सीधे किसानों के खातों में पहुंचेगा कर्जमाफी का पैसा, 17 अगस्त को सीएम योगी लखनऊ में 100 किसानों को देंगे कर्जमाफी का सर्टिफिकेट

Manish MishraManish Mishra   8 Aug 2017 6:39 PM GMT

सीधे किसानों के खातों में पहुंचेगा कर्जमाफी का पैसा, 17 अगस्त को सीएम योगी लखनऊ में 100 किसानों को देंगे कर्जमाफी का सर्टिफिकेटऋणमाफी की राह देख रहे किसानों का इंतजार खत्म होने वाला है। फोटो- पुरुषोत्म ठाकुर, साभार

लखनऊ। ऋणमाफी की राह देख रहे किसानों का इंतजार खत्म होने वाला है। ऋणमाफी की राशि किसानों के खाते में सीधे भेजी जाएगी और इसका प्रमाण पत्र कैंप लगाकर दिए जाएंगे। पहला कैंप 17 अगस्त से लगेगा, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ किसानों को प्रमाण पत्र देंगे।

उत्तर प्रदेश के कृषि उत्पादन आयुक्त राजेश प्रताप ने गाँव कनेक्शन को बताया, “लगभग सभी जिलों से डिटेल बैंकों के माध्यम से आ गई है, बस आधार से लिंक करने का काम हो रहा है,” आगे बताया, “”इसके लिए पहले बैंकों को पैसा दिया जाएगा, वहां से किसानों के खातों में ऑनलाइन भेजा जाएगा।” इस योजना के तहत सरकार एक लाख तक के कर्ज को माफ करेगी। यूपी में कुल 2.30 करोड़ किसान हैं, इनमें से 92.5 प्रतिशत (लघु एवं सीमांत) किसान हैं, जो इस योजना से लाभान्वित होंगे। इस योजना का लाभ उन किसानों को मिलोगा जो वर्ष 2016-17 में कर्ज लिया होगा। इस तरह से कुल 36,359 करोड़ रुपये की कर्जमाफी की जाएगी।

उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन आयुक्त राजेश प्रताप

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उधर, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की आखिरी तारीख 31 जुलाई, 2017 को बीत जाने के बाद अगस्त से राजस्व विभाग द्वारा बुआई प्रमाण पत्र बांटे जाने की शुरुआत होने के बाद लाखों किसान इससे वंचित रह गए हैं। इस बारे में कृषि उत्पादन आयुक्त राज प्रताप ने कहा, “हम केन्द्र सरकार से गुजारिश करेंगे कि इसकी तारीख बढ़ाई जाए।”

कृषि उत्पादन आयुक्त ने बताया, “सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लिए हर संभव कदम उठाएगी। इसकी रूपरेखा सरकार बना रही है। इसके लिए किसानों की इनपुट में मदद, उन्हें जानकारी देना, ऋण की उपलब्धता और बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।”

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राज्य सरकार पशुपालन, और औषधीय खेती को प्रदेश में अधिक से अधिक बढ़ावा देने जा रही है। प्रदेश में औषधीय खेती को आयुष मिशन के अंतर्गत बढ़ावा दिया जाएगा। “औषधीय खेती करने वाले किसानों को बड़ी-बड़ी कंपनियों से कांट्रैक्ट कराने की कोशिश करेंगे। ताकि इसके लिए आसानी से बाजार मिल सके।

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