है। इच्छुक किसान उद्यानिकी विभाग के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन कर योजना का लाभ ले सकते हैं।
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आंध्र प्रदेश में मानसून की 51% भारी कमी के कारण कृष्णा और गोदावरी बेसिन के जलाशयों में जलस्तर खतरनाक रूप से गिर गया है। जून 2027 तक पेयजल आपूर्ति सुरक्षित रखने के लिए जल संसाधन विभाग ने कृष्णा डेल्टा के किसानों से इस खरीफ सीज़न में धान की खेती छोड़कर कम पानी वाली फसलें उगाने की अपील की है। पानी की किल्लत को देखते हुए सरकार ने सिंचाई और उद्योगों के बजाय पीने के पानी को प्राथमिक दर्जा दिया है।
आंध्र प्रदेश में मानसून की 51% भारी कमी के कारण कृष्णा और गोदावरी बेसिन के जलाशयों में जलस्तर खतरनाक रूप से गिर गया है। जून 2027 तक पेयजल आपूर्ति सुरक्षित रखने के लिए जल संसाधन विभाग ने कृष्णा डेल्टा के किसानों से इस खरीफ सीज़न में धान की खेती छोड़कर कम पानी वाली फसलें उगाने की अपील की है। पानी की किल्लत को देखते हुए सरकार ने सिंचाई और उद्योगों के बजाय पीने के पानी को प्राथमिक दर्जा दिया है।
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मानसून के दूसरे चरण की बारिश ने उत्तर भारत के किसानों को राहत दी है। उड़द की बुवाई का रकबा पिछले साल की तुलना में आठ प्रतिशत बढ़ा है। उत्तर प्रदेश में उड़द की खेती में सबसे अधिक 75% की वृद्धि हुई है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में बारिश की कमी से बुवाई पिछड़ गई है। उत्तर भारत की अच्छी बुवाई देश में दालों की उपलब्धता को संतुलित रखेगी।
मानसून के दूसरे चरण की बारिश ने उत्तर भारत के किसानों को राहत दी है। उड़द की बुवाई का रकबा पिछले साल की तुलना में आठ प्रतिशत बढ़ा है। उत्तर प्रदेश में उड़द की खेती में सबसे अधिक 75% की वृद्धि हुई है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में बारिश की कमी से बुवाई पिछड़ गई है। उत्तर भारत की अच्छी बुवाई देश में दालों की उपलब्धता को संतुलित रखेगी।
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बदलते मौसम, अनिश्चित मानसून और अल नीनो जैसे जलवायु कारकों का असर अब किसानों की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ रहा है। खरीफ़ सीज़न में बारिश की कमी के कारण कई फसलों की बुवाई प्रभावित हुई, जिससे किसानों की लागत और आर्थिक दबाव बढ़ा है। ऐसी परिस्थितियों में दोबारा बुवाई, अतिरिक्त सिंचाई और घरेलू खर्चों का बोझ बढ़ने से कर्ज़ चुकाना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में किसानों के लिए केवल कृषि ऋण ही नहीं, बल्कि बचत, फसल बीमा, लचीली ऋण व्यवस्था और समय पर वित्तीय सहायता भी महत्वपूर्ण होती जा रही है, ताकि वे मौसम से जुड़े जोखिमों का बेहतर ढंग से सामना कर सकें।
बदलते मौसम, अनिश्चित मानसून और अल नीनो जैसे जलवायु कारकों का असर अब किसानों की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ रहा है। खरीफ़ सीज़न में बारिश की कमी के कारण कई फसलों की बुवाई प्रभावित हुई, जिससे किसानों की लागत और आर्थिक दबाव बढ़ा है। ऐसी परिस्थितियों में दोबारा बुवाई, अतिरिक्त सिंचाई और घरेलू खर्चों का बोझ बढ़ने से कर्ज़ चुकाना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में किसानों के लिए केवल कृषि ऋण ही नहीं, बल्कि बचत, फसल बीमा, लचीली ऋण व्यवस्था और समय पर वित्तीय सहायता भी महत्वपूर्ण होती जा रही है, ताकि वे मौसम से जुड़े जोखिमों का बेहतर ढंग से सामना कर सकें।
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